क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो लाखों रुपये एड्स पर फूंक कर चवन्नी जैसी सेल्स की उम्मीद करते हैं। सच तो यह है कि आपका बोरिंग मार्केटिंग प्लान किसी को याद भी नहीं रहता और आपके कॉम्पिटिटर मजे में आपका मार्केट खा रहे हैं। अगर आपके ब्रांड में दम नहीं है तो आप बस एक और शोर मचाने वाले शोरूम बनकर रह जाएंगे जिसे दुनिया इग्नोर कर रही है।
आज हम मार्क ह्यूज की बुक बज़मार्केटिंग से वो सीक्रेट्स सीखेंगे जो आपके ब्रांड को रातों रात वायरल कर देंगे। यह आर्टिकल आपको उन 3 जबरदस्त लेसन के बारे में बताएगा जो मार्केटिंग की दुनिया को देखने का आपका नजरिया हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : बज़ के 6 बटन दबाकर लोगों को मजबूर कर दो
दोस्तो, इमेजिन कीजिये कि आप एक शादी में गए हैं और वहां सब लोग लाइन में लगकर पनीर टिक्का खा रहे हैं। तभी अचानक वहां एक आदमी जोकर के कपड़े पहनकर आता है और नागिन डांस करने लगता है। अब सच बताना आप किसे याद रखोगे। उस टेस्टी पनीर को या उस पागलों जैसी हरकत करने वाले आदमी को। जाहिर सी बात है कि आपका दिमाग उस अजीब नजारे को कभी नहीं भूलेगा। मार्क ह्यूज अपनी बुक बज़मार्केटिंग में यही समझाते हैं कि अगर आपको दुनिया का ध्यान खींचना है तो आपको बोरिंग होना छोड़ना पड़ेगा। लोग उसी चीज के बारे में बात करते हैं जो या तो बहुत अजीब हो या बहुत मजेदार। मार्क ने इसे बज़ के 6 बटन कहा है।
पहला बटन है टैबू यानी वो बातें जिनके बारे में लोग अक्सर चुप रहते हैं। जब आप समाज की किसी दबी हुई बात को छेड़ते हैं तो लोग खुद ब खुद बातें करने लगते हैं। जैसे मान लो कोई कंपनी अचानक पीरियड क्रैम्प्स या डार्क स्किन की समस्याओं पर बेबाक विज्ञापन बना दे। आधा मोहल्ला तो इसी बात पर बहस करने लगेगा कि यह क्या दिखा दिया। और यही तो मार्केटिंग है। जब लोग बहस करते हैं तो ब्रांड का नाम फ्री में फैलता है।
दूसरा बटन है अनयूजुअल यानी वो जो पहले कभी नहीं देखा गया। अब भाई साहब अगर आप वही घिसा पिटा साबुन बेचोगे जो गोरा करने का दावा करता है तो लोग आपको इग्नोर ही करेंगे। लेकिन अगर आप एक ऐसा साबुन लॉन्च कर दो जो कहता है कि इसे लगाने से आपको गंदी नाली जैसी खुशबू आएगी तो यकीन मानिए लोग उसे खरीदने नहीं तो कम से कम देखने जरूर आएंगे। लोग हैरान होना चाहते हैं। वो बोरियत से मर रहे हैं और आपका काम उन्हें उस बोरियत से बाहर निकालना है।
तीसरा बटन है रिमार्कएबल। इसका मतलब है कुछ ऐसा जो इतना अच्छा हो कि लोग चुप रह ही न पाएं। जैसे मान लो आपने एक फोन खरीदा और उसके साथ कंपनी ने आपको एक साल का रिचार्ज फ्री दे दिया। आप कम से कम 10 दोस्तों को फोन करके यह बात बताओगे। यह वर्ड ऑफ माउथ मार्केटिंग का सबसे पावरफुल तरीका है। मार्क कहते हैं कि अगर आपका प्रोडक्ट रिमार्कएबल नहीं है तो आप बस मार्केट में शोर कर रहे हैं।
चौथा बटन है हिलेरियस यानी मजाक। हम इंडियंस को कॉमेडी बहुत पसंद है। अगर आपने अपने ब्रांड के साथ कोई तगड़ा जोक जोड़ दिया तो लोग उसे व्हाट्सएप स्टेटस पर शेयर करने लगेंगे। पांचवा है सीक्रेट। लोगों को राज की बातें जानने में बहुत मजा आता है। अगर आप कहें कि मेरे प्रोडक्ट में एक ऐसा जादुई इंग्रीडिएंट है जो कोई नहीं जानता तो लोग उसे ढूंढने निकल पड़ेंगे। और आखिरी है एडवेंचरस यानी कुछ तूफानी करना।
मार्क ह्यूज खुद एक बार एक शहर का नाम बदलकर अपनी कंपनी के नाम पर रखने के लिए तैयार हो गए थे। सोचिए कितना बड़ा रिस्क था। लेकिन इससे जो बज़ क्रिएट हुआ उसने उन्हें करोड़ों की फ्री पब्लिसिटी दिला दी। हम लोग अक्सर डरते हैं कि लोग क्या कहेंगे। सच तो यह है कि अगर लोग कुछ नहीं कह रहे हैं तो आप फेल हो रहे हैं। आपकी मार्केटिंग ऐसी होनी चाहिए कि उसे देखकर ताऊजी को हार्ट अटैक आए और बच्चों को मजा आ जाए। जब तक आप लोगों के इमोशन्स को हिट नहीं करोगे तब तक वो आपकी बात नहीं करेंगे। तो क्या आप तैयार हैं अपने ब्रांड का वो बटन दबाने के लिए जिससे पूरा इंटरनेट हिल जाए। बस याद रखना कि सेफ खेलना सबसे बड़ा रिस्क है। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में बात करें तो आपको कुछ ऐसा करना होगा जो उनकी डेली लाइफ की बोरियत को तोड़ दे।
लेसन २ : अटेंशन की पावर और फ्री पब्लिसिटी का जादू
दोस्तो, क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके शहर के सबसे बड़े शोरूम के बाहर अक्सर एक अजीब सा हवा वाला पुतला नाच रहा होता है। वह पागलों की तरह हाथ पैर मारता है और हर गुजरने वाला बंदा उसे एक बार जरूर देखता है। मार्क ह्यूज कहते हैं कि वह पुतला दरअसल आपसे चिल्लाकर कह रहा है कि मुझे देखो। और यही मार्केटिंग का असली खेल है। अगर आप लोगों का ध्यान यानी अटेंशन नहीं जीत पा रहे हैं तो आप बिजनेस की रेस में पहले ही बाहर हो चुके हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि करोड़ों रुपये के विज्ञापन टीवी पर चलाने से ब्रांड बन जाता है। लेकिन मार्क इस बात पर हंसते हैं। वो कहते हैं कि असली खिलाड़ी वो है जो बिना पैसा खर्च किए पूरे देश की हेडलाइंस में जगह बना ले।
आज के समय में लोगों का अटेंशन स्पैन एक गोल्डफिश से भी कम हो गया है। आप खुद सोचिए कि आप कितनी बार सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए किसी काम के विज्ञापन को देखते ही भाग जाते हैं। लेकिन अगर वहीं पर कोई ऐसी चीज दिख जाए जो एकदम हटकर हो तो आप रुक जाते हैं। मार्क ह्यूज ने एक बार अपनी कंपनी हाफ डॉट कॉम के लिए कुछ ऐसा ही किया था। उन्होंने अमेरिका के एक छोटे से गांव के लोगों को मनाया कि वो अपने गांव का नाम बदलकर उनकी कंपनी के नाम पर रख लें। यह सुनने में कितना बेवकूफाना लगता है ना। लेकिन इसी एक हरकत ने उन्हें सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे बड़े चैनल्स पर फ्री में जगह दिला दी। उन्होंने जो पब्लिसिटी सिर्फ कुछ लाख रुपये में पा ली उसे पाने के लिए दूसरी कंपनियां अरबों रुपये खर्च कर देती हैं।
हम इंडियंस के साथ दिक्कत यह है कि हम बहुत जल्दी शर्मा जाते हैं। हमें लगता है कि अगर हम कुछ अलग करेंगे तो पड़ोस वाले शर्मा जी क्या कहेंगे। लेकिन मार्केटिंग में शर्मा जी की राय से घर नहीं चलता। मार्क समझाते हैं कि आपको अपना ईगो साइड में रखकर अटेंशन का भूखा बनना पड़ेगा। अगर आप एक छोटा बिजनेस चला रहे हैं और आपके पास विज्ञापन के लिए बजट नहीं है तो रोना बंद कीजिये। दिमाग लगाइए कि आप ऐसा क्या कर सकते हैं जिससे मीडिया खुद आपके पास आए। क्या आप दुनिया का सबसे बड़ा समोसा बना सकते हैं। क्या आप अपने स्टोर पर किसी एलियन को सेल्समैन बना सकते हैं। जो भी करो बस इतना ध्यान रखो कि वह बात करने लायक होना चाहिए।
अटेंशन पाने का मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी गलत करें। इसका मतलब है कि आप लोगों की बोरियत के दुश्मन बन जाएं। आज की दुनिया में सबसे बड़ा गुनाह है बोरिंग होना। अगर आपकी हेडलाइन या आपका पोस्टर किसी को दो सेकंड के लिए रोक नहीं पा रहा है तो उसे डस्टबिन में डाल देना चाहिए। मार्क कहते हैं कि मीडिया हमेशा एक अच्छी कहानी की तलाश में रहती है। अगर आप उन्हें एक मसाला खबर दे सकते हैं तो वो आपके ब्रांड को फ्री में प्रमोट करेंगे। इमेजिन कीजिये कि आपका एक छोटा सा स्टार्टअप है और आप कुछ ऐसा करते हैं जिससे पूरे ट्विटर पर सिर्फ आपकी चर्चा होने लगे। लोग आपके बारे में मीम्स बनाने लगें। लोग बहस करने लगें कि यह सही है या गलत। बस समझ जाइये कि आप जीत गए।
अटेंशन एक ऐसी करेंसी है जिसकी वैल्यू सोने से भी ज्यादा है। एक बार जब लोग आपकी तरफ देखने लगें तब आप उन्हें अपना प्रोडक्ट दिखा सकते हैं। लेकिन अगर वो देख ही नहीं रहे हैं तो आप चाहे दुनिया की सबसे अच्छी चीज बेच रहे हों कोई फर्क नहीं पड़ता। मार्क ह्यूज का यह लेसन हमें सिखाता है कि क्रिएटिविटी के लिए पैसे से ज्यादा हिम्मत की जरूरत होती है। क्या आपमें वो हिम्मत है कि आप भीड़ से अलग खड़े होकर कुछ ऐसा करें कि सबकी गर्दनें आपकी तरफ मुड़ जाएं। याद रखिये कि जब तक आप लोगों की चर्चा का विषय नहीं बनेंगे तब तक आप सिर्फ एक और दुकान बनकर रह जाएंगे। फ्री पब्लिसिटी का दरवाजा तब खुलता है जब आप अपनी इज्जत की चिंता छोड़कर अपने ब्रांड की चिंता करने लगते हैं।
लेसन ३ : रिस्क लेने का जिगरा और वायरल होने का असली सच
दोस्तो, क्या आपने कभी सोचा है कि हम लोग अपनी पूरी जिंदगी 'सेफ' खेलने में क्यों निकाल देते हैं। स्कूल से लेकर जॉब तक हमें यही सिखाया गया है कि बेटा लाइन से बाहर मत निकलना वरना गिर जाओगे। लेकिन मार्क ह्यूज की यह बुक हमारे मुंह पर एक जोरदार तमाचा मारती है। मार्क कहते हैं कि अगर आप मार्केटिंग की दुनिया में सेफ खेल रहे हैं तो आप असल में खुद को धीरे-धीरे खत्म कर रहे हैं। इस लेसन का सबसे बड़ा सच यही है कि वायरल होने के लिए आपको अपनी इज्जत दांव पर लगानी पड़ती है। जिसे हम पागलपन कहते हैं मार्क उसे बिजनेस की भाषा में 'कैलकुलेटेड रिस्क' कहते हैं।
इमेजिन कीजिये कि एक बहुत बड़ी मीटिंग चल रही है जहां सब लोग सूट पहनकर बैठे हैं और बोरिंग प्रेजेंटेशन देख रहे हैं। तभी एक बंदा टेबल पर चढ़कर डांस करने लगे। आप उसे पागल कहेंगे लेकिन अगले दिन पूरे ऑफिस में सिर्फ उसी की चर्चा होगी। मार्क ह्यूज ने भी यही किया था। जब उन्होंने एक पूरे शहर का नाम बदलने की बात की तो दुनिया उन पर हंस रही थी। लोगों ने कहा कि यह तो फ्लॉप हो जाएगा। लेकिन मार्क को खुद पर और अपने आइडिया पर भरोसा था। वो जानते थे कि अगर यह काम कर गया तो वो इतिहास रच देंगे और अगर नहीं किया तो कम से कम लोग उन्हें याद तो रखेंगे। मार्केटिंग में सबसे बुरी मौत गुमनामी की मौत होती है।
हम अक्सर सोचते हैं कि वायरल होना तो किस्मत का खेल है। पर मार्क समझाते हैं कि यह किस्मत नहीं बल्कि एक सोची समझी स्ट्रेटेजी है। आपको ऐसे आइडियाज पर काम करना होगा जो लोगों को झकझोर दें। आपको वो करने का जिगरा दिखाना होगा जिसे देखकर आपके कॉम्पिटिटर्स के पसीने छूट जाएं। अगर आप एक रेस्टोरेंट चला रहे हैं और आप कहें कि जो बंदा 5 मिनट में 10 मिर्चें खाएगा उसे उम्र भर फ्री खाना मिलेगा तो यह एक बज़ है। लोग इसे चैलेंज की तरह लेंगे और अपने दोस्तों को टैग करेंगे। यहाँ पैसा कम और रिस्क ज्यादा है पर यही चीज आपको ब्रांड बनाती है।
अक्सर हम फेल होने से डरते हैं। हमें लगता है कि अगर लोगों ने मजाक उड़ाया तो क्या होगा। मार्क कहते हैं कि मजाक उड़ना भी एक तरह की पब्लिसिटी ही है। जब लोग आप पर हंस रहे होते हैं तब भी वो आपका नाम ले रहे होते हैं। असली हार तब है जब लोग आपके बारे में कोई बात ही न करें। आज के दौर में जहां हर सेकंड हजारों विज्ञापन हमारी आंखों के सामने से गुजरते हैं वहां वही टिकता है जो लीक से हटकर कुछ तूफानी करता है। क्या आप तैयार हैं वो तूफानी कदम उठाने के लिए। क्या आपमें वो दम है कि आप अपने ब्रांड के लिए कुछ ऐसा करें जो पहले कभी किसी ने न किया हो।
बज़मार्केटिंग सिर्फ एक बुक नहीं बल्कि एक माइंडसेट है। यह आपको सिखाती है कि कैसे कम संसाधनों में भी आप दुनिया जीत सकते हैं। मार्क ह्यूज ने हमें वो चाबियां दी हैं जिनसे हम अटेंशन का ताला खोल सकते हैं। अब फैसला आपके हाथ में है कि आप एक और आम दुकानदार बनकर रहना चाहते हैं या फिर वो इंसान जिसके बारे में पूरा इंटरनेट बातें करे। उठिए और अपने ब्रांड का वो बटन ढूंढिए जो दुनिया को हिलाकर रख दे। क्योंकि याद रखिये अगर चर्चा नहीं हुई तो समझो सेल भी नहीं हुई।
तो दोस्तो, क्या आप भी अपने बिजनेस या ब्रांड को वायरल करने के लिए तैयार हैं। नीचे कमेंट्स में हमें बताइये कि वो कौन सा 'पागलपन' भरा आइडिया है जो आप अपने काम में आजमाना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो अपनी मार्केटिंग को लेकर बहुत डरा हुआ रहता है। चलिए मिलकर एक बज़ क्रिएट करते हैं।
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