आप अपनी टीम को मशीन समझकर काम करा रहे हैं और सोच रहे हैं कि रिजल्ट्स क्यों नहीं आ रहे। सच तो यह है कि आपका ऑफिस एक जेल जैसा लग रहा है जहाँ सब डरे हुए हैं। अगर आप अब भी पुराने जमाने की सड़ी हुई लीडरशिप चला रहे हैं तो मुबारक हो आप फेल होने वाले हैं।
क्या आप भी अपनी टीम की एनर्जी को खत्म कर रहे हैं। इस आर्टिकल में हम रिचर्ड शेरिडन की किताब चीफ जॉय ऑफिसर से वो 3 लेसन सीखेंगे जो आपके काम करने के तरीके और लीडरशिप को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : डर का अंत और खुशी की शुरुआत
क्या आपको याद है जब आप स्कूल में होमवर्क भूल जाते थे और टीचर को देखकर आपके हाथ पैर फूल जाते थे। आज भी आपके ऑफिस में बहुत से लोग वैसा ही महसूस करते हैं जब वो आपको अपने केबिन की तरफ आते देखते हैं। अगर आपकी टीम आपको देखकर मुस्कुराने के बजाय अपना कंप्यूटर स्क्रीन ज्यादा ध्यान से देखने लगती है तो समझ जाइये कि आप लीडर नहीं बल्कि एक चलता फिरता खौफ हैं। रिचर्ड शेरिडन कहते हैं कि एक महान लीडर का सबसे पहला काम अपनी टीम के दिल से डर को बाहर निकालना है।
जरा सोचिये कि एक एम्प्लॉई अपनी पूरी क्षमता से काम कैसे करेगा जब उसके दिमाग में हर वक्त यह चल रहा हो कि कहीं आज बॉस का मूड खराब न हो जाए। डर इंसान की क्रिएटिविटी को वैसे ही चाट जाता है जैसे दीमक लकड़ी को। जब लोग डरे होते हैं तो वो रिस्क लेना बंद कर देते हैं। वो सिर्फ उतना ही करते हैं जिससे उनकी नौकरी बची रहे। वो नए आइडियाज नहीं देते क्योंकि उन्हें डर होता है कि अगर आइडिया फेल हुआ तो उनकी क्लास लग जाएगी। क्या आप एक ऐसी टीम चाहते हैं जो रोबोट की तरह बस बटन दबाने पर काम करे या ऐसी टीम जो दिल से आपके विजन को अपना माने।
एक बार एक मैनेजर ने अपनी टीम की मीटिंग बुलाई और बड़े गर्व से कहा कि यहाँ सब अपनी बात खुल कर कह सकते हैं। लेकिन जैसे ही एक जूनियर ने ऑफिस की किसी पॉलिसी पर सवाल उठाया तो मैनेजर का चेहरा लाल हो गया और उसने उसे वहीँ चुप करा दिया। अब उस टीम का हर मेम्बर समझ गया कि यहाँ बोलना मना है। इसे कहते हैं दिखावे की लीडरशिप। असली लीडर वो है जो अपनी गलतियों पर भी हंस सके और अपनी टीम को यह यकीन दिला सके कि गलती करना कोई गुनाह नहीं है। जब टीम को पता होता है कि उनका लीडर उनकी ढाल बनकर खड़ा है तो उनकी एनर्जी का लेवल सातवें आसमान पर पहुँच जाता है।
खुशी का मतलब यह नहीं है कि ऑफिस में हर वक्त डीजे बजता रहे या सब लोग काम छोड़कर पिज्जा पार्टी करें। खुशी का मतलब है एक ऐसा माहौल जहाँ इंसान को अपनी बात कहने की आजादी हो। जहाँ उसे लगे कि उसके काम की वैल्यू है। जब एक लीडर फियर को एलिमिनेट करता है तो वो असल में ह्यूमन एनर्जी को एक्टिवेट करता है। याद रखिये कि डरा हुआ इंसान सिर्फ सर्वाइव करता है लेकिन खुश इंसान कमाल करता है। आपको बस अपनी टीम के लिए वो कंफर्ट जोन बनाना है जहाँ वो फेल होने से न डरें बल्कि सीखने के लिए एक्साइटेड रहें।
लेसन २ : स्पष्टता की ताकत और टीम की हाई एनर्जी
क्या आपने कभी किसी चौराहे पर उस ट्रैफिक पुलिस वाले को देखा है जो हाथ हिलाकर सबको कंफ्यूज कर देता है। आधे लोग रुकते हैं और आधे लोग चलने लगते हैं। फिर नतीजा क्या होता है। भयंकर जाम और खूब सारा शोर। आपके ऑफिस में भी अक्सर ऐसा ही होता है जब विजन क्लियर नहीं होता। रिचर्ड शेरिडन कहते हैं कि अगर आप अपनी टीम की एनर्जी बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले उन्हें यह बताना होगा कि हम जा कहाँ रहे हैं। बिना दिशा के भागती हुई टीम सिर्फ थकती है मंजिल तक नहीं पहुँचती।
जरा सोचिये कि आप एक फुटबॉल मैच खेल रहे हैं लेकिन मैदान में गोल पोस्ट ही नहीं है। आप बस बॉल को इधर उधर किक मार रहे हैं। कितनी देर तक आप जोश में रहेंगे। दस मिनट। बीस मिनट। उसके बाद आप बोर हो जाएंगे। ऑफिस में भी जब एम्प्लॉई को यह नहीं पता होता कि उसके काम का असर क्या हो रहा है तो उसका जोश ठंडा पड़ जाता है। एक चीफ जॉय ऑफिसर का काम है सबको एक ही पेज पर लाना। जब हर मेम्बर को अपनी जिम्मेदारी और कंपनी का गोल साफ दिखता है तो उसे काम काम नहीं बल्कि एक मिशन लगने लगता है।
अक्सर लीडर्स को लगता है कि वो बहुत बढ़िया कम्युनिकेट कर रहे हैं। वो लंबे लंबे ईमेल लिखते हैं जिन्हें कोई नहीं पढ़ता या फिर ऐसी मीटिंग्स करते हैं जो कभी खत्म ही नहीं होतीं। एक बार एक कंपनी के बॉस ने अपनी टीम को आधे घंटे तक नई स्ट्रेटेजी समझाई। अंत में जब उसने पूछा कि किसी को कोई डाउट है तो सब चुप रहे। बॉस को लगा सब समझ गए। लेकिन असल में किसी को कुछ पल्ले नहीं पड़ा था। बस सब जल्दी लंच ब्रेक पर जाना चाहते थे। यह एनर्जी की बर्बादी है। असली क्लैरिटी तब आती है जब आप आसान भाषा में बात करते हैं और टीम को सवाल पूछने का मौका देते हैं।
जब माहौल में स्पष्टता होती है, तो लोगों को एक दूसरे पर शक नहीं होता। गॉसिप कम होती है और काम ज्यादा। आपको अपनी टीम के बीच ऐसी एनर्जी पैदा करनी है जहाँ हर कोई एक दूसरे की मदद के लिए तैयार रहे। जब एक टीम के रूप में लोग साथ मिलकर हंसते हैं और बिना किसी डर के अपने विचार रखते हैं तो वो एक ऐसी ताकत बन जाते हैं जिसे कोई नहीं हरा सकता। याद रखिये कि धुंध में गाड़ी तेज नहीं चलाई जा सकती। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम बुलेट ट्रेन की स्पीड से भागे तो आपको उनके रास्ते से कन्फ्यूजन की धुंध को हटाना होगा।
लेसन ३ : माइक्रो मैनेजमेंट का त्याग और आजादी का जादू
क्या आपने कभी उस पड़ोसी को देखा है जो अपनी कार की सफाई करते वक्त क्लीनर के सिर पर चढ़ा रहता है। अरे भाई यहाँ कपड़ा मारो। थोड़ा दांये से रगड़ो। पानी कम डालो। अंत में वो क्लीनर चिढ़कर कपड़ा पटक देता है और कहता है कि साहब आप खुद ही कर लो। यही हाल उन लीडर्स का है जो अपनी टीम के हर छोटे काम में अपनी नाक घुसाते हैं। इसे कहते हैं माइक्रो मैनेजमेंट। रिचर्ड शेरिडन का मानना है कि अगर आप अपनी टीम को अपनी उंगलियों पर नचाना चाहते हैं तो आप लीडर नहीं बल्कि एक कठपुतली चलाने वाले कलाकार हैं।
एक लीडर की सबसे बड़ी कमजोरी यह होती है कि उसे लगता है कि उसके बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता। अगर आप हर छोटी फाइल खुद चेक कर रहे हैं और हर ईमेल को अप्रूव कर रहे हैं तो आप अपनी टीम का आत्मविश्वास कुचल रहे हैं। जब आप लोगों को फैसले लेने की आजादी देते हैं तो वो खुद को काम का मालिक समझने लगते हैं। लेकिन जब आप हर कदम पर टोकते हैं तो वो अपनी अकल का इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। वो सोचने लगते हैं कि जब बॉस को ही सब तय करना है तो मैं अपना दिमाग क्यों चलाऊं। इससे टीम की एनर्जी पूरी तरह मर जाती है।
एक कंपनी में मैनेजर साहब इतने सख्त थे कि वो एम्प्लॉई के डेस्क पर रखी पेन की पोजीशन भी चेक करते थे। नतीजा यह हुआ कि पूरी टीम अपना काम छोड़कर बस यह देखने में लगी रहती थी कि साहब को क्या पसंद आएगा। जिस कंपनी को करोड़ों का बिजनेस करना था वो बस स्टेशनरी संभालने में रह गई। यह सुनकर आपको हंसी आ सकती है लेकिन सच तो यह है कि बहुत से ऑफिस आज भी इसी तरह चल रहे हैं। असली ताकत टीम को कंट्रोल करने में नहीं बल्कि उन्हें कंट्रोल देने में है।
जब आप अपनी टीम पर भरोसा करते हैं तो वो आपको चौंका देने वाले रिजल्ट्स देते हैं। उन्हें आजादी दीजिये कि वो अपने तरीके से प्रॉब्लम सॉल्व कर सकें। एक चीफ जॉय ऑफिसर वो है जो सिर्फ रास्ता दिखाता है और फिर किनारे हट जाता है ताकि टीम अपनी रफ्तार पकड़ सके। जब लोग खुद फैसले लेते हैं और सफल होते हैं तो उनके चेहरे पर जो खुशी होती है वही असली ह्यूमन एनर्जी है। यही वो मोमेंट है जब एक साधारण एम्प्लॉई एक जिम्मेदार लीडर में बदलने लगता है।
तो क्या आप तैयार हैं, अपनी लीडरशिप को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए। याद रखिये कि आपकी सफलता इस बात से नहीं मापी जाएगी कि आपने कितने लोगों को कंट्रोल किया बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि आपने कितने लोगों के चेहरे पर मुस्कान और काम के प्रति जुनून पैदा किया। डर को घर छोड़कर आइये और अपने ऑफिस को एक ऐसी जगह बनाइये जहाँ हर कोई आने के लिए बेताब रहे। आज ही एक छोटा कदम उठाइए। अपनी टीम पर भरोसा कीजिये और उन्हें वो आजादी दीजिये जिसके वो हकदार हैं। चलिए साथ मिलकर खुशियों वाला वर्कप्लेस बनाते हैं।
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