Changing the Channel (Hindi)


आप अभी भी वही एक घिसा पिटा सेल्स चैनल पकड़ कर बैठे हैं और सोच रहे हैं कि करोड़ों की बारिश होगी। मुबारक हो आप अपने बिजनेस को धीरे धीरे कब्रिस्तान की तरफ ले जा रहे हैं। बिना मल्टी चैनल मार्केटिंग के आपकी ग्रोथ वैसी ही है जैसी बिना पेट्रोल की फरारी।

आज के दौर में अगर आप नए सेल्स चैनल नहीं खोल रहे हैं तो आप सिर्फ पैसा ही नहीं बल्कि अपना कीमती समय और मार्केट शेयर भी खो रहे हैं। चलिए जानते हैं कैसे आप माइकल मास्टरसन के इन तीन पावरफुल लेसन से अपने बिजनेस को सच में बदल सकते हैं।


लेसन १ : एक ही अंडे पर भरोसा मत करो यानी चैनल डाइवर्सिफिकेशन

जरा सोचिए आप एक दुकानदार हैं और आपकी दुकान एक ऐसी गली में है जहां सिर्फ एक ही रास्ता आता है। अब अगर किसी दिन उस रास्ते पर गड्ढा खुद जाए या वहां कोई धरना प्रदर्शन शुरू हो जाए तो आपकी कमाई का क्या होगा। बिल्कुल सही पकड़े हैं। आपकी सेल्स जीरो हो जाएगी। माइकल मास्टरसन और मैरीएलन ट्रिब्बी अपनी किताब चेंजिंग द चैनल में सबसे पहले यही समझाते हैं कि अगर आपका बिजनेस सिर्फ एक सेल्स चैनल पर टिका है तो आप बिजनेस नहीं बल्कि जुआ खेल रहे हैं।

आजकल के कई सो कॉल्ड डिजिटल एक्सपर्ट्स आपको सिखाएंगे कि बस फेसबुक एड्स चला लो और अमीर बन जाओ। लेकिन भाई साहब अगर कल मार्क जुकरबर्ग का मूड खराब हो गया और उन्होंने आपका एड अकाउंट ब्लॉक कर दिया तो क्या आप सड़क पर कटोरा लेकर बैठेंगे। असल दुनिया में इसे वन चैनल सिंड्रोम कहते हैं। यह बीमारी कैंसर से भी खतरनाक है क्योंकि यह आपके अच्छे भले चलते बिजनेस को एक झटके में खत्म कर देती है। अगर आप सिर्फ एक ही सोर्स से कस्टमर ला रहे हैं तो आप एक ऐसी नाव में बैठे हैं जिसमें एक ही चप्पू है। आप गोल गोल तो घूमेंगे पर कहीं पहुंचेंगे नहीं।

असली समझदारी इसमें है कि आप अपने कस्टमर तक पहुंचने के कम से कम सात से दस अलग अलग रास्ते बनाएं। इसे आसान भाषा में समझिए। मान लीजिए आप फिट रहने के लिए सप्लीमेंट बेचते हैं। अब सिर्फ इंस्टाग्राम की रील बनाकर मत बैठिए। आपको ईमेल मार्केटिंग भी करनी चाहिए। आपको डायरेक्ट मेल यानी लोगों के घर चिट्ठियां भी भेजनी चाहिए। आपको यूट्यूब पर भी होना चाहिए और शायद आपको न्यूजपेपर में छोटे क्लासिफाइड एड्स भी देने चाहिए। जब आप हर तरफ से कस्टमर को घेर लेते हैं तो उसे लगता है कि पूरी दुनिया में बस आप ही छाए हुए हैं।

इस स्ट्रेटेजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर एक चैनल महंगा हो जाए या बंद हो जाए तो आपके पास बैकअप प्लान तैयार रहता है। मान लीजिए गूगल ने अपनी पॉलिसी बदल दी और आपकी वेबसाइट की रैंकिंग गिर गई। कोई बात नहीं। आपके पास आपकी ईमेल लिस्ट है जो आपको हर महीने लाखों का धंधा दे रही है। यह वैसा ही है जैसे शादी में बुफे सिस्टम। अगर पनीर खत्म हो गया तो लोग दाल मखनी खाकर पेट भर लेंगे और आपकी इज्जत बची रहेगी। लेकिन अगर आप सिर्फ पनीर ही परोस रहे थे तो मेहमान आपको गालियां देकर ही जाएंगे।

मेरे एक पड़ोसी हैं वर्मा जी। उन्होंने अपनी मिठाई की दुकान सिर्फ जोमैटो के भरोसे छोड़ दी थी। शुरू में तो खूब ऑर्डर्स आए और वर्मा जी ने नई गाड़ी भी बुक कर दी। फिर एक दिन जोमैटो ने अपना कमीशन बढ़ा दिया और वर्मा जी की रेटिंग किसी ने जानबूझकर गिरा दी। अब वर्मा जी के पास न तो कस्टमर का डेटा था और न ही कोई दूसरा तरीका उन तक पहुंचने का। आज वर्मा जी अपनी दुकान पर मक्खियां मार रहे हैं और जोमैटो के कस्टमर केयर को फोन लगा रहे हैं। अगर उन्होंने शुरू से ही अपनी खुद की लिस्ट बनाई होती या फेसबुक और व्हाट्सएप का सही इस्तेमाल किया होता तो आज वह खुशी खुशी लड्डू बांट रहे होते। इसलिए आज ही अपनी डायरी निकालिए और सोचिए कि आप कौन से तीन नए चैनल आज से शुरू कर सकते हैं। याद रखिए चैनल बदलना कोई चॉइस नहीं बल्कि मजबूरी है अगर आपको करोड़ों कमाने हैं।


लेसन २ : पुराने मुर्गे को बार बार हलाल करना यानी कस्टमर रिटेंशन

जब आप एक नया चैनल खोल लेते हैं तो अक्सर लोग एक बहुत बड़ी गलती करते हैं। वे पागलों की तरह सिर्फ नए ग्राहकों के पीछे भागने लगते हैं। माइकल मास्टरसन कहते हैं कि यह वैसी ही बेवकूफी है जैसे आप एक बाल्टी में पानी भर रहे हों जिसमें नीचे बड़े बड़े छेद हों। आप ऊपर से जितना मर्जी पानी डाल लें बाल्टी कभी भरेगी नहीं। बिजनेस की दुनिया में नया कस्टमर ढूंढना सबसे महंगा काम है। पुराने कस्टमर को वापस बुलाना सबसे सस्ता और फायदेमंद काम है। लेकिन हम तो ठहरे हिंदुस्तानी। हमें तो बस नई चमक धमक वाली चीजों से प्यार है।

सोचिए आपने एक बार फेसबुक पर भारी भरकम पैसा खर्च करके एक कस्टमर को अपने स्टोर तक बुलाया। उसने एक शर्ट खरीदी और चला गया। अब अगर आप उसे भूल गए तो आपने वह सारा पैसा नाली में बहा दिया जो उसे ढूंढने में लगा था। असली पैसा पहली सेल में नहीं बल्कि दूसरी, तीसरी और दसवीं सेल में होता है। इसे मार्केटिंग की भाषा में बैकएंड सेल्स कहते हैं। अगर आपके पास बेचने के लिए सिर्फ एक ही चीज है तो आप बहुत जल्द अपनी दुकान बढ़ाकर घर बैठने वाले हैं। आपको अपने कस्टमर की उंगली नहीं बल्कि उसका पूरा हाथ पकड़ना होगा ताकि वह कहीं और जा ही न सके।

आप किसी नए सैलून में बाल कटवाने गए। वहां के नाई ने आपसे बहुत प्यार से बात की और बाल काटने के बाद आपको एक हेड मसाज फ्री में दे दी। जाते वक्त उसने आपसे आपका नंबर लिया और कहा कि अगली बार आएंगे तो आपको शेविंग पर डिस्काउंट मिलेगा। अब अगले महीने जब आपको बाल कटवाने होंगे तो क्या आप किसी नई जगह जाकर रिस्क लेंगे। बिल्कुल नहीं। आप उसी नाई के पास वापस जाएंगे क्योंकि उसने आपको अपने जाल में फंसा लिया है। और आप भी खुशी खुशी फंसना चाहते हैं क्योंकि उसने आपको वैल्यू दी है।

लेकिन हमारे बिजनेस भाई क्या करते हैं। वे एक बार सामान बेचकर ऐसे गायब होते हैं जैसे कर्ज लेने के बाद दूर का रिश्तेदार। वे कभी अपने पुराने ग्राहकों को हाल चाल पूछने के लिए मैसेज नहीं करते। वे उन्हें नए ऑफर्स के बारे में नहीं बताते। याद रखिए जो दिखता है वही बिकता है और जो बार बार दिखता है वही बार बार बिकता है। आपके पास अपने ग्राहकों का ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर होना ही चाहिए। यह आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। अगर आप उन्हें हफ्ते में एक बार भी कोई काम की बात या कोई खास डिस्काउंट भेजते रहते हैं तो आप उनके दिमाग में बने रहते हैं।

जरा सोचिए उस शादीशुदा इंसान के बारे में जो अपनी पत्नी को सिर्फ शादी के दिन फूल देता है और फिर पूरी जिंदगी उम्मीद करता है कि उसे प्यार मिले। भाई साहब तलाक के पेपर घर आ जाएंगे। प्यार बनाए रखने के लिए समय समय पर तोहफे और ध्यान देना पड़ता है। बिजनेस भी बिल्कुल वैसा ही है। अगर आप अपने कस्टमर को अटेंशन नहीं देंगे तो कोई दूसरा कंपीटीटर उसे फूल देकर ले जाएगा। इसलिए नए लोगों को पटाने के चक्कर में घर में बैठी लक्ष्मी को मत भूलिए। अपने पुराने डेटाबेस को खंगालिए और देखिए कि आप उन्हें और क्या बेहतर दे सकते हैं। जब आप ऐसा करते हैं तो आपकी मार्केटिंग कॉस्ट लगभग जीरो हो जाती है और प्रॉफिट सीधा आपके बैंक अकाउंट में रॉकेट की तरह ऊपर जाता है।


लेसन ३ : शब्दों की जादूगरी यानी कॉपीराइटिंग की असली ताकत

अब मान लीजिए आपने दस नए चैनल भी खोल लिए और पुराने ग्राहकों की लिस्ट भी बना ली। लेकिन अगर आपकी बात में दम ही नहीं है तो लोग आपकी तरफ मुड़कर भी नहीं देखेंगे। माइकल मास्टरसन कहते हैं कि कॉपीराइटिंग वह गुप्त हथियार है जो एक मरे हुए बिजनेस में भी जान फूंक सकता है। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ लिखना समझते हैं पर असल में यह लोगों के दिमाग से खेलने की कला है। अगर आप अपने प्रोडक्ट के बारे में बोरिंग बातें करेंगे तो लोग आपको वैसे ही इग्नोर करेंगे जैसे आप यूट्यूब पर आने वाले पांच सेकंड के एड को करते हैं।

जरा बाजार में घूम रहे उन सेल्समेन को देखिए जो चिल्ला चिल्ला कर कहते हैं कि हमारा साबुन सबसे अच्छा है। क्या आप उनकी बात पर यकीन करते हैं। बिल्कुल नहीं। लेकिन वहीं अगर कोई आपसे कहे कि इस साबुन का इस्तेमाल करके आप अपनी उम्र से दस साल छोटे दिखने लगेंगे तो शायद आप रुककर उसकी बात सुनेंगे। फर्क प्रोडक्ट में नहीं बल्कि उसे पेश करने के तरीके में है। आपको फीचर्स नहीं बल्कि फायदे बेचने हैं। लोगों को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि आपकी मशीन में कितने गियर हैं। उन्हें बस इस बात की चिंता है कि क्या वह मशीन उनका काम आसान करके उन्हें जल्दी घर पहुंचाएगी या नहीं।

इस बात को एक मजेदार उदाहरण से समझते हैं। एक लड़का अपनी गर्लफ्रेंड को प्रपोज करने जाता है। अगर वह उसे जाकर अपनी मार्कशीट दिखाए और बताए कि उसके बैंक में कितने पैसे हैं तो लड़की उसे सीधा भाई बना लेगी। लेकिन अगर वह उसे बताए कि वह उसके साथ अपनी पूरी जिंदगी कितनी हसीन बना सकता है और उसे दुनिया की सारी खुशियां देगा तो शायद बात बन जाए। बिजनेस में भी आपको अपने ग्राहक का दिल जीतना होता है। आपकी हेडलाइन ऐसी होनी चाहिए जो ग्राहक को झकझोर दे। उसे लगना चाहिए कि अगर उसने यह नहीं पढ़ा तो वह अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर रहा है।

सर्कस के बाहर खड़ा वह आदमी जो बस चिल्लाता है कि अंदर देखो चमत्कार है वह भी एक तरह की कॉपीराइटिंग ही कर रहा है। लेकिन अगर वह बस यह कहे कि अंदर कुछ जानवर और कुछ लोग खेल दिखा रहे हैं तो कोई टिकट नहीं खरीदेगा। आपको अपनी मार्केटिंग में क्यूरियोसिटी यानी जिज्ञासा पैदा करनी होगी। ऐसी बातें बोलिए जो ग्राहक के दर्द को छुएं और फिर उसे अपना प्रोडक्ट एक मरहम की तरह पेश कीजिए। अगर आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं और शोर मचाने वालों को दुनिया अक्सर अनसुना कर देती है।

आज के सोशल मीडिया के जमाने में तो यह और भी जरूरी हो गया है। आपके पास सिर्फ दो सेकंड होते हैं किसी का ध्यान खींचने के लिए। अगर आपकी पहली लाइन दमदार नहीं है तो लोग अंगूठा ऊपर करके आगे निकल जाएंगे। इसलिए अपनी भाषा को सरल रखिए पर अपनी बात को वजनदार बनाइए। भारी भरकम अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करके आप बुद्धिमान तो लग सकते हैं पर आप अमीर नहीं बन पाएंगे। अमीर बनने के लिए आपको उस भाषा में बात करनी होगी जो आम आदमी के दिल को छूती है। जब आपके शब्द सही चैनल के जरिए सही लोगों तक पहुंचेंगे तो यकीन मानिए आपको करोड़पति बनने से कोई रोक नहीं पाएगा।


तो दोस्तों, क्या आप भी वही पुरानी गलती दोहरा रहे हैं या आज से अपने बिजनेस के चैनल बदलने के लिए तैयार हैं। याद रखिए वक्त किसी का इंतजार नहीं करता और बिजनेस की दुनिया में जो रुक गया वह खत्म हो गया। आज ही नीचे कमेंट करके बताइए कि आप अपने बिजनेस के लिए कौन सा नया चैनल शुरू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो सालों से एक ही जगह अटका हुआ है। चलिए साथ मिलकर तरक्की की नई राहें बनाते हैं।

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