Demand-Side Sales 101 (Hindi)


आप अभी भी गधों की तरह सामान बेचने की कोशिश कर रहे हैं और फिर रोते हैं कि सेल्स नहीं हो रही। सच तो यह है कि आपका कस्टमर आपके प्रोडक्ट को घास भी नहीं डालता क्योंकि उसे सॉल्यूशन चाहिए कचरा नहीं। अगर आपको अभी भी डिमांड समझ नहीं आई तो अपना बिजनेस बंद कर दीजिए।

​इस आर्टिकल में हम बॉब मोएस्ता की डिमांड साइड सेल्स 101 से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी सेल्स को रॉकेट बना देंगे। हम देखेंगे कि कैसे कस्टमर की प्रोग्रेस में मदद करके आप बिना बेचे भी टॉप लेवल के सेल्समैन बन सकते हैं। इन 3 लेसन को ध्यान से समझें।


लेसन १ : सप्लाई के पीछे भागना छोड़िए और कस्टमर की डिमांड को पकड़िए

ज्यादातर सेल्समैन और बिजनेस ओनर की सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या है पता है। वे अपने प्रोडक्ट के प्यार में पागल होते हैं। वे दिन भर बस यही गाते रहते हैं कि मेरा प्रोडक्ट बेस्ट है इसमें यह फीचर है और वह डिस्काउंट है। भाई सच बात तो यह है कि कस्टमर को आपके शानदार फीचर्स से कोई मतलब नहीं है। उसे बस अपनी लाइफ की प्रॉब्लम सॉल्व करनी है। बॉब मोएस्ता कहते हैं कि असली सेल्स वह नहीं है जहाँ आप अपना सामान किसी के गले उतार दें। असली सेल्स वह है जहाँ आप यह समझें कि कस्टमर को आखिर चाहिए क्या। इसे ही डिमांड साइड सेल्स कहते हैं।

​सोचिए आप एक जिम ज्वाइन करना चाहते हैं। अब एक जिम वाला आता है और आपको बताता है कि हमारे पास दुनिया की सबसे महंगी मशीनें हैं और हमारा डंबल अमेरिका से आया है। क्या आप ज्वाइन करेंगे। शायद नहीं। लेकिन दूसरा जिम वाला आता है और आपसे पूछता है कि क्या आप अपनी पुरानी जींस में फिट होना चाहते हैं या ऑफिस की सीढ़ियां चढ़ते हुए आपकी सांस फूलती है। वह आपकी प्रॉब्लम यानी आपकी डिमांड को समझ रहा है। वह आपको लोहा नहीं बेच रहा वह आपको एक बेहतर कॉन्फिडेंस और हेल्थ बेच रहा है। जब आप सप्लाई यानी अपने प्रोडक्ट को छोड़कर डिमांड यानी कस्टमर की जरूरत पर फोकस करते हैं तब जाकर असली पैसा बनता है।

​आज के दौर में लोग सेल्समैन से नफरत करते हैं क्योंकि वे सिर्फ अपना टारगेट पूरा करने के लिए पीछे पड़े रहते हैं। वे आपको वह चीज बेच देते हैं जिसकी आपको जरूरत ही नहीं है। लेकिन डिमांड साइड सेल्स आपको एक डॉक्टर की तरह बना देती है। क्या आपने कभी किसी डॉक्टर को देखा है जो आपको क्लिनिक में घुसते ही कहे कि आज हमारे पास पैरासिटामोल पर बीस परसेंट डिस्काउंट है तो आप दस गोलियां ले लो। बिल्कुल नहीं। वह पहले आपकी बीमारी पूछता है। वह देखता है कि आपको दर्द कहाँ है। उसके बाद वह आपको दवा देता है। सेल्स में भी आपको यही करना है। आपको सेल्समैन नहीं बल्कि एक मददगार बनना है जो कस्टमर की लाइफ में प्रोग्रेस लेकर आए।

​जब आप कस्टमर के जूते में पैर डालकर देखते हैं तब आपको समझ आता है कि वह किसी चीज को क्यों खरीदना चाहता है। वह शायद स्टेटस के लिए खरीद रहा हो या फिर अपना समय बचाने के लिए। अगर आप सिर्फ फीचर्स चिल्लाते रहेंगे तो लोग आपको इग्नोर करेंगे जैसे आप YouTube के एड्स को करते हैं। याद रखिए डिमांड तब पैदा होती है जब कस्टमर जहाँ आज खड़ा है और जहाँ वह पहुंचना चाहता है उसके बीच में एक गैप होता है। आपका काम उस गैप को भरना है। अगर आप यह नहीं कर पा रहे तो आप सेल्स नहीं कर रहे बस शोर मचा रहे हैं।

​कस्टमर को यह महसूस होना चाहिए कि आप उसके दुश्मन नहीं बल्कि उसके सबसे बड़े शुभचिंतक हैं। जब आप बेचना बंद कर देते हैं और मदद करना शुरू करते हैं तो लोग खुद चलकर आपके पास आते हैं। यह सुनने में अजीब लगता है लेकिन यही सबसे बड़ा सच है। और जब आप डिमांड समझ जाते हैं तब आता है अगला स्टेप जहाँ आप यह देखते हैं कि कस्टमर असल में किसी चीज को खरीदता क्यों है। इसी को कहते हैं उसे किसी काम के लिए हायर करना जो हम अगले लेसन में देखेंगे।


लेसन २ : कस्टमर किसी प्रोडक्ट को खरीदता नहीं है बल्कि उसे किसी काम के लिए हायर करता है

अगर आपको लगता है कि लोग आपका प्रोडक्ट इसलिए खरीदते हैं क्योंकि वह बहुत सुंदर दिखता है या सस्ता है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। बॉब मोएस्ता यहाँ एक बहुत ही कमाल का कॉन्सेप्ट देते हैं जिसे जॉब्स टू बी डन कहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि कस्टमर लाइफ में किसी खास सिचुएशन में फंसा होता है और वह उस सिचुएशन से बाहर निकलने के लिए किसी प्रोडक्ट को एक वर्कर की तरह हायर करता है। जैसे आप एक कारपेंटर को घर की अलमारी ठीक करने के लिए हायर करते हैं वैसे ही आप एक कप कॉफी को अपनी सुस्ती भगाने के लिए हायर करते हैं।

मान लीजिए आप एक मिल्क शेक बेच रहे हैं। अब आप सोचेंगे कि लोग इसे स्वाद के लिए खरीदते हैं। लेकिन जब इस पर रिसर्च की गई तो पता चला कि बहुत से लोग इसे सुबह सुबह ऑफिस जाते वक्त खरीदते हैं। क्यों। क्या उन्हें भूख लगी थी। नहीं। असल में उनका जॉब यह था कि ऑफिस का रास्ता बहुत बोरिंग और लंबा है और उन्हें ड्राइविंग करते समय खुद को बिजी रखना है। केला जल्दी खत्म हो जाता है और डोनट से हाथ गंदे हो जाते हैं। लेकिन मिल्क शेक धीरे धीरे पिया जा सकता है और कप होल्डर में फिट हो जाता है। यहाँ कस्टमर ने मिल्क शेक को स्वाद के लिए नहीं बल्कि बोरियत दूर करने वाले एक साथी के रूप में हायर किया है।

​जब आप यह समझ जाते हैं कि आपका प्रोडक्ट किस काम के लिए हायर किया जा रहा है तो आपकी मार्केटिंग पूरी तरह बदल जाती है। अगर आप सिर्फ दूध और चीनी की क्वालिटी बताते रहेंगे तो आप कभी उस बोरियत वाले कस्टमर को नहीं पकड़ पाएंगे। आपको यह देखना होगा कि कस्टमर की लाइफ में वह कौन सा स्ट्रगल है जिसे आपका प्रोडक्ट खत्म कर रहा है। लोग ड्रिल मशीन नहीं खरीदते उन्हें तो दीवार में एक छेद चाहिए ताकि वे अपनी फैमिली फोटो टांग सकें। वे छेद भी नहीं चाहते वे तो उस फोटो को देखकर मिलने वाली ख़ुशी चाहते हैं। अगर आप सिर्फ ड्रिल की मोटर की पावर बताते रहेंगे तो आप एक इमोशन को मिस कर रहे हैं।

​ज्यादातर बिजनेस फेल हो जाते हैं क्योंकि वे ऐसे सॉल्यूशन बनाते हैं जिनका कोई जॉब ही नहीं होता। आप दुनिया का सबसे बेहतरीन और स्मार्ट छाता बना लीजिए जो आपको मौसम की जानकारी भी दे। लेकिन अगर वह भारी है और उसे ले जाना मुश्किल है तो कोई उसे हायर नहीं करेगा। लोग एक साधारण सस्ता छाता हायर कर लेंगे क्योंकि उनका जॉब सिर्फ खुद को बारिश से बचाना है न कि मौसम विभाग का साइंटिस्ट बनना। आपको यह समझना होगा कि आपका कॉम्पिटिशन सिर्फ आपके जैसे दूसरे प्रोडक्ट से नहीं है बल्कि उन हर चीजों से है जो उस काम को कर सकती हैं।

​जैसे अगर कोई नेटफ्लिक्स देख रहा है तो उसका कॉम्पिटिशन प्राइम वीडियो से तो है ही पर उसका असली कॉम्पिटिशन नींद से या दोस्तों के साथ गप्पें मारने से भी है। क्योंकि वे सब एक ही जॉब यानी मनोरंजन या टाइम पास के लिए लड़ रहे हैं। जब आप इस नजरिए से देखते हैं तो आपको समझ आता है कि सेल्स कोई जादू नहीं बल्कि एक गहरी साइकोलॉजी है। कस्टमर अपनी लाइफ में प्रोग्रेस चाहता है और वह प्रोग्रेस तब होती है जब वह पुराने तरीके को छोड़कर नए तरीके को अपनाता है। लेकिन यह बदलाव इतना आसान नहीं होता क्योंकि पुरानी आदतें उसे पीछे खींचती हैं जिसे हम अगले लेसन में डिटेल में समझेंगे।


लेसन ३ : खरीदारी के चार बल जो कस्टमर का दिमाग घुमा देते हैं

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर कस्टमर को प्रॉब्लम है और मेरे पास सॉल्यूशन है तो वह तुरंत सामान क्यों नहीं खरीद लेता। भाई साहब मामला इतना सीधा नहीं है। इंसान का दिमाग एक जंग का मैदान है जहाँ चार अलग अलग ताकतें आपस में लड़ रही होती हैं। बॉब मोएस्ता इसे फोर्सेस ऑफ प्रोग्रेस कहते हैं। जब तक आप इन चार ताकतों को बैलेंस करना नहीं सीखेंगे आपकी सेल्स की गाड़ी बीच रास्ते में ही पंक्चर रहेगी। पहली ताकत है पुश यानी वर्तमान समस्या का धक्का। जब आपकी पुरानी कार बार बार बीच सड़क पर बंद होने लगे तो वह गुस्सा आपको नई कार खरीदने के लिए धक्का देता है।

​लेकिन जैसे ही आप शोरूम जाने का सोचते हैं दूसरी ताकत सामने आ जाती है जिसे पुल यानी नए सॉल्यूशन का आकर्षण कहते हैं। आपको दिखता है कि नई कार में सनरूफ है और वह बहुत चमचमाती है। यहाँ तक तो सब ठीक है लेकिन असली विलेन अब आते हैं। तीसरी ताकत है एंजायटी यानी नएपन की घबराहट। कस्टमर सोचने लगता है कि अगर नई कार की किश्तें टाइम पर नहीं दे पाया तो क्या होगा या फिर इसका मेंटेनेंस बहुत महंगा हुआ तो। यह डर उसे खरीदने से रोकता है। और चौथी सबसे खतरनाक ताकत है एलेगिएंस यानी पुरानी आदतों का मोह। अरे मेरी पुरानी कार ने दस साल साथ दिया है अभी एक बार और मैकेनिक को दिखा लेता हूँ शायद ठीक हो जाए।

​इस खींचतान को एक एग्जांपल से समझिए। मान लीजिए आप एक नया ऑनलाइन कोर्स बेचना चाहते हैं। आपका कस्टमर अपनी कम सैलरी से परेशान है यानी उसे पुश मिल रहा है। आपका कोर्स उसे लाख रुपये महीने कमाने का सपना दिखा रहा है यानी पुल मिल रहा है। लेकिन तभी उसके दिमाग की घंटी बजती है कि क्या यह कोर्स सच में काम करेगा या मेरे पैसे डूब जाएंगे। यह उसकी एंजायटी है। और फिर वह सोचता है कि छोड़ो यार शाम को नेटफ्लिक्स देखना ज्यादा आसान है कौन इतनी पढ़ाई करेगा। यह उसकी पुरानी आदत है। एक प्रो सेल्समैन वही है जो इन चारों ताकतों को समझकर कस्टमर के डर को कम करे और उसकी पुरानी आदतों की पकड़ ढीली कर दे।

​आपको कस्टमर को सिर्फ फायदे नहीं गिनाने हैं बल्कि उसे यह भरोसा दिलाना है कि स्विच करना यानी पुराने को छोड़कर नए पर आना आसान है। अगर आप उसकी एंजायटी दूर नहीं कर पाए तो वह आखिरी मोमेंट पर पीछे हट जाएगा। आपको उसे यह समझाना होगा कि अगर उसने आज बदलाव नहीं किया तो वह उसी दलदल में फंसा रहेगा जहाँ वह आज है। सेल्स कोई धक्का मारना नहीं है बल्कि कस्टमर का हाथ पकड़कर उसे एक किनारे से दूसरे किनारे पर ले जाना है। जब आप इन फोर्सेस को कंट्रोल करना सीख जाते हैं तो कस्टमर को लगता है कि खरीदना उसका खुद का फैसला था और यही एक सफल डील की पहचान है।

​पूरी सेल्स की कहानी बस इतनी ही है कि आपको सामने वाले की लाइफ में प्रोग्रेस लानी है। जब आप उसके स्ट्रगल को अपनी जिम्मेदारी बना लेते हैं तो पैसा अपने आप पीछे खिंचा चला आता है। याद रखिए आप सामान नहीं बेच रहे आप एक बेहतर भविष्य की चाबी बेच रहे हैं। अगर आप अभी भी सिर्फ टारगेट और कमीशन के पीछे भागेंगे तो आप बस एक साधारण सेल्समैन बनकर रह जाएंगे। लेकिन अगर आप इन तीन लेसन को अपनी लाइफ में उतार लेते हैं तो आप एक ऐसे मास्टर बन जाएंगे जिसे लोग खुद फोन करके बुलाएंगे।


तो दोस्तों, क्या आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चलकर सेल्स करने की नाकाम कोशिश करेंगे या फिर डिमांड साइड के मास्टर बनकर अपने बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। लाइफ में प्रोग्रेस तभी आती है जब हम दूसरों की प्रोग्रेस का जरिया बनते हैं। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप अपनी सेल्स की गेम बदलना चाहते हैं तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सेल्स में स्ट्रगल कर रहे हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपके प्रोडक्ट को कस्टमर किस जॉब के लिए हायर करता है। चलिए मिलकर एक ऐसी कम्युनिटी बनाते हैं जहाँ हम बेचना नहीं बल्कि मदद करना सीखते हैं।

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