The Fall of Advertising and the Rise of PR (Hindi)


आप अभी भी करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर फूंक रहे हैं और सोच रहे हैं कि कस्टमर लाइन लगा देगा। सच तो यह है कि लोग आपके विज्ञापनों को स्किप कर रहे हैं जैसे आप अपनी जिम्मेदारी को करते हैं। बिना भरोसे के बेचना सिर्फ पैसे की बर्बादी है और आप इसमें एक्सपर्ट बन चुके हैं।

आज की दुनिया में मार्केटिंग का खेल पूरी तरह बदल चुका है। अगर आप पुराने घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं तो आप हारने वाले हैं। चलिए समझते हैं उन 3 लेसन को जो आपके बिजनेस और ब्रांडिंग के नजरिए को हमेशा के लिए बदल देंगे।


Lesson : विज्ञापन मर चुका है, पीआर ही असली राजा है

अगर आप आज भी यह सोचते हैं कि टीवी पर एक करोड़ का विज्ञापन देकर आप रातों रात ब्रांड बन जाएंगे तो मुबारक हो, आप अभी भी 90 के दशक के सपने देख रहे हैं। असलियत यह है कि विज्ञापन की मौत हो चुकी है। अब वह सिर्फ एक चमक धमक वाली लाश है जिसे कंपनियां करोड़ों रुपये देकर सजा रही हैं। अल रीस और लॉरा रीस अपनी इस किताब में साफ कहते हैं कि विज्ञापन कभी भी एक नया ब्रांड नहीं बना सकता। विज्ञापन केवल उस ब्रांड को जिंदा रख सकता है जो पहले से ही मार्केट में अपनी जगह बना चुका है। अगर आप एक नया स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और सबसे पहले एड एजेंसी के पास जाकर अपना बजट लुटा रहे हैं तो आप अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं।

आज का कस्टमर बहुत स्मार्ट हो गया है। उसे पता है कि विज्ञापन में जो दिख रहा है वह झूठ का एक खूबसूरत पैकेट है। जब आप टीवी पर चिल्लाते हैं कि आपका साबुन दुनिया का सबसे अच्छा साबुन है तो कोई आप पर यकीन नहीं करता। लोग आपकी बात को वैसे ही इग्नोर करते हैं जैसे आप अपनी हेल्थ पॉलिसी के पेपर्स को करते हैं। यहाँ एंट्री होती है पीआर यानी पब्लिक रिलेशन की। पीआर का मतलब है कि आप खुद अपनी तारीफ नहीं करते बल्कि कोई और आपके बारे में बात करता है। जब अखबार में आपके स्टार्टअप के बारे में एक आर्टिकल छपता है या कोई इन्फ्लुएंसर दिल से आपकी तारीफ करता है तो लोग उसे सच मानते हैं।

मान लीजिए आप किसी पार्टी में जाते हैं और वहां चिल्ला चिल्ला कर सबको बताते हैं कि आप शहर के सबसे हैंडसम और अमीर लड़के हैं। क्या होगा। लोग आपको एक नंबर का शो ऑफ और जोकर समझेंगे। यह है विज्ञापन। अब दूसरी तरफ सोचिए कि आप पार्टी में चुपचाप कोने में खड़े हैं और शहर के तीन प्रतिष्ठित लोग आपस में बात कर रहे हैं कि आप कितने जमीन से जुड़े और कामयाब इंसान हैं। यह बात पूरी पार्टी में फैल जाती है। अब लोग खुद आपके पास आना चाहते हैं। यह है पीआर की असली ताकत।

पीआर भरोसे की बुनियाद पर खड़ा होता है जबकि विज्ञापन सिर्फ शोर मचाता है। बिना किसी ठोस पीआर के विज्ञापन करना वैसा ही है जैसे बिना इंजन की कार में पेट्रोल भरना। आप शोर तो बहुत करेंगे पर आगे एक इंच भी नहीं बढ़ पाएंगे। ज्यादातर बड़े ब्रांड्स जैसे स्टारबक्स या गूगल ने कभी शुरुआत में विज्ञापन नहीं दिए थे। वे पीआर और माउथ पब्लिसिटी के दम पर खड़े हुए। विज्ञापन का काम तो तब शुरू होता है जब आप पहले से ही लोगों के दिमाग में जगह बना चुके होते हैं। अगर आप अभी भी विज्ञापनों पर पैसे बहा रहे हैं तो रुक जाइए और अपनी स्ट्रैटेजी को फिर से देखिए।


Lesson : क्रेडिबिलिटी यानी भरोसा ही सब कुछ है

मार्केटिंग की दुनिया का सबसे बड़ा सच यह है कि कस्टमर के लिए आपका प्रोडक्ट बाद में आता है और उसका भरोसा पहले। विज्ञापन की सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि वह सेल्फ सर्विस की तरह है। आप खुद के मुंह से खुद के ब्रांड के गुण गा रहे होते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई नेता चुनाव से पहले खुद को ईमानदार बताए। क्या आप उन पर यकीन करते हैं। बिल्कुल नहीं। विज्ञापन में क्रेडिबिलिटी यानी विश्वसनीयता की भारी कमी होती है। लोग जानते हैं कि आपने पैसे दिए हैं इसलिए आप बढ़ चढ़कर बोल रहे हैं। अल रीस कहते हैं कि बिना भरोसे के आप चाहे जितना भी अच्छा विजुअल दिखा लें सब बेकार है।

आजकल के दौर में जब हर गली में एक नया ब्रांड खुल रहा है तब लोग सिर्फ उसी को चुनते हैं जिस पर उन्हें यकीन होता है। विज्ञापन आपको सिर्फ जानकारी दे सकता है लेकिन पीआर आपको वह मोहर देता है जिसे लोग सच मानते हैं। अगर कल को किसी न्यूज चैनल पर यह खबर आती है कि एक खास ब्रांड का जूस सेहत के लिए सबसे अच्छा है तो आप अगले ही दिन उसे खरीदने दौड़ेंगे। लेकिन अगर वही ब्रांड खुद टीवी पर एड दे तो आप कहेंगे कि यह तो अपना माल बेचने के लिए झूठ बोल रहे हैं। यही फर्क है एक विज्ञापन और एक थर्ड पार्टी एंडोर्समेंट में।

मान लीजिए आपको एक नई बाइक खरीदनी है। आप टीवी पर एक एड देखते हैं जहाँ एक बॉलीवुड स्टार उस बाइक को चलाकर आसमान में उड़ रहा है। आपको पता है कि वह सब वीएफएक्स का कमाल है और वह स्टार असल जिंदगी में शायद उसे हाथ भी न लगाए। आप उस पर कभी यकीन नहीं करेंगे। लेकिन वही बाइक अगर आपका वह दोस्त रिकमेंड करे जो गाड़ियों का कीड़ा है तो आप बिना सोचे उसे बुक कर देंगे। आपका दोस्त यहाँ एक पीआर एजेंट का काम कर रहा है क्योंकि उसकी बात में वजन है और वह आपसे कुछ छुपा नहीं रहा है।

लोग विज्ञापन देखते तो हैं पर उसे पचाते नहीं हैं। विज्ञापन एक ऐसी बिन बुलायी मेहमान की तरह है जो आपकी पसंदीदा मूवी के बीच में आकर अपना दुखड़ा रोने लगता है। पीआर इसके उलट है। यह एक ऐसी कहानी की तरह है जिसे लोग खुद पढ़ना और शेयर करना चाहते हैं। जब तक आपके ब्रांड के पास दूसरों का भरोसा नहीं है तब तक आप सिर्फ एक महंगी और रंगीन दुकान हैं जहाँ कोई घुसना नहीं चाहता। भरोसा कमाना मुश्किल है पर यही वह चीज है जो आपके ब्रांड को अमर बनाती है। विज्ञापन तो सिर्फ उस भरोसे को बार बार दोहराने का एक जरिया मात्र है।


Lesson : विज्ञापन केवल याद दिलाने के लिए है

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर विज्ञापन इतना ही बेकार है तो दुनिया की बड़ी कंपनियां अरबों रुपये विज्ञापनों पर क्यों खर्च करती हैं। क्या वे सब पागल हैं। बिल्कुल नहीं। बात यह है कि वे कंपनियां विज्ञापन का इस्तेमाल ब्रांड बनाने के लिए नहीं बल्कि उसे बनाए रखने के लिए करती हैं। जब पीआर की मदद से आपका ब्रांड लोगों के दिल और दिमाग में एक बार बैठ जाता है तब विज्ञापन का असली रोल शुरू होता है। विज्ञापन का काम आग लगाना नहीं है बल्कि उस लगी हुई आग में घी डालना है ताकि वह बुझने न पाए। अल रीस के अनुसार विज्ञापन का असली मकसद है रिमाइंडर देना यानी लोगों को याद दिलाते रहना कि आप अभी भी मार्केट में हैं।

अगर कोका कोला आज विज्ञापन देना बंद कर दे तो क्या होगा। लोग उसे कल ही नहीं भूल जाएंगे। लेकिन धीरे धीरे उनके दिमाग से वह ब्रांड धुंधला होने लगेगा। विज्ञापन यहाँ एक मेंटेनेंस टूल की तरह काम करता है। यह आपके ब्रांड की इमेज को प्रोटेक्ट करता है और उसे डिफेंड करता है। विज्ञापन कभी भी नई जमीन नहीं जीतता वह सिर्फ जीती हुई जमीन पर अपना झंडा फहराए रखने का काम करता है। अगर आप एक नया ब्रांड हैं और सीधे विज्ञापन के मैदान में कूद रहे हैं तो आप उस सिपाही की तरह हैं जो बिना हथियारों के युद्ध लड़ने चला गया है। आप शोर तो करेंगे पर जीत नहीं पाएंगे।

शादी के बाद पति पत्नी एक दूसरे को कभी कभी गिफ्ट देते हैं या बाहर डिनर पर जाते हैं। यह सब विज्ञापन की तरह है जो रिश्ते की ताजगी को बनाए रखता है और याद दिलाता है कि प्यार अभी भी बरकरार है। लेकिन सोचिए कि आपने कभी किसी लड़की से बात ही नहीं की और सीधे उसे एक महंगा गिफ्ट देकर कहें कि मुझसे शादी कर लो। क्या वह मान जाएगी। बिल्कुल नहीं। वह आपको पागल समझेगी। पहले आपको बातचीत करनी होगी भरोसा जीतना होगा और एक इमेज बनानी होगी यानी पीआर करना होगा। जब रिश्ता बन जाए तब गिफ्ट यानी विज्ञापन काम आते हैं।

इसलिए अगर आप अपने बिजनेस में विज्ञापनों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि पहले आपने पीआर के जरिए अपनी एक पहचान बना ली हो। विज्ञापन आपकी ब्रांड वैल्यू को बढ़ाता नहीं है बल्कि उसे स्टेबल रखता है। जो लोग विज्ञापनों के भरोसे ब्रांड खड़ा करने की कोशिश करते हैं वे अक्सर कर्ज में डूब जाते हैं क्योंकि विज्ञापन की भूख कभी खत्म नहीं होती। याद रखिए पीआर वह बीज है जो पेड़ बनाता है और विज्ञापन वह खाद है जो उस पेड़ को हरा भरा रखती है। बिना बीज के आप चाहे जितनी खाद डाल लें मिट्टी से सिर्फ धूल ही उड़ेगी।


तो दोस्तों, क्या आप भी अपने बिजनेस के लिए वही पुरानी गलतियां कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि आप शोर मचाना बंद करें और भरोसा कमाना शुरू करें। विज्ञापनों के पीछे भागने से पहले अपनी पीआर स्ट्रैटेजी पर काम करें। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और इसने आपकी सोच बदली है तो इसे उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो मार्केटिंग में अपना पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। याद रखिए असली ब्रांड विज्ञापनों से नहीं लोगों के विश्वास से बनते हैं।

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