Competing Against Luck (Hindi)


आप दिन रात मेहनत करके नया प्रोडक्ट बना रहे हैं और आपको लगता है कि आप अगला बड़ा स्टार्टअप खड़ा कर लेंगे। पर सच तो यह है कि बिना जॉब्स टू बी डन थ्योरी समझे आप सिर्फ अपना पैसा और समय बर्बाद कर रहे हैं। शायद किस्मत आपके साथ नहीं है क्योंकि आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं।

इस शानदार किताब के जरिए हम समझेंगे कि इनोवेशन सिर्फ किस्मत का खेल नहीं है। आज हम उन 3 लेसन्स पर गहराई से बात करेंगे जो आपके बिजनेस और लाइफ को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल देंगे और आपको कस्टमर की असली जरूरत समझाएंगे।


लेसन १ : कस्टमर प्रोडक्ट नहीं खरीदते बल्कि उसे 'हायर' करते हैं

क्या आपने कभी सोचा है कि आप सुबह ऑफिस जाते समय मिल्क शेक क्यों खरीदते हैं। शायद आप कहेंगे कि आपको भूख लगी है या आपको वह पसंद है। लेकिन क्लैटन क्रिस्टेंसन कहते हैं कि आप गलत हैं। आप उस मिल्क शेक को सिर्फ पी नहीं रहे हैं बल्कि आप उसे अपने जीवन का एक छोटा सा काम यानी 'जॉब' पूरा करने के लिए 'हायर' कर रहे हैं। सोचिए कि आपका सुबह का सफर बहुत लंबा और बोरिंग है। आपको ड्राइविंग करते समय अपना हाथ व्यस्त रखना है और पेट को भी कुछ देर तक भरा रखना है। अगर आप केला खाते हैं तो वह जल्दी खत्म हो जाता है। अगर आप डोनट खाते हैं तो हाथ गंदे हो जाते हैं। लेकिन मिल्क शेक। वह धीरे-धीरे खत्म होता है और आपका पूरा रास्ता मजे में कट जाता है। यहाँ मिल्क शेक का असली कॉम्पिटिटर कोई दूसरी कोल्ड ड्रिंक नहीं बल्कि बोरियत और भूख है।

ज्यादातर स्टार्टअप और बिजनेसमैन यही गलती करते हैं कि वे अपने प्रोडक्ट के फीचर्स चमकाने में लगे रहते हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादा डिस्काउंट या ज्यादा कलर्स देने से सेल बढ़ जाएगी। लेकिन सच तो यह है कि कस्टमर को आपके प्रोडक्ट से प्यार नहीं है। उसे बस अपना वह काम पूरा करना है जिसके लिए उसने आपको पैसे दिए हैं। अगर कल को कोई और चीज उसका वह काम ज्यादा बेहतर तरीके से करेगी तो वह आपको पलक झपकते ही फायर कर देगा। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप किसी प्लंबर को बुलाते हैं। आपको प्लंबर की शक्ल या उसकी बातों से मतलब नहीं होता। आपको मतलब होता है उस टपकते हुए नल से जो आपकी नींद हराम कर रहा है।

लोग अक्सर डेटा के पीछे भागते हैं। वे देखते हैं कि उनका कस्टमर 25 साल का है और शहर में रहता है। पर क्या उस डेटा से यह पता चलता है कि उसने कल रात को आपका ऐप क्यों डिलीट किया। बिल्कुल नहीं। डेटा आपको यह बता सकता है कि क्या हुआ लेकिन यह कभी नहीं बताएगा कि 'क्यों' हुआ। जब तक आप उस 'क्यों' को नहीं पकड़ेंगे तब तक आप केवल अंधेरे में हाथ पैर मारते रहेंगे। इसे समझने के लिए आपको जासूस बनना पड़ेगा। आपको देखना होगा कि उस कस्टमर के जीवन में ऐसी कौन सी मजबूरी आई जिसने उसे आपका प्रोडक्ट खरीदने पर मजबूर किया।

अगर आप आज भी पुराने तरीके से मार्केटिंग कर रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द मार्केट से बाहर होने वाले हैं। आप अपनी एनर्जी उन लोगों पर बर्बाद कर रहे हैं जिन्हें आपकी जरूरत ही नहीं है। असली जादू तब होता है जब आप अपने प्रोडक्ट को उस खास सिचुएशन के लिए फिट कर देते हैं। जब आप यह समझ जाते हैं कि आपका असली दुश्मन आपका कॉम्पिटिटर नहीं बल्कि कस्टमर की लाइफ का वह संघर्ष है जिसे वह खत्म करना चाहता है। तो अगली बार जब आप कुछ बेचें तो खुद से पूछें कि क्या आप किसी की समस्या सुलझा रहे हैं या बस अपना स्टॉक खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।


लेसन २ : डेटा की दुनिया में असली इंसान को मत भूलिए

आजकल हर कोई डेटा का दीवाना है। ग्राफ्स और चार्ट्स देखकर ऐसा लगता है जैसे हमें दुनिया की सारी समझ आ गई है। लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ा धोखा है। क्लैटन कहते हैं कि डेटा अक्सर झूठ बोलता है क्योंकि वह केवल कोरिलेशन यानी दो चीजों के बीच का संबंध दिखाता है पर उनके पीछे का कारण नहीं बताता। मान लीजिए कि डेटा कहता है कि बारिश होने पर लोग छाता ज्यादा खरीदते हैं। अब इसका मतलब यह तो नहीं हुआ कि अगर आप घर में बैठे लोगों पर पानी छिड़क देंगे तो वे छाता खरीदने दौड़ेंगे। यह सुनने में मजाक लग सकता है पर असल दुनिया में मैनेजर्स बिल्कुल यही कर रहे होते हैं। वे नंबरों की चादर ओढ़कर सो जाते हैं और भूल जाते हैं कि उनका कस्टमर एक जीता-जागता इंसान है जिसके पास भावनाएं और उलझनें हैं।

सोचिए एक रीयल एस्टेट डेवलपर की कहानी। वह नए घर बना रहा था और उसने डेटा के हिसाब से हर सुख-सुविधा दी। बड़े बेडरूम और बढ़िया किचन। फिर भी लोग घर नहीं खरीद रहे थे। उसने बहुत डिस्काउंट दिया पर सब बेकार। फिर उसने कुछ लोगों से बात की और उसे एक अजीब बात पता चली। लोग नया घर तो खरीदना चाहते थे पर वे अपनी पुरानी डाइनिंग टेबल नहीं छोड़ पा रहे थे। वह टेबल सिर्फ लकड़ी का टुकड़ा नहीं थी बल्कि उसमें उनकी यादें बसी थीं। उन्हें डर था कि नए छोटे अपार्टमेंट में वह टेबल फिट नहीं आएगी। यहाँ समस्या घर की कीमत या बेडरूम का साइज नहीं था। समस्या थी वह डाइनिंग टेबल। जैसे ही डेवलपर ने डाइनिंग टेबल के लिए अलग से जगह बनाई और पुरानी चीजों को शिफ्ट करने में मदद की वैसे ही सेल रॉकेट की तरह ऊपर चली गई।

ज्यादातर कंपनियां केवल औसत यानी एवरेज कस्टमर के लिए प्रोडक्ट बनाती हैं। लेकिन हकीकत में कोई भी इंसान एवरेज नहीं होता। अगर आप एक पैर बर्फ में रखें और दूसरा जलते हुए अंगारे पर तो औसतन आपका तापमान बिल्कुल ठीक होगा। लेकिन क्या आप सच में ठीक होंगे। बिल्कुल नहीं। यही हाल बिजनेस का है। जब आप केवल डेटा के औसत पर ध्यान देते हैं तो आप उस अकेले इंसान के संघर्ष को भूल जाते हैं जो आपके पास एक उम्मीद लेकर आया था। आप उसे केवल एक नंबर समझने लगते हैं और यहीं से आपकी बर्बादी शुरू होती है।

अगर आप चाहते हैं कि आपका स्टार्टअप या काम सफल हो तो कंप्यूटर की स्क्रीन छोड़कर जरा बाहर निकलिए। अपने कस्टमर को उस समय देखिए जब वह आपके प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने की जद्दोजहद कर रहा होता है। वह कौन सी चीज है जो उसे परेशान कर रही है। वह कौन सी खुशी है जो उसे आपके कॉम्पिटिटर के पास नहीं मिल रही। जब आप डेटा के बजाय उस इंसान की लाइफ के छोटे-छोटे संघर्षों को देखना शुरू करेंगे तब आपको वह गैप दिखेगा जहाँ इनोवेशन छिपा है। अगर आप अब भी केवल एक्सेल शीट के भरोसे बैठे हैं तो यकीन मानिए आप उस रीयल एस्टेट डेवलपर की तरह खाली घर लेकर बैठे रह जाएंगे और आपकी किस्मत कभी नहीं चमकेगी।


लेसन ३ : पूरी कंपनी को 'जॉब' के इर्द-गिर्द खड़ा करना

मान लीजिए कि आपको पता चल गया कि आपका कस्टमर आपका प्रोडक्ट किस 'जॉब' के लिए हायर कर रहा है। आपको लग रहा होगा कि आधी जंग जीत ली। लेकिन असल चुनौती तो अब शुरू होती है। क्लैटन कहते हैं कि सिर्फ जानना काफी नहीं है। आपको अपनी पूरी कंपनी के स्ट्रक्चर और प्रोसेस को उस एक काम को पूरा करने के लिए मोड़ना होगा। अक्सर होता यह है कि मार्केटिंग टीम कुछ और बोलती है सेल्स टीम किसी और चीज के पीछे भागती है और प्रोडक्ट बनाने वाले अपनी ही धुन में मगन रहते हैं। नतीजा यह होता है कि कस्टमर कन्फ्यूज हो जाता है और आपका ब्रांड एक खिचड़ी बन कर रह जाता है।

एक स्कूल की कहानी लीजिए जो अपनी घटती हुई संख्या से परेशान था। उन्होंने बहुत एडवरटाइजिंग की पर कुछ नहीं बदला। जब उन्होंने गहराई से देखा तो पता चला कि माता-पिता स्कूल को सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि इस 'जॉब' के लिए हायर करते थे कि उनका बच्चा सुरक्षित रहे और उसे अच्छे संस्कार मिलें। अब अगर स्कूल केवल अपनी बड़ी बिल्डिंग और कंप्यूटर लैब की बातें करता रहेगा तो वह उस असली डर को कभी खत्म नहीं कर पाएगा। जैसे ही स्कूल ने अपनी बस सर्विस अपनी सिक्योरिटी और टीचर के व्यवहार को उस सुरक्षा वाले 'जॉब' के हिसाब से बदला पेरेंट्स की लाइन लग गई। यहाँ बदलाव किसी एक डिपार्टमेंट में नहीं बल्कि पूरी स्कूल की प्रोसेस में आया।

ज्यादातर कंपनियां अपनी सफलता को डॉलर या रुपयों में मापती हैं। लेकिन आपको अपनी सफलता को इस बात से मापना चाहिए कि आपने कस्टमर का वह काम कितनी अच्छी तरह पूरा किया। अगर आप एक कॉफी शॉप चलाते हैं और आपका कस्टमर वहां सिर्फ कॉफी पीने नहीं बल्कि शांति से बैठकर काम करने के लिए आता है तो आपकी सफलता आपकी कॉफी की खुशबू से ज्यादा आपके वाईफाई की स्पीड और शांति वाले माहौल पर निर्भर करती है। अगर आपके वेटर्स बार-बार उसे टोकेंगे तो वह अगली बार किसी और कैफे को 'हायर' कर लेगा। आपको अपने हर कर्मचारी को यह समझाना होगा कि वे कॉफी नहीं बेच रहे बल्कि वे एक शांत वर्कप्लेस बेच रहे हैं।

अगर आपकी कंपनी के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग दिशा में भाग रहे हैं तो आप कभी भी कस्टमर का भरोसा नहीं जीत पाएंगे। आपको अपनी हार और जीत का पैमाना बदलना होगा। जब तक आपका पूरा सिस्टम उस एक 'जॉब' को पूरा करने के लिए एक सुर में काम नहीं करेगा तब तक आप केवल किस्मत के भरोसे बैठे रहेंगे। और जैसा कि हमने पहले देखा किस्मत बहुत बेवफा होती है। तो अपनी टीम को इकट्ठा कीजिए और उनसे पूछिए कि हम किस काम के लिए पैदा हुए हैं। अगर जवाब धुंधला है तो समझ लीजिए कि आपके फेल होने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।


किस्मत के भरोसे बैठना बंद कीजिए और उस असली कारण को ढूंढिए जिसके लिए दुनिया आपको याद रखे। इनोवेशन कोई जादू नहीं है बल्कि यह उस इंसान के दर्द को समझने की कला है जो आपके सामने खड़ा है। अगर आप आज से ही अपने कस्टमर के संघर्ष को अपनी प्राथमिकता बना लेंगे तो आपको कभी भी कॉम्पिटिशन से डरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या आप आज से अपने काम को एक नई नजर से देखने के लिए तैयार हैं। अपने विचार नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपने बिजनेस में स्ट्रगल कर रहा है।

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