Executive Warfare (Hindi)


क्या आप भी उन मासूम लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि सिर्फ मेहनत से प्रमोशन मिलेगा? बड़े दुख की बात है कि आपके बॉस आपकी मेहनत का हलवा खा रहे हैं और आप सिर्फ प्लेट धो रहे हैं। अगर ऑफिस पॉलिटिक्स की समझ नहीं है तो जल्द ही आप कॉर्पोरेट की बलि चढ़ने वाले हैं।

आज हम डेविड डी अलेसेंड्रो की किताब एग्जीक्यूटिव वारफेयर से वो खतरनाक तरीके सीखेंगे जो आपको ऑफिस का शिकार बनने से बचाएंगे। चलिए जानते हैं करियर की इस लड़ाई को जीतने वाले 3 सबसे जरूरी लेसन।


लेसन १ : अपनी ब्रांड वैल्यू का विज्ञापन खुद कीजिये

क्या आपको भी लगता है कि आपका काम खुद बोलेगा? अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी के कागजों पर खुद साइन कर रहे हैं। कॉर्पोरेट दुनिया में काम बोलता नहीं है उसे बुलवाना पड़ता है। डेविड डी अलेसेंड्रो कहते हैं कि आप सिर्फ एक एम्प्लोयी नहीं हैं बल्कि आप एक प्रोडक्ट हैं। अब जरा सोचिये क्या आपने कभी देखा है कि फेयरनेस क्रीम वाले यह कहें कि हम चुप रहेंगे जिसे गोरा होना होगा वो खुद ढूँढ लेगा? बिल्कुल नहीं। वे चिल्ला चिल्ला कर बताते हैं कि वे क्या कर सकते हैं।

ऑफिस में भी यही खेल चलता है। आप कोने में बैठकर चुपचाप कोडिंग कर रहे हैं या फाइलें निपटा रहे हैं और आपको लगता है कि साल के अंत में बॉस आपके सिर पर ताज रख देगा? भूल जाइये। असलियत में वो ताज उस शर्मा जी के लड़के को मिलेगा जो काम कम करता है और कॉफी मशीन के पास खड़े होकर अपनी छोटी सी अचीवमेंट को ऐसे सुनाता है जैसे उसने चाँद पर झंडा गाड़ दिया हो। यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि आपने क्या किया बल्कि मुद्दा यह है कि लोगों को क्या लगता है कि आपने क्या किया।

मान लीजिये आपने एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट समय से पहले खत्म कर दिया। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला यह कि आप शांति से ईमेल भेज दें। दूसरा यह कि आप मीटिंग में बड़े ही प्यार से यह जिक्र करें कि कैसे आपकी टीम ने आपकी लीडरशिप में इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया। अगर आप खुद अपना ढोल नहीं बजाएंगे तो लोग आपको सिर्फ एक ढोल समझकर बजाते रहेंगे और आगे निकल जाएंगे। ऑफिस में आपकी इमेज एक बेचारे मजदूर की नहीं बल्कि एक ऐसे ब्रांड की होनी चाहिए जिसके बिना कंपनी ठप हो जाएगी।

यह सब सुनने में शायद आपको थोड़ा अजीब लगे लेकिन याद रखिये कि दुनिया उन्ही को याद रखती है जो नजर आते हैं। जो छिपकर काम करते हैं उन्हें सिर्फ एप्रिसिएशन मेल मिलता है और जो दिखकर काम करते हैं उन्हें प्रमोशन का लेटर मिलता है। इसलिए अपनी ब्रांडिंग पर ध्यान दीजिये। अपनी छोटी छोटी जीत का ढिंढोरा ऐसे पीटिये कि सुनने वाले को लगे कि आप ही इस कंपनी के असली हीरो हैं। जब तक आप खुद को कीमती नहीं दिखाएंगे तब तक कोई आपको कीमती नहीं समझेगा।


लेसन २ : ऑफिस पॉलिटिक्स को अपना हथियार बनाइये

अगर आप उन लोगों में से हैं जो कहते हैं कि मुझे इन सब फालतू की पॉलिटिक्स में नहीं पड़ना तो असल में आप यह कह रहे हैं कि मुझे सक्सेसफुल नहीं होना है। डेविड कहते हैं कि ऑफिस एक ऐसी जगह है जहाँ हर कोई अपनी अपनी जंग लड़ रहा है। यहाँ कोई भी आपके लिए रेड कारपेट बिछाकर नहीं बैठा है। अगर आप पॉलिटिक्स को इग्नोर करते हैं तो आप उस हिरण की तरह हैं जो शेर के सामने आँखें बंद करके खड़ा है और सोच रहा है कि शेर उसे नहीं खाएगा क्योंकि वो एक शाकाहारी जानवर है। जंगल में और कॉर्पोरेट ऑफिस में ऐसा बिल्कुल नहीं होता।

पॉलिटिक्स का मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों के पैरों में गड्ढे खोदें बल्कि इसका मतलब है कि आप अपनी पोजीशन को बचाना और बढ़ाना सीखें। मान लीजिये आपका कोई सहकर्मी आपकी बुराई बॉस के कान में कर रहा है। अब आपके पास फिर से दो रास्ते हैं। या तो आप घर जाकर अपनी किस्मत को कोसें या फिर आप भी अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करके अपनी अच्छी इमेज और उस सहकर्मी की असलियत बॉस तक पहुँचने दें। यहाँ सारा खेल इन्फ्लुएंस का है। जो जितना ज्यादा लोगों को प्रभावित कर सकता है वो उतना ही बड़ा खिलाड़ी है।

ऑफिस में दोस्ती बहुत सोच समझकर कीजिये। यहाँ हर कोई आपसे मुस्कुराकर बात करेगा क्योंकि उसे आपसे कोई काम निकलवाना है। जैसे ही काम खत्म आपकी वैल्यू भी खत्म। इसलिए आपको भी अपनी वफादारी का सिक्का बहुत संभलकर खर्च करना चाहिए। अगर आप सबको खुश करने की कोशिश करेंगे तो आप किसी को भी खुश नहीं कर पाएंगे और अंत में अकेले रह जाएंगे। अपनी एक ऐसी टीम या एक ऐसा ग्रुप बनाइये जो संकट के समय आपके साथ खड़ा हो।

याद रखिये ऑफिस एक शतरंज की बिसात है। यहाँ हर चाल बहुत सोच समझकर चलनी पड़ती है। कभी कभी आपको पीछे हटना पड़ता है ताकि आप बाद में लंबी छलांग लगा सकें। अगर आप सीधे बने रहेंगे तो लोग आपको टेढ़ा कर देंगे। इसलिए थोड़े चालाक बनिये और ऑफिस के माहौल को भांपना सीखिए। जो इंसान यह समझ जाता है कि ऑफिस में असली पावर किसके हाथ में है और उस पावर को कैसे अपनी तरफ मोड़ना है वही इंसान असल में करियर की रेस जीतता है। मेहनत तो गधा भी करता है लेकिन नाम हमेशा घोड़े का होता है क्योंकि उसे पता है कि रेस कहाँ जीतनी है।


लेसन ३ : वफादारी का चश्मा उतारकर खुद पर इन्वेस्ट कीजिये

क्या आपको भी लगता है कि जिस कंपनी के लिए आप दिन-रात एक कर रहे हैं, वो आपके बुढ़ापे का सहारा बनेगी? अगर हाँ, तो शायद आपने अभी तक दुनिया का सबसे बड़ा झूठ सच मान लिया है। डेविड कहते हैं कि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में 'वफादारी' जैसी कोई चीज नहीं होती। कंपनी के लिए आप सिर्फ एक नंबर हैं और जिस दिन वो नंबर उनके फायदे से कम होगा, उसी दिन आपको पिंक स्लिप थमा दी जाएगी। इसलिए, वफादारी निभानी है तो अपनी स्किल्स और अपने भविष्य से निभाइए।

जरा सोचिये, क्या कंपनी ने कभी आपसे पूछा है कि आपका घर का किराया कैसे चलेगा जब वो आपको ले-ऑफ करेंगे? नहीं न। फिर आप क्यों अपनी सेहत और अपने परिवार का टाइम उस डेस्क पर कुर्बान कर रहे हैं जहाँ आपकी जगह भरने में उन्हें मात्र चौबीस घंटे लगेंगे। यहाँ मुद्दा काम चोरी का नहीं है, बल्कि स्मार्ट होने का है। काम उतना ही कीजिये जितना जरूरी है और बाकी का वक्त अपनी स्किल्स को अपग्रेड करने में लगाइये। अगर आज आप कंपनी छोड़ते हैं, तो क्या आपके पास इतना टैलेंट है कि दूसरी कंपनी आपको हाथों-हाथ उठा ले?

अक्सर लोग एक ही पोजीशन पर सालों तक चिपक कर बैठे रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कंपनी उन्हें बहुत प्यार करती है। यह प्यार नहीं, बल्कि आपका डर है। आप उस हाथी के बच्चे की तरह हैं जिसे पतली रस्सी से बांधा गया है और अब आप बड़े होकर भी उसे तोड़ना नहीं चाहते। ऑफिस के कॉरिडोर में दोस्त बनाना अच्छी बात है, लेकिन उन दोस्तों के चक्कर में अपनी ग्रोथ मत रोकिये। अगर आपको बेहतर अवसर मिल रहा है, तो बिना पलक झपकाए उसे पकड़ लीजिये।

याद रखिये, आपकी असली एसेट आपकी डिग्री या आपका ऑफिस डेस्क नहीं है, बल्कि आपकी मार्केट वैल्यू है। जिस दिन आपने खुद को सीखना बंद कर दिया, समझ लीजिये आपने अपनी कब्र खुद खोद ली। अपनी तलवार की धार हमेशा तेज रखिये ताकि जब भी युद्ध का बिगुल बजे, आप तैयार रहें। वफादार बनिए, लेकिन अपने करियर के प्रति। जब आप खुद को वैल्यू देंगे, तभी दुनिया आपको वैल्यू देगी।


एग्जीक्यूटिव वारफेयर कोई आम लड़ाई नहीं है, यह आपके अस्तित्व की जंग है। डेविड डी अलेसेंड्रो के ये रूल्स आपको सिर्फ एक अच्छा एम्प्लोयी नहीं, बल्कि एक शातिर खिलाड़ी बनाना सिखाते हैं। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप वही मासूम शिकार बने रहना चाहते हैं जिसे हर कोई इस्तेमाल करके चला जाता है? या फिर आप वो शिकारी बनना चाहते हैं जो अपनी शर्तों पर अपना साम्राज्य खड़ा करता है?

आज ही एक छोटा सा कदम उठाइये। अपनी स्किल्स को पहचानिये, अपना नेटवर्क बनाइये और सबसे जरूरी, अपनी ब्रांडिंग शुरू कीजिये। यह करियर आपका है, यह जिंदगी आपकी है, तो इसके नियम भी आपके ही होने चाहिए। उठिये और इस जंग को जीत लीजिये क्योंकि जीतता वही है जो लड़ना जानता है।

अगर आपको यह आर्टिकल अपनी लाइफ से जुड़ा हुआ लगा, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो ऑफिस में दिन-रात गधों की तरह मेहनत कर रहा है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको ऑफिस पॉलिटिक्स का सबसे बुरा अनुभव क्या रहा है? चलिए मिलकर एक-दूसरे की मदद करते हैं।

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