क्या आप भी अपनी आधी सैलरी उन बैंकों को दान कर रहे हैं जो पहले से अमीर हैं। अगर आपको लगता है कि ईएमआई पर आईफोन लेना कोई अचीवमेंट है तो मुबारक हो आप गरीबी की ईंटें खुद ही बिछा रहे हैं। इस कर्जे के जाल में फंसकर आप अपनी रातों की नींद और अपनी आजादी दोनों ही खो चुके हैं।
डेविड बाच की किताब डेब्ट फ्री फॉर लाइफ हमें उस दलदल से बाहर निकालने का रास्ता दिखाती है। आज हम उन तीन पावरफुल लेसन के बारे में बात करेंगे जो आपके बैंक बैलेंस को फिर से जिंदा कर सकते हैं और आपको असली फाइनेंशियल फ्रीडम दिला सकते हैं।
लेसन १ : डेब्ट वाइज रेशियो को समझना और अपनी औकात पहचानना
दोस्तो, असलियत तो यह है कि हम में से ज्यादातर लोग अपनी असली औकात से दस गुना ज्यादा अमीर दिखने के चक्कर में पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं। डेविड बाच अपनी किताब में सबसे पहले जिस चीज पर वार करते हैं वह है आपका डेब्ट वाइज रेशियो। यह क्या है। यह दरअसल आपके और आपकी बर्बादी के बीच का वह फासला है जिसे आप नजरअंदाज कर रहे हैं। डेविड कहते हैं कि अगर आप यह नहीं जानते कि आपकी जेब से हर महीने कितना पैसा बैंकों की तिजोरी में जा रहा है तो आप एक अंधे ड्राइवर की तरह हैं जो सौ की स्पीड पर गाड़ी चला रहा है।
जरा सोचिए आप अपने ऑफिस में बॉस की डांट सहते हैं ताकि महीने के अंत में सैलरी आए। लेकिन जैसे ही वह पैसा आता है आपके फोन पर मैसेजेस की लाइन लग जाती है। होम लोन की ईएमआई कटी। कार लोन की ईएमआई कटी। और वह क्रेडिट कार्ड जिसका बिल देखकर आपको मिर्गी के झटके आने लगते हैं। आप मेहनत करते हैं ताकि बैंक के मैनेजर के बच्चे विदेश में पढ़ सकें। क्या यह मजाक नहीं है।
बाच कहते हैं कि आपको अपना डेब्ट टू इनकम रेशियो कैलकुलेट करना होगा। अगर आपकी कमाई का तीस परसेंट से ज्यादा हिस्सा कर्ज चुकाने में जा रहा है तो आप रेड जोन में हैं। भारत में आजकल लोग शो ऑफ के इतने भूखे हैं कि वे पच्चीस हजार की नौकरी में पचास हजार का क्रेडिट कार्ड स्वाइप कर देते हैं। वे सोचते हैं कि वे स्मार्ट हैं क्योंकि उन्होंने डिस्काउंट पाया है। लेकिन असल में वे उस चूहे की तरह हैं जो पिंजरे में रखे पनीर के टुकड़े को देखकर खुश हो रहा है और उसे यह नहीं पता कि अगला पल उसकी आजादी का आखिरी पल होगा।
डेविड बाच हमें सिखाते हैं कि कर्ज दो तरह के होते हैं। एक वह जो आपको अमीर बनाता है और दूसरा वह जो आपको भिखारी। अगर आपने अपनी एजुकेशन या किसी बिजनेस के लिए लोन लिया है तो वह शायद आपको आगे बढ़ाए। लेकिन अगर आपने वह बड़ी वाली एलइडी टीवी या वह चमचमाती कार सिर्फ इसलिए ली है ताकि पड़ोस वाले शर्मा जी जलकर खाक हो जाएं तो आपने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं बल्कि सीधा हथौड़ा मार लिया है।
असली अमीर वह नहीं जिसके पास सबसे महंगी कार है बल्कि वह है जिसकी रातों की नींद सुकून भरी है क्योंकि उसे किसी बैंक का डर नहीं है। बाच का यह लेसन हमें आईना दिखाता है कि अपनी असली फाइनेंशियल कंडीशन को पहचानो। झूठ बोलना बंद करो। जब तक आप यह नहीं मानेंगे कि आप बीमार हैं तब तक आप डॉक्टर के पास नहीं जाएंगे। ठीक उसी तरह जब तक आप यह नहीं मानेंगे कि आप कर्ज के दलदल में हैं तब तक आप आजादी का रास्ता नहीं खोज पाएंगे।
अपनी ईएमआई की लिस्ट बनाइए और खुद से पूछिए कि इनमें से कितनी चीजें आपके जीवन में वाकई वैल्यू जोड़ रही हैं। क्या वह महंगा फोन वाकई जरूरी था या सिर्फ इंस्टाग्राम पर फोटो डालने का एक महंगा जरिया। जब आप अपनी असलियत को देख लेंगे तभी आप अगले कदम की ओर बढ़ पाएंगे। यह लेसन आपको डराने के लिए नहीं बल्कि आपको उस नींद से जगाने के लिए है जिसमें आप खुद को अमीर समझ रहे हैं।
लेसन २ : द डेब्ट फ्री पेडाउन प्लान और ब्याज का खेल
पहले लेसन में हमने अपनी कड़वी सच्चाई देख ली। अब बारी है उस बीमारी का इलाज करने की। डेविड बाच यहाँ एक कमाल का फार्मूला देते हैं जिसे वे डेब्ट फ्री पेडाउन प्लान कहते हैं। ज्यादातर लोग कर्ज चुकाने के नाम पर क्या करते हैं। वे बस हर महीने मिनिमम ड्यू भरते रहते हैं। बैंक वाले आपको फोन करके बड़े प्यार से कहते हैं कि सर आप बस दो हजार रुपये भर दीजिए बाकी बाद में देख लेंगे। और आप खुश हो जाते हैं कि चलो इस महीने का काम निकल गया। लेकिन सच तो यह है कि बैंक आपको अपना दामाद बनाकर जिंदगी भर पालना चाहता है ताकि आप उन्हें ब्याज खिलाते रहें।
बाच कहते हैं कि आपको एक सिपाही की तरह हमला करना होगा। सबसे पहले अपने सारे कर्जों की एक लिस्ट बनाइए। इसमें यह मत देखिए कि किस पर कितना पैसा बकाया है बल्कि यह देखिए कि किस पर सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट यानी ब्याज लग रहा है। अक्सर वह आपका क्रेडिट कार्ड ही होता है। क्रेडिट कार्ड का ब्याज दर देखकर तो अच्छे-अच्छे गणितज्ञों को पसीना आ जाए। आप जितना पैसा उधार लेते हैं उससे कहीं ज्यादा तो आप ब्याज में चुका देते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप एक बाल्टी में पानी भर रहे हों जिसमें नीचे एक बड़ा सा छेद है।
डेविड बाच का प्लान सिंपल है। आप अपने हर कर्ज का कम से कम पेमेंट तो करें ही लेकिन अपनी पूरी ताकत उस एक कर्ज को खत्म करने में लगा दें जिसका ब्याज सबसे ज्यादा है। जैसे ही वह पहला कर्ज खत्म हो जाए तो जो पैसा आप उसकी किश्त में दे रहे थे उसे चुपचाप अगले कर्ज की किश्त में जोड़ दें। इसे रोल ओवर करना कहते हैं। इससे एक स्नोबॉल इफेक्ट बनता है। शुरुआत में लगेगा कि कुछ नहीं बदल रहा लेकिन धीरे-धीरे आपके कर्ज चुकाने की रफ्तार बुलेट ट्रेन जैसी हो जाएगी।
लोग गलती कहाँ करते हैं। वे सोचते हैं कि जब उनके पास एक साथ बहुत सारा पैसा आएगा तब वे कर्ज चुकाएंगे। जैसे कोई लॉटरी लगेगी या ऑफिस में बोनस मिलेगा। पर दोस्तो बोनस तो साल में एक बार आता है और बैंकों का ब्याज हर सेकंड बढ़ता है। बाच कहते हैं कि आपको आज से और अभी से शुरुआत करनी होगी। अगर आप रोज के केवल सौ रुपये भी एक्स्ट्रा बचाकर अपने कर्ज में डालते हैं तो आप सालों का ब्याज बचा सकते हैं।
सोचिए जब आप उस आखिरी क्रेडिट कार्ड को कैंची से काटेंगे तो आपको कैसी फीलिंग आएगी। वह आजादी किसी जन्नत से कम नहीं होगी। लेकिन इसके लिए आपको अपनी ईगो को थोड़ा साइड में रखना होगा। हो सकता है आपको कुछ समय के लिए बाहर खाना खाना बंद करना पड़े या वह नई सेल वाली शर्ट छोड़नी पड़े। पर यकीन मानिए कर्ज की जंजीरों में बंधकर महंगी शर्ट पहनने से बेहतर है कि आप अपनी मर्जी के मालिक बनें। यह लेसन हमें सिखाता है कि कर्ज चुकाना केवल पैसों का खेल नहीं है बल्कि यह आपके डिसिप्लिन और आपकी हिम्मत का टेस्ट है।
लेसन ३ : द लैटे फैक्टर और फाइनेंशियल ऑटोमेशन का जादू
अब तक हमने यह जान लिया कि हम कितने गहरे पानी में हैं और बाहर निकलने का नक्शा क्या है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आप बाहर निकलने के बाद फिर से उसी गड्ढे में नहीं गिरेंगे। यहाँ डेविड बाच अपना सबसे मशहूर कॉन्सेप्ट पेश करते हैं जिसे वे द लैटे फैक्टर कहते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि बाच को आपकी कॉफी से कोई दुश्मनी है। असल में यह उन छोटी छोटी फिजूलखर्चियों का प्रतीक है जिन्हें हम यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि अरे इसमें क्या ही जाता है।
जरा अपनी आदतों पर गौर कीजिए। वह हर रोज का बाहर का समोसा और चाय। वह नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन जिसे आप महीने में एक बार भी नहीं देखते। वह ऑनलाइन शॉपिंग की सेल जहाँ आप ऐसी चीजें खरीदते हैं जिनकी आपको जरूरत नहीं है सिर्फ इसलिए क्योंकि वे सस्ती मिल रही थीं। डेविड बाच कहते हैं कि अगर आप अपनी रोज की इन छोटी छोटी लीकेज को रोक लें तो महीने के अंत में आपके पास एक अच्छी खासी रकम बच सकती है। भारत में हम अक्सर कहते हैं कि बूंद बूंद से घड़ा भरता है। बाच बस यही कह रहे हैं कि भाई साहब उस घड़े में छेद तो बंद करो।
लेकिन इंसान का स्वभाव आलसी है। हम जोश में आकर डायरी तो बना लेते हैं लेकिन चार दिन बाद फिर वही पुरानी आदतों पर लौट आते हैं। इसीलिए बाच यहाँ एक मास्टर स्ट्रोक देते हैं जिसे ऑटोमेशन कहते हैं। वे कहते हैं कि अपनी इच्छाशक्ति पर भरोसा करना बंद करो क्योंकि वह बहुत कमजोर है। जैसे ही आपकी सैलरी अकाउंट में आए आपका कर्ज का पेमेंट और आपकी सेविंग अपने आप कट जानी चाहिए। आपको उस पैसे को देखने का मौका ही नहीं मिलना चाहिए।
जब पैसा आपकी आंखों के सामने नहीं होगा तो आप उसे खर्च करने का बहाना भी नहीं ढूंढ पाएंगे। यह वैसा ही है जैसे आप जिम जाने का वादा करते हैं पर रोज सो जाते हैं। लेकिन अगर कोई आपके बिस्तर को ही उठाकर जिम में डाल दे तो आपको कसरत करनी ही पड़ेगी। ऑटोमेशन आपके लिए वही काम करता है। यह आपके पैसे को सही रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर देता है।
डेविड बाच का यह लेसन हमें सिखाता है कि अमीर बनने के लिए आपको बहुत बड़ी सैलरी की जरूरत नहीं है बल्कि सही आदतों की जरूरत है। फिनिश रिच प्लान का मतलब यह नहीं है कि आप कंजूस बन जाएं बल्कि इसका मतलब यह है कि आप अपने पैसे के मालिक बनें न कि उसके गुलाम। जब आप अपनी छोटी छोटी खुशियों को भविष्य की बड़ी आजादी के लिए कुर्बान करते हैं तो आप असल में खुद को एक तोहफा दे रहे होते हैं।
आज ही अपने बैंक अकाउंट में लॉगिन कीजिए और अपने डेब्ट पेडाउन को ऑटोमेटिक मोड पर डालिए। उस फालतू के खर्चे को पहचानिए जो आपकी जेब में दीमक की तरह लगा है। याद रखिए आजादी मुफ्त में नहीं मिलती उसकी कीमत चुकानी पड़ती है और वह कीमत है आपका आज का थोड़ा सा डिसिप्लिन।
कर्ज की जंजीरें लोहे की नहीं होतीं वे आपकी आदतों की बनी होती हैं। डेविड बाच की यह किताब सिर्फ पैसों के बारे में नहीं है बल्कि आपकी गरिमा और आपके सुकून के बारे में है। क्या आप वाकई अपनी पूरी जिंदगी दूसरों को अमीर बनाने में गुजारना चाहते हैं। या आप वह इंसान बनना चाहते हैं जो अपनी शर्तों पर जीता है। फैसला आपका है।
अगर आपने इस आर्टिकल से कुछ भी नया सीखा है तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा क्रेडिट कार्ड के बिल का रोना रोता रहता है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका सबसे बड़ा लैटे फैक्टर क्या है जिसे आप आज ही छोड़ने वाले हैं। चलिए साथ मिलकर डेब्ट फ्री इंडिया की शुरुआत करते हैं।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#PersonalFinance #DebtFreeLife #FinancialFreedom #MoneyManagement #DYBooks
_