Executing Your Strategy (Hindi)


अगर आपको लगता है कि सिर्फ दीवार पर एक बड़ा विजन बोर्ड चिपका देने से आपका स्टार्टअप या करियर रॉकेट बन जाएगा, तो बधाई हो, आप अपनी बर्बादी का बहुत सुंदर नक्शा बना रहे हैं। बिना एक्जीक्यूशन के आपकी स्ट्रैटेजी उतनी ही बेकार है जितनी कि जिम की महंगी मेंबरशिप लेने के बाद घर पर बैठकर समोसे खाना।

मार्क मॉर्गन की किताब एक्जीक्यूटिंग योर स्ट्रैटेजी हमें सिखाती है कि आखिर क्यों बड़े बड़े प्लॉन फ्लॉप हो जाते हैं और कैसे आप एक्जीक्यूशन गैप को खत्म करके अपनी स्ट्रैटेजी को हकीकत में बदल सकते हैं। चलिए इन ३ लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : अलाइनमेंट: जब तक सब एक पटरी पर नहीं, गाड़ी नहीं चलेगी

सोचिए आपने एक बहुत ही शानदार वेकेशन प्लॉन किया है। आपने पहाड़ों की लोकेशन चुनी है, गाड़ी बुक की है और होटल भी टॉप क्लास लिया है। लेकिन जैसे ही आप सफर शुरू करते हैं, आपको पता चलता है कि आपका ड्राइवर समंदर के किनारे जाना चाहता है और आपकी बीवी को रेगिस्तान पसंद है। अब आपकी गाड़ी भले ही रोल्स रॉयस हो, लेकिन पहुँचेगी कहीं नहीं। यही हाल आजकल की कंपनियों और हमारे खुद के करियर का है। हम स्ट्रैटेजी तो ऐसी बनाते हैं जैसे कल ही एलन मस्क को पीछे छोड़ देंगे, लेकिन हमारा डेली का काम उस स्ट्रैटेजी से कोसों दूर होता है। मार्क मॉर्गन कहते हैं कि स्ट्रैटेजी और एक्जीक्यूशन के बीच का यह गैप ही वो गड्ढा है जिसमें बड़े बड़े बिजनेस डूब जाते हैं।

अलाइनमेंट का मतलब है कि आपके ऑफिस का चपरासी और कंपनी का CEO, दोनों को पता होना चाहिए कि गोल क्या है। अक्सर होता यह है कि बॉस मीटिंग रूम में बैठकर बड़े बड़े शब्द जैसे सिनर्जी और डिस्रप्शन हवा में उछालते हैं, जबकि बाहर बैठा एम्प्लॉई सिर्फ इस बात की टेंशन में होता है कि शाम की चाय के साथ समोसे मिलेंगे या नहीं। अगर आपके विजन और जमीन पर होने वाले काम के बीच कोई कनेक्शन नहीं है, तो आपकी स्ट्रैटेजी सिर्फ एक महंगा रद्दी का टुकड़ा है। इसे ठीक करने का तरीका है अपनी स्ट्रैटेजी को छोटे छोटे और साफ प्रोजेक्ट्स में तोड़ना। जब तक हर इंसान को यह नहीं पता होगा कि उसके छोटे से काम से कंपनी के बड़े सपने पर क्या असर पड़ रहा है, तब तक कोई भी अपना सौ परसेंट नहीं देगा।

मान लीजिए आपने वजन कम करने की स्ट्रैटेजी बनाई। आपने महंगे जूते खरीदे और इंस्टाग्राम पर मोटिवेशनल कोट भी डाल दिया। यह आपकी स्ट्रैटेजी है। लेकिन एक्जीक्यूशन के टाइम पर आप सुबह ६ बजे अलार्म बजते ही उसे थप्पड़ मार कर सो जाते हैं। यहाँ अलाइनमेंट की कमी है। आपका दिमाग चाहता है फिट होना, लेकिन आपका शरीर चाहता है नींद। जब तक ये दोनों एक ही पेज पर नहीं आएंगे, आपकी फिटनेस स्ट्रैटेजी सिर्फ एक कॉमेडी सर्कस बनकर रह जाएगी। बिजनेस में भी यही होता है। मार्केटिंग टीम कुछ और बेच रही है, सेल्स टीम कुछ और वादा कर रही है और प्रोडक्ट टीम कुछ और ही बना रही है। ऐसी अलाइनमेंट के साथ तो आप सिर्फ सिरदर्द ही एक्जीक्यूट कर पाएंगे, स्ट्रैटेजी नहीं। इसलिए सबसे पहले अपने हर कदम को अपने बड़े गोल के साथ जोड़ना सीखिए।


लेसन २ : मेट्रिक्स: अगर नापोगे नहीं, तो सिर्फ भागते ही रहोगे

ज्यादातर लोग और बिजनेस एक अजीब सी गलतफहमी में जीते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वो बहुत बिजी हैं, तो इसका मतलब है कि वो प्रोग्रेस कर रहे हैं। भाई साहब, गोल गोल घूमने वाला चूहा भी बहुत बिजी होता है, लेकिन वो पहुँचता कहीं नहीं है। मार्क मॉर्गन और रेमंड लेविट अपनी किताब में साफ कहते हैं कि बिना सही मेट्रिक्स के आपका एक्जीक्यूशन अंधेरे में तीर चलाने जैसा है। अगर आप यह नहीं नाप रहे हैं कि कौन सा तीर निशाने पर लगा और कौन सा पड़ोसी की खिड़की तोड़ आया, तो आपकी स्ट्रैटेजी बस एक तुक्का है। अक्सर कंपनियां उन चीजों को नापती हैं जो सुनने में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन असलियत में किसी काम की नहीं होतीं। इसे हम वैनिटी मेट्रिक्स कहते हैं।

मान लीजिए आप एक नया यूट्यूब चैनल शुरू करते हैं। आपकी स्ट्रैटेजी है कि आप भारत के सबसे बड़े इंफ्लुएंसर बनेंगे। अब आप हर दिन इस बात से खुश हो रहे हैं कि आपकी मम्मी और आपके तीन पुराने स्कूल के दोस्तों ने आपका वीडियो लाइक किया है। आप बहुत बिजी हैं, एडिटिंग कर रहे हैं, थंबनेल बना रहे हैं। लेकिन क्या ये लाइक्स आपको आपके गोल तक पहुँचा रहे हैं? शायद नहीं। असली मेट्रिक यह है कि क्या अनजान लोग आपका वीडियो देख रहे हैं? क्या आपका वॉच टाइम बढ़ रहा है? अगर आप सिर्फ अपनी तारीफ सुनने वाले मेट्रिक्स ट्रैक करेंगे, तो आप खुद को धोखा दे रहे हैं। बिजनेस में भी लोग अक्सर रेवेन्यू के पीछे भागते हैं, जबकि असली समस्या उनके प्रॉफिट मार्जिन या कस्टमर रिटेंशन में होती है।

सही मेट्रिक्स वो होते हैं जो आपको सच बताते हैं, भले ही वो सच कड़वा हो। जैसे अगर आपने जिम जाना शुरू किया और आपका वजन कम नहीं हो रहा, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी मशीन खराब है। इसका मतलब है कि आपकी स्ट्रैटेजी और एक्जीक्यूशन के बीच डाइट वाला मेट्रिक फेल हो रहा है। किताब हमें सिखाती है कि हमें की परफॉरमेंस इंडिकेटर्स यानी KPI ऐसे चुनने चाहिए जो सीधे हमारे प्रोजेक्ट की हेल्थ बताएं। अगर प्रोजेक्ट लाल निशान में है, तो उसे मेकअप लगाकर हरा दिखाने की कोशिश मत कीजिए। सच का सामना कीजिए ताकि आप सही समय पर अपनी स्ट्रैटेजी बदल सकें। वरना आप बस मेहनत करते रह जाएंगे और रिजल्ट के नाम पर आपको सिर्फ थकान और पुरानी यादें ही मिलेंगी।


लेसन ३ : चॉइस: सब कुछ पाने के चक्कर में कहीं सब कुछ खो न देना

दुनिया का सबसे बड़ा झूठ यह है कि आप सब कुछ एक साथ कर सकते हैं। मार्क मॉर्गन कहते हैं कि स्ट्रैटेजी असल में यह तय करना नहीं है कि आपको क्या करना है, बल्कि यह तय करना है कि आपको क्या बिल्कुल नहीं करना है। हम में से ज्यादातर लोग 'यस मैन' बन जाते हैं। जैसे ही कोई नया आईडिया आता है, हम अपनी पुरानी स्ट्रैटेजी को लावारिस छोड़कर नए के पीछे भागने लगते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप एक शादी की बुफे लाइन में खड़े हों और पनीर टिक्का प्लेट में रखते ही आपकी नजर दूर रखे गुलाब जामुन पर पड़ जाए। आप पनीर छोड़कर वहां भागते हैं, और अंत में आपके हाथ न पनीर आता है और न ही मीठा। बस धक्का मुक्की और खाली प्लेट बचती है।

एक्जीक्यूशन में चॉइस का मतलब है अपने लिमिटेड रिसोर्सेज, जैसे समय और पैसा, को सही जगह पर झोंकना। अगर आपकी कंपनी दस अलग अलग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है और उनमें से एक भी पूरा नहीं हो रहा, तो आप काम नहीं कर रहे, आप बस रायता फैला रहे हैं। हर नया प्रोजेक्ट एक जिम्मेदारी होता है, जो आपके पुराने और जरूरी प्रोजेक्ट का खून चूसता है। किताब हमें सिखाती है कि हमें अपने प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। हमें उन चीजों को बेरहमी से ना कहना होगा जो हमारे बड़े गोल में फिट नहीं बैठतीं। अगर आप हर चमकती हुई चीज के पीछे भागेंगे, तो आप एक्जीक्यूटिव नहीं, बल्कि एक कंफ्यूज्ड इंसान कहलाएंगे।

मान लीजिए आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। अचानक आपका दोस्त आकर कहता है कि भाई क्रिप्टो में बहुत पैसा है, चलो ट्रेडिंग करते हैं। फिर दूसरा दोस्त कहता है कि एक रील वायरल हो गई है, चलो इंफ्लुएंसर बनते हैं। अगर आप अपनी पढ़ाई छोड़कर इन सब में हाथ डालेंगे, तो एक साल बाद आप सिर्फ बेरोजगार ही नहीं, बल्कि एक बहुत थके हुए बेरोजगार होंगे। एक्जीक्यूशन का मतलब है अपनी चॉइस पर टिके रहना। जब आप 'ना' कहना सीख जाते हैं, तब जाकर आपकी स्ट्रैटेजी को सांस लेने की जगह मिलती है। याद रखिए, एक साथ तीन नावों पर पैर रखने वाला इंसान समंदर पार नहीं करता, वो बस मछलियों का खाना बनता है। अपनी स्ट्रैटेजी को शार्प रखिए और केवल उन प्रोजेक्ट्स को चुनिए जो आपको वाकई जीत दिला सकें।


दोस्तों, स्ट्रैटेजी बनाना केवल पहला कदम है, लेकिन उसे एक्जीक्यूट करना ही वो असली खेल है जो आपको विनर बनाता है। अगर आप भी केवल प्लॉन्स बनाकर थक चुके हैं और अब रिजल्ट्स देखना चाहते हैं, तो आज ही अपने सबसे जरूरी काम को चुनिए और उस पर अलाइनमेंट के साथ काम शुरू कीजिए। अपनी प्रोग्रेस को सही तरीके से नापिए और फालतू की चीजों को 'ना' कहना सीखिए।

क्या आप भी अपनी लाइफ में किसी बड़े प्रोजेक्ट को एक्जीक्यूट करने में स्ट्रगल कर रहे हैं? हमें कमेंट्स में बताएं कि आप कौन सा एक लेसन आज से ही अपनी जिंदगी में लागू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करता है पर करता कुछ नहीं। चलिए साथ मिलकर काम को हकीकत में बदलते हैं।

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