Build Your Own Garage (Hindi)


क्या आप भी अपनी कंपनी को एक बोरिंग सरकारी दफ्तर की तरह चला रहे हैं। बधाई हो, आप अपनी टीम की क्रिएटिविटी का गला घोंटने में एक्सपर्ट बन चुके हैं। बिना गैराज माइंडसेट के आपकी कंपनी बस एक कबाड़खाना है जहाँ आइडियाज दम तोड़ देते हैं। सच तो यह है कि आपका बिजनेस बिना इनोवेशन के एक डूबता हुआ जहाज है और आपको पता भी नहीं है।

आज हम Build Your Own Garage बुक से उन टूल्स के बारे में जानेंगे जो आपकी कंपनी की सोई हुई आत्मा को जगा देंगे। चलिए देखते हैं वह ३ लेसन जो आपके बिजनेस को फिर से जवान कर देंगे।


लेसन १ : गैराज माइंडसेट का जादू और आपका आलसी कॉर्पोरेट कल्चर

सच बताना, क्या आपकी कंपनी में नए आइडियाज पर बात होती है या सिर्फ इस पर कि लंच में क्या मंगाना है। हम अक्सर भूल जाते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियाँ जैसे गूगल या एप्पल किसी आलीशान शीशे वाले ऑफिस में नहीं बल्कि एक छोटे से धूल भरे गैराज में पैदा हुई थीं। बर्न्ड श्मिट और लौरा ब्राउन अपनी बुक Build Your Own Garage में हमें सबसे पहले इसी गैराज माइंडसेट की याद दिलाते हैं। गैराज का मतलब यह नहीं है कि आप अपना महंगा ऑफिस छोड़कर किसी मैकेनिक की दुकान में बैठ जाएँ। इसका मतलब है वह भूख, वह पागलपन और वह रिस्क लेने की हिम्मत जो एक स्टार्टअप की शुरुआत में होती है।

जरा सोचिए, जब कोई नया स्टार्टअप शुरू होता है, तो वहां कोई लम्बा चौड़ा फॉर्म नहीं भरना पड़ता। वहां बस एक जोश होता है। लेकिन जैसे ही कंपनी बड़ी होती है, उसमें इतने नियम और कायदे आ जाते हैं कि एक नया आइडिया फाइल के नीचे दबकर दम तोड़ देता है। मान लीजिए आपकी कंपनी के किसी एम्प्लॉई के पास दुनिया को बदलने वाला कोई धांसू आइडिया आया। अब अगर उसे उस आइडिया को बताने के लिए दस मैनेजरों की परमिशन लेनी पड़े और बीस मीटिंग्स अटेंड करनी पड़ें, तो वह बेचारा यही सोचेगा कि इससे अच्छा तो मैं चुपचाप अपनी चाय पियूँ और घर जाऊँ। यही वह मोमेंट है जहाँ आपकी कंपनी की मौत शुरू होती है।

गैराज माइंडसेट का असली दुश्मन है आपका वह ईगो जो कहता है कि हम तो बहुत बड़े प्लेयर हैं, हमें बदलने की क्या जरूरत है। अरे भाई, नोकिया और कोडक को भी यही लगता था। आज वे कहाँ हैं। शायद किसी गैराज के कोने में कबाड़ बनकर पड़े होंगे। अगर आप चाहते हैं कि आपकी कंपनी में इनोवेशन की आग लगी रहे, तो आपको अपनी टीम को वह आजादी देनी होगी जो एक गैराज में मिलती है। वहां गलतियां करना गुनाह नहीं बल्कि सीखने का एक हिस्सा माना जाता है।

हमारे यहाँ मैनेजर मीटिंग इसलिए बुलाते हैं ताकि यह तय किया जा सके कि अगली मीटिंग कब होगी। इसे कहते हैं क्रिएटिविटी का कत्ल करना। गैराज माइंडसेट कहता है कि मीटिंग कम करो और काम ज्यादा। अपनी टीम को छोटे छोटे ग्रुप्स में बांटो और उन्हें एक मिशन दो। उन्हें डराओ मत कि अगर फेल हुए तो नौकरी जाएगी। उन्हें यह भरोसा दो कि अगर तुम कुछ नया ट्राई नहीं करोगे, तो असली हार तब होगी। जब लोग बिना डरे अपनी बात कह पाएंगे, तभी असली जादू शुरू होगा। तो क्या आप तैयार हैं अपने उस आलीशान केबिन के दरवाजे खोलकर अपनी कंपनी को फिर से एक गैराज बनाने के लिए।


लेसन २ : क्रिएटिविटी का ब्लूप्रिंट - सिर्फ सोचने से काम नहीं चलेगा

अक्सर लोगों को लगता है कि क्रिएटिविटी का मतलब है कि आप पहाड़ पर जाकर बैठ जाएँ और अचानक से आपके दिमाग की बत्ती जल जाएगी। लेकिन बर्न्ड श्मिट और लौरा ब्राउन कहते हैं कि भाई साहब, क्रिएटिविटी कोई भगवान का वरदान नहीं है जो सिर्फ कुछ खास लोगों को मिलता है। यह एक प्रोसेस है, एक ब्लूप्रिंट है। जैसे घर बनाने के लिए नक्शा चाहिए होता है, वैसे ही कंपनी में इनोवेशन लाने के लिए भी एक सिस्टम चाहिए। अगर आप अपनी टीम से सिर्फ यह कहेंगे कि जाओ कुछ नया सोचो, तो यकीन मानिए शाम तक वह सिर्फ नए बहाने ही सोच पाएंगे।

असली समस्या यह है कि हम क्रिएटिविटी को बहुत ज्यादा हवा बना देते हैं। हम सोचते हैं कि इसके लिए बहुत बड़ी लैब या करोड़ों का बजट चाहिए। लेकिन असल में आपको चाहिए सही टूल्स। अपनी कंपनी के अंदर एक ऐसा ढांचा तैयार कीजिए जहाँ आइडियाज को सिर्फ सुना न जाए, बल्कि उन्हें टेस्ट भी किया जाए। इसे आप एक सैंडबॉक्स की तरह समझ सकते हैं जहाँ बच्चे बिना डरे मिट्टी के घर बनाते हैं और टूट जाने पर रोते नहीं बल्कि फिर से बनाना शुरू करते हैं। आपकी कंपनी में भी ऐसा ही एक कोना होना चाहिए।

मान लीजिए आपकी मार्केटिंग टीम को एक नया कैंपेन सोचना है। अब अगर आप उन्हें एक बोरिंग बोर्डरूम में बिठाकर कहेंगे कि चलो भाई दिमाग लगाओ, तो आधे लोग तो एसी की हवा खाकर सो जाएंगे। लेकिन अगर आप उन्हें एक ब्लूप्रिंट देंगे, जिसमें कुछ बाउंड्रीज होंगी और कुछ टूल्स होंगे, तो दिमाग अपने आप चलना शुरू होगा। जैसे उन्हें कहिए कि आपको सिर्फ ऐसी चीज सोचनी है जिसमें जीरो बजट लगे। अब देखिए कैसे उनके दिमाग के घोड़े दौड़ते हैं। जब आप लिमिट्स तय करते हैं, तभी असल में क्रिएटिविटी बाहर आती है।

अक्सर बड़े बॉस को लगता है कि वे ही सबसे ज्यादा स्मार्ट हैं। वे सोचते हैं कि नया आइडिया सिर्फ ऊपर से नीचे आना चाहिए। इसे कहते हैं टॉप डाउन अप्रोच, जो असल में इनोवेशन के लिए जहर है। ब्लूप्रिंट ऐसा होना चाहिए जो नीचे से ऊपर की तरफ जाए। आपके फ्रंटलाइन एम्प्लॉई, जो सीधा कस्टमर से बात कर रहे हैं, उनके पास जो जानकारी है वह आपके किसी भी डेटा रिपोर्ट से ज्यादा कीमती है। अगर आपका ब्लूप्रिंट उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं देता, तो आपका नक्शा ही गलत है।

बहुत सारी कंपनियाँ इनोवेशन के नाम पर बस दीवारें पेंट करवा देती हैं और बीन बैग्स रख देती हैं। उन्हें लगता है कि ऑफिस को गूगल जैसा दिखाने से लोग भी गूगल जैसे हो जाएंगे। भाई साहब, अगर दिमाग में पुरानी सोच भरी है, तो आप सोने के सिंहासन पर भी बैठ जाएँ, आइडिया कबाड़ ही आएगा। असली ब्लूप्रिंट दीवारों पर नहीं, बल्कि कंपनी के कल्चर और प्रोसेस में होना चाहिए। आपको यह तय करना होगा कि एक कच्चे आइडिया को एक पक्के प्रोडक्ट में बदलने का सफर कैसा होगा। क्या आपके पास वह मैप तैयार है या आप भी बस अँधेरे में तीर चला रहे हैं।


लेसन ३ : अपनी कंपनी के असली खजाने को पहचानें - हिडन क्रिएटिविटी

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी कंपनी का वह चपरासी जो हर रोज सबको चाय पिलाता है, उसके पास आपके अगले बड़े प्रोडक्ट का आइडिया हो सकता है। बर्न्ड श्मिट और लौरा ब्राउन अपनी बुक में एक बहुत ही कड़वा सच बताते हैं। वे कहते हैं कि ज्यादातर कंपनियों में ७० परसेंट से ज्यादा क्रिएटिविटी फाइलों और कंप्यूटर फोल्डर्स में दबी रह जाती है। हम बाहर से नए टैलेंट को ढूंढने के लिए लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन उन लोगों की तरफ नहीं देखते जो पिछले दस सालों से हमारे साथ काम कर रहे हैं। इसे ही कहते हैं कंपनी की हिडन क्रिएटिविटी जिसे अनलॉक करना आपकी सबसे बड़ी जीत हो सकती है।

सोचिए, आपकी टीम में कोई ऐसा एम्प्लॉई है जो ऑफिस के बाद बहुत अच्छा गिटार बजाता है या पेंटिंग करता है। लेकिन ऑफिस आते ही वह एक रोबोट बन जाता है जो बस एक्सेल शीट भरता है। ऐसा क्यों होता है। क्योंकि आपने उसे सिर्फ एक काम के लिए फिक्स कर दिया है। आपने उसके उस क्रिएटिव हिस्से को ऑफिस के बाहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। जब आप अपनी टीम को सिर्फ उनके डेजिग्नेशन से पहचानते हैं, तो आप उनकी असली काबिलियत को खो देते हैं। एक सेल्समैन सिर्फ सेल्समैन नहीं होता, वह एक कहानी सुनाने वाला भी हो सकता है। एक इंजीनियर सिर्फ कोड नहीं लिखता, वह एक प्रॉब्लम सॉल्वर भी हो सकता है।

मान लीजिए आपकी कंपनी में कोई बहुत बड़ी टेक्निकल प्रॉब्लम आ गई। आपने महंगे कंसल्टेंट बुलाए, लाखों की फीस दी, फिर भी बात नहीं बनी। तभी अचानक वह लड़का जो रिसेप्शन पर बैठता है, एक ऐसी बात कहता है जो बहुत ही सिंपल और लॉजिकल है। सब उसे घूर कर देखते हैं कि भाई तू अपना काम कर। लेकिन अगर आप उसकी बात सुन लें, तो शायद वही उस समस्या का हल हो। हयूमर की बात यह है कि हम डिग्रियों की चमक में अक्सर सादे दिमाग की चमक को नजरअंदाज कर देते हैं। हम सोचते हैं कि जो जितना महंगा सूट पहनता है, उसका दिमाग उतना ही तेज होगा। जबकि असलियत में असली आइडिया अक्सर वहां से आते हैं जहाँ किसी की नजर नहीं जाती।

अपनी कंपनी की इस छिपी हुई क्रिएटिविटी को बाहर निकालने के लिए आपको एक जासूस की तरह काम करना होगा। आपको अपनी टीम के साथ सिर्फ काम की नहीं, बल्कि उनके पैशन की भी बातें करनी होंगी। उन्हें ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका देना होगा जो उनके रेगुलर जॉब का हिस्सा नहीं हैं। अगर आप उन्हें एक ही लकीर पर चलने को कहेंगे, तो वे कभी भी आपको नया रास्ता नहीं दिखा पाएंगे। हिडन क्रिएटिविटी कोई जादू की छड़ी नहीं है, यह एक भरोसा है। भरोसा कि आपकी टीम का हर सदस्य स्पेशल है और उसके पास कुछ न कुछ अलग देने के लिए है।

तो अब वक्त आ गया है कि आप अपनी कंपनी के उन कोनों में रोशनी डालें जहाँ धूल जमी है। अपने एम्प्लॉई को सिर्फ एक रोल नंबर मत समझिए, उन्हें एक इंसान समझिए जिसके पास इमोशंस और इमेजिनेशन दोनों हैं। जब आप अपनी कंपनी के हर दिमाग को इस्तेमाल करना शुरू करेंगे, तो आपको किसी बाहर वाले कंसल्टेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप खुद ही एक ऐसी पावरहाउस कंपनी बन जाएंगे जिसे रोकना नामुमकिन होगा। क्या आप इस खजाने को लूटने के लिए तैयार हैं या अभी भी पुराने बोरिंग तरीके से ही काम चलाना चाहते हैं।


दोस्तों, गैराज से शुरू हुआ सफर ही दुनिया बदलता है। आज ही अपनी टीम के साथ बैठिए और उनसे वह सवाल पूछिए जो आपने कभी नहीं पूछा। क्या पता आपकी कंपनी का अगला बड़ा टर्निंग पॉइंट आपके सामने ही बैठा हो। अगर आपको यह लेसन पसंद आए, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपना नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहा है। और हाँ, कमेंट में बताएं कि आपके ऑफिस का सबसे बड़ा क्रिएटिव दुश्मन कौन है।

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