अगर आप आज भी पुराने जमाने के चचा की तरह बैंक के चक्कर काट रहे हैं और अपनी प्रॉपर्टी गिरवी रखने की सोच रहे हैं तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं। बिना सोशल नेटवर्किंग के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के फरारी चलाना।
इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि कैसे आप दुनिया के सबसे बड़े फाइनेंसियल बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं। पेश हैं इस बेहतरीन किताब से वह ३ लेसन जो आपके बिजनेस करने के नजरिए को पूरी तरह बदल कर रख देंगे।
लेसन १ : पैसा अब सिर्फ अमीरों की जागीर नहीं है
आजकल के दौर में अगर आप अभी भी यह सोच रहे हैं कि बिजनेस शुरू करने के लिए किसी अमीर ससुर या बैंक मैनेजर के सामने हाथ फैलाने पड़ेंगे तो दोस्त आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। द क्राउडफंडिंग रेवोल्यूशन हमें सबसे पहला और बड़ा लेसन यही सिखाती है कि पैसा अब सिर्फ कुछ चुनिंदा रईसों की जागीर नहीं रह गया है। पुराने जमाने में अगर आपको कोई नया आईडिया मार्केट में लाना होता था तो आपको सूट बूट पहनकर किसी बड़े ऑफिस में बैठना पड़ता था जहाँ एक खडूस इन्वेस्टर आपकी किस्मत का फैसला करता था। लेकिन अब जमाना बदल चुका है। इंटरनेट ने फाइनेंस की दुनिया में वही किया है जो इंटरनेट ने न्यूज और एंटरटेनमेंट के साथ किया था यानी सबको बराबरी का मौका दे दिया है।
मान लीजिए आपके पास एक ऐसा आईडिया है जिससे आप ऐसी चप्पल बनाना चाहते हैं जो कभी नहीं घिसेगी। अब अगर आप पुराने स्टाइल के किसी वेंचर कैपिटलिस्ट के पास जाएंगे तो वह आपसे प्रॉफिट और पांच साल का प्लान पूछेगा और शायद चाय पिलाकर बाहर का रास्ता दिखा देगा। लेकिन क्राउडफंडिंग की दुनिया में आप सीधे जनता के पास जाते हैं। आप अपनी सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल करते हैं और लोगों से कहते हैं कि भाई अगर आपको यह आईडिया पसंद है तो मुझे एक चप्पल की कीमत के बराबर पैसा अभी दे दो और जब चप्पल बनकर तैयार होगी तो पहली जोड़ी आपकी होगी।
यहाँ जादू यह होता है कि आपको एक या दो बड़े इन्वेस्टर्स की जगह हजारों छोटे इन्वेस्टर्स मिल जाते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप अपने मोहल्ले के लड़कों से दस दस रुपये इकट्ठा करके क्रिकेट का नया बैट खरीदते थे। बस अब यह काम ग्लोबल लेवल पर हो रहा है। अगर आप आज भी इस डिजिटल बदलाव को नहीं समझ रहे हैं तो आप उस इंसान की तरह हैं जो स्मार्टफोन के जमाने में भी चिट्ठियां लिखने की जिद कर रहा है। याद रखिए कि अब मार्केट यह तय नहीं करता कि आपके पास पैसा है या नहीं बल्कि लोग यह तय करते हैं कि आपके आईडिया में दम है या नहीं।
क्राउडफंडिंग सिर्फ पैसा जुटाने का जरिया नहीं है बल्कि यह यह जानने का सबसे तेज तरीका है कि क्या लोग वाकई आपका प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं। अगर लोग पैसा दे रहे हैं तो मतलब आपका आईडिया हिट है और अगर नहीं दे रहे हैं तो समझ जाइए कि आपका आईडिया सिर्फ आपकी मम्मी को ही अच्छा लगा है। इसलिए बैंक के चक्कर छोड़िए और अपनी सोशल कम्युनिटी बनाना शुरू कीजिए।
लेसन २ : सोशल कैपिटल ही असली पैसा है
इस किताब का दूसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि आपकी असल दौलत आपके बैंक बैलेंस में नहीं बल्कि आपके सोशल नेटवर्क में छुपी हुई है। पुराने जमाने में लोग कहते थे कि पैसा पैसे को खींचता है लेकिन आज का सच यह है कि भरोसा पैसे को खींचता है। लेखक समझाते हैं कि सोशल कैपिटल ही वह इंजन है जो आपके बिजनेस की गाड़ी को दौड़ाएगा। अगर आपके फेसबुक या इंस्टाग्राम पर हजार दोस्त हैं और उनमें से कोई भी आपके आईडिया पर दस रुपये लगाने को तैयार नहीं है तो समझ लीजिए कि आपकी सोशल लाइफ केवल दिखावा है। असली नेटवर्किंग का मतलब यह नहीं होता कि आप पार्टी में जाकर किसके साथ सेल्फी ले रहे हैं बल्कि इसका मतलब यह है कि कितने लोग आपकी बात पर यकीन करते हैं।
कल्पना कीजिए कि आपको एक नया कैफे खोलना है। अब एक तरीका तो यह है कि आप अखबार में बड़ा सा विज्ञापन दें और करोड़ों रुपये खर्च करें जिसका शायद कोई जवाब न आए। दूसरा तरीका यह है कि आप अपनी ऑनलाइन कम्युनिटी को इस सफर का हिस्सा बनाएं। आप उन्हें दिखाएं कि कैफे की दीवार का रंग कैसा होगा या मेनू में कौन सी डिश होनी चाहिए। जब आप लोगों को अपने फैसले में शामिल करते हैं तो वे सिर्फ कस्टमर नहीं रहते बल्कि वे आपके ब्रांड के मालिक जैसा महसूस करने लगते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे मोहल्ले की आंटी अपने पड़ोस की शादी में इतनी मेहनत करती हैं जैसे शादी उनके अपने सगे बेटे की हो।
लोग अपनी पूरी जिंदगी फालतू की रील्स देखने और दूसरों की फोटो लाइक करने में बिता देते हैं लेकिन जब खुद के लिए नेटवर्क बनाने की बारी आती है तो वे शर्माने लगते हैं। सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल सिर्फ दूसरों की शादियों की फोटो देखने के लिए मत कीजिए। अगर आप आज के दौर में अपनी कम्युनिटी नहीं बना रहे हैं तो आप उस दुकानदार की तरह हैं जिसने दुकान तो जंगल में खोल ली है लेकिन किसी को रास्ता नहीं बताया। क्राउडफंडिंग के इस दौर में आपका नेटवर्क ही आपकी नेटवर्थ है। जितना बड़ा और मजबूत आपका सर्कल होगा उतना ही आसान आपके लिए फंड्स इकट्ठा करना होगा।
सोशल नेटवर्किंग और वेंचर फाइनेंसिंग का यह मेल ही वह असली रेवोल्यूशन है जिसके बारे में यह किताब चीख चीख कर कह रही है। आप अकेले शायद एक छोटा सा स्टार्टअप भी न चला पाएं लेकिन अगर आपके साथ पांच सौ ऐसे लोग हैं जो आपके विजन पर भरोसा करते हैं तो आप दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनी को टक्कर दे सकते हैं। इसलिए कीबोर्ड के पीछे छुपना बंद कीजिए और लोगों के साथ असली कनेक्शन बनाना शुरू कीजिए। बिना लोगों के सपोर्ट के आपका आईडिया सिर्फ एक हसीन सपना बनकर रह जाएगा जिसे आप बुढ़ापे में अपनी डायरी में पढ़कर ठंडी आहें भरेंगे।
लेसन ३ : रिस्क और रिवॉर्ड का नया बैलेंस-
तीसरा और सबसे जरूरी लेसन यह है कि क्राउडफंडिंग केवल चंदा इकट्ठा करने की मशीन नहीं है बल्कि यह आपके आईडिया के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और सच्चा मार्केट टेस्ट है। बहुत से लोग अपना पूरा जीवन एक ऐसे आईडिया पर बर्बाद कर देते हैं जिसकी जरूरत असल में किसी को होती ही नहीं है। वे सालों तक बंद कमरे में मेहनत करते हैं अपना सारा पैसा लगा देते हैं और जब प्रोडक्ट मार्केट में आता है तो पता चलता है कि उसे खरीदने वाला कोई है ही नहीं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप पूरी रात जागकर अपनी क्रश के लिए एक बहुत लंबी कविता लिखें और सुबह पता चले कि उसे तो कविताएं पढ़ना ही पसंद नहीं है।
क्राउडफंडिंग आपको इस बेइज्जती और बर्बादी से बचाती है। यह आपको मौका देती है कि आप अपना पूरा पैसा और समय लगाने से पहले ही जनता से पूछ लें कि क्या उन्हें यह चाहिए। अगर लोग आपके आईडिया के लिए पहले से पैसे देने को तैयार हैं तो इसका मतलब है कि आपके पास एक विनिंग आईडिया है। लेकिन अगर कोई भी अपना बटुआ खोलने को तैयार नहीं है तो समझ जाइए कि आपका आईडिया कबाड़ है। यहाँ तंज यह है कि लोग अपनी गलती मानने से डरते हैं और सोचते हैं कि शायद दुनिया ही बेवकूफ है जो उनके महान आईडिया को नहीं समझ पा रही। सच तो यह है कि मार्केट कभी झूठ नहीं बोलता।
रिस्क और रिवॉर्ड का यह नया बैलेंस आपको एक स्मार्ट बिजनेसमैन बनाता है। पुराने दौर में रिस्क सिर्फ आपका होता था और फायदा बैंक या बड़े इन्वेस्टर्स का। लेकिन आज आप अपना रिस्क पूरी दुनिया के साथ बांट सकते हैं। जब हजारों लोग थोड़े थोड़े पैसे लगाते हैं तो किसी एक पर बोझ नहीं पड़ता और आपके पास काम करने के लिए ढेर सारा फंड और फीडबैक दोनों आ जाते हैं। अगर आप अभी भी इस तरीके को अपनाने से डर रहे हैं तो आप उस ड्राइवर की तरह हैं जो जीपीएस होने के बाद भी अनजान रास्तों पर अपनी मर्जी से गाड़ी घुमा रहा है और फिर खो जाने पर किस्मत को दोष दे रहा है। क्राउडफंडिंग के जरिए आप फेल भी जल्दी होते हैं और पास भी जल्दी होते हैं। और यकीन मानिए बिजनेस में जल्दी फेल हो जाना दस साल बाद बर्बाद होने से कहीं ज्यादा बेहतर है।
तो दोस्त अब फैसला आपका है। आप बैंक के बाहर लाइन में खड़ा होना चाहते हैं या इंटरनेट की ताकत का इस्तेमाल करके अपनी खुद की एक आर्मी खड़ी करना चाहते हैं। द क्राउडफंडिंग रेवोल्यूशन हमें सिर्फ पैसे जुटाना नहीं सिखाती बल्कि यह हमें लोगों से जुड़ना और अपने सपनों के लिए लड़ना सिखाती है। याद रखिए कि दुनिया में आईडिया की कमी नहीं है बल्कि कमी है तो बस उस पर यकीन करने वालों की। अगर आप आज कदम नहीं उठाएंगे तो कल किसी और का आईडिया मार्केट में देख कर सिर्फ अफसोस करेंगे।
उठिए अपनी कम्युनिटी बनाइए और अपने उस आईडिया को हकीकत में बदलिए जिसे आप सालों से दबाकर बैठे हैं। क्या आपके पास भी कोई ऐसा आईडिया है जिसे आप क्राउडफंडिंग के जरिए शुरू करना चाहते हैं। हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा बिजनेस शुरू करने के लिए पैसों का रोना रोता रहता है।
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