क्या आपके पास भी दुनिया बदलने वाले आइडियाज हैं पर ऑफिस मीटिंग में लोग उन्हें ऐसे कुचल देते हैं जैसे कचरे का डिब्बा। शायद आपकी शक्ल खराब है या फिर आपका बोलने का तरीका बिल्कुल बेकार है। मुबारक हो क्योंकि आपके बेस्ट आइडियाज अब सिर्फ आपकी डायरी में ही दम तोड़ेंगे।
चिंता मत कीजिये क्योंकि जॉन कोटर की बुक बाय इन आपको सिखाएगी कि कैसे अपने आइडियाज को रिजेक्शन की मौत मरने से बचाना है। आइये जानते हैं वह ३ पावरफुल लेसन जो आपको ऑफिस का असली खिलाड़ी बना देंगे और आपके हर प्लान को सक्सेस दिलाएंगे।
लेसन १ : अटैक करने वालों को अपना बॉडीगार्ड बनाइये
अक्सर जब आप ऑफिस की मीटिंग में अपना कोई क्रांतिकारी आइडिया पेश करते हैं तो वहां कुछ ऐसे लोग जरूर होते हैं जिनका काम ही आपकी लंका लगाना होता है। आपने बड़े जोश में कहा कि हम इस नए सॉफ्टवेयर से कंपनी का टाइम बचा सकते हैं और तभी कोने से एक महाशय चिल्लाते हैं कि यह तो बहुत महंगा है और फालतू का खर्चा है। उस वक्त आपको लगता है कि बस अब एक ईंट उठाऊं और इनके सिर पर मार दूं। लेकिन रुकिए। जॉन कोटर कहते हैं कि यही आपकी सबसे बड़ी गलती है। जब कोई आपके आइडिया पर कीचड़ उछालता है तो वह असल में आपको एक मौका दे रहा होता है कि आप बाकी लोगों के सामने अपनी समझदारी साबित कर सकें।
सोचिये अगर विराट कोहली को कोई बाउंसर ही न फेंके तो वह छक्का कैसे मारेगा। आपके क्रिटिक्स भी वही बाउंसर फेंकने वाले बॉलर्स हैं। अगर आप उनसे डरकर क्रीज छोड़ देंगे तो आपका आइडिया आउट हो जाएगा। आपको बस शांत रहना है। अगर कोई कहता है कि आपका आइडिया महंगा है तो उसे यह मत कहिये कि आप बेवकूफ हैं आपको कुछ नहीं पता। बल्कि उसे थैंक यू बोलिये। उससे कहिये कि आपने बहुत अच्छी बात नोटिस की है और इसीलिए मैंने इस खर्चे को कम करने का यह तरीका निकाला है।
असली खिलाड़ी वह है जो सामने वाले के गुस्से को अपनी ढाल बना ले। लोग अक्सर डरे होते हैं कि कुछ नया करने से उनका काम बढ़ जाएगा या उनकी इज्जत कम हो जाएगी। उनका विरोध उनके डर का सिग्नल है। जब आप उनके तीखे सवालों का जवाब बिना गुस्सा हुए और मुस्कुराकर देते हैं तो पूरी मीटिंग को यह मैसेज जाता है कि आपका आइडिया वाकई में दम रखता है। याद रखिये कि बिना शोर मचाए किसी का मुंह बंद करना ही असली आर्ट है। अगर आप क्रिटिक को चुप कराने के बजाय उसे इंगेज करेंगे तो वह खुद ही आपके आइडिया का रक्षक बन जाएगा। यह ऑफिस की वह राजनीति है जिसे आपको मास्टर करना ही पड़ेगा वरना आपके टैलेंट पर धूल जमती रहेगी।
लेसन २ : मौत के ४ वार और उनसे बचने का तरीका
ऑफिस में आपके आइडिया को मारने के लिए लोग अक्सर ४ तरह के हथियारों का इस्तेमाल करते हैं। पहला हथियार है डर फैलाना। जैसे ही आप कुछ नया बोलेंगे कोई खड़ूस बॉस कहेगा कि अगर यह फेल हो गया तो कंपनी डूब जाएगी। दूसरा है देरी करना। लोग कहेंगे कि आइडिया तो अच्छा है पर अभी सही समय नहीं है। तीसरा है मजाक उड़ाना। आपकी बात सुनते ही कोई हंसेगा और कहेगा कि यह तो बच्चों वाला ख्याल है। और चौथा है कंफ्यूजन पैदा करना। वह आपसे ऐसे ऊलजलूल सवाल पूछेंगे जिनका आपके प्लान से कोई लेना देना ही नहीं होगा। अगर आप इन ४ हमलों के लिए तैयार नहीं हैं तो आपका आइडिया वहीं ढेर हो जाएगा।
मान लीजिये आप कहते हैं कि हमें ऑफिस में फ्री कॉफी मशीन लगानी चाहिए ताकि एम्प्लॉई खुश रहें। तभी फाइनेंस वाला बंदा खड़ा होकर कहेगा कि अगर मशीन लग गई तो सब काम छोड़कर बस कॉफी ही पियेंगे और बिजली का बिल आसमान छू लेगा। अब आप वहां खड़े होकर उसे बिजली का गणित समझाने लगेंगे तो आप हार गए। आपको बस इतना कहना है कि मुझे खुशी है कि आप कंपनी के पैसे बचाना चाहते हैं लेकिन क्या आपने सोचा है कि थके हुए एम्प्लॉई जो गलतियां करते हैं उससे कंपनी का कितना बड़ा नुकसान होता है। बस एक लाइन और सामने वाले का डर खत्म।
लोग अक्सर आपके आइडिया के पीछे के लॉजिक को नहीं बल्कि आपके कॉन्फिडेंस को देखते हैं। अगर आप उनके अजीब सवालों पर घबरा गए तो लोग समझेंगे कि आपके प्लान में वाकई कोई कमी है। जॉन कोटर समझाते हैं कि आपको इन ४ तरह के हमलों की प्रैक्टिस पहले से ही कर लेनी चाहिए। अपने घर के आईने के सामने खड़े होकर खुद से वह सबसे गंदे सवाल पूछिए जो आपको मीटिंग में परेशान कर सकते हैं। जब आप हर वार को रोकने की ढाल पहले से तैयार रखते हैं तो मैदान में आपको कोई नहीं हरा सकता। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप बारिश में छाता लेकर निकलें। बारिश तो होगी ही पर आप भीगने से बच जाएंगे। अपने आइडिया को इन ४ हमलों से बचाना ही उसे हकीकत बनाने का इकलौता रास्ता है।
लेसन ३ : दिमाग नहीं बल्कि दिल जीतिये
इंसान खुद को बहुत लॉजिकल समझता है पर असल में हम सब इमोशन्स के गुलाम हैं। आप दुनिया भर के डेटा और ग्राफ दिखा दीजिये पर अगर सामने वाले को आपके आइडिया से अपना फायदा महसूस नहीं हुआ तो वह उसे कचरे में डाल देगा। ऑफिस में लोग सिर्फ यह देखते हैं कि इस नए बदलाव से मेरी कुर्सी को खतरा तो नहीं है या मेरा काम तो नहीं बढ़ जाएगा। जॉन कोटर का सबसे बड़ा लेसन यही है कि अपने आइडिया को सिर्फ दिमाग की बात मत बनाइये बल्कि उसे लोगों की भावनाओं से जोड़िये।
सोचिये आप अपनी टीम को एक नया सॉफ्टवेयर सिखाना चाहते हैं। अगर आप कहेंगे कि यह लेटेस्ट टेक्नोलॉजी है और कंपनी का रेवेन्यू बढ़ाएगी तो आधे लोग सो जाएंगे। लेकिन अगर आप कहेंगे कि इस सॉफ्टवेयर को सीखने के बाद आपकी रोज की दो घंटे की फालतू मेहनत खत्म हो जाएगी और आप शाम को जल्दी घर जाकर अपने बच्चों के साथ खेल सकेंगे तो देखिये कैसे सब लोग आपकी बात सुनने के लिए तैयार हो जाते हैं। लोग कंपनी के रेवेन्यू के लिए नहीं बल्कि अपनी लाइफ को आसान बनाने के लिए आपके आइडिया को सपोर्ट करेंगे। इसे ही असली बाय इन कहते हैं।
अक्सर हम अपने आइडिया के प्यार में इतने अंधे हो जाते हैं कि हम दूसरों की जरूरतों को भूल जाते हैं। आपको एक सेल्समैन की तरह सोचना होगा। एक अच्छा सेल्समैन प्रोडक्ट नहीं बेचता बल्कि वह आपके सपनों को बेचता है। जब आप मीटिंग में बोलें तो भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल बंद कीजिये। सादा और सीधा बोलिये। लोगों को यह दिखाइए कि आपका आइडिया उनके लिए कैसे एक जीत है। जब आप लोगों को यह यकीन दिला देते हैं कि आपके प्लान की सक्सेस में ही उनकी पर्सनल सक्सेस छिपी है तो वह खुद ब खुद आपके पीछे चलने लगेंगे। बिना लोगों के सपोर्ट के आपका आइडिया एक बिना इंजन वाली गाड़ी जैसा है जो कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचेगी। इसलिए पहले दिल जीतिये और दिमाग अपने आप मान जाएगा।
तो दोस्तों, आपके पास दो रास्ते हैं। या तो अपने शानदार आइडियाज को रिजेक्शन के डर से अपने अंदर ही दबाकर रखिये और पूरी जिंदगी दूसरों के बेकार प्लान्स पर काम करते रहिये। या फिर आज ही जॉन कोटर के इन लेसन्स को अपनाइये और अपने ऑफिस के असली लीडर बन जाइये। याद रखिये कि दुनिया आपके आइडिया की कदर तब तक नहीं करेगी जब तक आप उसे बेचना नहीं सीखेंगे। अब उठिये और अपने उस एक आइडिया को बाहर निकालिये जिसे लोग दबा रहे थे। उसे आज फिर से पेश कीजिये पर इस बार पूरी तैयारी और इन लेसन्स के साथ। अगर आप अपनी आवाज नहीं उठाएंगे तो कोई और आपकी जगह ले लेगा। क्या आप आज एक रिस्क लेने के लिए तैयार हैं। कमेंट्स में अपनी राय जरूर बताइये।
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