Business Brilliant (Hindi)


आप अभी भी वही घिसी पिटी मेहनत कर रहे हैं जो एक एवरेज इंसान करता है। बधाई हो आप कभी अमीर नहीं बनेंगे क्योंकि लुईस शिफ के ये सीक्रेट्स आपके पास नहीं हैं। अपनी मिडिल क्लास सोच को पकड़े रखिये और देखते रहिये कैसे दूसरे लोग बिजनेस ब्रिलियंट बनकर आपसे कोसों आगे निकल जाते हैं।

अगर आप सच में सेल्फ मेड आइकन बनना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपकी आंखें खोल देगा। चलिए जानते हैं वे 3 बड़े लेसन जो आपकी लाइफ और बिजनेस को पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : अपनी ताकत पर फोकस करें, कमजोरी पर नहीं

अक्सर हमारे समाज में बचपन से एक बात सिखाई जाती है कि जो काम नहीं आता उस पर जी जान लगा दो। अगर मैथ में कमजोर हो तो ट्यूशन पढ़ो और दिन रात एक कर दो। लेकिन लुईस शिफ की किताब बिजनेस ब्रिलियंट कहती है कि यह सोच आपको एक अच्छा नौकर तो बना सकती है पर एक अमीर बिजनेस आइकन कभी नहीं। मिडिल क्लास लोग अपनी कमियों को सुधारने में अपनी पूरी जिंदगी और एनर्जी बर्बाद कर देते हैं। वे सोचते हैं कि उन्हें हर काम में परफेक्ट होना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ जो लोग सेल्फ मेड मिलियनेयर बनते हैं वे अपनी कमजोरियों को गले लगाते हैं। वे जानते हैं कि वे हर चीज में अच्छे नहीं हो सकते और सच तो यह है कि वे होना भी नहीं चाहते।

मान लीजिये राहुल एक बहुत शानदार ग्राफिक डिजाइनर है। उसकी क्रिएटिविटी का कोई मुकाबला नहीं है। अब राहुल अपना खुद का बिजनेस शुरू करता है। लेकिन यहाँ राहुल एक बड़ी गलती करता है। वह सोचता है कि पैसे बचाने के लिए वह खुद ही अकाउंट्स संभालेगा, खुद ही सेल्स कॉल करेगा और खुद ही ऑफिस की साफ सफाई भी देख लेगा। नतीजा क्या होता है? राहुल का ज्यादातर समय उन कामों में निकल जाता है जिसमें वह जीरो है। उसकी डिजाइनिंग की जो असली ताकत थी वह कहीं खो जाती है। वह थक जाता है, चिड़चिड़ा हो जाता है और उसका बिजनेस ठप हो जाता है।

अब जरा समीर को देखिये। समीर भी एक डिजाइनर है लेकिन उसका माइंडसेट बिजनेस ब्रिलियंट वाला है। समीर जानता है कि उसे हिसाब किताब समझ नहीं आता और सेल्स कॉल करने में उसे डर लगता है। वह इन चीजों को सुधारने में अपना सिर नहीं फोड़ता। वह एक ऐसे बंदे को हायर करता है जो अकाउंट्स में मास्टर है और एक ऐसी लड़की को काम पर रखता है जो मिट्टी को भी सोना बोलकर बेच दे। समीर अपना पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ डिजाइनिंग और नए आइडियाज पर रखता है। समीर का बिजनेस रॉकेट की तरह ऊपर जाता है क्योंकि उसने अपनी कमजोरी को ठीक करने के बजाय अपनी ताकत को और ज्यादा मजबूत किया।

अमीर लोग जानते हैं कि टाइम सबसे कीमती एसेट है। अगर आप वह काम कर रहे हैं जो कोई और आपसे बेहतर और सस्ते में कर सकता है तो आप अपना कीमती वक्त कचरे में डाल रहे हैं। आपको जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स नहीं बनना है बल्कि मास्टर ऑफ वन बनना है। मिडिल क्लास सोच कहती है कि सब कुछ खुद करो क्योंकि पैसा बचेगा। अमीर सोच कहती है कि दूसरों को काम पर रखो ताकि आप वह बड़ा काम कर सकें जो सिर्फ आप कर सकते हैं।

इस लेसन का सबसे बड़ा सच यह है कि दुनिया आपको आपकी कमियों के लिए नहीं बल्कि आपकी खूबियों के लिए पैसे देती है। सचिन तेंदुलकर ने कभी अपनी बॉलिंग सुधारने में वक्त बर्बाद नहीं किया क्योंकि वे जानते थे कि उनका बल्ला ही उनकी असली ताकत है। अगर वे अपनी बॉलिंग ठीक करने बैठते तो शायद आज हम उन्हें क्रिकेट का भगवान नहीं कह रहे होते। तो क्या आप अभी भी अपनी उन कमजोरियों को रगड़ रहे हैं जिनका आपके सक्सेस से कोई लेना देना नहीं है? अपनी ताकत पहचानिये और उसे इतना शार्प कीजिये कि लोग आपके काम के कायल हो जाएं।

यही वह पहला कदम है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा करेगा। जब आप अपनी ताकत पर काम करना शुरू करते हैं तब आप असल मायने में उस रास्ते पर बढ़ते हैं जहाँ सफलता आपका इंतजार कर रही है। और जब आप इस ताकत के साथ आगे बढ़ेंगे तभी आप अगले स्टेप यानी रिस्क और फेलियर को मैनेज करना सीख पाएंगे।


लेसन २ : फेलियर से डरो मत बल्कि उससे सीखो

मिडिल क्लास माइंडसेट में फेलियर को एक बहुत बड़ा कलंक माना जाता है। अगर आप फेल हो गए तो लोग ऐसे देखते हैं जैसे आपने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो। पडोसी के ताने और रिश्तेदारों की नजरें आपको यह अहसास दिलाती हैं कि अब आपकी लाइफ खत्म हो चुकी है। लेकिन बिजनेस ब्रिलियंट किताब कहती है कि जो लोग खुद के दम पर अमीर बने हैं उनके लिए फेलियर एक फीडबैक है। एक डेटा है। वे इसे पर्सनल हार की तरह नहीं लेते बल्कि एक लेसन की तरह देखते हैं। एवरेज लोग फेलियर से बचने के लिए रिस्क ही नहीं लेते जबकि अमीर लोग रिस्क लेते हैं और अगर वे गिरते हैं तो वे जल्दी उठकर यह देखते हैं कि वे गिरे क्यों थे।

मान लीजिये विकास ने एक रेस्टोरेंट खोला। उसने बहुत पैसा लगाया और खूब सजावट की। लेकिन तीन महीने बाद ही रेस्टोरेंट बंद हो गया। विकास अब डिप्रेशन में चला गया है। वह सोच रहा है कि उसकी किस्मत ही खराब है। वह अब दोबारा कभी बिजनेस नहीं करेगा और किसी बैंक में क्लर्क की नौकरी ढूँढने लगेगा। वह अपने फेलियर को अपनी पहचान बना लेता है। विकास की नजर में फेलियर एक फुल स्टॉप है। वह रोएगा और पूरी दुनिया को दोष देगा पर खुद से यह नहीं पूछेगा कि आखिर लोग उसके रेस्टोरेंट में आए क्यों नहीं।

अब मिलिए अमित से। अमित ने भी एक स्टार्टअप शुरू किया जो बुरी तरह पिट गया। अमित दुखी जरूर हुआ लेकिन वह घर पर बैठकर रोया नहीं। उसने एक डायरी उठाई और उन 10 गलतियों को लिखा जो उसने की थीं। उसने समझा कि उसका प्रोडक्ट मार्केट के लिए सही नहीं था। उसने यह जाना कि उसने मार्केटिंग पर फालतू पैसा बहा दिया था। अमित के लिए यह फेलियर एक महंगी ट्यूशन फीस की तरह था। उसने उस डेटा का इस्तेमाल किया और एक नया बिजनेस शुरू किया। आज अमित करोड़ों का मालिक है क्योंकि उसने फेलियर को अंत नहीं बल्कि एक नया मोड़ माना।

दुनिया के सबसे सफल लोग हारने से नहीं डरते क्योंकि वे जानते हैं कि जीत का रास्ता हार की गलियों से ही गुजरता है। अगर आप कभी फेल नहीं हुए तो इसका सीधा मतलब है कि आपने कभी कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की। आप बस सेफ गेम खेल रहे हैं। और सेफ गेम खेलने वाले लोग कभी इतिहास नहीं रचते। अमीर लोग फेलियर को एक साइंटिस्ट की तरह देखते हैं। एक एक्सपेरिमेंट काम नहीं किया तो क्या हुआ? अगला वाला जरूर करेगा। बस यह ध्यान रखना है कि एक ही गलती दोबारा न हो।

ज्यादातर लोग अपनी पूरी एनर्जी इस बात में लगा देते हैं कि वे परफेक्ट दिखें। वे चाहते हैं कि पहली बार में ही सब कुछ सही हो जाए। लेकिन हकीकत में ऐसा कभी नहीं होता। बिजनेस एक गेम है जहाँ आपको बार बार आउट होना पड़ेगा ताकि आप एक दिन छक्का मार सकें। अगर आप आउट होने के डर से क्रीज पर ही नहीं आएंगे तो मैच कैसे जीतेंगे? अमीर लोग इस बात को समझते हैं कि जितनी जल्दी आप फेल होंगे उतनी ही जल्दी आप सीखेंगे। वे फेलियर को गले लगाते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हर हार उन्हें उनकी बड़ी जीत के एक कदम और करीब ले जा रही है।

अपनी सोच को बदलिए। फेलियर का मतलब यह नहीं है कि आप कमजोर हैं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आपको अपना तरीका बदलने की जरूरत है। जब आप इस डर को अपने दिमाग से निकाल देते हैं तो आप असल में फ्री हो जाते हैं। और यही वह फ्रीडम है जो आपको बड़े फैसले लेने की हिम्मत देती है। जब आप फेलियर को हैंडल करना सीख जाते हैं तब आप असली पावर को समझते हैं। और वह पावर आती है उन लोगों से जो आपके आसपास हैं। यहीं से शुरू होता है हमारा अगला और सबसे जरूरी लेसन यानी नेटवर्किंग।


लेसन ३ : नेटवर्क ही आपकी नेटवर्थ है

मिडिल क्लास घरों में एक बहुत ही महान सलाह दी जाती है कि बेटा बस अपने काम से काम रखो और फालतू लोगों से दूर रहो। हम सोचते हैं कि अगर हम चुपचाप डेस्क पर बैठकर मेहनत करेंगे तो एक दिन मालिक हमें माला पहनाकर अमीर बना देगा। लेकिन लुईस शिफ कहते हैं कि सेल्फ मेड लोग अकेले कमरे में बैठकर अमीर नहीं बने। वे बाहर निकले और उन्होंने ऐसे लोगों से हाथ मिलाया जो उनसे ज्यादा स्मार्ट थे। अमीर होने का सीक्रेट आपकी डिग्री में नहीं बल्कि आपकी फोन बुक में छिपा होता है। आपकी नेटवर्थ उतनी ही होगी जितना मजबूत आपका नेटवर्क होगा। अगर आप पाँच निठल्ले लोगों के साथ बैठते हैं तो छठे निठल्ले आप ही होंगे।

एक शख्स है आकाश जो दिन में चौदह घंटे काम करता है। वह बहुत ही इंटेलिजेंट है लेकिन उसके दोस्त वही पुराने कॉलेज के यार हैं जो सिर्फ क्रिकेट और ऑफिस की बुराई करने में वक्त निकालते हैं। आकाश के पास बहुत अच्छे बिजनेस आइडियाज हैं पर जब भी वह अपने दोस्तों को बताता है तो वे कहते हैं कि भाई रिस्क बहुत है चुपचाप नौकरी कर। आकाश उसी घेरे में फंसा रह जाता है क्योंकि उसका नेटवर्क उसे ऊपर खींचने के बजाय नीचे ढकेलता है। उसे लगता है कि मेहनत ही सब कुछ है पर असल में उसे सही लोगों के धक्के की जरूरत थी जो उसे कभी नहीं मिला।

अब जरा सागर को देखिये। सागर कोई बहुत बड़ा जीनियस नहीं है पर उसे लोगों से बात करना आता है। वह उन इवेंट्स में जाता है जहाँ सफल एंटरप्रेन्योर्स आते हैं। वह उनके लिए कॉफी लाता है और उनके अनुभव सुनता है। एक दिन एक बड़े इन्वेस्टर से उसकी मुलाकात होती है। सागर उसे अपना छोटा सा आइडिया बताता है। वह इन्वेस्टर सागर की मेहनत से ज्यादा उसके नेटवर्क और जोश से इम्प्रेस होता है और उसे करोड़ों की फंडिंग मिल जाती है। सागर आज एक सफल कंपनी चला रहा है क्योंकि उसने अपनी डेस्क से ज्यादा अपने रिश्तों पर मेहनत की। अमीर लोग जानते हैं कि हर दरवाजा मेहनत से नहीं खुलता कुछ दरवाजे सिर्फ सही सिफारिश और सही जान पहचान से खुलते हैं।

नेटवर्किंग का मतलब यह नहीं है कि आप लोगों का फायदा उठाएं। इसका मतलब है वैल्यू एक्सचेंज करना। आप दूसरों की मदद करते हैं और बदले में वे आपके लिए रास्ते खोलते हैं। एवरेज लोग सोचते हैं कि वे सब कुछ खुद कर लेंगे पर अमीर लोग जानते हैं कि टीम वर्क और सही कनेक्शन के बिना बड़ी जीत मुमकिन नहीं है। वे उन लोगों के साथ समय बिताते हैं जो उन्हें चैलेंज करते हैं और जो उनसे बेहतर हैं। अगर आप अपने ग्रुप के सबसे अमीर और स्मार्ट इंसान हैं तो समझ जाइये कि आप गलत ग्रुप में हैं। आपको उस कमरे में होना चाहिए जहाँ आप सबसे पीछे हों ताकि आप दूसरों को देखकर सीख सकें और आगे बढ़ सकें।

दुनिया के सबसे बड़े सौदे मीटिंग रूम्स में नहीं बल्कि गोल्फ कोर्स या डिनर टेबल पर होते हैं। लोग उन लोगों के साथ बिजनेस करना पसंद करते हैं जिन्हें वे जानते हैं और जिन पर वे भरोसा करते हैं। तो अपनी उस मिडिल क्लास झिझक को बाहर निकालिए और लोगों से मिलना शुरू कीजिये। शर्माने से घर नहीं चलता और न ही बैंक बैलेंस बढ़ता है। आपका अगला बड़ा ब्रेक शायद आपके अगले हाथ मिलाने में छिपा हो। अपनी ताकत पहचान ली फेलियर से सीख लिया अब बस सही लोगों का साथ पकड़ लीजिये और फिर देखिये आपकी लाइफ कैसे बदलती है।


बिजनेस ब्रिलियंट बनना कोई जादू नहीं है बल्कि यह एक अलग माइंडसेट है। आपने आज सीखा कि कैसे अपनी ताकत पर खेलना है फेलियर को डेटा की तरह इस्तेमाल करना है और एक तगड़ा नेटवर्क बनाना है। अब चॉइस आपकी है। क्या आप वही पुरानी घिसी पीटी लाइफ जीना चाहते हैं या लुईस शिफ के इन लेसन्स को अपनाकर अपनी किस्मत खुद लिखना चाहते हैं? इस आर्टिकल को उन 2 दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जिनके साथ आप अमीर बनना चाहते हैं। याद रखिये साथ मिलकर बढ़ना ही असली अमीरी है। आज ही अपनी ताकत पर काम करना शुरू करें और नीचे कमेंट में बताएं कि आपका सबसे बड़ा टैलेंट क्या है। चलिए साथ मिलकर बिजनेस ब्रिलियंट बनते हैं।

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