Customer-Centric Selling (Hindi)


क्या आप भी उन सेल्समेन की लिस्ट में टॉप पर हैं जो कस्टमर को देखते ही रेड बुल पीकर चिपक जाते हैं और फिर भी खाली हाथ लौटते हैं। मुबारक हो आप अपनी कंपनी के सबसे महंगे और बेकार शोपीस बन चुके हैं जो सिर्फ रिजेक्शन कलेक्ट कर रहा है।

कस्टमर सेंट्रिक सेलिंग का यह पावरफुल फ्रेमवर्क आपको सिखाएगा कि कैसे आप एक पीछे पड़ने वाले सेल्समेन से एक ट्रस्टेड एडवाइजर बन सकते हैं। आइये इन 3 जादुई लेसन से समझते हैं कि सेल्स आखिर होती कैसे है ताकि आपका क्लाइंट खुद आपसे डील मांगे।


लेसन १ : सॉल्यूशन बेचो प्रोडक्ट नहीं

अक्सर जब कोई नया सेल्समेन मार्केट में उतरता है तो उसे लगता है कि उसका प्रोडक्ट दुनिया का आठवां अजूबा है। वह कस्टमर के पास जाकर सीधा उसके फीचर्स की चालीसा पढ़ने लगता है। भाई साहब हमारे सॉफ्टवेयर में यह बटन है इसमें वह कलर है और यह चाँद तक ले जाएगा। लेकिन कस्टमर मन ही मन सोच रहा होता है कि भाई मुझे इससे क्या लेना देना। क्या इससे मेरी सरदर्दी कम होगी या बस मेरा खर्चा बढ़ेगा। माइकल बोसवर्थ और जॉन हॉलैंड अपनी बुक में साफ कहते हैं कि लोग कभी भी प्रोडक्ट नहीं खरीदते वे हमेशा एक बेहतर कल का वादा खरीदते हैं।

मान लीजिये आप एक जिम की मेंबरशिप बेचने वाले सेल्समेन हैं। अगर आप कस्टमर को यह बता रहे हैं कि हमारी मशीनें जर्मनी से आई हैं और यहाँ का एसी 16 डिग्री पर चलता है तो आप सिर्फ एक बोरिंग इंसान हैं। लेकिन अगर आप उसे यह अहसास दिलाएं कि इस जिम में आने के बाद वह अपनी पुरानी फिट जींस में वापस फिट हो जाएगा और लोग उसे कॉम्प्लीमेंट देंगे तो आप उसे एक सपना बेच रहे हैं। कस्टमर को आपके डंबल्स के वजन से मतलब नहीं है उसे अपनी तोंद कम करने से मतलब है। अगर आप उसकी प्रॉब्लम को नहीं पकड़ पा रहे तो आप सेल्स नहीं बल्कि एक प्रवचन दे रहे हैं जो कोई नहीं सुनना चाहता।

ज़रा सोचिये आप एक डॉक्टर के पास जाते हैं और वह बिना आपकी बीमारी पूछे अपनी दवाइयों की तारीफ करने लगे। वह कहे कि यह नीली गोली बहुत मीठी है और लाल वाली गोली बहुत ही सुंदर दिखती है। क्या आप उससे इलाज कराएंगे। बिल्कुल नहीं। आप तुरंत वहां से भाग खड़े होंगे और शायद पुलिस को भी फोन कर देंगे। सेल्स में भी यही होता है। जब आप बिना कस्टमर की परेशानी समझे अपना प्रोडक्ट उसके गले उतारने की कोशिश करते हैं तो आप उसी डॉक्टर की तरह बिहेव कर रहे होते हैं। कस्टमर को लगता है कि आप उसकी जेब काटने आए हैं न कि उसकी मदद करने।

आजकल के दौर में कस्टमर बहुत स्मार्ट हो गया है। उसके पास गूगल है और वह आपसे ज्यादा आपके कॉम्पिटिटर के बारे में जानता है। उसे इन्फॉर्मेशन की कमी नहीं है बल्कि उसे एक ऐसे इंसान की तलाश है जो उसकी उलझन सुलझा सके। अगर आपका प्रोडक्ट किसी की लाइफ को आसान नहीं बना रहा या उसका पैसा नहीं बचा रहा तो वह कचरा है। आपको अपनी बातचीत का फोकस 'मैं क्या बेच रहा हूँ' से हटाकर 'कस्टमर को क्या चाहिए' पर शिफ्ट करना होगा। जब तक आप उसे यह यकीन नहीं दिला देते कि आपका सॉल्यूशन उसकी रातों की नींद वापस ला सकता है तब तक वह अपना बटुआ नहीं खोलेगा।

याद रखिये कि सेल्स का मतलब किसी को बेवकूफ बनाना नहीं है। यह तो एक डॉक्टर की तरह सही मर्ज की सही दवा देना है। अगर आप इस माइंडसेट से काम करेंगे कि मुझे इस बंदे की प्रॉब्लम सॉल्व करनी है तो आपको सेल्स करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कस्टमर खुद आपके पीछे आएगा। वह आपसे पूछेगा कि भाई पैसे कहाँ ट्रांसफर करने हैं। तो अगली बार जब आप किसी क्लाइंट से मिलें तो अपनी तारीफों के पुल बांधना बंद करें। पहले यह समझें कि उसके जूते में कांटा कहाँ चुभ रहा है और फिर उसे अपना सॉल्यूशन पेश करें।


लेसन २ : सही सवाल पूछने की कला

ज्यादातर सेल्समेन को लगता है कि भगवान ने उन्हें दो कान और एक मुँह इसलिए दिया है ताकि वे सामने वाले का सर खा सकें। वे नॉन स्टॉप बोलते हैं जैसे कोई रेडियो स्टेशन बिना ब्रेक के चल रहा हो। लेकिन 'कस्टमर सेंट्रिक सेलिंग' हमें सिखाती है कि एक महान सेल्समेन वह नहीं है जिसके पास हर बात का जवाब है बल्कि वह है जिसके पास हर स्थिति के लिए सही सवाल है। अगर आप कस्टमर से बात कर रहे हैं और 80 परसेंट टाइम आप ही बोल रहे हैं तो बधाई हो आप सेल्स नहीं कर रहे आप बस खुद से प्यार जता रहे हैं। और यकीन मानिये कस्टमर को आपकी आवाज़ में उतना इंटरेस्ट नहीं है जितना आपको है।

मान लीजिये आप एक कार शोरूम में हैं। एक सेल्समेन आता है और सीधे चिल्लाने लगता है कि सर इस कार का इंजन बहुत तगड़ा है और यह 200 की स्पीड पकड़ लेती है। अब उसे क्या पता कि आप अपनी वाइफ के लिए कार देख रहे हैं जो सुरक्षित गाड़ी चाहती है और जिसे स्पीड से डर लगता है। वह सेल्समेन अपनी ही दुनिया में मस्त है और आप वहां से निकलने का रास्ता ढूंढ रहे हैं। वहीं अगर वह आपसे पूछता कि सर आप यह गाड़ी किसके लिए ले रहे हैं और आपकी सबसे बड़ी प्रायोरिटी क्या है। तब आप शायद उसे अपनी पूरी कहानी बता देते और वह आपको सही मॉडल बेच पाता।

सवाल पूछना एक तरह का जासूसी काम है लेकिन बिना पुलिस वाली सख्ती के। आपको ऐसे सवाल करने चाहिए जिससे कस्टमर खुद अपनी जरूरतें कुबूल कर ले। इसे बुक में 'ओपन एंडेड क्वेश्चन्स' कहा गया है। जैसे यह मत पूछिए कि क्या आपको हमारा प्लान पसंद आया। इसके बजाय पूछिए कि इस प्लान में आपको अपनी कंपनी के लिए सबसे काम की चीज़ क्या लगी। जब आप सवाल पूछते हैं तो कंट्रोल आपके हाथ में होता है। आप कस्टमर को उस दिशा में ले जाते हैं जहाँ उसे अहसास होता है कि हाँ यार मुझे इस चीज़ की वाकई जरूरत है।

कई बार सेल्समेन डरते हैं कि सवाल पूछने से कस्टमर इरिटेट हो जाएगा। लेकिन असलियत में लोग अपने बारे में बात करना पसंद करते हैं। जब आप उनसे पूछते हैं कि आपकी बिज़नस ग्रोथ में सबसे बड़ी रुकावट क्या है तो उन्हें लगता है कि आप उनमें और उनके काम में इंटरेस्ट ले रहे हैं। आप एक चिपचिपे सेल्समेन से बदलकर एक एक्सपर्ट कंसल्टेंट बन जाते हैं। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे आप किसी दोस्त को अपनी परेशानी बता रहे हों और वह ध्यान से सुन रहा हो। ऐसे में ट्रस्ट अपने आप बन जाता है और जहाँ ट्रस्ट होता है वहां डील अपने आप क्लोज होती है।

जो लोग बहुत ज्यादा बोलते हैं वे अक्सर डील के आखिरी मोड़ पर आकर कुछ ऐसा बोल देते हैं जो कस्टमर को डरा देता है। इसे 'ओवर सेलिंग' कहते हैं। सही सवाल आपको इस गड्ढे में गिरने से बचाते हैं। जब आप सवाल पूछते हैं तो आप चुप रहकर कस्टमर की बॉडी लैंग्वेज और उसके शब्दों के पीछे छुपे डर को पढ़ पाते हैं। सेल्स एक चेस के गेम की तरह है जहाँ हर चाल एक सोच समझकर पूछा गया सवाल होनी चाहिए। अगर आप सही बटन दबाना सीख गए तो कस्टमर खुद अपनी चेकबुक निकालकर तैयार बैठा होगा।

अगली बार जब आप किसी मीटिंग में बैठें तो खुद को याद दिलाएं कि आपको बोलना कम है और पूछना ज्यादा है। आपकी जॉब कस्टमर को इम्प्रेस करना नहीं है बल्कि उसे एक्सप्रेस करने का मौका देना है। जब वह अपनी प्रॉब्लम खुद अपनी जुबान से बोलता है तो उसे आपके सॉल्यूशन की वैल्यू दस गुना ज्यादा समझ आती है। तो अपनी 'बोलने की बीमारी' का इलाज कीजिये और एक अच्छे लिस्नर बनिए।


लेसन ३ : कस्टमर के डिसीजन मेकिंग प्रोसेस को समझना

क्या आपने कभी किसी ऐसे सेल्समेन को देखा है जो आपको तब तक कॉल करता रहता है जब तक आप उसका नंबर ब्लॉक न कर दें। वह सोचता है कि बार-बार टोकने से आप मान जाएंगे, पर असल में वह आपको डिप्रेशन की तरफ धकेल रहा होता है। माइकल बोसवर्थ और जॉन हॉलैंड कहते हैं कि सेल्स क्लोज करना कोई जादू नहीं है, बल्कि कस्टमर के खरीदने के प्रोसेस (Buying Process) के साथ खुद को अलाइन करना है। दुनिया का हर इंसान कुछ न कुछ खरीदना चाहता है, लेकिन किसी को भी यह पसंद नहीं कि उसे कोई कुछ 'बेचकर' चला जाए। लोग अपनी मर्जी के मालिक बनना चाहते हैं, सेल्समेन के टारगेट का हिस्सा नहीं।

मान लीजिये आप एक प्रॉपर्टी डीलर हैं और किसी को फ्लैट दिखा रहे हैं। कस्टमर अभी यह सोच रहा है कि क्या यहाँ पास में कोई अच्छा स्कूल है या नहीं, और आप उसे जबरदस्ती बालकनी की टाइल्स की चमक दिखा रहे हैं। आप उसके दिमाग की रफ्तार से बहुत आगे निकल चुके हैं। वह अभी 'जरूरत' वाले स्टेप पर अटका है और आप उसे 'पैसे ट्रांसफर' करने वाले स्टेप पर खींच रहे हैं। यह वही बात हो गई कि अभी पहली डेट खत्म नहीं हुई और आप शादी के कार्ड छपवाने की बात कर रहे हैं। थोड़ा रुकिए, उसे सांस लेने दीजिये।

एक स्मार्ट सेल्समेन वह है जो यह पहचान लेता है कि कस्टमर अभी किस स्टेज पर है। क्या वह सिर्फ जानकारी जुटा रहा है। क्या वह आपके कॉम्पिटिटर से आपकी तुलना कर रहा है। या फिर वह मन बना चुका है और बस उसे एक आखिरी भरोसे की जरूरत है। अगर आप कस्टमर को सही समय पर सही इन्फॉर्मेशन देंगे, तो उसे लगेगा कि डिसीजन उसने खुद लिया है। और जब इंसान को लगता है कि फैसला उसका है, तो वह पीछे नहीं हटता। आपकी जॉब उसे धक्का देना नहीं है, बल्कि उसके रास्ते के पत्थरों को हटाना है ताकि वह खुद चलकर डील तक पहुँच सके।

अक्सर हम सेल्समेन अपनी सेल्स साइकिल के बारे में सोचते हैं कि 'मुझे इस महीने तक क्लोजर चाहिए'। लेकिन हकीकत में सिर्फ कस्टमर की 'बाइंग साइकिल' मायने रखती है। अगर उसके पास बजट नहीं है या अभी उसकी कंपनी में कोई बड़ा बदलाव चल रहा है, तो आपका कितना भी सिर पटक लेना काम नहीं आएगा। यहाँ धैर्य ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। उसे यह महसूस कराइए कि आप उसके साथ हैं, उसके पीछे नहीं। जब आप उसे डिसीजन मेकिंग में मदद करते हैं, जैसे कि उसे एक कंपैरिजन चार्ट दे दिया या उसके बॉस को समझाने के लिए प्रेजेंटेशन बना दी, तो आप उसके पार्टनर बन जाते हैं।

सेल्स का असली मतलब है एक ऐसा रिश्ता बनाना जहाँ दोनों का फायदा हो। अगर आप सिर्फ अपनी कमीशन देख रहे हैं, तो आप लंबे समय तक इस खेल में नहीं टिक पाएंगे। लेकिन अगर आप 'कस्टमर सेंट्रिक' बन जाते हैं, तो आप सिर्फ एक डील क्लोज नहीं करते, बल्कि एक लाइफटाइम क्लाइंट कमाते हैं। तो अगली बार जब कोई डील क्लोज न हो रही हो, तो खुद से पूछिए कि क्या मैं कस्टमर की मदद कर रहा हूँ या बस अपनी जिद पूरी कर रहा हूँ। सही समय पर सही मदद ही असली सेल्स है।


तो दोस्तों, क्या आप अब भी पुराने जमाने के 'चिपकू' सेल्समेन बने रहना चाहते हैं या एक मॉडर्न 'ट्रस्टेड एडवाइजर' बनना चाहते हैं। नीचे कमेंट्स में बताइये कि इनमें से कौन सा लेसन आपकी सेल्स लाइफ को बदल सकता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हर कॉल पर रिजेक्शन झेल रहा है। चलिए, मिलकर सेल्स की दुनिया को थोड़ा और बेहतर और थोड़ा कम इरिटेटिंग बनाते हैं।

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