Exceptional Selling (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सेल्स के नाम पर क्लाइंट को चिपकाऊ सेल्समैन की तरह इरिटेट कर रहे हैं। अगर आपकी क्लोजिंग रेट आपके बैंक बैलेंस की तरह गिरी हुई है तो बधाई हो। आप बहुत बड़ा मौका और पैसा दोनों खो रहे हैं। जेफ थुल की यह बुक आपको उस शर्मिंदगी से बचा सकती है।

आज हम एक्सेप्शनल सेलिंग बुक से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो बड़ी और मुश्किल सेल्स को आसान बना देते हैं। यह लेसन आपकी सोच बदल देंगे और आपको एक साधारण सेल्समैन से एक प्रोफेशनल बिजनेस पार्टनर बना देंगे। चलिए इन कीमती लेसन्स को विस्तार से समझते हैं।


लेसन १ : सेल्समैन नहीं पार्टनर बनो (वैल्यू बेस्ड सेलिंग)

अक्सर जब हम सेल्स के बारे में सोचते हैं तो हमारे दिमाग में एक ऐसे इंसान की इमेज आती है जो कोट पैंट पहनकर आपके पीछे पड़ा रहता है। वह तब तक आपका पीछा नहीं छोड़ता जब तक आप उसका सामान न खरीद लें या फिर उसे ब्लॉक न कर दें। अगर आप भी इसी तरह से सेल्स कर रहे हैं तो यकीन मानिए आप सेल्स नहीं कर रहे बल्कि लोगों को परेशान कर रहे हैं। जेफ थुल अपनी बुक एक्सेप्शनल सेलिंग में सबसे पहला और सबसे बड़ा लेसन यही देते हैं कि दुनिया को एक और सेल्समैन की जरूरत नहीं है। दुनिया को जरूरत है एक ऐसे पार्टनर की जो उनकी प्रॉब्लम को समझ सके।

सोचिए आप एक दुकान पर जाते हैं और दुकानदार बिना आपसे पूछे कि आपको क्या चाहिए बस अपना सबसे महंगा फोन आपके हाथ में थमा देता है। वह उसके फीचर्स गिनाने लगता है और कहता है कि यह मार्केट का बेस्ट फोन है। आपको कैसा लगेगा। शायद आपको लगेगा कि उसे आपकी जरूरत से कोई मतलब नहीं है उसे बस अपना कमीशन प्यारा है। यही गलती ज्यादातर सेल्स प्रोफेशनल्स करते हैं। वे क्लाइंट के पास जाते ही अपने प्रोडक्ट की तारीफों के पुल बांधने लगते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा बातें वे करेंगे उतनी जल्दी डील क्लोज होगी। लेकिन हकीकत में आप जितना ज्यादा बोलते हैं क्लाइंट उतना ही आपसे दूर भागता है।

सच्चाई तो यह है कि हाई स्टेक्स सेल्स में यानी जहां बहुत बड़ा पैसा इन्वॉल्व होता है वहां लोग सामान नहीं खरीदते। वे एक सॉल्यूशन खरीदते हैं। वे एक भरोसा खरीदते हैं। आपको खुद को एक वेंडर की तरह नहीं बल्कि एक कंसल्टेंट की तरह पेश करना होगा। एक ऐसा इंसान जो क्लाइंट के साथ बैठकर उसके बिजनेस के गैप्स को ढूंढता है। जब आप सामने वाले को यह यकीन दिला देते हैं कि आपको उनके पैसों से ज्यादा उनके फायदे की फिक्र है तो सेल्स अपने आप हो जाती है। इसे ही हम वैल्यू बेस्ड सेलिंग कहते हैं।

जरा सोचिए क्या कभी आपने किसी डॉक्टर को यह कहते सुना है कि भाई साहब आज यह वाली दवाई सेल पर है तो आप इसे ले लीजिए। बिल्कुल नहीं। डॉक्टर पहले आपसे सवाल पूछता है। वह आपकी तकलीफ समझता है। उसके बाद वह आपको दवा लिखता है। सेल्स में भी आपको यही अप्रोच अपनानी है। जब आप अपनी बातचीत में प्रोडक्ट की जगह वैल्यू को सेंटर में रखते हैं तो क्लाइंट आपको एक बोझ नहीं बल्कि एक एसेट समझने लगता है। वह आपसे सलाह मांगता है। वह आपके साथ काम करना चाहता है।

अगर आप अभी भी वही घिसी पिटी पिच इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें सिर्फ मैं मेरा और हमारा प्रोडक्ट है तो रुक जाइए। अपनी डिक्शनरी से मैं शब्द निकालकर आप शब्द डाल दीजिए। क्लाइंट को यह महसूस कराइए कि यह डील उनके लिए कितनी जरूरी है। जब आप उनकी जीत में अपनी जीत देखने लगते हैं तो आप एक साधारण सेल्समैन से ऊपर उठकर एक एक्सेप्शनल पार्टनर बन जाते हैं। और याद रखिए पार्टनर्स को कभी रिजेक्ट नहीं किया जाता बल्कि उन्हें रिस्पेक्ट दी जाती है।


लेसन २ : बेचने से पहले बीमारी पकड़ो (डायग्नोसिस बिफोर प्रिस्क्रिप्शन)

क्या आपने कभी किसी ऐसे इंसान को देखा है जो रास्ते में खड़ा होकर सबको बिना मांगे सलाह बांट रहा हो। लोग उसे ज्ञानचंद समझकर इग्नोर कर देते हैं। सेल्स की दुनिया में भी यही होता है। जब आप बिना क्लाइंट की समस्या जाने उसे अपना प्रोडक्ट चिपकाने की कोशिश करते हैं तो आप उसी ज्ञानचंद की तरह दिखते हैं। जेफ थुल कहते हैं कि एक प्रोफेशनल सेल्स पर्सन को एक डॉक्टर की तरह काम करना चाहिए। डॉक्टर कभी भी आपको क्लिनिक में घुसते ही इंजेक्शन नहीं लगा देता। वह पहले चेकअप करता है। वह पूछता है कि दर्द कहां है। वह टेस्ट करवाता है। जब उसे पक्का पता चल जाता है कि बीमारी क्या है तभी वह इलाज शुरू करता है।

लेकिन हमारे यहाँ सेल्स में लोग उलटा चलते हैं। वे क्लाइंट की ऑफिस की दहलीज पार करते ही अपनी प्रेजेंटेशन की पीपीटी खोल देते हैं। वे ऐसे फीचर्स गिनाते हैं जैसे कोई मंत्र पढ़ रहे हों। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि क्लाइंट को उस फीचर की जरूरत है भी या नहीं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप किसी ऐसे इंसान को गंजेपन का तेल बेच रहे हों जिसके सिर पर घने बाल हों। वह आपकी मेहनत की तारीफ तो कर सकता है लेकिन खरीदेगा बिल्कुल नहीं।

हाई स्टेक्स सेल्स में सबसे बड़ी ताकत सवाल पूछने में होती है। जो इंसान सही सवाल पूछता है वही पूरी बातचीत को कंट्रोल करता है। आपको क्लाइंट से ऐसे सवाल करने चाहिए जो उसे यह सोचने पर मजबूर कर दें कि अगर उसने आपकी सर्विस नहीं ली तो उसका कितना नुकसान हो सकता है। इसे बुक में डायग्नोसिस कहा गया है। जब तक आप क्लाइंट के दर्द को इतना बड़ा नहीं कर देते कि वह उसे सह न सके तब तक वह आपकी दवा यानी आपके प्रोडक्ट की कीमत नहीं समझेगा।

कई बार तो ऐसा भी होता है कि डायग्नोसिस करने के बाद आपको पता चलता है कि आपका प्रोडक्ट क्लाइंट के लिए सही नहीं है। एक साधारण सेल्समैन यहाँ भी झूठ बोलकर माल बेचने की कोशिश करेगा। लेकिन एक एक्सेप्शनल सेल्स प्रोफेशनल वहां सच बोल देगा। वह कहेगा कि सर आपको मेरी सर्विस की जरूरत नहीं है। यह सुनकर क्लाइंट को जो झटका लगेगा वह उसे जिंदगी भर के लिए आपका दीवाना बना देगा। उसे लगेगा कि यार यह बंदा ईमानदार है। इसने अपने फायदे के ऊपर मेरी जरूरत को रखा।

यही वह पल होता है जब आप कंपटीशन को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं। जब आप क्लाइंट के साथ बैठकर उसके बिजनेस की मुश्किलों का पोस्टमार्टम करते हैं तो आप उसे एक क्लैरिटी देते हैं। लोग क्लैरिटी के लिए पैसे देते हैं। उन्हें फीचर्स की लिस्ट नहीं चाहिए। उन्हें यह जानना है कि उनका काम आसान कैसे होगा। इसलिए अगली बार जब आप किसी मीटिंग में जाएं तो अपनी बोलने की स्पीड को कम करें और सुनने की क्षमता को बढ़ाएं। जितना गहरा आपका डायग्नोसिस होगा उतना ही आसान आपका प्रिस्क्रिप्शन यानी आपकी सेल होगी। याद रखिए बिना बीमारी जाने इलाज करना सिर्फ तुक्का होता है और बिजनेस तुक्कों पर नहीं भरोसे पर चलता है।


लेसन ३ : जीत का असली मतलब (रिलेशनशिप बियॉन्ड ट्रांजैक्शन)

ज्यादातर सेल्स के लोग एक ऐसी मशीन की तरह काम करते हैं जिसमें एक तरफ से क्लाइंट डालो और दूसरी तरफ से पैसा निकालो। जैसे ही चेक हाथ में आया वे गायब हो जाते हैं जैसे गधे के सिर से सींग। अगर आप भी डील क्लोज होते ही क्लाइंट का फोन उठाना बंद कर देते हैं तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की नींव रख रहे हैं। जेफ थुल का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि सेल खत्म होने पर आपका काम खत्म नहीं होता बल्कि असली रिश्ता वहां से शुरू होता है। सेल्स की दुनिया में असली पैसा एक बार बेचने में नहीं बल्कि बार-बार बेचने में है और वह तभी मुमकिन है जब आपका क्लाइंट आप पर आंख मूंदकर भरोसा करे।

आज के दौर में कंपटीशन इतना ज्यादा है कि हर कोई एक दूसरे का गला काटने को तैयार है। क्लाइंट के पास हजारों ऑप्शन हैं। ऐसे में वह आपके पास ही क्यों टिका रहे। इसका जवाब है आपका कमिटमेंट। एक एक्सेप्शनल सेल्स प्रोफेशनल यह जानता है कि ट्रांजैक्शन यानी पैसों का लेनदेन सिर्फ एक पड़ाव है मंजिल नहीं। वह डील के बाद भी क्लाइंट से जुड़ा रहता है। वह यह चेक करता है कि क्या क्लाइंट को वह रिजल्ट मिल रहा है जिसका उसने वादा किया था। अगर कहीं कोई दिक्कत आती है तो वह भागता नहीं है बल्कि सामने खड़े होकर जिम्मेदारी लेता है।

जरा सोचिए उस दोस्त के बारे में जो आपसे सिर्फ तब बात करता है जब उसे उधार चाहिए हो। आप उसे देखते ही रास्ता बदल लेते होंगे। अब सोचिए उस दोस्त के बारे में जो आपके बुरे वक्त में आपके साथ खड़ा रहा। आप उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाएंगे। सेल्स में भी यही फिलॉसफी काम करती है। जब आप क्लाइंट के साथ एक इमोशनल और प्रोफेशनल बॉन्ड बना लेते हैं तो आप उनके लिए सिर्फ एक वेंडर नहीं बल्कि उनके परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। वे खुद आपके पास नए क्लाइंट्स लेकर आते हैं जिसे हम वर्ड ऑफ माउथ कहते हैं। यह मार्केटिंग की सबसे महंगी और सबसे असरदार फॉर्म है जो आपको फ्री में मिलती है।

हाई स्टेक्स सेल्स में जीत का मतलब सिर्फ टारगेट पूरा करना नहीं है। जीत का मतलब है एक ऐसा नाम बनाना कि जब भी आपके सेक्टर की बात हो तो क्लाइंट सबसे पहले आपका नाम ले। इसके लिए आपको शॉर्ट टर्म लालच को छोड़कर लॉन्ग टर्म वैल्यू पर फोकस करना होगा। कई बार आपको क्लाइंट के भले के लिए अपनी जेब का नुकसान भी सहना पड़ सकता है लेकिन वह नुकसान असल में एक इन्वेस्टमेंट है जो भविष्य में आपको ब्याज समेत वापस मिलेगा।

लोग क्या कहते हैं वह शायद लोग भूल जाएं लेकिन आपने उन्हें कैसा महसूस कराया वह कभी नहीं भूलते। अगर आपने उन्हें जीत का अहसास कराया है तो वे आपको कभी हारने नहीं देंगे। सेल्स का असली जादू बातों में नहीं नियत में होता है। अपनी नियत साफ रखिए क्लाइंट को पार्टनर बनाइए और फिर देखिए कैसे आपकी सेल्स और आपकी इज्जत दोनों रॉकेट की तरह ऊपर जाती हैं।


दोस्तों, सेल्स कोई रॉकेट साइंस नहीं है यह बस इंसान को इंसान की तरह समझने की कला है। अगर आप जेफ थुल के इन लेसन्स को अपनी लाइफ में उतार लेते हैं तो आप सिर्फ एक बेहतर सेल्समैन नहीं बल्कि एक बेहतर इंसान भी बनेंगे। उठिए और आज से ही बेचना बंद कीजिए और मदद करना शुरू कीजिए। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा और आप इनमें से कौन सा लेसन सबसे पहले इस्तेमाल करेंगे। हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं और अपने उस दोस्त के साथ इसे शेयर करें जो अपनी सेल्स बढ़ाना चाहता है। याद रखिए आपकी एक सलाह किसी का करियर बदल सकती है।

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