अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बस एक घटिया सी वेबसाइट बनाकर और फेसबुक पर दो चार पोस्ट डालकर आपका बिजनेस अंबानी को टक्कर देने लगेगा तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का टिकट खुद ही काट रहे हैं। बिना ई स्ट्रेटजी के डिजिटल बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल की फेरारी चलाना। बस बैठ कर इंजन की आवाज निकालने का नाटक करते रहिये पर पहुंचेंगे कहीं नहीं। आपकी इसी नासमझी का फायदा आपके कॉम्पिटिटर्स उठा रहे हैं और आप बस हाथ मलते रह जायेंगे।
मिशेल रॉबर्ट और बर्नार्ड रासीन की यह किताब आपको उस अंधेरे से बाहर निकालेगी और सिखाएगी कि कैसे अपनी पुरानी घिसी पिटी बिजनेस स्ट्रेटजी को इंटरनेट के रॉकेट इंजन से जोड़ना है। आइये इस सफर की शुरुआत करते हैं।
Lesson : इंटरनेट सिर्फ एक दुकान नहीं एक नई दुनिया है
अगर आपको लगता है कि इंटरनेट बस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ आप अपनी दुकान का बोर्ड लगा देंगे और लोग लाइन लगाकर पैसे लुटाने लगेंगे तो सच कहूँ तो आप गहरी नींद में सो रहे हैं। मिशेल रॉबर्ट साहब बहुत प्यार से समझाते हैं कि भाई इंटरनेट कोई एक्स्ट्रा सामान नहीं है जिसे आपने अपने बिजनेस के ऊपर सजा दिया। यह तो असल में आपकी पूरी बिजनेस की आत्मा को बदलने वाली चीज है।
जरा सोचिये हमारे पड़ोस वाले शर्मा जी की किराने की दुकान के बारे में। उन्होंने सोचा कि अब जमाना डिजिटल हो गया है तो उन्होंने एक बहुत ही भद्दी सी वेबसाइट बनवा ली जिस पर बिस्किट और साबुन की फोटो डाल दी। अब शर्मा जी को लगा कि वो जेफ बेजोस को टक्कर देंगे। लेकिन नतीजा क्या निकला? वेबसाइट पर धूल जम रही है और शर्मा जी अब भी उसी पुराने रजिस्टर में उधार लिख रहे हैं। गलती कहाँ हुई? गलती यहाँ हुई कि उन्होंने इंटरनेट को सिर्फ एक एडवरटाइजिंग टूल समझा।
लेखक कहते हैं कि इंटरनेट आपकी स्ट्रेटजी का हिस्सा होना चाहिए। इसका मतलब है कि आपको अपना पूरा सोचने का तरीका बदलना होगा। पहले हम सोचते थे कि हमारे पास क्या सामान है और हम उसे कैसे बेचें। लेकिन इंटरनेट के आने के बाद अब सवाल यह है कि कस्टमर को क्या चाहिए और हम उसे इतनी आसानी से कैसे दें कि उसे अपनी सोफे से उठना भी न पड़े।
अगर आप एक कंपनी चला रहे हैं और आपकी इंटरनेट टीम अलग कमरे में बैठी है और आपकी सेल्स टीम अलग कमरे में तो समझ लीजिये कि आपकी नैया डूबने वाली है। इन दोनों का आपस में मिलना उतना ही जरूरी है जितना चाय में चीनी का होना। बिना तालमेल के आपकी इंटरनेट स्ट्रेटजी वैसी ही दिखेगी जैसे किसी ने सूट बूट के नीचे हवाई चप्पल पहन ली हो। देखने में अजीब और चलने में तकलीफदेह।
आज के समय में डेटा ही असली सोना है। अगर आप इंटरनेट का इस्तेमाल सिर्फ ईमेल भेजने के लिए कर रहे हैं तो आप सोने की खदान पर बैठकर भी भीख मांग रहे हैं। इंटरनेट आपको यह बताता है कि आपका कस्टमर रात को 2 बजे क्या सर्च कर रहा है। उसे क्या चीज परेशान कर रही है। अब अगर आप यह डेटा समझकर अपनी सर्विस नहीं सुधार रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे हैं बस टाइम पास कर रहे हैं।
कॉम्पिटिशन इतना बढ़ गया है कि अगर आप 10 मिनट भी पीछे रह गए तो कोई नया स्टार्टअप आकर आपकी मार्केट साफ कर देगा। इसलिए अपनी ई स्ट्रेटजी को अपनी बिजनेस स्ट्रेटजी के साथ ऐसे जोड़िये जैसे बिजली का तार प्लग के साथ जुड़ता है। तभी जाकर आपके बिजनेस का बल्ब जलेगा वरना अंधेरे में हाथ पैर मारते रहिये कुछ हासिल नहीं होने वाला। सार्केस्म की बात तो यह है कि लोग लाखों रुपये मार्केटिंग पर फूंक देते हैं पर वेबसाइट का यूजर एक्सपीरियंस ऐसा रखते हैं जैसे किसी सरकारी दफ्तर की फाइल हो जहाँ कुछ भी ढूंढना नामुमकिन हो। इस लेसन का सीधा मतलब यही है कि इंटरनेट को अपनी बिजनेस की जड़ बनाइये न कि सिर्फ एक दिखावे की पत्ती।
Lesson : अपने ड्राइविंग फोर्स को इंटरनेट के गियर से मैच करें
अक्सर लोग बिजनेस शुरू तो कर देते हैं पर उन्हें यह पता ही नहीं होता कि उनके जहाज का असली कैप्टन कौन है। लेखक मिशेल रॉबर्ट कहते हैं कि हर बिजनेस का एक ड्राइविंग फोर्स होता है। यह वह ताकत है जो तय करती है कि आपकी कंपनी आज कहाँ खड़ी है और कल कहाँ होगी। कुछ कंपनियों के लिए यह उनका प्रोडक्ट होता है तो कुछ के लिए उनकी मार्केट या फिर उनकी टेक्नोलॉजी। अब असली मजाक तो तब शुरू होता है जब आपका बिजनेस चल रहा हो एक दिशा में और आपकी इंटरनेट स्ट्रेटजी भाग रही हो दूसरी दिशा में।
कल्पना कीजिये एक ऐसी कंपनी की जो अपनी बेहतरीन सर्विस के लिए जानी जाती है। उनके पास ऐसे एम्प्लॉई हैं जो कस्टमर की हर बात सुनते हैं। अब इस कंपनी ने जोश में आकर अपनी वेबसाइट पर एक ऐसा बॉट लगा दिया जो हर सवाल का जवाब बिलकुल पत्थर की तरह देता है। कस्टमर पूछ रहा है कि मेरा ऑर्डर कहाँ है और बॉट जवाब दे रहा है कि नमस्ते हम आपकी मदद करके खुश हैं। यह तो वही बात हो गई कि आप किसी को गले लगाने गए और सामने वाले ने आपको हाथ जोड़कर नमस्ते कर दिया। यहाँ आपकी ड्राइविंग फोर्स यानी आपकी सर्विस और आपकी इंटरनेट स्ट्रेटजी के बीच का कनेक्शन टूट गया है।
अगर आपका ड्राइविंग फोर्स प्रोडक्ट है तो इंटरनेट का इस्तेमाल दुनिया को यह दिखाने के लिए कीजिये कि आपका प्रोडक्ट दूसरों से अलग क्यों है। लेकिन नहीं हमारे यहाँ तो लोग क्या करते हैं? प्रोडक्ट में कोई दम नहीं होगा पर वेबसाइट पर ऐसी फोटो डालेंगे जैसे उसे सीधे स्वर्ग से मंगाया गया हो। जब असली माल हाथ में आता है तो पता चलता है कि वह तो किसी सस्ते कबाड़ से ज्यादा कुछ नहीं है। यह धोखा देने वाली स्ट्रेटजी आपको एक बार तो पैसा दिला सकती है पर लॉन्ग टर्म में आप सिर्फ अपनी इज्जत ही गंवाएंगे।
लेखक समझाते हैं कि आपको अपनी ताकत पहचाननी होगी। अगर आपकी ताकत कम कीमत में सामान बेचना है तो आपकी वेबसाइट को इतना आसान और तेज होना चाहिए कि कस्टमर पलक झपकते ही डील फाइनल कर ले। और अगर आपकी ताकत क्वालिटी है तो आपके डिजिटल कंटेंट में वह क्लास दिखनी चाहिए। इंटरनेट का काम आपकी उस ताकत को दस गुना बढ़ाना है न कि उसे छुपाना।
बहुत से बिजनेसमैन यह गलती करते हैं कि वो हर चीज में हाथ डालने की कोशिश करते हैं। वो सोचते हैं कि हम फेसबुक पर भी टॉप करेंगे हम अपनी एप भी बना लेंगे और हम वायरल भी हो जायेंगे। भाई साहब आप भगवान नहीं हैं। अपनी एक ताकत चुनिए और इंटरनेट को उसका लाउडस्पीकर बनाइये। सार्केस्म तो देखिये कि लोग अपनी ई स्ट्रेटजी के नाम पर बस दूसरों की नकल करते हैं। अगर पड़ोस वाले शर्मा जी ने रील्स बनाना शुरू किया है तो हम भी ठुमके लगायेंगे चाहे हमारा बिजनेस सीरियस कंसल्टिंग का ही क्यों न हो। यह बेवकूफी बंद करनी होगी।
आपका ड्राइविंग फोर्स ही आपके बिजनेस का डीएनए है। जब आप इंटरनेट का इस्तेमाल इसे और मजबूत करने के लिए करते हैं तभी आप मार्केट में अपनी धाक जमा पाते हैं। वरना इंटरनेट पर तो करोड़ों लोग चिल्ला रहे हैं आपकी आवाज उस शोर में कहीं खो जाएगी। सीधा लेसन यह है कि पहले अपनी पहचान पहचानिये और फिर इंटरनेट के जरिए उसे पूरी दुनिया को बताइये।
Lesson : कॉम्पिटिटिव गैप को खत्म कीजिये और लीडर बनिये
बिजनेस की दुनिया में एक बहुत ही कड़वा सच है कि यहाँ कोई आपकी मेहनत के नंबर नहीं देता। यहाँ सिर्फ रिजल्ट्स चलते हैं। लेखक इस लेसन में बताते हैं कि इंटरनेट का असली जादू तब होता है जब आप इसका इस्तेमाल अपने और अपने बड़े कॉम्पिटिटर्स के बीच के गैप को भरने के लिए करते हैं। पुराने जमाने में अगर आपको किसी बड़ी कंपनी को हराना होता था तो आपको करोड़ों रुपयों की और हजारों लोगों की जरूरत होती थी। लेकिन आज इंटरनेट ने खेल का मैदान बराबर कर दिया है। अब एक छोटा सा स्टार्टअप भी अपने गैराज में बैठकर एक मल्टीनेशनल कंपनी की नींद उड़ा सकता है।
लेकिन रुकिए यहाँ भी एक ट्विस्ट है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि टेक्नोलॉजी खरीद लेना ही काफी है। उन्होंने सबसे महंगा सॉफ्टवेयर ले लिया और उन्हें लगा कि अब तो वो मार्केट लीडर बन गए। यह वैसा ही है जैसे किसी ने जिम की मेंबरशिप ले ली और अब वो सोच रहा है कि बिना एक्सरसाइज किये ही उसकी बॉडी बन जाएगी। असलियत यह है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ एक जरिया है असली खेल तो आपकी स्ट्रेटजी का है। अगर आप वही काम कर रहे हैं जो बाकी सब कर रहे हैं तो आप सिर्फ भीड़ का हिस्सा हैं लीडर नहीं।
जरा अपने आसपास देखिये। कितनी ही ऐसी कंपनियां हैं जो बरसों से राज कर रही थीं लेकिन इंटरनेट के सही इस्तेमाल ने उन्हें इतिहास बना दिया। क्यों? क्योंकि उन्होंने समय रहते कॉम्पिटिटिव गैप को नहीं समझा। उन्होंने सोचा कि हमारे पास तो बहुत बड़ा शोरूम है लोग तो हमारे पास ही आएंगे। पर उन्हें क्या पता था कि कस्टमर अब शोरूम की चकाचौंध से ज्यादा अपनी सुविधा को पसंद करता है। लेखक समझाते हैं कि अगर आप इंटरनेट का उपयोग करके कस्टमर का समय और पैसा बचा रहे हैं तो आप जीत रहे हैं।
कॉम्पिटिशन को मात देने का मतलब यह नहीं है कि आप उनसे लड़ने बैठ जाएँ। इसका मतलब है कि आप वह काम करें जो वो करने से डर रहे हैं या जो वो बहुत धीरे कर रहे हैं। बड़ी कंपनियों के साथ दिक्कत यह होती है कि उनके फैसले लेने की रफ्तार बहुत धीमी होती है। आप इंटरनेट की स्पीड का फायदा उठाकर उनसे पहले कस्टमर तक पहुँच सकते हैं। सार्केस्म तो देखिये कि बड़ी कंपनियां अपनी मीटिंग्स में ही साल बिता देती हैं और तब तक कोई नया लड़का एक एप बनाकर उनकी आधी मार्केट गायब कर देता है।
लेखक यह भी आगाह करते हैं कि सिर्फ सस्ता होना आपकी स्ट्रेटजी नहीं हो सकती। क्योंकि हमेशा कोई न कोई ऐसा आएगा जो आपसे भी सस्ता बेचेगा। आपकी असली ताकत होनी चाहिए आपका डेटा और आपका कस्टमर रिलेशनशिप। इंटरनेट आपको मौका देता है कि आप अपने हर कस्टमर को यह महसूस करा सकें कि वह आपके लिए खास है। अगर आपकी वेबसाइट या सर्विस उसे वही पुराना घिसा पिटा अहसास दे रही है तो फिर भूल जाइये कि आप किसी बड़े ब्रांड को टक्कर दे पाएंगे।
बात फिर वहीं आती है कि क्या आप बदलाव के लिए तैयार हैं? अपनी ई स्ट्रेटजी को इतना धारदार बनाइये कि वह आपके कॉम्पिटिटर की हर चाल को नाकाम कर दे। यह लेसन हमें सिखाता है कि इंटरनेट सिर्फ सर्वाइवल का साधन नहीं है बल्कि यह वह हथियार है जिससे आप अपने बिजनेस की सल्तनत खड़ी कर सकते हैं। बस शर्त यह है कि आपको इसे चलाना आना चाहिए।
ई स्ट्रेटजी कोई रॉकेट साइंस नहीं है पर इसे समझना हर किसी के बस की बात भी नहीं है। मिशेल रॉबर्ट और बर्नार्ड रासीन की यह बातें आपको यह याद दिलाने के लिए काफी हैं कि बिजनेस सिर्फ दिमाग से नहीं बल्कि सही टूल्स के सही इस्तेमाल से चलता है। अगर आप अब भी अपनी पुरानी सोच के साथ चिपके हुए हैं तो यकीन मानिए आप उस डायनासोर की तरह हैं जिसे पता ही नहीं कि आसमान से मुसीबत गिरने वाली है।
आज ही बैठिये और सोचिये कि क्या आपकी इंटरनेट स्ट्रेटजी आपके बिजनेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है? क्या आप सच में डिजिटल हो रहे हैं या सिर्फ दिखावा कर रहे हैं? वक्त हाथ से निकलता जा रहा है। या तो आप आज बदल जाइये या फिर कल किसी और की कामयाबी की कहानी पढ़कर अफसोस मनाइये।
अगर आपको यह लेसन काम के लगे तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिये जो बिजनेस में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। कमेंट में बताइये कि आपके बिजनेस का ड्राइविंग फोर्स क्या है? आइये साथ मिलकर एक मजबूत डिजिटल इंडिया बनाते हैं।
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