क्या आप अभी भी लाखों रुपये फूंक कर महंगे एक्सपर्ट्स की सलाह ले रहे हैं और फिर भी आपका बिजनेस कछुए की रफ्तार से चल रहा है। बड़े शर्म की बात है कि आपके आसपास की दुनिया बदल गई पर आपका दिमाग अभी भी पुराने जमाने में अटका है। अगर आपने क्राउड की पावर को नहीं समझा तो यकीन मानिए आप अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं और आपके कॉम्पिटिटर्स आप पर हंस रहे हैं।
आज हम जेफ हावे की किताब क्राउडसोर्सिंग के जरिए जानेंगे कि कैसे आम लोग मिलकर बड़े बड़े बिजनेस की किस्मत बदल रहे हैं। चलिए उन ३ लेसन्स को समझते हैं जो आपके काम करने के नजरिए को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : क्राउड की असली अकल और आपके महंगे एक्सपर्ट्स का फेलियर
आजकल के जमाने में हर कोई खुद को गुरु समझता है। खासकर वो लोग जो ताई लगाकर और हाथ में महंगी कॉफी लेकर खुद को बिजनेस कंसल्टेंट कहते हैं। जेफ हावे कहते हैं कि अगर आप अभी भी सिर्फ इन मुट्ठी भर सो कॉल्ड एक्सपर्ट्स के भरोसे अपना बिजनेस चला रहे हैं तो आपसे बड़ा भोला इंसान इस दुनिया में कोई नहीं है। असल में सच्चाई यह है कि एक बड़ा और अलग अलग बैकग्राउंड वाले लोगों का ग्रुप यानी क्राउड किसी भी एक अकेले पीएचडी होल्डर से कहीं ज्यादा स्मार्ट होता है। इसे कहते हैं विजडम ऑफ द क्राउड।
सोचिए जरा आपके पास एक बहुत बड़ी समस्या है। आप अपने केबिन में बैठकर सिर खुजला रहे हैं और आपके टॉप मैनेजर्स भी वही पुरानी घिसी पिटी सलाह दे रहे हैं। फिर आप इंटरनेट पर जाते हैं और अपनी प्रॉब्लम दुनिया के सामने रख देते हैं। अचानक से एक कॉलेज का स्टूडेंट या शायद कोई रिटायर हो चुका इंजीनियर आपको वो आईडिया दे देता है जो आपके लाखों रुपये बचा सकता है। यह कोई जादू नहीं है भाई साहब। यह सिंपल सा लॉजिक है। जितने ज्यादा दिमाग उतना ज्यादा तगड़ा सलूशन।
पर हमारे समाज में तो एक्सपर्ट्स की पूजा करने का रिवाज है। हमें लगता है कि अगर किसी के पास बड़ी डिग्री है तो उसके पास हर मर्ज की दवा होगी। लेकिन असलियत में वो एक्सपर्ट उसी पुराने ढर्रे पर सोचता है जो उसने किताबों में पढ़ा है। वहीं दूसरी तरफ क्राउड में वो लोग होते हैं जो लीक से हटकर सोचते हैं क्योंकि उनका कोई फिक्स फ्रेमवर्क नहीं होता। वो लोग अपनी हॉबी और पैशन के लिए काम करते हैं।
क्राउडसोर्सिंग सिर्फ काम करवाने का तरीका नहीं है बल्कि यह ईगो चेक भी है। जो कंपनियां खुद को बहुत होशियार समझती थीं वो आज क्राउड के आगे घुटने टेक रही हैं। अगर आप अभी भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप उस नोकिया की तरह हैं जिसे लगा था कि टचस्क्रीन फोन बस एक मजाक है। क्राउड की इस ताकत को कम समझना आपके बैंक बैलेंस के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। जब हजारों लोग एक साथ मिलकर किसी प्रॉब्लम पर काम करते हैं तो वहां फेल होने के चांस लगभग जीरो हो जाते हैं क्योंकि कोई न कोई तो सही रास्ता ढूंढ ही लेगा।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि ये लोग आखिर फ्री में या बहुत कम पैसों में आपके लिए काम क्यों करेंगे और कैसे आप एक कम्युनिटी खड़ी कर सकते हैं।
लेसन २ : कम्युनिटी का पैशन और आपके खाली रिवॉर्ड्स का सच
जरा सोचिए कि कोई इंसान अपनी कीमती शाम या संडे का वक्त किसी अजनबी के बिजनेस प्रोजेक्ट के लिए क्यों बर्बाद करेगा। क्या वो पागल है। नहीं भाई साहब असल में बात यह है कि दुनिया सिर्फ पैसों के पीछे नहीं भाग रही है। जेफ हावे हमें समझाते हैं कि क्राउडसोर्सिंग की जान है कम्युनिटी का पैशन। अगर आपको लगता है कि आप चंद रुपये फेंक कर लोगों से बेस्ट काम करवा लेंगे तो शायद आप किसी सरकारी दफ्तर के बाबू वाली सोच रख रहे हैं। क्राउडसोर्सिंग में लोग इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि उन्हें कुछ बड़ा करने की भूख होती है और उन्हें अपनी पहचान बनानी होती है।
एक मिडिल क्लास इंडियन लड़के का उदाहरण लीजिए जो दिन भर एक बोरिंग आईटी कंपनी में कोडिंग करता है। वहां उसे कोई नहीं पूछता कि उसका आईडिया क्या है। बस उसे काम का बोझ थमा दिया जाता है। लेकिन जैसे ही वो घर आकर किसी ओपन सोर्स प्रोजेक्ट या क्राउडसोर्सिंग प्लेटफॉर्म पर अपना हुनर दिखाता है तो उसे दुनिया भर से वाहवाही मिलती है। वहां वो अपनी मर्जी का मालिक है। वो अपनी स्किल्स को टेस्ट कर रहा है। यही वो जज्बा है जिसे बड़ी कंपनियां कैश कर रही हैं। अगर आप लोगों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म दे दें जहां उन्हें इज्जत और अपना हुनर दिखाने का मौका मिले तो वो आपके लिए वो कर देंगे जो आपकी सैलरी वाली टीम कभी नहीं कर पाएगी।
लेकिन यहाँ भी एक पेंच है। अगर आप चालाकी दिखाएंगे और लोगों के काम का क्रेडिट खुद खा जाएंगे तो वो क्राउड आपको पल भर में सड़क पर ले आएगी। क्राउड बहुत इमोशनल होती है। वो आपके ब्रांड के साथ तब जुड़ती है जब उन्हें लगता है कि वो भी इस सक्सेस का हिस्सा हैं। आपने वो चिप्स बनाने वाली कंपनियों के कांटेस्ट तो देखे ही होंगे जहां वो पब्लिक से फ्लेवर पूछते हैं। क्या उन्हें खुद फ्लेवर बनाना नहीं आता। बिल्कुल आता है। लेकिन वो आपको यह एहसास दिलाना चाहते हैं कि यह चिप्स आपने बनाए हैं। यह एक बहुत ही शातिर और मजेदार मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है।
आपकी टीम में बैठे वो लोग जो बस महीने की ३० तारीख का इंतजार करते हैं वो कभी भी उस लेवल की क्रिएटिविटी नहीं ला सकते जो एक जुनूनी क्राउड ला सकती है। क्राउड में बैठा इंसान तब तक नहीं रुकता जब तक वो बेस्ट रिजल्ट न दे दे क्योंकि उसकी इज्जत दांव पर होती है। अगर आप अभी भी सिर्फ अपनी छोटी सी टीम के भरोसे बैठे हैं तो आप एक बहुत बड़े महासागर को छोड़कर एक छोटी सी बाल्टी में पानी ढूंढ रहे हैं। कम्युनिटी बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस लोगों को यह यकीन दिलाना है कि उनका योगदान कीमती है।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे टेक्नोलॉजी ने इस खेल को पूरी तरह बदल दिया है और क्यों अब कोई भी छोटा बिजनेस दुनिया हिला सकता है।
लेसन ३ : डिजिटल डेमोक्रेसी और आपके बहानेबाजी का अंत
पुराने जमाने में अगर आपको कोई बड़ा बिजनेस शुरू करना होता था तो आपको बहुत सारे पैसों और भारी भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ती थी। लेकिन जेफ हावे कहते हैं कि अब वो दिन लद गए जब सिर्फ अमीर लोग ही बड़े खेल खेल सकते थे। आज टेक्नोलॉजी ने हर किसी के हाथ में वो ताकत दे दी है जिसे हम डिजिटल डेमोक्रेसी कहते हैं। अब आपके पास बजट कम है या आपकी ऑफिस छोटी है यह सब सिर्फ आपकी कामचोरी के बहाने हैं। इंटरनेट ने दुनिया को एक ऐसे लेवल पर लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ एक छोटे से गांव में बैठा लड़का भी सिलिकॉन वैली की कंपनी के लिए प्रॉब्लम सॉल्व कर रहा है।
जरा सोचिए पहले एक अच्छी फोटो या डिजाइन के लिए आपको महंगे प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स को हायर करना पड़ता था जिनके नखरे आपके बजट से बाहर होते थे। आज आईस्टॉक या शटरस्टॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आम लोग अपनी फोटो डालते हैं और पूरी दुनिया उन्हें खरीदती है। यह क्या है। यह टैलेंट का लोकतंत्र है। अब डिग्री और ऊंचे रसूख से ज्यादा आपकी काबिलियत मायने रखती है। अगर आप एक बिजनेस ओनर हैं और अभी भी इस बात का रोना रो रहे हैं कि आपको अच्छे एम्प्लॉई नहीं मिल रहे हैं तो शायद आप गलत जगह ढूंढ रहे हैं। दुनिया भर का टैलेंट आपके लैपटॉप की एक क्लिक की दूरी पर है।
क्राउडसोर्सिंग ने उन बड़ी कंपनियों की नींद उड़ा दी है जो अपनी मोनोपॉली यानी दादागिरी चलाती थीं। अब एक आम इंसान भी उन टूल्स का इस्तेमाल कर सकता है जो पहले सिर्फ करोड़पतियों के पास होते थे। इसे कहते हैं प्रोडक्शन के साधनों का बंटवारा। अब आपके पास महंगा कैमरा नहीं है तो कोई बात नहीं आपके पास स्मार्टफोन है। आपके पास बड़ा ऑफिस नहीं है तो क्या हुआ आपके पास पूरी दुनिया की क्राउड का दिमाग है। अगर आप इस बदलाव को नहीं अपना रहे हैं तो आप उस डायनासोर की तरह हैं जिसे लगता था कि मौसम कभी नहीं बदलेगा।
जो लोग इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा नहीं बनेंगे वो बहुत जल्द इतिहास की किताबों में खो जाएंगे। क्राउडसोर्सिंग सिर्फ एक बिजनेस मॉडल नहीं है बल्कि यह एक जीने का तरीका है जहाँ हम मिलकर कुछ बड़ा क्रिएट करते हैं। तो अब सोचना छोड़िए और अपनी ईगो को साइड में रखकर दुनिया की इस महान भीड़ से हाथ मिलाइए। क्योंकि अकेले आप शायद सिर्फ एक अच्छी दुकान चला सकते हैं लेकिन क्राउड के साथ मिलकर आप एक पूरी सल्तनत खड़ी कर सकते हैं।
दोस्तों, क्या आप अभी भी अकेले सब कुछ करने की गलती कर रहे हैं या फिर आप भी इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनकर दुनिया को अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। नीचे कमेंट्स में बताएं कि आप अपने काम में क्राउड की पावर का इस्तेमाल कैसे करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं ताकि उनकी भी आंखें खुल सकें। उठो और इस बदलाव का हिस्सा बनो।
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