क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो बिना किसी प्लान के सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते रहते हैं और फिर रोते हैं कि सेल्स क्यों नहीं आ रही है? मुबारक हो। आप अपनी मेहनत और पैसा दोनों कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ एक सुंदर फोटो डालना ही डिजिटल मार्केटिंग है तो आपकी नासमझी पर मुझे तरस आ रहा है।
असल में डिजिटल मार्केटिंग कोई तुक्का नहीं बल्कि एक गहरी कला है। इयान डोडसन की यह बुक आपको उन गलतियों से बचाएगी जो आपके कॉम्पिटिटर कर रहे हैं। चलिए आज इस आर्टिकल में उन ३ बड़े लेसन को समझते हैं जो आपके डूबते हुए ऑनलाइन बिजनेस को बचा सकते हैं।
लेसन १ : द थ्री आई फ्रेमवर्क: डेटा की शक्ति को पहचानें
अगर आपको लगता है कि मार्केटिंग का मतलब बस एक चमकती हुई फोटो बनाना और उसे इंटरनेट की दीवार पर चिपका देना है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। इयान डोडसन अपनी बुक में एक बहुत ही कड़वा सच बताते हैं। वे कहते हैं कि बिना डेटा के मार्केटिंग करना वैसा ही है जैसे अंधेरे कमरे में काली बिल्ली को ढूंढना जो वहां है ही नहीं। इसी समस्या का समाधान है द थ्री आई फ्रेमवर्क यानी इनिशिएट, इटरेट और इंटीग्रेट।
मान लीजिये आपने एक नया जिम खोला है। अब आप जोश में आकर पूरे शहर में पर्चे बांटने लगे। आपने सोचा कि हर कोई फिट होना चाहता है तो हर कोई आपके पास आएगा। लेकिन असलियत क्या निकली? आपके पास सिर्फ वही लोग आए जो फ्री में पानी पीना चाहते थे या जिन्हें जिम के बाहर लगे शीशे में अपनी शक्ल देखनी थी। यहाँ आपने डेटा का इस्तेमाल नहीं किया। डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में सबसे पहले आपको इनिशिएट करना होता है यानी अपनी ऑडियंस को पहचानना होता है। आपको यह जानना होगा कि क्या वह इंसान वाकई वजन घटाना चाहता है या बस अपनी लेजी लाइफस्टाइल से बोर होकर आपके एड पर क्लिक कर रहा है।
जब आप यह जान लेते हैं कि आपका असली कस्टमर कौन है तब बारी आती है इटरेट करने की। इसका मतलब है अपने काम को बार बार सुधारना। आपने एक एड चलाया जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब आप बैठकर अपनी किस्मत को दोष देंगे? बिल्कुल नहीं। इयान कहते हैं कि आपको अपना चश्मा बदलना होगा। अगर नीले रंग के एड पर कोई क्लिक नहीं कर रहा है तो उसे लाल कर दीजिये। अगर आपकी भाषा लोगों को बोर कर रही है तो उसमें थोड़ी मिर्च मसाला डालिए। यह वैसा ही है जैसे आप पहली डेट पर जाते हैं और सामने वाले का मूड देखकर अपनी बातें बदलते रहते हैं ताकि आप रिजेक्ट न हो जाएं। मार्केटिंग में भी रिजेक्शन से बचने के लिए आपको पल पल बदलना पड़ता है।
अंत में आता है इंटीग्रेट करना। इसका मतलब है कि आपकी वेबसाइट, आपका इंस्टाग्राम और आपका ईमेल सब एक ही सुर में गाना गाएं। ऐसा न हो कि इंस्टाग्राम पर आप खुद को बहुत प्रोफेशनल दिखा रहे हैं और आपकी वेबसाइट खोलने पर ऐसा लगे जैसे किसी ने १९९० की पुरानी दुकान खोल दी हो। जब आपकी सारी डिजिटल मौजूदगी एक साथ मिलकर काम करती है तभी कस्टमर के दिमाग में आपकी ब्रांड वैल्यू बैठती है।
सोचिये अगर आप एक रेस्टोरेंट चला रहे हैं और वेटर बहुत तमीज से बात करता है लेकिन खाना खाते ही आपको डॉक्टर के पास जाना पड़े। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे? कभी नहीं। ठीक वैसे ही अगर आपकी मार्केटिंग की कड़ियां आपस में नहीं जुड़ी हैं तो आप बस अपना पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। डेटा को अपना दोस्त बनाइये और उसे अपनी भावनाओं से ऊपर रखिये। क्योंकि इंटरनेट पर आपकी पसंद मायने नहीं रखती बल्कि आपके कस्टमर का क्लिक मायने रखता है।
लेसन २ : यूजर सेंट्रिक अप्रोच: कस्टमर के जूते में पैर रखकर देखिये
ज्यादातर बिजनेस मालिक अपनी ही धुन में रहते हैं। उन्हें लगता है कि उनका प्रोडक्ट दुनिया का आठवां अजूबा है। वे चिल्ला चिल्लाकर अपनी तारीफ करते हैं। लेकिन इयान डोडसन कहते हैं कि डिजिटल दुनिया में किसी को आपकी महानता में कोई दिलचस्पी नहीं है। लोग सिर्फ एक ही चीज ढूंढ रहे हैं और वह है अपनी समस्या का समाधान। अगर आप सिर्फ मैं मैं मैं करेंगे तो लोग आपको वैसे ही इग्नोर करेंगे जैसे आप यूट्यूब पर आने वाले फालतू एड्स को करते हैं।
इमेजिन कीजिये कि आप एक बहुत महंगा स्मार्टफोन बेच रहे हैं। आप अपने एड में लिखते हैं कि इसमें दुनिया का सबसे तेज प्रोसेसर है। अब आम आदमी को क्या पता कि प्रोसेसर क्या बला है? वह तो बस यह चाहता है कि जब वह अपनी सुंदर सी फोटो खींचे तो वह धुंधली न आए या गेम खेलते वक्त फोन गर्म होकर बम न बन जाए। यहाँ यूजर सेंट्रिक होने का मतलब है कस्टमर की भाषा में बात करना। अगर आप उसे वह नहीं दे रहे जो उसे चाहिए तो आप बस इंटरनेट का शोर बढ़ा रहे हैं।
मान लीजिये आप एक ऑनलाइन कोर्स बेच रहे हैं कि अमीर कैसे बनें। आप अपनी वेबसाइट पर अपनी फोटो लगाते हैं जिसमें आप एक महंगी कार के पास खड़े हैं। आपको लगता है कि लोग आपसे इम्प्रेस हो जाएंगे। लेकिन कस्टमर क्या सोच रहा है? वह सोच रहा है कि यह बंदा तो मेरी फीस के पैसों से ही कार की ईएमआई भर रहा है। यहाँ आपका फोकस खुद पर था न कि कस्टमर की ग्रोथ पर। इयान समझाते हैं कि असली मार्केटिंग वह है जहाँ आप कस्टमर को हीरो बनाते हैं और खुद को उसका गाइड।
आज के दौर में अटेंशन स्पैन यानी ध्यान देने की क्षमता एक मच्छर से भी कम हो गई है। अगर आपने शुरू के तीन सेकंड में यह नहीं बताया कि कस्टमर का क्या फायदा है तो वह एक उंगली के स्वाइप से आपको गायब कर देगा। यह वैसा ही है जैसे आप किसी पार्टी में किसी ऐसे इंसान से मिले जो सिर्फ अपनी ही तारीफ किये जा रहा हो। आप बहाना बनाकर वहां से भाग जाएंगे न? डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी यही होता है। आपको कस्टमर की जर्नी को समझना होगा। वह किस वक्त क्या देख रहा है और उसे क्या परेशानी हो रही है।
मार्केटिंग का असली जादू तब होता है जब आप कस्टमर के उस दर्द को पकड़ लेते हैं जिसके बारे में उसने कभी किसी से नहीं कहा। जब आप अपने कंटेंट के जरिए उसे अहसास कराते हैं कि हाँ मैं तुम्हारी तकलीफ समझता हूँ और मेरे पास इसका इलाज है तब वह आप पर भरोसा करता है। बिना भरोसे के सेल वैसी ही है जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी। आप कितनी भी चाबी घुमा लें वह एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगी। इसलिए अपनी ईगो को साइड में रखिये और अपने कस्टमर के चश्मे से दुनिया को देखना शुरू कीजिये।
लेसन ३ : ओम्नी चैनल मार्केटिंग: हर जगह दिखिए पर सही तरीके से
क्या आपने कभी गौर किया है कि आप अमेज़न पर एक जूता देखते हैं और फिर वह जूता आपका पीछा नहीं छोड़ता? आप फेसबुक खोलें तो वहां वही जूता है। आप इंस्टाग्राम पर रील्स देखें तो वहां भी वही जूता नाच रहा है। यहाँ तक कि आप कोई न्यूज़ पढ़ें तो वहां कोने में भी वही जूता आपको घूर रहा होता है। इसे कहते हैं ओम्नी चैनल मार्केटिंग। इयान डोडसन समझाते हैं कि आज के जमाने में कस्टमर को एक बार में कुछ नहीं बिकता। आपको उसके दिमाग में घर बनाना पड़ता है। लेकिन ध्यान रहे घर बनाना है जेल नहीं।
कई लोग गलती यह करते हैं कि वे हर जगह एक ही जैसा कचरा फैला देते हैं। वे सोचते हैं कि जो पोस्ट उन्होंने लिंक्डइन पर डाली है वही व्हाट्सएप स्टेटस पर भी चल जाएगी। यह वैसी ही बेवकूफी है जैसे आप किसी शादी में जिम के कपड़े पहनकर चले जाएं या ऑफिस की मीटिंग में शेरवानी पहनकर बैठ जाएं। हर प्लेटफॉर्म का अपना एक मिजाज होता है। लिंक्डइन पर लोग ज्ञान लेने आते हैं इंस्टाग्राम पर मजे करने और गूगल पर अपनी समस्याओं का हल ढूंढने। अगर आप हर जगह एक ही टोन में चिल्लाएंगे तो लोग आपको पागल समझेंगे।
असली डिजिटल मार्केटर वह है जो अपने कंटेंट को प्लेटफॉर्म के हिसाब से ढालता है। इयान कहते हैं कि आपको एक मकड़ी की तरह जाल बुनना चाहिए। आपका एसईओ यानी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन वह बुनियाद है जो सोए हुए कस्टमर को जगाकर आपकी वेबसाइट तक लाती है। फिर आपका सोशल मीडिया उस कस्टमर से दोस्ती करता है और आखिर में आपकी ईमेल मार्केटिंग उस दोस्ती को एक मजबूत रिश्ते में बदल देती है। अगर इनमें से एक भी धागा टूटा तो आपका पूरा जाल बिखर जाएगा और आपकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
ज़रा सोचिये अगर आप एक फिल्म देखने जाएं और उसका ट्रेलर तो बहुत धांसू हो लेकिन फिल्म शुरू होते ही आपको नींद आने लगे। क्या आप उस डायरेक्टर की अगली फिल्म देखेंगे? कभी नहीं। डिजिटल मार्केटिंग में भी आपका हर प्लेटफॉर्म एक ट्रेलर की तरह काम करना चाहिए जो कस्टमर को आपकी मुख्य सर्विस की तरफ खींचे। यह सब कुछ एक फिल्म की तरह स्मूथ होना चाहिए। कस्टमर को लगना चाहिए कि यह ब्रांड मुझे समझता है और मेरी हर जरूरत का ख्याल रखता है।
अंत में याद रखिये कि डिजिटल मार्केटिंग कोई जादू की छड़ी नहीं है जिसे एक बार घुमाया और रातों रात करोड़पति बन गए। यह एक लंबी रेस है जहाँ वही जीतता है जो हर मोड़ पर खड़ा मिलता है। अगर आप आज गायब हो गए तो कल कोई और आपकी जगह ले लेगा। इंटरनेट की दुनिया बहुत निर्दयी है यहाँ आउट ऑफ साइट का मतलब है आउट ऑफ माइंड। इसलिए हर चैनल का सही इस्तेमाल कीजिये और अपने कस्टमर के दिल और दिमाग दोनों पर अपनी छाप छोड़िये।
डिजिटल मार्केटिंग केवल टूल्स चलाना नहीं बल्कि इंसानी व्यवहार को समझना है। अगर आप डेटा यूजर की पसंद और सही प्लेटफॉर्म का तालमेल बिठा लेते हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। क्या आप अब भी पुराने तरीके से मार्केटिंग करके अपना पैसा बर्बाद करना चाहते हैं या इयान डोडसन के इन लेसन को अपनाकर अपने बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं? फैसला आपका है। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो आज भी इंटरनेट पर सिर्फ फोटो डालकर सेल्स का इन्तजार कर रहे हैं। बदलाव की शुरुआत आज से ही कीजिये।
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