Youtility (Hindi)


आप अभी भी अपने बिजनेस के लिए वही पुराने घिसे पिटे विज्ञापन चलाकर पैसा पानी में बहा रहे हैं। मुबारक हो आप अपने कस्टमर्स को इरिटेट करने में एक्सपर्ट बन चुके हैं और वो आपसे कोसों दूर भाग रहे हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ शोर मचाकर आप सफल हो जाएंगे तो शायद आप नींद में हैं।

आज के इस डिजिटल शोर शराबे में वही बिजनेस टिकेगा जो लोगों की जिंदगी आसान बनाएगा। जय बेयर की किताब यूटिलिटी हमें सिखाती है कि कैसे बिना किसी फालतू हाइप के आप लोगों के चहेते बन सकते हैं। आइए जानते हैं इस शानदार किताब के वो ३ पावरफुल लेसन जो आपकी मार्केटिंग की सोच बदल देंगे।


लेसन १ : हाइप छोड़ो और हेल्प करो

दोस्तो, क्या आपको भी वो दिन याद हैं जब टीवी पर विज्ञापन आते ही हम चैनल बदल देते थे। आज भी कुछ नहीं बदला है बस अब हम यूट्यूब पर स्किप बटन का इंतजार करते हैं। जय बेयर अपनी किताब यूटिलिटी में सबसे पहले यही कड़वा सच बताते हैं। वो कहते हैं कि अगर आप अपने प्रोडक्ट को लेकर सिर्फ शोर मचा रहे हैं तो आप असल में लोगों को परेशान कर रहे हैं। सोचिए आप किसी पार्टी में गए हैं और वहां कोई अनजान आदमी आकर सीधा अपनी बीमा पॉलिसी बेचने लगे। आप क्या करेंगे। जाहिर है आप वहां से भाग निकलेंगे। यही हाल आज के ग्राहकों का है।

आज की दुनिया में हर कोई कुछ न कुछ बेचने की कोशिश कर रहा है। फेसबुक खोलिए तो विज्ञापन इंस्टाग्राम पर जाइए तो विज्ञापन और ईमेल तो जैसे कूड़ादान बन गया है। ऐसे में लोग उन पर भरोसा करते हैं जो उनकी मदद करते हैं न कि उन पर जो सिर्फ अपनी तारीफ के पुल बांधते हैं। यूटिलिटी का मतलब ही यही है कि आपकी मार्केटिंग इतनी काम की होनी चाहिए कि लोग उसके लिए आपको पैसे देने को भी तैयार हो जाएं। अगर आप किसी की समस्या का समाधान बिना किसी लालच के दे रहे हैं तो आप उनके दोस्त बन जाते हैं। और याद रखिए लोग सामान किसी अनजान से नहीं बल्कि अपने दोस्तों से खरीदना पसंद करते हैं।

मान लीजिए आप एक जिम के मालिक हैं। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह कि आप हर जगह पोस्टर लगा दें कि हमारा जिम सबसे सस्ता है और हमारी मशीनें सबसे अच्छी हैं। लोग इसे देखेंगे और इग्नोर कर देंगे क्योंकि हर दूसरा जिम यही कह रहा है। अब दूसरा रास्ता देखिए जिसे हम यूटिलिटी कहते हैं। आप एक फ्री गाइड या वीडियो सीरीज निकालते हैं जिसका नाम है ऑफिस में बैठकर वजन कैसे घटाएं। इसमें आप उन लोगों को फ्री में एक्सरसाइज और डाइट बताते हैं जिनके पास जिम आने का वक्त नहीं है। अब आप सोचेंगे कि अगर सब फ्री में बता दिया तो जिम कौन आएगा।

यही तो सबसे बड़ी गलतफहमी है। जब आप उन लोगों की मदद करेंगे तो उनके मन में आपके लिए इज्जत बढ़ेगी। जब भी वो भविष्य में जिम जॉइन करने का सोचेंगे तो सबसे पहला नाम आपका ही आएगा। आपने उन्हें विज्ञापन से नहीं बल्कि अपनी हेल्प से जीता है। मार्केटिंग का मतलब अब सिर्फ ध्यान खींचना नहीं है बल्कि भरोसा जीतना है। जय बेयर कहते हैं कि आज का कस्टमर बहुत स्मार्ट है। उसे पता है कि आप उसे कब बेवकूफ बना रहे हैं और कब आप सच में उसकी परवाह कर रहे हैं।

अगर आप आज भी पुराने जमाने की मार्केटिंग में फंसे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपने बिजनेस की कब्र खोद रहे हैं। लोग अब विज्ञापन नहीं देखते वो समाधान ढूंढते हैं। तो क्या आप एक सेल्समैन बनकर रहना चाहते हैं या एक मददगार दोस्त। फैसला आपका है। याद रखिए जो बिजनेस सिर्फ बेचना जानता है वो खत्म हो जाता है और जो मदद करना जानता है वो एक लेजेंड बन जाता है। मार्केटिंग की इस भीड़ में अगर आपको अलग दिखना है तो चिल्लाना बंद कीजिए और लोगों की छोटी छोटी मुश्किलों को हल करना शुरू कीजिए।


लेसन २ : सेल्फ सर्विंग मार्केटिंग का अंत

दोस्तो, आज के जमाने में अगर आप सिर्फ अपने बारे में बात कर रहे हैं, तो यकीन मानिए आप किसी दीवार से बातें कर रहे हैं। जय बेयर कहते हैं कि कस्टमर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका ऑफिस कितना बड़ा है या आपकी कंपनी कितनी पुरानी है। उसे बस एक ही चीज से मतलब है और वो है कि मेरा क्या फायदा। अगर आप अपनी मार्केटिंग में सिर्फ मैं मैं और मैं कर रहे हैं, तो आप उस घमंडी रिश्तेदार की तरह हैं जिसे कोई शादी में बुलाना नहीं चाहता।

सेल्फ सर्विंग मार्केटिंग का मतलब है ऐसी बातें करना जो सिर्फ आपके बिजनेस को सूट करती हैं। जैसे कि हम नंबर वन हैं या हमारा प्रोडक्ट सबसे बेस्ट है। भाई अगर आप बेस्ट हैं तो वो आपका कस्टमर डिसाइड करेगा न कि आपका बैनर। यूटिलिटी का दूसरा सबसे बड़ा नियम यही है कि अपनी नजरों से हटकर कस्टमर की नजरों से दुनिया को देखो। जब आप अपनी मार्केटिंग को स्वार्थ से दूर ले जाते हैं, तब असल में जादू शुरू होता है। आप अपनी सर्विस को इतना जरूरी बना दीजिए कि लोग उसे एक विज्ञापन की तरह नहीं बल्कि एक इन्फॉर्मेशन की तरह देखें।

मान लीजिए आपकी पेंट की दुकान है। अब आप हर जगह अपनी दुकान का नाम छपवा सकते हैं। लेकिन एक स्मार्ट यूटिलिटी मार्केटर क्या करेगा। वो एक मोबाइल ऐप बनाएगा जहाँ लोग अपनी दीवार की फोटो खींचकर देख सकें कि कौन सा कलर उन पर जमेगा। या फिर एक ऐसी वेबसाइट जहाँ आप यह जान सकें कि कौन सा पेंट लगाने से घर में गर्मी कम लगेगी। अब देखिए यहाँ आप पेंट नहीं बेच रहे हैं बल्कि आप एक एक्सपर्ट की तरह सलाह दे रहे हैं। जब ग्राहक को सही सलाह मिल जाती है, तो वो सामान खरीदने के लिए ऑटोमेटिकली आपकी दुकान पर ही आएगा।

कुछ लोग सोचते हैं कि फ्री में इतनी जानकारी क्यों देनी। उन्हें लगता है कि अगर सब कुछ बता दिया तो कस्टमर खुद ही सब कुछ कर लेगा। यह सोच वैसी ही है जैसे कोई सोचे कि अगर मैंने किसी को खाना बनाने की रेसिपी बता दी, तो वो कभी होटल नहीं जाएगा। हकीकत तो यह है कि जब आप लोगों को एजुकेट करते हैं, तो आप उनके लिए एक अथॉरिटी बन जाते हैं। आप उनके भरोसेमंद सलाहकार बन जाते हैं। और आज के दौर में भरोसा ही सबसे बड़ी करेंसी है।

अपनी ईगो को साइड में रखिए और यह पूछना बंद कीजिए कि मैं और ज्यादा कैसे बेच सकता हूं। इसके बजाय यह पूछिए कि मैं अपने कस्टमर की जिंदगी को थोड़ा सा और आसान कैसे बना सकता हूं। जब आप उनकी मुश्किलों को अपनी मुश्किल समझेंगे, तो आपको बेचने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। मार्केटिंग का असली मकसद कस्टमर को पीछे पड़कर पकड़ना नहीं है, बल्कि उसे इतना वैल्यू देना है कि वो खुद आपका हाथ पकड़ ले। तो क्या आप अब भी अपनी तारीफों के पुल बांधना चाहते हैं या सच में किसी की लाइफ में वैल्यू ऐड करना चाहते हैं।


लेसन ३ : लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप

दोस्तो, अक्सर लोग मार्केटिंग को १०० मीटर की रेस समझते हैं, लेकिन जय बेयर कहते हैं कि यह एक मैराथन है। अगर आप आज किसी की मदद सिर्फ इसलिए कर रहे हैं ताकि कल वो आपका सामान खरीद ले, तो यह यूटिलिटी नहीं बल्कि एक चालाकी है। और यकीन मानिए, आजकल का ग्राहक चालाकी को कोसों दूर से सूंघ लेता है। यूटिलिटी का असली पावर तब दिखता है जब आप एक बार की सेल के पीछे भागना छोड़कर जिंदगी भर का रिश्ता बनाने पर फोकस करते हैं।

सोचिए उस किराने वाले अंकल के बारे में जो आपको बता देते हैं कि बेटा आज यह वाली दाल मत ले जाओ, इसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। क्या उन्हें उस वक्त नुकसान नहीं हुआ। हुआ ना। लेकिन उन्होंने उस छोटे से नुकसान के बदले आपका जो भरोसा जीता है, उसकी कीमत लाखों में है। अब आप चाहे कहीं भी शिफ्ट हो जाएं, राशन की बात आएगी तो आपको वही अंकल याद आएंगे। यही है यूटिलिटी का जादू। जब आप काम के बनते हैं, तो आप लोगों की रूटीन का हिस्सा बन जाते हैं।

आजकल के कई स्टार्टअप्स बस यह सोचते हैं कि कैसे भी करके कस्टमर का डेटा मिल जाए और फिर उसे इतने मैसेज और ईमेल भेजो कि वो परेशान होकर फोन ही फेंक दे। इसे मार्केटिंग नहीं, टॉर्चर कहते हैं। यूटिलिटी कहती है कि आप कस्टमर के पास तब जाइए जब उसे आपकी जरूरत हो, न कि तब जब आपको टारगेट पूरा करना हो। जब आप लगातार मदद करते रहते हैं, तो आप एक ब्रांड नहीं बल्कि एक आदत बन जाते हैं। और आदतें कभी आसानी से नहीं छूटतीं।

बहुत से लोग डरते हैं कि अगर हमने बहुत ज्यादा हेल्प कर दी तो लोग हमारा फायदा उठाएंगे। भाई, अगर कोई आपका फायदा उठा रहा है तो इसका मतलब है कि आप सच में काम के हैं। बेकार लोगों का फायदा तो कोई दुश्मन भी नहीं उठाना चाहता। इसलिए डरना बंद कीजिए और वैल्यू देना शुरू कीजिए। जब आप किसी के मुश्किल समय में उनके काम आते हैं, तो आप उनके दिमाग में एक ऐसी जगह बना लेते हैं जहाँ कोई और कॉम्पिटिटर कभी नहीं पहुंच सकता।

मार्केटिंग का अंत सेल्स पर नहीं होता, बल्कि वहां से तो असली कहानी शुरू होती है। अगर सामान बेचने के बाद आप गायब हो गए, तो आप बस एक दुकानदार हैं। लेकिन अगर आप सामान बेचने के बाद भी उनकी मदद करते रहते हैं, तो आप एक दोस्त हैं। और बिजनेस की दुनिया में दोस्त हमेशा फायदे में रहते हैं। तो क्या आप तैयार हैं एक ऐसा बिजनेस खड़ा करने के लिए जिसे लोग प्यार करें, न कि सिर्फ इस्तेमाल।


तो दोस्तों, आज से ही शोर मचाना बंद कीजिए और यह सोचना शुरू कीजिए कि आप आज किसकी लाइफ आसान बना सकते हैं। क्या आपके पास कोई ऐसी जानकारी है जो किसी का बड़ा नुकसान होने से बचा सकती है। अगर है, तो उसे शेयर कीजिए। मार्केटिंग को एक बोझ की तरह नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी की तरह लीजिए। अगर आपको यह आर्टिकल काम का लगा, तो इसे उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं। और कमेंट में बताएं, आपके हिसाब से मार्केटिंग में हेल्प ज्यादा जरूरी है या हाइप।

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