That Will Never Work (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आपका करोड़ों का आईडिया दुनिया बदल देगा, तो आप शायद किसी गहरी नींद में सो रहे हैं। आपके आईडिया की औकात रद्दी के भाव भी नहीं है, अगर आप उसे टेस्ट करने की हिम्मत नहीं रखते। नेटफ्लिक्स की शुरुआत पर हंसने वाले दुनिया के सबसे बड़े बेवकूफ आज हाथ मल रहे हैं।

नेटफ्लिक्स के को-फाउंडर मार्क रैंडोल्फ की यह कहानी आपको सिखाएगी कि कैसे एक "घटिया" आईडिया ने पूरी दुनिया का एंटरटेनमेंट बदल दिया। चलिए देखते हैं वह ३ लेसन जो आपके फेल होने वाले बिजनेस को भी सक्सेसफुल बना सकते हैं।


लेसन १ : आईडिया की कोई कीमत नहीं है, केवल काम मायने रखता है

अगर आपके पास एक शानदार आईडिया है और आप उसे तिजोरी में बंद करके बैठे हैं, तो बधाई हो, आप एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। मार्क रैंडोल्फ जब नेटफ्लिक्स का आईडिया लेकर निकले थे, तब उनके खुद के घर वालों ने कहा था कि यह कभी काम नहीं करेगा। लोग अक्सर अपने आईडिया को किसी कोहिनूर हीरे की तरह छुपा कर रखते हैं जैसे कोई दूसरा उसे चुरा लेगा और रातों रात अमीर बन जाएगा। असलियत यह है कि मार्केट में आपके आईडिया की वैल्यू एक फटे हुए पुराने मोजे से भी कम है जब तक आप उसे जमीन पर नहीं उतारते। लोग घंटों कैफे में बैठकर डिस्कस करते हैं कि उनका ऐप कैसे दुनिया बदल देगा, लेकिन एक छोटा सा प्रोटोटाइप बनाने में उनकी नानी याद आ जाती है। मार्क रैंडोल्फ ने सिखाया कि आईडिया तो हर गली के मोड़ पर मिल जाते हैं, असली खिलाड़ी वह है जो उस आईडिया को कूड़ेदान से उठाकर उसे टेस्ट करने की हिम्मत रखता है।

सोचिए अगर मार्क सिर्फ यह सोचते रहते कि काश लोग घर बैठे डीवीडी मंगवा पाते, तो आज आप अपने फोन पर बिंज वाचिंग नहीं कर रहे होते। उन्होंने आईडिया को सजाने के बजाय उसे गंदा किया, उसे रगड़ा और बार बार फेल होने के लिए छोड़ दिया। हम में से ज्यादातर लोग परफेक्ट होने के चक्कर में कभी शुरुआत ही नहीं कर पाते। हम सोचते हैं कि जब सब कुछ सही होगा, जब बहुत सारा पैसा होगा और जब सितारे सही जगह पर होंगे, तब हम अपना बिजनेस शुरू करेंगे। लेकिन सच तो यह है कि वह सही समय कभी नहीं आता। आप बस एक आईडिया लेकर बैठ जाते हैं और दुनिया आपसे आगे निकल जाती है। हुमर की बात तो यह है कि जिस आईडिया को आप अपनी जागीर समझते हैं, वही आईडिया शायद किसी और के दिमाग में भी चल रहा होगा जो आपसे ज्यादा मेहनती है।

मार्क रैंडोल्फ ने नेटफ्लिक्स के शुरुआती दिनों में सैकड़ों ऐसे आईडिया टेस्ट किए जो बुरी तरह पिट गए। उन्होंने शैम्पू बेचने से लेकर पालतू जानवरों का खाना घर तक पहुंचाने तक की बातें सोची थीं। सुनने में यह सब कितना बकवास लगता है न। लेकिन यही वह रास्ता था जिसने उन्हें नेटफ्लिक्स तक पहुंचाया। अगर वह उन बकवास आइडियाज पर काम नहीं करते, तो उन्हें वह एक सही रास्ता कभी नहीं मिलता। लोग फेल होने से इतना डरते हैं जैसे फेल होना कोई छूत की बीमारी हो। जबकि बिजनेस में फेल होना तो नाश्ता करने जैसा नॉर्मल होना चाहिए। आप गिरते हैं, धूल झाड़ते हैं और फिर से खड़े हो जाते हैं।

जब आप किसी से कहते हैं कि मेरा आईडिया करोड़ों का है, तो असल में आप अपनी ईगो को सहला रहे होते हैं। मार्केट को आपकी ईगो से कोई लेना देना नहीं है। उसे बस इस बात से मतलब है कि आप उसकी कौन सी समस्या हल कर रहे हैं। मार्क ने डीवीडी को पोस्ट के जरिए भेजने का रिस्क लिया जब लोगों को लगता था कि डीवीडी रास्ते में ही टूट जाएगी। उन्होंने एक लिफाफे में डीवीडी डालकर खुद को ही पोस्ट किया। यह देखने के लिए कि क्या वह सही सलामत पहुंचती है। यह होता है असली काम। घंटों मीटिंग्स में बैठकर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिखाना काम नहीं है, बल्कि वह लिफाफा पोस्ट करना असली काम है। अगर वह लिफाफा टूट जाता, तो शायद नेटफ्लिक्स आज नहीं होता। लेकिन वह नहीं टूटा और मार्क को अपना जवाब मिल गया।

आपकी योजनाएं कागजों पर बहुत खूबसूरत लग सकती हैं, लेकिन असल दुनिया बहुत बेरहम है। यहाँ वही टिकता है जो थ्योरी छोड़कर प्रैक्टिकल पर ध्यान देता है। अगर आप आज भी किसी परफेक्ट आईडिया का इंतजार कर रहे हैं, तो रुक जाइए। अपनी कुर्सी से उठिए और उस आईडिया का सबसे छोटा और सबसे सस्ता वर्जन आज ही टेस्ट कीजिए। हो सकता है कि वह फेल हो जाए, और यकीन मानिए, वह होगा ही। लेकिन वही फेलियर आपको उस रास्ते पर ले जाएगा जो सक्सेस की तरफ जाता है। मार्क रैंडोल्फ की यह जिद ही थी जिसने एक साधारण से दिखने वाले इंसान को दुनिया के सबसे बड़े रिवॉल्यूशन का चेहरा बना दिया। तो अपने आईडिया से प्यार करना छोड़िए और उसे हकीकत की आग में तपाना शुरू कीजिए। क्योंकि अंत में वही बचता है जो चलता है, वह नहीं जो सिर्फ सोचा जाता है।


लेसन २ : जब दुनिया कहे यह काम नहीं करेगा, तो समझो आप सही रास्ते पर हो

मार्क रैंडोल्फ की पत्नी ने खुद उनसे कहा था कि "दैट विल नेवर वर्क" यानी यह कभी काम नहीं करेगा। सोचिए, जिस इंसान के साथ आप पूरी जिंदगी बिताने का वादा करते हैं, वही आपकी मेहनत पर पानी फेर दे, तो कैसा लगेगा। लेकिन मार्क ने इसे दिल पर लेने के बजाय इसे एक चुनौती की तरह लिया। भारत में तो हमारे पास रिश्तेदारों की एक पूरी फौज होती है जिनका इकलौता काम ही यही है कि आपके हर नए आईडिया में छेद ढूंढना। आप कहेंगे कि मुझे स्टार्टअप करना है, और वह कहेंगे कि बेटा सरकारी नौकरी की तैयारी क्यों नहीं करते। आप कहेंगे कि मुझे कुछ अलग करना है, और वह आपको पड़ोस के किसी फेल हुए लड़के की कहानी सुना देंगे। हुमर की बात यह है कि जो लोग आपको सलाह दे रहे होते हैं, उन्होंने खुद अपनी लाइफ में कभी घर की लाइट ठीक करने के अलावा कोई बड़ा रिस्क नहीं लिया होता।

मार्क रैंडोल्फ ने जब नेटफ्लिक्स का मॉडल ब्लॉकबस्टर जैसी बड़ी कंपनी के सामने रखा, तो उन लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। उस समय ब्लॉकबस्टर वीडियो रेंटल की दुनिया का बेताज बादशाह था। उनके पास हजारों स्टोर थे और करोड़ों का बिजनेस था। मार्क और उनके पार्टनर रीड हेस्टिंग्स जब उनके ऑफिस गए, तो वहां के सीईओ को हंसी आ गई। उन्हें लगा कि ये दो लड़के मेल के जरिए डीवीडी भेजकर उन्हें टक्कर देंगे। लेकिन आज ब्लॉकबस्टर का नामो-निशान मिट चुका है और नेटफ्लिक्स आपके ड्राइंग रूम का हिस्सा है। जब दुनिया आप पर हंसती है, तो असल में वह अपनी सीमाओं को आप पर थोप रही होती है। उन्हें डर लगता है कि कहीं आप वह न कर दिखाएं जो वह कभी सोच भी नहीं पाए।

सक्सेसफुल होने का एक ही नियम है, अपनी आंखों पर पट्टी बांध लो और सिर्फ अपने डेटा और कस्टमर की सुनो। दुनिया का काम है शोर मचाना और आपका काम है उस शोर के बीच अपने काम की धुन को पहचानना। मार्क ने लोगों की बकवास सुनने के बजाय इस पर ध्यान दिया कि क्या लोग वाकई ऑनलाइन फिल्म चुनना पसंद कर रहे हैं। उन्होंने देखा कि लोग भले ही शुरुआत में हिचकिचा रहे थे, लेकिन सर्विस इस्तेमाल करने के बाद वह खुश थे। यही वह कॉन्फिडेंस है जो आपको बड़े बड़े दिग्गजों के सामने खड़े होने की ताकत देता है। अगर आप सबकी राय लेकर अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो आप शायद एक चाय की टपरी भी नहीं खोल पाएंगे, क्योंकि वहां भी लोग कहेंगे कि चीनी कम है।

अक्सर हम अपने विजन को लेकर दूसरों से अप्रूवल मांगते रहते हैं। हमें लगता है कि अगर चार लोग "वाह-वाह" कह देंगे, तो आईडिया हिट हो जाएगा। लेकिन हकीकत में, सबसे क्रांतिकारी आईडिया वही होते हैं जिन्हें शुरुआत में सबने पागलपन कहा था। मार्क रैंडोल्फ को पता था कि वह कुछ ऐसा बना रहे हैं जो भविष्य बदल देगा। उन्होंने अपनी कार में बैठकर सैकड़ों ऐसे आईडिया रिजेक्ट किए जो सुनने में बहुत अच्छे थे लेकिन उनमें वह दम नहीं था। उन्होंने अपनी ना सुनने की क्षमता को इतना मजबूत कर लिया था कि ब्लॉकबस्टर की हंसी भी उन्हें डिगा नहीं पाई।

आज के सोशल मीडिया के दौर में, जहां हर कोई एक कीबोर्ड वॉरियर है, वहां किसी का भी मनोबल तोड़ना बहुत आसान है। आप एक पोस्ट डालेंगे और नीचे दस लोग आकर लिख देंगे कि "भाई तुझसे नहीं होगा"। ऐसे में आपको मार्क रैंडोल्फ जैसा जिद्दी बनना पड़ेगा। जिद्दी इंसान ही इतिहास रचता है, समझदार लोग तो सिर्फ इतिहास पढ़ते हैं और दूसरों की गलतियां निकालते हैं। मार्क ने यह साबित किया कि अगर आपके पास अपनी बात को सच करने का जुनून है, तो पूरी दुनिया की "ना" आपके रास्ते का पत्थर नहीं, बल्कि सीढ़ी बन जाती है। तो अगली बार जब कोई आपसे कहे कि "यह नहीं चलेगा", तो एक प्यारी सी मुस्कान दीजिए और मन ही मन कहिए कि "बस देखते जाओ"।


लेसन ३ : सही टीम और कल्चर ही असली साम्राज्य खड़ा करते हैं

पैसा तो कोई भी बैंक या इन्वेस्टर दे सकता है, लेकिन वह जुनून कहां से लाओगे जो रात के दो बजे भी आपको काम करने के लिए मजबूर कर दे। मार्क रैंडोल्फ ने नेटफ्लिक्स में सिर्फ एम्प्लॉई नहीं रखे थे, उन्होंने एक ऐसी फौज खड़ी की थी जो हार मानने को तैयार नहीं थी। अक्सर नए स्टार्टअप यह गलती करते हैं कि वह सबसे सस्ते लोग ढूंढते हैं या फिर सिर्फ अपनी चापलूसी करने वाले दोस्तों को साथ ले लेते हैं। नतीजा यह होता है कि पहली बड़ी मुसीबत आते ही जहाज डूबने लगता है। मार्क ने शुरुआत से ही एक "फ्रीडम और रिस्पॉन्सिबिलिटी" वाला कल्चर बनाया। उन्होंने लोगों को कंट्रोल नहीं किया, बल्कि उन्हें अपना काम खुद मैनेज करने की आजादी दी। हुमर की बात यह है कि हमारे यहाँ तो ऑफिस में बॉस ऐसे घूमता है जैसे वह जेल का जेलर हो और एम्प्लॉई कैदी। मार्क ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया।

नेटफ्लिक्स की टीम ने तब भी हार नहीं मानी जब उनके पास कैश खत्म हो रहा था। उस दौर में उन्होंने अपने सबसे अच्छे लोगों को रिटेन किया और बाकी को बाहर का रास्ता दिखाया। यह बहुत कड़वा फैसला था, लेकिन एक महान कंपनी बनाने के लिए कभी-कभी आपको सर्जरी करनी ही पड़ती है। मार्क का मानना था कि अगर आपके पास १० औसत दर्जे के लोग हैं, तो वह एक टैलेंटेड इंसान के बराबर भी काम नहीं कर पाएंगे। उन्होंने एक ऐसी संस्कृति की नींव रखी जहाँ लोग एक-दूसरे को सच बोल सकें, चाहे वह सच कितना भी कड़वा क्यों न हो। हमारे यहाँ तो मीटिंग्स में सब एक-दूसरे की हां में हां मिलाते हैं ताकि चाय और बिस्किट शांति से मिल सकें। लेकिन नेटफ्लिक्स में लोग एक-दूसरे के आइडियाज की धज्जियां उड़ाते थे ताकि अंत में जो बचे, वह सबसे मजबूत आईडिया हो।

मार्क रैंडोल्फ ने खुद को कंपनी से अलग करना भी सीखा। जब उन्हें लगा कि रीड हेस्टिंग्स कंपनी को अगले लेवल पर ले जाने के लिए ज्यादा बेहतर सीईओ साबित होंगे, तो उन्होंने अपनी ईगो को किनारे रख दिया। यह कोई छोटी बात नहीं है। अपनी बनाई हुई कंपनी की कमान किसी और को सौंप देना कलेजे का काम है। लोग तो अपने छोटे से ढाबे की गद्दी नहीं छोड़ते, मार्क ने तो एक ग्लोबल रिवॉल्यूशन की गद्दी छोड़ दी। उन्होंने साबित किया कि अगर आप सच में कुछ बड़ा बनाना चाहते हैं, तो आपको कंपनी को खुद से भी बड़ा बनाना होगा। यही वह मैच्योरिटी है जो एक फाउंडर को लीडर बनाती है।

एक अच्छा कल्चर वह नहीं है जहाँ साल में एक बार ऑफिस ट्रिप पर ले जाया जाए। अच्छा कल्चर वह है जहाँ हर इंसान को पता हो कि उसकी जिम्मेदारी क्या है और उसे उसे पूरा करने के लिए किसी के डंडे की जरूरत न पड़े। मार्क ने अपनी टीम को यह भरोसा दिलाया कि वह फेल हो सकते हैं, लेकिन वह चुप नहीं बैठ सकते। उन्होंने एक्सपेरिमेंट करने की पूरी छूट दी। आज जब आप नेटफ्लिक्स पर कोई फिल्म देखते हैं, तो वह सिर्फ एक सॉफ्टवेयर का कमाल नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की मेहनत और उस कल्चर का नतीजा है जो मार्क ने सालो पहले बोया था।

तो अगर आप भी कुछ बड़ा शुरू करना चाहते हैं, तो पहले उन लोगों को ढूंढिए जो आपकी तरह पागल हों। ऐसे लोग जो आपके साथ सिर्फ सैलरी के लिए नहीं, बल्कि उस विजन को पूरा करने के लिए खड़े हों जिसे दुनिया नामुमकिन कहती है। पैसा और शोहरत तो बाय-प्रोडक्ट हैं, असली खुशी तो उस सफर में है जो आप एक शानदार टीम के साथ तय करते हैं। मार्क रैंडोल्फ की कहानी हमें सिखाती है कि महान आईडिया से भी ज्यादा जरूरी महान लोग होते हैं।


मार्क रैंडोल्फ की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हर बड़े साम्राज्य की शुरुआत एक "बकवास" कहे जाने वाले आईडिया से ही होती है। आपके पास भी शायद ऐसा ही कोई आईडिया होगा जिसे लोग नापसंद कर रहे हैं। क्या आपमें इतनी हिम्मत है कि आप दुनिया की परवाह किए बिना उस पर काम शुरू करें। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका वह कौन सा "पागलपन भरा" आईडिया है जिसे आप हकीकत में बदलना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है पर डर रहा है। याद रखिए, अगर आप आज शुरू नहीं करेंगे, तो कल कोई और आपके आईडिया पर राज करेगा।

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