Disciplined Dreaming (Hindi)


क्या आप अभी भी उसी पुराने घिसे पिटे तरीके से काम कर रहे हैं। बधाई हो आप अपनी ग्रोथ का गला खुद घोंट रहे हैं। जब पूरी दुनिया जोश लिंकनर के डिसिप्लिन ड्रीमिंग से धमाका कर रही है तब आप बिना किसी सिस्टम के सिर्फ तुक्के मार रहे हैं। यह आलस आपको बहुत भारी पड़ने वाला है।

आज के इस ब्लॉग में हम जोश लिंकनर की बुक डिसिप्लिन ड्रीमिंग को डिकोड करेंगे। हम उन ३ सीक्रेट लेसन को जानेंगे जो आपकी क्रिएटिविटी को रॉकेट की तरह उड़ा देंगे और आपको एक सफल लीडर बनाएंगे।


लेसन १ : क्रिएटिविटी कोई आसमानी बिजली नहीं है जो अचानक गिरेगी

अक्सर लोग सोचते हैं कि क्रिएटिविटी कोई ऐसी चीज है जो सिर्फ आर्टिस्ट या किसी खास किस्म के लोगों को ही भगवान से गिफ्ट में मिलती है। हम तो ठहरे आम इंसान। हमारे पास तो बस वही घिसा पिटा रूटीन है। लेकिन जोश लिंकनर कहते हैं कि अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप खुद को दुनिया का सबसे बड़ा चूना लगा रहे हैं। क्रिएटिविटी कोई जादू की छड़ी नहीं है जो रात को सोते समय आपके सिर पर घूमेगी और सुबह आप एक नया एप्पल जैसा स्टार्टअप खड़ा कर देंगे। असल में क्रिएटिविटी एक प्रोसेस है। यह वैसी ही है जैसे आप रोज सुबह उठकर ब्रश करते हैं या जिम में पसीना बहाते हैं।

सोचिए आप जिम गए और वहां आपने डंबल को बस घूरा और घर आ गए। क्या बॉडी बनेगी। बिल्कुल नहीं। वैसे ही अगर आप हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे कि कब कोई बड़ा आइडिया आपके दिमाग के दरवाजे पर दस्तक देगा तो यकीन मानिए आप पूरी जिंदगी उसी दरवाजे को ताकते रह जाएंगे। जोश लिंकनर के मुताबिक डिसिप्लिन ड्रीमिंग का पहला नियम यही है कि आपको क्रिएटिव होने की प्रैक्टिस करनी होगी। इसे एक आदत बनाना होगा। जैसे एक जोकर सर्कस में गेंद उछालने की प्रैक्टिस करता है वैसे ही आपको हर रोज नए और थोड़े अजीब आइडियाज सोचने की प्रैक्टिस करनी होगी।

मान लीजिए आप एक ऑफिस में काम करते हैं और आपको एक प्रेजेंटेशन देनी है। अब या तो आप वही पुराने बोरिंग टेम्पलेट का इस्तेमाल करें जिसे देखकर आपके बॉस को भी नींद आ जाए। या फिर आप जोश लिंकनर का तरीका अपनाएं। वो कहते हैं कि अपने दिमाग को एक ऐसी मशीन समझें जिसे रोज तेल डालना पड़ता है। अगर आप रोज कुछ नया नहीं सोच रहे हैं तो आपकी मशीन में जंग लग जाएगा। और यकीन मानिए मार्केट में जंग लगी मशीनों की कोई कीमत नहीं होती। लोग आपको कबाड़ के भाव भी नहीं पूछेंगे।

असली मजे की बात तो यह है कि लोग क्रिएटिविटी को बहुत सीरियसली ले लेते हैं। जैसे कोई बहुत बड़ा मंत्र पढ़ना हो। जबकि क्रिएटिविटी का मतलब है पुरानी चीजों को नए तरीके से जोड़ना। जैसे इंडिया में हम जुगाड़ करते हैं। एक टूटी हुई बाल्टी को गमला बना देना भी क्रिएटिविटी है। लेकिन जोश कहते हैं कि इसे सिर्फ मजबूरी में मत कीजिए। इसे अपनी प्लानिंग का हिस्सा बनाइए। जब आप डिसिप्लिन के साथ सपने देखते हैं तो आप सिर्फ हवा में महल नहीं बनाते बल्कि उन महलों के लिए ईंटें भी खुद ही तैयार करते हैं।

अगर आप आज भी इस इंतजार में हैं कि कोई फरिश्ता आएगा और आपके कान में एक करोड़ का आइडिया बोलकर जाएगा तो भाई साहब आप गलत लाइन में लग गए हैं। उठिए और अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाइए। क्योंकि जब तक आप खुद को यह नहीं समझाएंगे कि क्रिएटिविटी एक मेहनत वाला काम है तब तक आप वही पुरानी घिसी पिटी जिंदगी जीते रहेंगे। और मुझे नहीं लगता कि आप अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ दूसरों के सक्सेस की तालियां बजाने में गुजारना चाहते हैं।


लेसन २ : फेलियर से ऐसा डरो मत जैसे वो आपकी पड़ोस वाली चिढ़चिढ़ी आंटी हो

जब हम कुछ नया करने की सोचते हैं तो सबसे पहले दिमाग में क्या आता है। यही कि लोग क्या कहेंगे। अगर यह फ्लॉप हो गया तो बेइज्जती कितनी होगी। जोश लिंकनर कहते हैं कि अगर आप फेल होने से डर रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपने अपनी तरक्की के दरवाजे पर खुद ही ताला मार दिया है। असल में बिजनेस और लाइफ में सबसे बड़ा रिस्क यही है कि आप कोई रिस्क ही नहीं ले रहे हैं। आप बस एक सेफ किनारे पर खड़े होकर लहरें देख रहे हैं जबकि मोती तो समंदर की गहराई में मिलते हैं।

सोचिए अगर थॉमस एडिसन पहली बार में बल्ब न जलने पर यह सोचकर बैठ जाते कि लोग उन्हें पागल कहेंगे तो आज हम शायद दीये की रोशनी में यह ब्लॉग पढ़ रहे होते। जोश लिंकनर समझाते हैं कि क्रिएटिविटी के रास्ते में फेलियर कोई गड्ढा नहीं है बल्कि एक सीढ़ी है। लेकिन हमारे यहां तो फेल होने को ऐसा पाप समझा जाता है जैसे किसी ने शादी में पनीर की सब्जी खत्म कर दी हो। लोग आपको ऐसे देखेंगे जैसे आपने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो। पर सच तो यह है कि जो कभी फेल नहीं हुआ उसने कभी कुछ नया ट्राई ही नहीं किया।

मान लीजिए आप एक नया स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। अब आप साल भर सिर्फ उसकी प्लानिंग ही कर रहे हैं ताकि सब कुछ परफेक्ट हो। जोश कहते हैं कि परफेक्शन की तलाश करना छोड़ दीजिए। परफेक्शन एक ऐसी बीमारी है जो आपको कभी शुरुआत ही नहीं करने देगी। इससे अच्छा है कि आप छोटी छोटी गलतियां करें और उनसे जल्दी सीखें। इसे जोश लिंकनर एक सेफ एनवायरमेंट में टेस्ट करने की बात कहते हैं। मतलब ऐसा नहीं है कि बिना पैराशूट के प्लेन से कूद जाओ। बल्कि छोटे छोटे एक्सपेरिमेंट करो ताकि अगर गिरो भी तो बस घुटने पर खरोंच आए जान न जाए।

आजकल के कॉर्पोरेट कल्चर में हर कोई स्मार्ट दिखना चाहता है। मीटिंग में लोग ऐसे बैठते हैं जैसे उनसे ज्यादा अक्लमंद कोई है ही नहीं। लेकिन जोश कहते हैं कि असली स्मार्ट वो है जो बेवकूफी भरे सवाल पूछने और अजीब आइडियाज देने से नहीं डरता। क्योंकि कई बार वो सबसे फालतू दिखने वाला आइडिया ही गेम चेंजर साबित होता है। अगर आप अपने ऑफिस में बस सिर झुकाकर हां में हां मिलाते रहेंगे तो आप एक एम्प्लॉई तो अच्छे बन सकते हैं लेकिन कभी लीडर नहीं बन पाएंगे।

तो अगली बार जब कोई नया आइडिया आए और आपका दिल धक धक करने लगे तो समझ जाइए कि आप सही रास्ते पर हैं। डर लगना अच्छी बात है क्योंकि डर वहीं लगता है जहां कुछ बड़ा होने की उम्मीद होती है। फेलियर को गले लगाइए क्योंकि वो आपको वो सिखाएगा जो कोई महंगी डिग्री नहीं सिखा सकती। अगर आप गिरने के डर से चलना ही छोड़ देंगे तो लोग आपको कुचलकर आगे निकल जाएंगे। और यकीन मानिए पीछे छूट जाने का दर्द फेल होने के दर्द से कहीं ज्यादा बुरा होता है।


लेसन ३ : आइडियाज को हकीकत में बदलना ही असली चौका मारना है

सिर्फ बड़े बड़े सपने देखना और डायरी में शानदार आइडियाज लिखना बहुत आसान काम है। असली खेल तब शुरू होता है जब उन आइडियाज को जमीन पर उतारने की बारी आती है। जोश लिंकनर कहते हैं कि दुनिया ऐसे लोगों के आइडियाज से भरी पड़ी है जिन्होंने कभी उन पर काम ही नहीं किया। अगर आप सिर्फ सपने देख रहे हैं और उन्हें पूरा करने के लिए पसीना नहीं बहा रहे हैं तो आप एक क्रिएटिव इंसान नहीं बल्कि सिर्फ एक मुंगेरी लाल हैं। डिसिप्लिन ड्रीमिंग का सबसे जरूरी हिस्सा है वह डिसिप्लिन जो आपके आइडिया को एक प्रोडक्ट या सर्विस में बदल देता है।

इसे ऐसे समझिए जैसे आपने एक बहुत बढ़िया रेसिपी पढ़ी और आपको लगा कि आप दुनिया के सबसे बेस्ट शेफ हैं। लेकिन अगर आपने किचन में जाकर गैस ही नहीं जलाई तो क्या खाना खुद ब खुद बन जाएगा। बिल्कुल नहीं। जोश लिंकनर समझाते हैं कि एग्जीक्यूशन ही वह पुल है जो आपके सपनों को हकीकत से जोड़ता है। कई लोग बहुत जोश में शुरुआत तो करते हैं लेकिन जैसे ही थोडी सी मेहनत बढ़ती है वो पतली गली से निकल लेते हैं। जोश कहते हैं कि आपको अपने आइडिया को पालना होगा उसे बड़ा करना होगा और उसे बाजार की मार झेलने के लिए तैयार करना होगा।

मान लीजिए आपने सोचा कि आप एक नया यूट्यूब चैनल शुरू करेंगे। आपने कैमरा खरीदा लाइट लगाई और दस स्क्रिप्ट लिख डालीं। लेकिन आपने कभी वीडियो अपलोड ही नहीं किया क्योंकि आप डर रहे थे कि एडिटिंग अच्छी नहीं है। यहाँ जोश का डिसिप्लिन वाला तरीका काम आता है। वो कहते हैं कि रोज एक छोटा कदम उठाना उस एक बड़े कदम से बेहतर है जो आप कभी नहीं उठाते। अगर आप अपने काम को छोटे छोटे हिस्सों में नहीं बांटेंगे तो वो आपको पहाड़ जैसा लगेगा और आप डरकर पीछे हट जाएंगे।

सक्सेसफुल होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास सबसे अनोखा आइडिया हो। बल्कि मतलब यह है कि आपने उस आइडिया को कितनी शिद्दत और डिसिप्लिन के साथ पूरा किया। जोश लिंकनर इस बुक में एक सिस्टम देते हैं जो आपको भटकने नहीं देता। जब आप एक प्रोसेस के साथ काम करते हैं तो आपकी क्रिएटिविटी को एक दिशा मिलती है। बिना दिशा की क्रिएटिविटी वैसी ही है जैसे बिना लगाम का घोड़ा जो आपको कहीं भी गिरा सकता है।

अंत में बस इतना समझ लीजिए कि दुनिया को आपके आइडियाज की नहीं बल्कि आपके रिजल्ट्स की परवाह है। अगर आप आज भी सिर्फ सोच रहे हैं तो कल भी सिर्फ सोचते ही रह जाएंगे। उठिए अपने उस आइडिया की धूल झाड़िए और उस पर काम करना शुरू कीजिए। जोश लिंकनर की यह बुक हमें सिखाती है कि जब सपने और डिसिप्लिन एक साथ मिलते हैं तो धमाका होना तय है। अब फैसला आपका है कि आपको धमाका करना है या सिर्फ दूसरों के धमाकों की आवाज सुननी है।


तो दोस्तों, क्या आप तैयार हैं अपने सपनों को डिसिप्लिन की ताकत देने के लिए। आज ही अपने एक ऐसे आइडिया को पकड़ें जिसे आप कल पर टाल रहे थे और उस पर काम शुरू करें। अगर आपको यह लेसन पसंद आए तो इस ब्लॉग को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सिर्फ बड़ी बातें करते हैं पर काम कुछ नहीं। कमेंट में बताएं कि आपका वो कौन सा ड्रीम है जिसे आप अब हकीकत में बदलने वाले हैं। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शुरुआत आपकी पूरी जिंदगी बदल सकती है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#Creativity #Innovation #SuccessTips #BookSummary #JoshLinkner


_

Post a Comment

Previous Post Next Post