क्या आप अभी भी अपनी छोटी सी दुकान के गल्ले पर बैठकर करोड़पति बनने के सपने देख रहे हैं। बहुत बढ़िया जोक था। अगर आपको लगता है कि बिना सही लोकेशन और सिस्टम के आपका बिजनेस मोहल्ले से बाहर निकलेगा तो मुबारक हो आप अब भी नींद में हैं। जाग जाइये वरना कंपटीशन आपको कच्चा चबा जाएगा।
लेकिन फिक्र मत कीजिये। आज हम Built for Growth किताब की मदद से उन सीक्रेट्स को खोलेंगे जो आपके छोटे से काम को एक ग्लोबल ब्रांड में बदल सकते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपकी किस्मत बदल देंगे।
लेसन १ : लोकेशन का चुनाव - किस्मत नहीं साइंस है
ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते वक्त सोचते हैं कि बस दुकान खुल जाए फिर तो ग्राहक अपने आप खिंचे चले आएंगे। जैसे आपकी दुकान नहीं कोई जादुई चिराग हो। लोग अक्सर अपने चाचा या ताऊ की खाली पड़ी जमीन पर दुकान खोल लेते हैं क्योंकि किराया नहीं देना पड़ेगा। पर भाई साहब अगर वहां कुत्ता भी नहीं भटकता तो क्या आप वहां बैठकर मक्खियां मारेंगे। आर्थर रुबिनफेल्ड कहते हैं कि बिजनेस की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितने अच्छे इंसान हैं बल्कि इस पर टिकी है कि आपकी लोकेशन कितनी पावरफुल है।
मान लीजिये आपने शहर के सबसे शांत इलाके में एक आलीशान जिम खोला। आपने वहां दुनिया भर की मशीनें लगा दीं और डिस्काउंट भी दे दिया। लेकिन वो इलाका रिटायर्ड बुजुर्गों का है जिन्हें शांति पसंद है। अब आप वहां बैठकर अपनी बॉडी दिखाएं या योगा करें उन बुजुर्गों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वो तो बस सुबह शाम वहां टहलेंगे और आपकी बिजली का बिल बढ़ाएंगे। आपने सोचा था कि आप फिटनेस किंग बनेंगे पर आप वहां बस चौकीदार बनकर रह गए। यही हाल तब होता है जब आप बिना मार्केट रिसर्च के अपनी दुकान का शटर उठा देते हैं।
लोकेशन चुनना कोई तुक्का नहीं बल्कि एक पूरी साइंस है। आपको यह देखना होगा कि आपके कस्टमर कहां चलते फिरते हैं। अगर आप कॉफी बेच रहे हैं तो आपको वहां होना चाहिए जहां लोग थके हुए हों या काम के बीच ब्रेक लेना चाहते हों। अगर आप ऐसी जगह दुकान खोलते हैं जहां पार्किंग की जगह ही नहीं है तो समझ लीजिये कि आपने खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। आज के जमाने में लोग दो मिनट पैदल चलने को तैयार नहीं हैं और आप चाहते हैं कि वो आपकी दुकान ढूंढने के लिए पूरा शहर छान मारें।
स्टारबक्स की कामयाबी के पीछे यही बड़ा राज है। वो सिर्फ कॉफी नहीं बेचते वो सही लोकेशन बेचते हैं। वो जानते हैं कि आप कब और कहां अपनी कॉफी पीना चाहेंगे। वो उस कोने को पकड़ते हैं जहां से सबसे ज्यादा लोग गुजरते हैं। अगर आप अपने बिजनेस को बड़ा करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी लोकेशन की ईगो छोड़िये। यह मत देखिये कि आपको क्या पसंद है बल्कि यह देखिये कि आपके बिजनेस के लिए क्या सही है। सही लोकेशन आपके आधे मार्केटिंग के पैसे बचा लेती है। बिना सही जगह के आपका बिजनेस वैसा ही है जैसे रेगिस्तान में आइसक्रीम की दुकान जिसके बारे में किसी को पता ही नहीं है। इसलिए जागिए और अपने बिजनेस के लिए वो प्राइम स्पॉट ढूंढिए जो उसे गली से उठाकर ग्लोबल बना सके।
लेसन २ : ब्रांड की एक जैसी पहचान - कॉपी पेस्ट का असली कमाल
क्या आपने कभी सोचा है कि आप दुनिया के किसी भी कोने में मैकडोनाल्ड्स में घुस जाएं तो वहां के बर्गर का टेस्ट और खुशबू एक जैसी क्यों होती है। ऐसा नहीं है कि वहां के शेफ कोई जादू करते हैं। असल में उन्होंने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जिसे दुनिया के किसी भी कोने में कॉपी पेस्ट किया जा सकता है। आर्थर रुबिनफेल्ड कहते हैं कि अगर आपका बिजनेस आपके बिना नहीं चल सकता तो इसका मतलब है कि आपने बिजनेस नहीं बल्कि अपने लिए एक नौकरी पैदा कर ली है। ब्रांड कंसिस्टेंसी का मतलब है कि आपके कस्टमर को हर बार एक जैसा अनुभव मिले चाहे वो आपकी पहली दुकान हो या सौवीं।
मान लीजिये शर्मा जी की एक मशहूर चाट की दुकान है। शर्मा जी खुद हाथ से मसाला डालते हैं तो स्वाद स्वर्ग जैसा आता है। अब शर्मा जी ने सोचा कि बिजनेस बड़ा करते हैं और दूसरी ब्रांच खोल दी। वहां उन्होंने अपने छोटे साले को बिठा दिया जिसे नमक और चीनी का फर्क भी ठीक से नहीं पता। अब ग्राहक वहां जाता है तो उसे चाट में कभी ज्यादा मिर्ची मिलती है तो कभी ज्यादा नमक। ग्राहक को लगता है कि शर्मा जी ने उसे धोखा दिया है। नतीजा यह होता है कि शर्मा जी की नई दुकान तो डूबती ही है साथ ही पुरानी दुकान की इज्जत का भी फालूदा बन जाता है। शर्मा जी परेशान हैं कि आखिर गलती कहाँ हुई। गलती यह हुई कि उन्होंने स्वाद को सिस्टम में नहीं बल्कि अपने हाथ के हुनर में कैद कर रखा था।
अगर आप ग्लोबल लेवल पर जाना चाहते हैं तो आपको अपने हर काम का एक स्टैण्डर्ड प्रोसीजर बनाना होगा। आपकी दुकान का बोर्ड कैसा दिखेगा। सेल्समैन ग्राहक से कैसे बात करेगा। सामान की पैकिंग कैसी होगी। यह सब पहले से तय होना चाहिए। अगर आपका स्टाफ अपनी मर्जी से काम कर रहा है तो आप ब्रांड नहीं बल्कि एक कचरा पेटी चला रहे हैं जहां हर दिन नया ड्रामा होता है। कंसिस्टेंसी का मतलब बोरिंग होना नहीं है बल्कि भरोसेमंद होना है। ग्राहक आपके पास इसलिए बार बार आता है क्योंकि उसे पता है कि उसे क्या मिलने वाला है।
लोग अक्सर सोचते हैं कि ब्रांडिंग का मतलब सिर्फ एक महंगा लोगो बनवाना है। पर असली ब्रांडिंग वो होती है जो आपकी गैरमौजूदगी में भी आपका काम वैसे ही करे जैसे आप करते। अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस आपके शहर की सीमाएं लांघे तो आपको अपनी क्वालिटी और सर्विस को एक सांचे में ढालना होगा। बिना किसी सिस्टम के स्केल करने की कोशिश करना वैसा ही है जैसे बिना नक्शे के समंदर पार करना। आप शायद थोड़े दूर चले जाएं पर डूबना तय है। इसलिए अपने बिजनेस में वो डिसिप्लिन लाइए जो एक छोटे से स्टार्टअप को एक लेजेंडरी ब्रांड में बदल देता है। जब तक आप अपने काम को एक प्रोसेस नहीं बनाएंगे तब तक आप बस एक दुकान ही रहेंगे ग्लोबल ब्रांड कभी नहीं बन पाएंगे।
लेसन ३ : स्केलेबिलिटी का सिस्टम - खुद को बिजनेस से आजाद करें
अगर आप आज भी अपनी दुकान की चाभी अपनी जेब में रखकर सोते हैं तो यकीन मानिये आप बिजनेस नहीं चला रहे बल्कि बिजनेस आपको चला रहा है। आर्थर रुबिनफेल्ड का सबसे बड़ा मंत्र यह है कि असली ग्रोथ तब होती है जब आप ऑपरेशंस से हटकर स्ट्रेटेजी पर ध्यान देते हैं। जब तक आप खुद ही बिल काटेंगे और खुद ही झाड़ू मारेंगे तब तक आप कभी नहीं सोच पाएंगे कि आपका अगला स्टोर लंदन या न्यूयॉर्क में कैसे खुलेगा। स्केलेबिलिटी का मतलब है एक ऐसा ढांचा तैयार करना जो आपकी फिजिकल मौजूदगी के बिना भी नोट छापता रहे।
मान लीजिये पिंटू भाई ने एक मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोली। पिंटू भाई इतने उस्ताद हैं कि वो फोन को फूंक मारकर ठीक कर देते हैं। अब पिंटू भाई ने सोचा कि मैं पूरा शहर जीत लूंगा और ५ नई दुकानें खोल दीं। लेकिन मुसीबत यह है कि हर दुकान पर पिंटू भाई जैसे उस्ताद नहीं हैं। वहां जो लड़के बैठे हैं वो फोन ठीक करने के बजाय उसे और बिगाड़ देते हैं। अब पिंटू भाई सारा दिन एक दुकान से दूसरी दुकान भागते रहते हैं। उनका फोन बजना बंद नहीं होता और टेंशन के मारे उनके सिर के बाल भी फोन के नेटवर्क की तरह गायब होने लगे हैं। पिंटू भाई को लग रहा है कि वो तरक्की कर रहे हैं पर असल में वो बस एक बहुत बड़े सर्कस के जोकर बनकर रह गए हैं।
बिजनेस को बड़ा करने का सीक्रेट यह है कि आप अपने काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें और हर हिस्से के लिए एक एक्सपर्ट या एक मशीन रखें। आपको यह सीखना होगा कि दूसरों पर भरोसा कैसे करें और उन्हें ट्रेन कैसे करें। अगर आप सोचते हैं कि आपके जैसा काम कोई और कर ही नहीं सकता तो मुबारक हो आप अपनी खुद की ग्रोथ के सबसे बड़े दुश्मन हैं। एक बड़ा लीडर वो नहीं होता जो सारा काम खुद करे बल्कि वो होता है जो काम करने वालों की एक फौज खड़ी कर दे। ग्रोथ का मतलब है अपनी पावर्स को दूसरों को देना ताकि वो आपके सपने को सच कर सकें।
जब आप एक बार सही सिस्टम और टीम बना लेते हैं तो फिर बिजनेस को बढ़ाना सिर्फ एक नंबर गेम रह जाता है। फिर चाहे आपको ५ स्टोर खोलने हों या ५००। तरीका वही रहेगा। यही वो तरीका है जिससे स्टारबक्स और वालमार्ट जैसे ब्रांड्स ने दुनिया जीती है। उन्होंने खुद को हर छोटी परेशानी में उलझाने के बजाय एक ऐसा विजन बनाया जो ऑटो-पायलट पर चलता है। इसलिए अगर आप वाकई में ग्लोबल बनना चाहते हैं तो अपनी कुर्सी छोड़िये और सिस्टम बनाइये। जिस दिन आपका बिजनेस आपके बिना पहले से ज्यादा मुनाफा देने लगेगा समझ जाइये कि आप अब वाकई में एक बड़े बिजनेसमैन बन चुके हैं।
बिजनेस को बड़ा बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है पर यह दिल के कमजोर लोगों का काम भी नहीं है। Built for Growth हमें सिखाती है कि सही जगह सही सिस्टम और सही टीम के साथ आप जमीन से आसमान तक का सफर तय कर सकते हैं। अब फैसला आपका है। क्या आप अब भी अपनी छोटी सी दुनिया में राजा बनकर रहना चाहते हैं या फिर पूरी दुनिया का रुख करना चाहते हैं। अगर आपके पास भी कोई ऐसा बिजनेस आइडिया है जिसे आप ग्लोबल ले जाना चाहते हैं तो आज ही अपना पहला सिस्टम बनाइये। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा बिजनेस बड़ा करने की बातें तो करते हैं पर कदम उठाने से डरते हैं। याद रखिये या तो आप सिस्टम का हिस्सा होते हैं या आप खुद एक सिस्टम बनाते हैं।
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