Everything is Figureoutable (Hindi)


आप अभी भी वही पुरानी घिसी पिटी जिंदगी जी रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि आपकी प्रॉब्लम्स का कोई सलूशन ही नहीं है। कितनी शर्म की बात है कि दुनिया आगे बढ़ रही है और आप अभी भी बहानों की रजाई ओढ़कर सो रहे हैं। अगर आपको लगता है कि आप हारने के लिए पैदा हुए हैं तो मुबारक हो आप बिल्कुल सही रास्ते पर हैं।

लेकिन क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ कि आपकी हर मुश्किल का हल आपकी जेब में ही छिपा है। आज हम मैरी फोर्लेओ की किताब से वो ३ सीक्रेट लेसन जानेंगे जो आपके दिमाग की बत्ती जला देंगे और आपको अनस्टॉपेबल बना देंगे।


लेसन १ : दुनिया की हर प्रॉब्लम का सलूशन मौजूद है (Everything is Figureoutable)

अगर आपको लगता है कि आपकी लाइफ की प्रॉब्लम्स हिमालय से भी बड़ी हैं और उनका कोई इलाज नहीं है तो यकीन मानिए आप एक नंबर के आलसी इंसान हैं। मैरी फोर्लेओ कहती हैं कि इस दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं बनी जिसे सुलझाया न जा सके। अब आप कहेंगे कि भाई मेरी नौकरी नहीं लग रही या मेरा ब्रेकअप हो गया है इसका क्या हल है। तो सुनिए हल तो है बस आप उसे ढूंढना नहीं चाहते क्योंकि आपको रोने में ज्यादा मजा आता है।

इमेजिन कीजिये कि आप एक ऐसे कमरे में बंद हैं जिसका दरवाजा बाहर से बंद है और आपके पास चाबी नहीं है। एक आम इंसान क्या करेगा। वो दरवाजे के पास बैठकर रोएगा और अपनी किस्मत को कोसेगा। लेकिन जिसके दिमाग में एवरीथिंग इस फिगरेटआउटेबल का मंत्र फिट है वो खिड़की ढूंढेगा या शायद दीवार तोड़ने का जुगाड़ करेगा या फिर चिल्लाकर किसी को बुलाएगा। पॉइंट यह है कि रास्ता हमेशा होता है बस आपको अपनी आंखों से बहानों की पट्टी उतारनी पड़ती है।

लोग अक्सर कहते हैं कि मेरे पास पैसा नहीं है इसलिए मैं बिजनेस शुरू नहीं कर पा रहा हूँ। अरे भाई आज के जमाने में इंटरनेट फ्री जैसा ही है। अगर आप दिन भर रील्स देखकर डेटा खत्म कर सकते हैं तो उसी इंटरनेट से कुछ नया सीख भी सकते हैं। लेकिन नहीं हमें तो बस यह कहना है कि मेरी तो फूटी किस्मत है। यह जो आप कहते हैं न कि यह नहीं हो सकता असल में आप कहना चाहते हैं कि मैं इसे करने की मेहनत नहीं करना चाहता।

अगर कोई काम आपके लिए वाकई जरूरी है तो आप रास्ता निकाल ही लेंगे। और अगर नहीं है तो आप बस एक नया बहाना तैयार रखेंगे। याद रखिये कि इंसान ने चांद पर कदम रखा और समंदर की गहराइयों को नापा। क्या उनके पास सब कुछ पहले से तैयार था। बिल्कुल नहीं। उन्होंने बस यह मान लिया था कि हर चीज का रास्ता निकाला जा सकता है। तो अगली बार जब लाइफ आपके सामने कोई गुगली फेंके तो पिच पर बैठकर रोना मत। बल्ला उठाइये और हल ढूंढने की कोशिश कीजिये। क्योंकि जब तक आप खुद को यह नहीं समझाएंगे कि हर चीज का तोड़ मुमकिन है तब तक आप वही पुरानी सड़ी हुई जिंदगी जीते रहेंगे।


लेसन २ : एक्सक्यूज बनाना बंद करें और जिम्मेदारी लें

अगर बहानों की कोई वर्ल्ड चैंपियनशिप होती तो यकीन मानिए हमारे देश के लोग गोल्ड मेडल लेकर ही आते। हम इतने क्रिएटिव हैं कि अपनी नाकामी के लिए पड़ोस के कुत्ते से लेकर सरकार की नीतियों तक किसी को भी जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। मैरी फोर्लेओ कहती हैं कि लाइफ में सिर्फ दो ही चीजें मिलती हैं या तो रिजल्ट या फिर बहाने। और अगर आपके पास बहानों की लंबी लिस्ट है तो साफ है कि रिजल्ट का खाता अभी भी जीरो पर ही अटका होगा।

सबसे बड़ा झूठ जो हम खुद से बोलते हैं वो है "मैं यह काम नहीं कर सकता"। अब ईमानदारी से अपने दिल पर हाथ रखकर कहिये कि क्या आप वाकई उसे नहीं कर सकते या फिर आप उसे करना ही नहीं चाहते। असल में "आई कांट" यानी मैं नहीं कर सकता सिर्फ एक सोफिस्टिकेटेड तरीका है यह कहने का कि "आई वोंट" यानी मैं नहीं करूँगा। आपको सुबह जल्दी उठकर कसरत करनी है पर आप कहते हैं कि नींद पूरी नहीं होती। आपको नई स्किल सीखनी है पर आप कहते हैं कि टाइम नहीं है। भाई साहब टाइम सबके पास वही २४ घंटे होता है। बस बात यह है कि आपकी प्रायोरिटी में वो काम है ही नहीं।

इमेजिन कीजिये कि अगर कोई आपसे कहे कि अगर आप अगले ३० दिन तक रोज एक घंटा कोडिंग सीखेंगे तो आपको १ करोड़ रुपये मिलेंगे। क्या तब भी आप कहेंगे कि मेरे पास टाइम नहीं है। तब तो आप ऑफिस के टॉयलेट में बैठकर भी कोडिंग सीख लेंगे। तो प्रॉब्लम टाइम की नहीं है प्रॉब्लम आपकी नियत और जिम्मेदारी की है। जब तक आप अपनी लाइफ की स्टियरिंग व्हील दूसरों के हाथ में देंगे तब तक आप वहीं पहुँचेंगे जहाँ दूसरे आपको ले जाना चाहते हैं।

अपनी नाकामियों का बोझ दूसरों के सिर पर फोड़ना बंद कीजिये। अगर आप अपनी सिचुएशन से खुश नहीं हैं तो उसे बदलने की पावर भी सिर्फ आपके पास ही है। लोग अक्सर अपनी गरीबी या अपनी खराब एजुकेशन का रोना रोते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि दुनिया के सबसे सफल लोगों के पास अक्सर सबसे कम साधन थे। उन्होंने रोने के बजाय रास्ता ढूंढने पर ध्यान दिया। जिस दिन आप यह मान लेंगे कि आप अपनी हर हार और हर जीत के लिए खुद जिम्मेदार हैं उसी दिन से आपकी तरक्की शुरू हो जाएगी। तो अब चॉइस आपकी है। या तो आप बहानों के महाराजा बने रहिये या फिर जिम्मेदारी लेकर अपनी लाइफ के हीरो बन जाइये।


लेसन ३ : प्रोग्रेस पर ध्यान दें परफेक्शन पर नहीं

हम में से ज्यादातर लोग किसी काम को इसलिए शुरू नहीं करते क्योंकि हमें लगता है कि जब तक सब कुछ 'परफेक्ट' नहीं होगा, तब तक हाथ डालना बेकार है। यह परफेक्शन कुछ और नहीं बल्कि डर का एक बहुत ही महंगा और पढ़ा-लिखा रूप है। आप सोचते हैं कि जब मेरे पास बढ़िया कैमरा होगा तब यूट्यूब शुरू करूँगा, या जब मैं पूरी तरह फिट हो जाऊँगा तब जिम जाऊँगा। यकीन मानिए, वो 'परफेक्ट' दिन कभी नहीं आने वाला। आप बस अपनी लाइफ के कीमती साल उस मौके के इंतज़ार में बर्बाद कर रहे हैं जो असल में एक्सिस्ट ही नहीं करता।

मैरी फोर्लेओ का सीधा सा फंडा है कि शुरू करने के लिए आपको बेहतरीन होने की जरूरत नहीं है, लेकिन बेहतरीन होने के लिए आपको शुरू करना पड़ेगा। लोग अक्सर पहली बार में ही ताजमहल खड़ा करना चाहते हैं, जबकि असलियत यह है कि शुरुआत हमेशा एक टेढ़ी-मेढ़ी ईंट से ही होती है। अगर आप गिरेंगे नहीं, लड़खड़ाएंगे नहीं, तो सीखेंगे कैसे। दुनिया का कोई भी बड़ा खिलाडी पहले दिन ही सेंचुरी नहीं मारता। वो बस मैदान में उतरता है और खेलता रहता है।

इमेजिन कीजिये कि आप खाना बनाना सीख रहे हैं। अब आप पहले दिन ही यह उम्मीद करें कि आप दुनिया के सबसे बड़े शेफ जैसा खाना बनाएंगे, तो यह बेवकूफी की पराकाष्ठा है। शुरू में नमक ज्यादा होगा, कभी रोटी जलेगी, कभी सब्जी कच्ची रह जाएगी। पर इसका मतलब यह तो नहीं कि आप भूखे सो जाएं। प्रोग्रेस का मतलब ही यही है कि कल की जली हुई रोटी से आज की थोड़ी कम जली हुई रोटी बेहतर है।

परफेक्शन का पीछा करना छोड़िये और अपनी प्रोग्रेस से प्यार कीजिये। क्लैरिटी काम शुरू करने से आती है, उसके बारे में सिर्फ सोचने से नहीं। जब आप एक्शन लेते हैं, तब आपको समझ आता है कि क्या काम कर रहा है और क्या नहीं। तो अगर आप भी किसी आइडिया को लेकर सालों से बैठे हैं, तो आज ही उस पर काम शुरू कीजिये। चाहे वो काम कितना भी बुरा क्यों न हो, कम से कम वो आपके दिमाग की फाइलों से निकलकर असल दुनिया में तो आएगा। याद रखिये, एक अधूरा काम उस परफेक्ट काम से हजार गुना बेहतर है जो कभी शुरू ही नहीं हुआ।


तो दोस्तों, यह थे मैरी फोर्लेओ की किताब के वो ३ क्रांतिकारी लेसन जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं। अब बहाने बनाना छोड़िये और खुद पर यकीन कीजिये कि आप हर मुश्किल का हल निकाल सकते हैं। आप आज से अपनी लाइफ का कौन सा 'बहाना' कचरे के डिब्बे में फेंकने वाले हैं। कमेंट में हमें जरूर बताएं और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा कहता है कि 'मुझसे नहीं हो पाएगा'। उठिये और कर दिखाईये।

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