Collaboration (Hindi)


क्या आपको लगता है कि ऑफिस में हर मीटिंग में मुफ़्त की सलाह देना और हर प्रोजेक्ट में अपनी टांग अड़ाना कोलाबरेशन है? बधाई हो, आप अपनी कंपनी और करियर दोनों को गड्ढे में धकेल रहे हैं। बिना सोचे समझे सबको साथ लेकर चलने की आपकी यह आदत असल में आपकी सबसे बड़ी बर्बादी है।

आज हम मोर्टन हैनसेन की किताब कोलाबरेशन के जरिए उन चालाक तरीकों को समझेंगे जिनसे आप फालतू की मेहनत छोड़कर असली रिजल्ट्स पा सकते हैं। चलिए इन ३ धमाकेदार लेसन के साथ अपनी लीडरशिप का लेवल सुधारते हैं।


लेसन १ : कोलाबरेशन ट्रेप्स और जबरदस्ती की भाईचारा

अक्सर ऑफिस में हमारे बॉस को लगता है कि अगर सब लोग एक दूसरे का हाथ पकड़कर गोल घेरे में बैठ जाएंगे और दिन भर मीटिंग करेंगे तो कंपनी सीधा चांद पर पहुँच जाएगी। मोर्टन हैनसेन कहते हैं कि यह सबसे बड़ा धोखा है। इसे कहते हैं कोलाबरेशन ट्रेप। हमारे देश में तो वैसे भी रायचंदों की कमी नहीं है। आप बस चाय की टपरी पर खड़े हो जाइए और बोलिए कि मुझे घर लेना है फिर देखिए कैसे लोग बिना मांगे आपको लोन से लेकर ईंट गारे तक की ऐसी सलाह देंगे जैसे उन्होंने ही ताजमहल बनवाया हो। ऑफिस में भी यही होता है। जब आप बिना किसी ठोस वजह के हर काम में दूसरों को घुसाने लगते हैं तो उसे कोलाबरेशन नहीं बल्कि समय की बर्बादी कहते हैं।

सोचिए आपके पास एक प्रोजेक्ट है जिसे आप अकेले २ दिन में खत्म कर सकते हैं। लेकिन आपके अंदर का लीडर जाग जाता है और आप सोचते हैं कि सबको साथ लेकर चलना चाहिए। आप ५ लोगों की मीटिंग बुलाते हैं। अब इन ५ लोगों में एक ऐसा होगा जिसे सिर्फ समोसे खाने में इंटरेस्ट है और दूसरा वह जो हर बात पर कहता है कि हम पुराने तरीके से ही करेंगे। नतीजा क्या निकला? जिस काम को २ दिन में खत्म होना था वह २ हफ्ते की लंबी बहस में बदल गया। इसे हैनसेन ने ओवर कोलाबरेशन कहा है। लोग अक्सर अपनी इमेज चमकाने के लिए हर ईमेल में सबको सी सी (CC) कर देते हैं ताकि पूरी दुनिया को पता चले कि वह कितने मिलनसार हैं। लेकिन असलियत में वह सिर्फ दूसरों का इनबॉक्स और दिमाग भर रहे होते हैं।

असली कोलाबरेशन तब होता है जब १ और १ मिलकर ११ बनें न कि १ और १ मिलकर जीरो हो जाएं। अगर साथ काम करने की कीमत उससे मिलने वाले फायदे से ज्यादा है तो भाई साहब आप गलत रास्ते पर हैं। कई बार अकेले काम करना ज्यादा समझदारी होती है। जैसे अगर आपको अपनी बीवी के लिए एनिवर्सरी का गिफ्ट लेना है तो आप पूरे मोहल्ले की पंचायत नहीं बुलाते। आप अपनी पसंद और बजट देखते हैं और काम खत्म करते हैं। लीडरशिप में भी यही नियम लागू होता है। आपको यह पहचानना होगा कि कब कोलाबरेशन की जरूरत है और कब वह सिर्फ एक बोझ बन चुका है।

जब आप हर बात के लिए अप्रूवल मांगने लगते हैं या हर छोटी चीज के लिए फीडबैक का इंतजार करते हैं तो आपका काम कछुए की चाल से भी धीमा हो जाता है। लोग सोचते हैं कि कोलाबरेशन मतलब दोस्ती है। नहीं बॉस कोलाबरेशन मतलब रिजल्ट्स है। अगर आपकी टीम आपस में बहुत अच्छी दोस्त है लेकिन काम कुछ नहीं कर रही तो वह पिकनिक ग्रुप है कंपनी नहीं। हैनसेन हमें सिखाते हैं कि कोलाबरेशन तभी करें जब उससे सच में कोई बड़ी वैल्यू क्रिएट हो रही हो। बिना किसी मकसद के दूसरों को अपने काम में शामिल करना वैसा ही है जैसे अपनी शादी में एक्स गर्लफ्रेंड को बुलाना। सुनने में बहुत साहसी लग सकता है लेकिन अंजाम सिर्फ तमाशा ही होता है। इसलिए अगली बार जब आप मीटिंग बुलाने का सोचें तो खुद से पूछें कि क्या इसके बिना काम नहीं चल सकता? अगर जवाब हां है तो अपने और दूसरों के समय पर थोड़ा रहम खाएं।


लेसन २ : टी शेप्ड लीडर बनिए न कि सिर्फ एक पाइप

कॉर्पोरेट की दुनिया में दो तरह के लोग पाए जाते हैं। पहले वो जो अपने डेस्क पर ऐसे चिपक कर बैठते हैं जैसे फेविकोल का मज़बूत जोड़ हो। उन्हें अपने काम के अलावा दुनिया से कोई मतलब नहीं होता। दूसरे वो जो पूरे ऑफिस में घूम-घूम कर ज्ञान बांटते हैं लेकिन खुद का काम आधा छोड़ देते हैं। मोर्टन हैनसेन कहते हैं कि अगर आपको वाकई में सफल होना है तो आपको टी शेप्ड (T-Shaped) लीडर बनना पड़ेगा। अब ये टी शेप कोई योगासन नहीं है। इसका मतलब है कि आप अपनी फील्ड के उस्ताद तो हैं ही साथ ही आपके अंदर दूसरों के साथ मिलकर काम करने की चौड़ाई भी है।

मान लीजिए आप अपनी गली के सबसे बड़े क्रिकेट एक्सपर्ट हैं। आपको पता है कि कवर ड्राइव कैसे मारनी है। यह हो गई आपकी टी की खड़ी डंडी यानी आपकी इंडिविजुअल परफॉरमेंस। लेकिन अगर मैच जीतने के लिए आपको १०वें नंबर के खिलाड़ी को ये समझाना पड़े कि भाई बस बल्ला अड़ा कर खड़ा रह तो वो आपकी टी की लेटी हुई डंडी है यानी आपका कोलाबरेशन। हमारे यहाँ आधे लोग तो ऐसे हैं जो सोचते हैं कि अगर मैंने दूसरे की मदद कर दी तो कहीं वो मेरा प्रमोशन न ले उड़े। यह वैसी ही सोच है जैसे कि कोई हलवाई अपनी रेसिपी इसलिए न बताए कि कहीं पड़ोसी भी समोसे बेचकर अमीर न हो जाए। अरे भाई अगर मार्केट बड़ा होगा तो सबको फायदा होगा।

टी शेप्ड लीडर वो होता है जो अपने टारगेट तो हिट करता ही है पर जब बगल वाले डिपार्टमेंट में आग लगी हो तो वो बाल्टी लेकर भागने से मना नहीं करता। अक्सर ऑफिस में लोग साइलोस (Silos) में रहते हैं। आईटी वाले मार्केटिंग वालों को ऐसे देखते हैं जैसे वो किसी दूसरी दुनिया से आए एलियन हों। और सेल्स वाले तो सबको ऐसा समझते हैं कि बाकी सब तो बस ऑफिस में बिजली का बिल बढ़ाने आते हैं। एक टी शेप्ड लीडर इन दीवारों को तोड़ता है। वो जानता है कि अगर कंपनी डूबी तो लाइफ जैकेट सिर्फ उसके पास नहीं रहने वाली।

हैनसेन यहाँ एक कड़वी सच्चाई बताते हैं। अगर आप सिर्फ अपने काम में बेस्ट हैं और किसी की मदद नहीं करते तो आप कंपनी के लिए एक रिस्क हैं। और अगर आप सिर्फ मदद करते हैं और खुद का काम जीरो है तो आप कंपनी के लिए एक बोझ हैं। आपको वो बैलेंस ढूंढना होगा। ये वैसा ही है जैसे जिम में सिर्फ एक हाथ की एक्सरसाइज करना। थोड़े समय बाद आप किसी कार्टून की तरह दिखेंगे। आपको पूरी बॉडी का बैलेंस चाहिए।

असली मज़ा तब आता है जब आप अपनी ईगो को साइड में रखकर ये पूछें कि मैं इस प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने के लिए और क्या कर सकता हूँ? लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि आप ऑफिस के 'हेल्पडेस्क' बन जाएं कि कोई भी आए और अपना काम आपके मत्थे मढ़कर चला जाए। याद रखिए टी की खड़ी डंडी यानी आपकी अपनी मेहनत हमेशा मज़बूत होनी चाहिए। अगर आप खुद फेल हो रहे हैं तो दूसरों को पास होने का ज्ञान देना बंद कीजिए। टी शेप्ड लीडर वो है जो अपनी चमक से दूसरों का रास्ता भी रोशन करे न कि दूसरों की रोशनी चुराकर अपना चेहरा चमकाए।


लेसन ३ : एकता का ढोंग नहीं असली अनुशासन वाली यूनिटी

हमारे देश में एकता का मतलब अक्सर यह समझ लिया जाता है कि चलो सब मिलकर पार्टी करते हैं। ऑफिस में भी जब बॉस कहता है कि हमें एक टीम की तरह काम करना है, तो आधे लोग तो यही सोचने लगते हैं कि अब गोवा का ट्रिप कब बनेगा। मोर्टन हैनसेन कहते हैं कि असली यूनिटी का मतलब यह नहीं है कि सब एक दूसरे की हर बात पर 'हाँ' में 'हाँ' मिलाएं। इसे तो 'ग्रुप थिंक' कहते हैं, जहाँ सबकी बुद्धि एक साथ घुटनों में चली जाती है। असली कोलाबरेशन के लिए अनुशासन यानी डिसिप्लिन की सख्त जरूरत होती है।

सोचिए एक म्यूजिकल बैंड है। अगर ढोलक बजाने वाला अपनी ही धुन में मगन है और गिटार वाला अलग ही रॉकस्टार बन रहा है, तो वो संगीत नहीं बल्कि सरदर्द पैदा करेंगे। कोलाबरेशन में भी यही होता है। जब तक हर इंसान को अपनी जिम्मेदारी और डेडलाइन का पता नहीं होगा, तब तक वो कोलाबरेशन सिर्फ एक बड़ा कन्फ्यूजन है। लोग अक्सर सोचते हैं कि कोलाबरेशन मतलब बहुत सारी बातचीत। असल में कोलाबरेशन मतलब बहुत सारे नतीजे। अगर आपकी टीम दिन भर व्हाट्सएप्प ग्रुप पर चुटकुले भेज रही है और काम के नाम पर सिर्फ इमोजी चल रहे हैं, तो आप एकता के नाम पर अपना और कंपनी का टाइम पास कर रहे हैं।

हैनसेन एक बहुत जरूरी बात समझाते हैं कि लीडर को 'डिसिप्लिन कोलाबरेशन' पर फोकस करना चाहिए। इसका मतलब है कि जब कोई फैसला हो जाए, तो उसके बाद कोई बहस नहीं। हमारे यहाँ तो फैसला होने के बाद असली राजनीति शुरू होती है। मीटिंग रूम से बाहर निकलते ही लोग कानाफूसी करने लगते हैं कि 'देख लेना यह आइडिया तो फ्लॉप होगा'। यह यूनिटी का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर आप टीम का हिस्सा हैं, तो आपको उस फैसले के पीछे अपनी पूरी जान लगानी होगी, चाहे आप उससे सहमत हों या न हों।

बिना अनुशासन के कोलाबरेशन वैसा ही है जैसे बिना लगाम का घोड़ा। वह दौड़ेगा तो सही, लेकिन आपको पहुँचाएगा कहाँ यह किसी को नहीं पता। आपको अपनी टीम में ऐसे लोग चाहिए जो सवाल पूछने की हिम्मत रखते हों, लेकिन जब काम करने की बारी आए तो उनके जैसा वफादार कोई न हो। अक्सर लोग 'नाइस' बनने के चक्कर में सच बोलना छोड़ देते हैं। उन्हें लगता है कि अगर मैंने गलती बता दी तो रिश्ता खराब हो जाएगा। भाई साहब, यह ऑफिस है, ससुराल नहीं। यहाँ आपकी जॉब की क्वालिटी आपके रिश्तों से ज्यादा मायने रखती है।

कोलाबरेशन का मतलब गले मिलना नहीं बल्कि मिलकर गोल पोस्ट तक बॉल पहुँचाना है। अगर कोई खिलाड़ी टीम में रहकर भी गोल नहीं कर रहा, तो उसे बाहर बैठना ही होगा। अनुशासन ही वह गोंद है जो अलग-अलग टैलेंटेड लोगों को जोड़कर एक मशीन की तरह काम करवाता है। जब आप यूनिटी के साथ डिसिप्लिन को मिला देते हैं, तब जो रिजल्ट्स मिलते हैं, वो किसी जादू से कम नहीं होते। इसलिए ग्रुप में सिर्फ भीड़ मत बढ़ाइए, बल्कि एक अनुशासित फ़ौज तैयार कीजिए जो किसी भी मुश्किल प्रोजेक्ट को फतह कर सके।


तो दोस्तों, कोलाबरेशन कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस अपनी ईगो को डिब्बे में बंद करके सही लोगों के साथ सही समय पर हाथ मिलाना है। याद रखिए, अकेले आप शायद तेज दौड़ सकते हैं, लेकिन दूर तक सिर्फ एक टीम ही जा सकती है। आज ही अपने ऑफिस या बिजनेस में उन फालतू की मीटिंग्स को बंद कीजिए और असली 'टी शेप्ड' लीडर बनने की दिशा में पहला कदम उठाइए।

आपको इनमें से कौन सा लेसन सबसे ज्यादा काम का लगा? क्या आप भी उस कोलाबरेशन ट्रेप में फंसे हैं जहाँ काम कम और बातें ज्यादा होती हैं? कमेंट्स में अपनी कहानी बताएं और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हर काम के लिए पूरी पलटन बुला लेता है। चलिए मिलकर एक बेहतर और समझदार वर्किंग कल्चर बनाते हैं।

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