Built to Sell (Hindi)


क्या आप भी उन महान बिजनेस ओनर्स में से हैं जो खुद को मालिक नहीं बल्कि अपने ही ऑफिस का सबसे सस्ता मजदूर समझते हैं। अगर आपके बिना एक दिन भी दुकान नहीं खुल सकती तो बधाई हो आपने बिजनेस नहीं बल्कि अपने लिए एक जेल बनाई है। आप अपनी लाइफ और फ्रीडम दोनों खो रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि हर काम खुद करना ही असली सक्सेस है।

इस आर्टिकल में हम जॉन वारिलो की बुक बिल्ट टू सेल से वो सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके सिर से काम का बोझ हटाकर आपको एक असली फ्रीडम वाला बिजनेस बनाने में मदद करेंगे। चलिए जानते हैं वो ३ लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।


लेसन १ : सब कुछ करने की बीमारी छोड़ो और स्पेशलिस्ट बनो

अगर आप अपने बिजनेस के जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स बने फिर रहे हैं तो यकीन मानिए आप असल में मास्टर ऑफ नन हैं। हमारे देश में आधे से ज्यादा स्टार्टअप और छोटे बिजनेस सिर्फ इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि मालिक को लगता है कि उसे समोसे भी तलने हैं और अकाउंट्स भी खुद ही देखने हैं। जॉन वारिलो कहते हैं कि अगर आप हर किसी के लिए सब कुछ करने की कोशिश करेंगे तो आप किसी के लिए भी खास नहीं बन पाएंगे। इसे ऐसे समझिए कि आप एक ऐसी दुकान चला रहे हैं जहाँ सुई से लेकर हाथी तक सब मिलता है। सुनने में यह बड़ा कूल लगता है पर असलियत में आप सिर्फ एक कन्फ्यूज्ड दुकानदार बनकर रह जाते हैं।

मान लीजिए आपका एक ग्राफिक डिजाइनिंग का छोटा सा काम है। अब आपके पास कोई क्लाइंट आता है जो कहता है कि भाई लोगो बना दो। आप कहते हैं हाँ जी बना देंगे। दूसरा आता है कहता है मेरी शादी का कार्ड छाप दो। आप कहते हैं बिल्कुल सर हम तो एक्सपर्ट हैं। तीसरा आता है और कहता है कि भैया मेरी दुकान का पेंट करवा दो और आप कहते हैं कि क्यों नहीं हम तो ब्रश भी पकड़ लेते हैं। यहाँ आप एक बिजनेस नहीं चला रहे बल्कि आप एक हेल्प डेस्क बन चुके हैं। जब आप हर तरह का काम लेते हैं तो आप कभी भी किसी एक चीज में इतने परफेक्ट नहीं हो पाते कि लोग आपके पास खिंचे चले आएं।

बिल्ट टू सेल हमें सिखाता है कि अगर आपको अपना बिजनेस बेचना है या उसे अपने बिना चलाना है तो आपको सबसे पहले अपनी उन सभी सर्विसेज की लिस्ट बनानी होगी जो आप देते हैं। फिर उस लिस्ट में से उस एक चीज को चुनना होगा जो आप सबसे अच्छी तरह करते हैं और जिसमें सबसे ज्यादा प्रॉफिट है। इसे 'प्रोडक्टाइजिंग' कहते हैं। जब आप अपनी सर्विस को एक प्रोडक्ट की तरह बेचने लगते हैं तो काम आसान हो जाता है। आप एक ही चीज को बार बार करते हैं जिससे आप उसमें एक्सपर्ट बन जाते हैं और आपकी टीम को भी पता होता है कि उन्हें क्या करना है।

असली मजा तब आता है जब आप अपने क्लाइंट को ना कहना सीख जाते हैं। हाँ आपने सही सुना। एक सफल बिजनेसमैन वही है जिसके पास फालतू काम को मना करने की हिम्मत हो। अगर आप हर एरे गैरे नत्थू खैरे के लिए अपना बिजनेस मॉडल बदलते रहेंगे तो आप कभी भी एक सिस्टम नहीं बना पाएंगे। जब आपका काम फिक्स होता है तो आप उसे एक फैक्ट्री की तरह चला सकते हैं। जैसे मैकडॉनल्ड्स वाले सिर्फ बर्गर बेचते हैं। अगर आप उनसे जाकर कहेंगे कि भाई साहब थोड़े छोले भटूरे भी खिला दो तो वो आपको सीधा बाहर का रास्ता दिखाएंगे। यही क्लेरिटी आपको अपने बिजनेस में लानी होगी।

जब आप स्पेशलाइज करते हैं तो आप मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। लोग आपके पास इसलिए नहीं आते कि आप सस्ते हैं बल्कि इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इस काम के लिए आपसे बेहतर कोई नहीं है। यह प्रोसेस आपके बिजनेस को स्केलेबल बनाता है। स्केलेबल मतलब ऐसा बिजनेस जिसे आप कल को बढ़ा सकें बिना अपनी नींद हराम किए। याद रखिए अगर आप हर जगह हाथ मारेंगे तो आप सिर्फ थकेंगे पर अगर आप एक ही जगह गहरा गड्ढा खोदेंगे तो पानी जरूर निकलेगा। इसलिए आज ही डिसाइड कीजिए कि वो एक चीज क्या है जिसमें आप दुनिया हिला सकते हैं और बाकी सब कचरा डस्टबिन में डाल दीजिए।


लेसन २ : कैश का चक्कर और एडवांस पेमेंट का जादू

बिजनेस में कैश फ्लो का मतलब बिल्कुल वैसा ही है जैसे आपकी बॉडी में खून। अगर खून की कमी हुई तो शरीर जवाब दे जाएगा और अगर कैश खत्म हुआ तो आपका बिजनेस आईसीयू में पहुँच जाएगा। हमारे यहाँ अक्सर क्या होता है। हम काम तो बड़े जोश में शुरू कर देते हैं पर पैसा वसूलने के टाइम पर हमारी हालत उस रिश्तेदार जैसी हो जाती है जो शादी में नाराज बैठा रहता है। जॉन वारिलो कहते हैं कि अगर आप अपने क्लाइंट के पीछे पैसे के लिए भाग रहे हैं तो आपने बिजनेस नहीं बल्कि एक सिरदर्द पाला है।

सोचिए आपने एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट पकड़ा। आपने अपनी पूरी टीम लगा दी। दिन रात एक कर दिया। ऑफिस का बिजली बिल भरा और चाय वाले का उधार चुकाया। अब जब बिल देने की बारी आई तो क्लाइंट कहता है कि भाई साहब पेमेंट तो अगले महीने के आखिर में मिलेगी। तब तक आपकी जेब में सिर्फ खाली बटुआ और आँखों में आंसू होते हैं। यह वो जाल है जिसमें फंसकर अच्छे भले बिजनेस दम तोड़ देते हैं। बुक हमें सिखाती है कि आपको अपना बिजनेस ऐसा बनाना चाहिए जो खुद को फंड कर सके। यानी काम शुरू करने से पहले ही पैसा आपकी टेबल पर होना चाहिए।

इसे 'पॉजिटिव कैश फ्लो' मॉडल कहते हैं। अब आप कहेंगे कि भाई साहब इंडिया में बिना उधार के काम कौन करता है। तो जनाब जरा अपने नेटफ्लिक्स या जिम की मेंबरशिप को देखिए। क्या वो आपसे महीने के आखिर में पूछते हैं कि सर मजा आया तो पैसे दे दो। नहीं ना। वो पहले पैसे काटते हैं और फिर आपको सर्विस देते हैं। आपको भी अपने बिजनेस को इसी तरफ मोड़ना होगा। जब आप अपनी सर्विस को एक प्रोडक्ट बना देते हैं तो आप उसकी प्राइस फिक्स कर सकते हैं और पेमेंट टर्म्स भी अपने हिसाब से रख सकते हैं।

अगर आप अपने क्लाइंट से एडवांस पैसा लेने में शर्मा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपने बिजनेस की चिता खुद सजा रहे हैं। जब आपके पास पैसा पहले आता है तो आप चैन की नींद सो सकते हैं। आप नए लोग हायर कर सकते हैं और बिना किसी टेंशन के काम की क्वालिटी पर ध्यान दे सकते हैं। बिना एडवांस के काम करना मतलब बिना पैराशूट के प्लेन से कूदना है। किस्मत अच्छी रही तो बच जाएंगे वरना जमीन पर गिरना तो तय है। जॉन वारिलो का सीधा फंडा है कि अगर कोई क्लाइंट आपको एडवांस नहीं दे सकता तो वो आपका क्लाइंट होने के लायक ही नहीं है।

ऐसे क्लाइंट्स को टाटा बाय बाय कहना सीखिए जो आपकी वर्किंग कैपिटल को अपनी पर्सनल बैंक समझते हैं। एक ऐसा बिजनेस जिसे कल को कोई खरीदना चाहेगा वो कभी भी ऐसे सिस्टम पर नहीं चलेगा जहाँ पैसा उधारी में फंसा हो। खरीदने वाला यह देखना चाहता है कि क्या यह मशीन खुद पैसा पैदा करती है। इसलिए अपने बिजनेस मॉडल को ऐसा डिजाइन कीजिए कि पैसा पहले आए और काम बाद में हो। यह सुनने में थोड़ा कड़वा लग सकता है पर यकीन मानिए आपकी बैलेंस शीट के लिए यह सबसे मीठी दवाई है।


लेसन ३ : अपने आपको रिप्लेस करो और सिस्टम का राज बनाओ

अगर आपको लगता है कि आप अपने ऑफिस के सुपरमैन हैं और आपके बिना पत्ता भी नहीं हिलता तो यकीन मानिए आप बिजनेस के सबसे बड़े दुश्मन हैं। असली बिजनेस वो नहीं है जहाँ मालिक को हर छोटे फैसले के लिए जगाना पड़े बल्कि वो है जो तब भी नोट छाप रहा हो जब मालिक गोवा के बीच पर बैठकर जूस पी रहा हो। जॉन वारिलो का कहना है कि अगर आपको अपना बिजनेस बेचना है तो उसे 'ओनर इंडिपेंडेंट' बनाना होगा। यानी आपकी कुर्सी खाली हो फिर भी काम की क्वालिटी में एक परसेंट का फर्क न आए।

मान लीजिए आपके ऑफिस में एक बहुत टैलेंटेड लड़का है जिसे आप हर काम के लिए बुलाते हैं। राहुल इधर आओ, राहुल वो फाइल देखो, राहुल चाय में चीनी कम है। अब एक दिन राहुल को जुकाम हो गया या उसने अपनी शादी के लिए छुट्टी ले ली। उस दिन आपके ऑफिस में ऐसा सन्नाटा छा जाता है जैसे किसी ने मातम मनाया हो। क्यों। क्योंकि आपने प्रोसेस नहीं बनाया बल्कि लोगों पर डिपेंड हो गए। एक खरीदने वाला इंसान आपका बिजनेस नहीं खरीदना चाहता वो आपका सिस्टम खरीदना चाहता है। अगर आप ही उस सिस्टम का सबसे जरूरी पुर्जा हैं तो आपके हटते ही वो मशीन कबाड़ हो जाएगी।

आपको अपने बिजनेस की हर छोटी बड़ी चीज के लिए एक इंस्ट्रक्शन मैन्युअल या एसओपी (SOP) तैयार करनी होगी। इसका मतलब यह है कि अगर आप कल को किसी नए बंदे को काम पर रखें तो उसे आपको घंटों बैठकर समझाना न पड़े। उसे बस वो मैन्युअल पकड़ा दें और वो काम शुरू कर दे। इसे ऐसे समझिए जैसे आप मैगी का पैकेट खरीदते हैं। उस पर लिखा होता है कि पानी उबालो मसाला डालो और दो मिनट में तैयार। चाहे आप मैगी बनाएं या आपका पड़ोसी स्वाद वही रहेगा। यही जादू आपको अपने बिजनेस में लाना है।

जब आप हर चीज का प्रोसेस लिख देते हैं तो गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है। आप अपनी टीम को सिखा सकते हैं कि अगर क्लाइंट का गुस्सा आए तो क्या बोलना है और अगर सर्वर डाउन हो जाए तो किसे फोन करना है। जब आपकी टीम के पास ये 'प्लेबुक' होती है तो वो छोटे मोटे फैसलों के लिए आपका सर नहीं खाते। आप एक सेल्स मैनेजर नहीं बल्कि एक कोच बन जाते हैं जो सिर्फ दूर से मैच देखता है। अगर आप हर बॉल पर खुद बैटिंग करने उतरेंगे तो टीम के बाकी खिलाड़ी सिर्फ तालियां बजाने के काम आएंगे।

याद रखिए एक अमीर बिजनेसमैन वो नहीं है जिसके पास बहुत सारा काम है बल्कि वो है जिसके पास बहुत सारा खाली वक्त है। वो वक्त जिसमें वो ये सोच सके कि बिजनेस को और बड़ा कैसे करना है। अगर आप दिन भर आग बुझाने में लगे रहेंगे तो आप कभी नया घर नहीं बना पाएंगे। अपने आपको धीरे धीरे हर डिपार्टमेंट से बाहर निकालिए। पहले सेल्स छोड़िए फिर ऑपरेशंस और अंत में मैनेजमेंट। जिस दिन आप अपने ऑफिस में एक अजनबी की तरह घुसेंगे और काम फिर भी मक्खन की तरह चल रहा होगा समझ लेना कि आपने एक हीरा तराश लिया है।


तो क्या आप आज भी अपने बिजनेस के चौकीदार बने रहना चाहते हैं या एक असली इन्वेस्टर बनना चाहते हैं। फैसला आपका है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत का सही फल मिले तो आज ही उन कामों की लिस्ट बनाइए जिन्हें आप दूसरों को सौंप सकते हैं। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो चौबीस घंटे 'बहुत बिजी हूँ' का रोना रोते रहते हैं। कमेंट में बताइए कि आपके बिजनेस का वो कौन सा काम है जो आपके बिना रुक जाता है। चलिए साथ मिलकर एक ऐसा इंडिया बनाते हैं जहाँ बिजनेस मालिकों के दम पर नहीं बल्कि सिस्टम के दम पर चलते हैं।

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