क्या आप अभी भी वही घिसा पिटा बिजनेस आईडिया लेकर बैठे हैं जो फेल होने के लिए ही बना है। बिना किसी सॉलिड प्लान के पैसे बर्बाद करना और इन्वेस्टर्स के सामने बेइज्जती करवाना आपकी हॉबी बन चुका है क्या। अपनी मेहनत की कमाई को आग लगाने का यह हुनर कमाल का है।
आज के इस ब्लॉग में हम वॉल्टर ग्रांट की किताब हाउ टू राइट ए विनिंग बिजनेस प्लान से वह राज खोलेंगे जो आपके डूबते हुए स्टार्टअप को बचा सकते हैं। चलिए जानते हैं वह तीन बेहतरीन लेसन जो आपके बिजनेस को बुलेटप्रूफ बना देंगे।
लेसन १ : एक सॉलिड बिजनेस फाउंडेशन तैयार करना
ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते समय सिर्फ मुनाफे के सपने देखते हैं। उनको लगता है कि बस एक ऑफिस खोल लिया और लोगो बना लिया तो काम हो गया। लेकिन हकीकत यह है कि बिना किसी मजबूत बुनियाद के आपका बिजनेस ताश के पत्तों के घर जैसा है। वॉल्टर ग्रांट कहते हैं कि एक विनिंग बिजनेस प्लान का मतलब सिर्फ कागज काले करना नहीं है। इसका असली मतलब यह है कि आप अपने आइडिया की धज्जियां उड़ाकर देखें कि उसमें दम है भी या नहीं। अक्सर लोग अपने ही आइडिया के प्यार में अंधे हो जाते हैं। उनको लगता है कि उनका प्रोडक्ट दुनिया बदल देगा। पर भाई साहब दुनिया को आपके प्रोडक्ट की जरूरत है भी या नहीं यह कौन पूछेगा।
मान लीजिए आपने एक ऐसी दुकान खोली जो सिर्फ गर्मियों में गरम मोजे बेचती है। अब आप कहेंगे कि मेरा आईडिया यूनिक है। जी हां यूनिक तो है पर बेवकूफी भरा भी है। एक सॉलिड फाउंडेशन का मतलब है मार्केट की नब्ज को पकड़ना। आपको यह समझना होगा कि आपका कस्टमर कौन है और उसकी असल समस्या क्या है। क्या आप सच में किसी की प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं या बस अपना शौक पूरा कर रहे हैं। बिना मार्केट रिसर्च के बिजनेस शुरू करना वैसा ही है जैसे बिना हेलमेट के पहाड़ से कूदना। चोट तो लगेगी ही और शायद अस्पताल जाने का मौका भी न मिले।
एक अच्छा बिजनेस प्लान आपकी कंपनी का डीएनए होता है। इसमें आपके विजन और मिशन का साफ जिक्र होना चाहिए। अगर आपको खुद नहीं पता कि आप पांच साल बाद कहां होंगे तो कोई और आप पर भरोसा क्यों करेगा। अक्सर नए एंटरप्रेन्योर अपनी टीम को लेकर बहुत कैजुअल होते हैं। उनको लगता है कि दोस्त यार मिलकर कंपनी चला लेंगे। पर याद रखिए कि इमोशन से घर चलते हैं और सिस्टम से बिजनेस। आपको अपनी फाउंडेशन में उन लोगों को जोड़ना होगा जो आपसे भी ज्यादा स्मार्ट हों।
लेखक समझाते हैं कि आपके प्लान में फ्लेक्सिबिलिटी होनी चाहिए। मार्केट गिरगिट की तरह रंग बदलता है। अगर आपका फाउंडेशन पत्थर जैसा सख्त है जो मुड़ नहीं सकता तो वह टूट जाएगा। आपको अपनी जड़ें मजबूत रखनी हैं पर टहनियों को हवा के साथ हिलने देना होगा। यह लेसन हमें सिखाता है कि बिजनेस की शुरुआत हवा में महल बनाने से नहीं बल्कि जमीन पर गड्ढा खोदकर गहरी नींव डालने से होती है। अगर आपकी नींव कमजोर है तो ऊपर आप कितनी भी आलीशान बिल्डिंग बना लें वह एक दिन गिरेगी जरूर। इसलिए अपनी प्लानिंग को इतना मजबूत बनाइए कि तूफान भी उसे हिला न सके।
लेसन २ : इन्वेस्टर्स की साइकोलॉजी और अट्रैक्टिव प्रपोजल
अगर आपको लगता है कि आप अपना आईडिया सुनाएंगे और इन्वेस्टर चेक बुक लेकर आपके पीछे भागेगा तो शायद आप किसी फिल्मी दुनिया में जी रहे हैं। हकीकत में इन्वेस्टर आपके आईडिया से ज्यादा आपके एग्जीक्यूशन और अपनी वापसी के मुनाफे में इंटरेस्टेड होता है। वॉल्टर ग्रांट कहते हैं कि इन्वेस्टर को इम्प्रेस करने का मतलब यह नहीं कि आप बड़ी बड़ी बातें करें। इसका मतलब यह है कि आप उन्हें यह यकीन दिलाएं कि उनका पैसा आपके हाथ में सुरक्षित है। अक्सर लोग पिच देते समय ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे वह कोई चैरिटी मांग रहे हों। भाई साहब वह दान नहीं दे रहे हैं वह आपके बिजनेस में पार्टनर बन रहे हैं।
मान लीजिए आप किसी के पास जाकर कहें कि मुझे एक करोड़ रुपये दे दो मैं एक बहुत बढ़िया ऐप बनाऊंगा। वह इंसान आपको चाय तक नहीं पूछेगा। लेकिन अगर आप उसे दिखाएं कि आपने पिछले तीन महीने में बिना किसी फंडिंग के कैसे हजार कस्टमर बनाए हैं तो वह खुद आपके पास आएगा। इन्वेस्टर को नंबर पसंद हैं कहानिया नहीं। अगर आपके पास डेटा नहीं है तो आप बस एक और ख्याली पुलाव पकाने वाले इंसान हैं। आपको अपना बिजनेस प्लान ऐसे पेश करना होगा कि सामने वाले को उसमें अपना फायदा साफ नजर आए। उसे यह दिखना चाहिए कि आपने रिस्क का पूरा हिसाब लगा लिया है।
लेखक बताते हैं कि एक अट्रैक्टिव प्रपोजल में आपकी यूएसपी यानी यूनिक सेलिंग प्रोपोजीशन एकदम क्लियर होनी चाहिए। आप दूसरों से अलग कैसे हैं। क्या आप सस्ता बेच रहे हैं या आप कुछ ऐसा दे रहे हैं जो और कोई नहीं दे सकता। अगर आप वही कर रहे हैं जो बगल वाली गली का बनिया कर रहा है तो फिर कोई आप पर दांव क्यों लगाएगा। अपनी पिच में थोड़ा ह्यूमर और कॉन्फिडेंस रखिए लेकिन ओवर कॉन्फिडेंस से बचिए। इन्वेस्टर को यह मत बोलिए कि हमारा कोई कॉम्पिटिशन नहीं है। यह सुनकर उसे लगेगा कि या तो आप झूठ बोल रहे हैं या आपको मार्केट की समझ ही नहीं है।
अक्सर लोग अपने फाइनेंशियल प्रोजेक्शन को इतना बढ़ा चढ़ाकर दिखाते हैं कि वह मजाक लगने लगता है। पहले साल में ही अरबों का टर्नओवर दिखाने की गलती न करें। जमीन पर रहकर बात कीजिए। इन्वेस्टर को यह दिखाइए कि आपने अपनी टीम कैसे बनाई है और आप मुश्किल समय में कैसे रिएक्ट करेंगे। वॉल्टर ग्रांट के अनुसार आपका बिजनेस प्लान एक सेल पिच है। इसे ऐसे डिजाइन कीजिए कि पढ़ने वाला बीच में उसे छोड़ न सके। जब आप किसी के पैसे मांगते हैं तो आप अपनी साख दांव पर लगाते हैं। इसलिए अपने प्रपोजल को बुलेटप्रूफ बनाइए ताकि कोई उसमें छेद न ढूंढ सके।
लेसन ३ : रिस्क मैनेजमेंट और बुलेटप्रूफ एग्जीक्यूशन
बिजनेस शुरू करना और उसे चलाना दो अलग बातें हैं। ज्यादातर लोग जोश में आकर दुकान तो खोल लेते हैं पर जब पहली बार मंदी आती है तो उनके हाथ पांव फूल जाते हैं। वॉल्टर ग्रांट कहते हैं कि एक विनिंग बिजनेस प्लान वही है जो सिर्फ अच्छे दिनों की बात न करे बल्कि बुरे वक्त का सामना करने के लिए भी तैयार रहे। अगर आपके पास प्लान बी नहीं है तो समझ लीजिए आपका प्लान ए भी बेकार है। अक्सर लोग सोचते हैं कि रिस्क लेना ही सब कुछ है। पर भाई साहब बिना पैराशूट के हवाई जहाज से कूदना रिस्क लेना नहीं बल्कि खुदकुशी करना है। एक समझदार एंटरप्रेन्योर हमेशा अपनी पीठ बचाने का इंतजाम पहले करता है।
सोचिए आपने एक बहुत बड़ा रेस्टोरेंट खोला और अचानक शहर में लॉकडाउन लग गया। अब अगर आपके पास होम डिलीवरी या ऑनलाइन सर्विस का कोई बैकअप नहीं था तो आप बस कुर्सियां गिनते रह जाएंगे। रिस्क मैनेजमेंट का मतलब है उन सभी रुकावटों को पहले से पहचान लेना जो आपके रास्ते में आ सकती हैं। आपको यह पता होना चाहिए कि अगर कच्चा माल महंगा हो गया या आपका सबसे खास एम्प्लॉई नौकरी छोड़ गया तो आप क्या करेंगे। एग्जीक्यूशन यानी काम को अंजाम देना ही असली खेल है। आईडिया तो हर किसी के पास होता है पर जो उसे सही तरीके से जमीन पर उतार दे वही असली बाजीगर कहलाता है।
लेखक समझाते हैं कि आपका एग्जीक्यूशन प्लान एकदम सटीक होना चाहिए। इसमें हर छोटे काम की जिम्मेदारी और समय तय होना चाहिए। अगर आप सब कुछ खुद ही करने की कोशिश करेंगे तो आप बिजनेस नहीं कर रहे हैं बल्कि खुद को एक नई नौकरी दे रहे हैं। डेलीगेशन यानी काम को सही लोगों में बांटना सीखिए। आपका बिजनेस आपके बिना भी चलना चाहिए तभी वह एक असली बिजनेस है। वरना आप बस एक सेल्फ एम्प्लॉयड इंसान बनकर रह जाएंगे जो दिन रात कोल्हू के बैल की तरह जुटा रहता है। एक बुलेटप्रूफ प्लान वह है जो हर डिपार्टमेंट की वर्किंग को स्मूथ बनाता है।
अंत में यह याद रखिए कि कोई भी प्लान पत्थर की लकीर नहीं होता। जैसे जैसे आप आगे बढ़ते हैं आपको उसमें बदलाव करने पड़ते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बिना किसी नक्शे के जंगल में निकल जाएं। वॉल्टर ग्रांट की यह किताब हमें सिखाती है कि सफलता इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची समझी प्लानिंग का नतीजा है। अगर आप आज पसीना बहाकर एक बेहतरीन प्लान तैयार करते हैं तो कल आपको मार्केट की धूप में जलना नहीं पड़ेगा। अपने विजन को बड़ा रखिए पर अपने पैरों को हकीकत की जमीन पर टिके रहने दीजिए।
दोस्तो, बिजनेस करना कोई जुआ नहीं है बल्कि एक साइंस है। अगर आप भी अपने स्टार्टअप को ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं तो आज ही अपने बिजनेस प्लान पर काम करना शुरू करें। याद रखिए एक गलत फैसला आपकी सालों की मेहनत को मिट्टी में मिला सकता है। क्या आपने अपना बिजनेस प्लान तैयार कर लिया है या आप अभी भी सिर्फ ख्यालों में खोए हैं। हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं कि आप कौन सा बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं और यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। इस जानकारी को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं। चलिए साथ मिलकर एक कामयाब भारत बनाते हैं।
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