क्या आप भी उस परफेक्ट मोमेंट का इंतजार कर रहे है जो कभी आएगा ही नहीं। मुबारक हो आप अपनी लाइफ को बर्बाद करने के सबसे सेफ रास्ते पर है। जबकि दुनिया फेल होकर आगे निकल रही है आप अभी भी प्लान बनाने में ही बिजी है। बिना हारे जीतने का सपना देखना बंद कीजिए।
आज हम रायन बेबिनेक्स और जॉन क्रुम्बोल्ट्ज की बुक फेल फास्ट फेल ऑफन से सीखेंगे कि कैसे हारना असल में जीतने का सबसे तेज तरीका है। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन्स को गहराई से समझते है जो आपकी लाइफ बदल देंगे।
लेसन १ : परफेक्ट मोमेंट का भूत और छोटे एक्शन की पावर
हम में से ज्यादातर लोग एक ऐसी बीमारी से जूझ रहे है जिसे साइकोलॉजी में एनालिसिस पैरालिसिस कहते है। मतलब इतना सोचना कि दिमाग जाम हो जाए और हाथ पैर चलना बंद कर दे। आप भी शायद उन्ही लोगो में से है जो अपना नया बिजनेस या नया प्रोजेक्ट तब शुरू करेंगे जब सितारे सही जगह होंगे, बैंक बैलेंस एकदम परफेक्ट होगा और मौसम सुहाना होगा। सच तो यह है कि वह परफेक्ट मोमेंट कभी नहीं आता। वह बस एक बहाना है जो आपने खुद को काम न करने के लिए दिया है। ऑथर कहते है कि बड़े बड़े सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन उन सपनो को हकीकत बनाने के लिए छोटे और घटिया एक्शन लेना उससे भी बड़ी बात है।
मान लीजिए आपको गिटार सीखना है। अब आप हफ्तों तक यूट्यूब पर बेस्ट गिटार के रिव्यु देख रहे है, म्यूजिक थ्योरी पढ़ रहे है और दुनिया के सबसे अच्छे टीचर की तलाश कर रहे है। आप सोच रहे है कि जब आपके पास १० हजार वाला गिटार होगा तभी आप पहली धुन बजाएंगे। यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। असली प्रोग्रेस तब होती है जब आप किसी दोस्त का पुराना गिटार मांगते है और पहले दिन अपनी उंगलियाँ दुखाते है। वह पहला बेसुरा नोट ही आपकी असली जीत है। छोटे एक्शन लेने का फायदा यह है कि इसमें रिस्क कम होता है। अगर आप फेल भी हुए, तो सिर्फ १५ मिनट खराब होंगे, १५ साल नहीं।
इंडियन घरों में अक्सर हमें सिखाया जाता है कि जो भी करो परफेक्ट करो वरना मत करो। इसी चक्कर में हमारी जनरेशन कुछ नया ट्राई करने से ही डरती है। हमें लगता है कि अगर पहली बार में फेल हो गए तो लोग क्या कहेंगे। ऑथर यहाँ बड़े ही प्यार से समझाते है कि फेलियर कोई दुश्मन नहीं है। वह तो एक टीचर है जो आपको फ्री में कोचिंग दे रहा है। जब आप छोटे छोटे स्टेप्स लेते है, तो आपका दिमाग डरना बंद कर देता है। उसे लगता है कि चलो यह तो छोटा सा काम है, इसे तो कर ही सकते है। और यही छोटे छोटे कदम धीरे धीरे एक बड़ा पहाड़ चढ़ने में मदद करते है।
तो अपनी उस पुरानी डायरी को बाहर निकालिए जिसमे आपने ५ साल पहले अपना मास्टर प्लान लिखा था। उस पर जमी धूल झाड़िए और देखिए कि आज आप कौन सा सबसे छोटा काम कर सकते है। चाहे वह सिर्फ एक फोन कॉल करना हो या गूगल पर ५ मिनट की रिसर्च। बस शुरू कीजिए। याद रखिए, एक चलती हुई खराब गाड़ी को मोड़ना आसान है, लेकिन एक खड़ी हुई फरारी को धक्का देना भी मुश्किल होता है। जब आप मोशन में होते है, तभी आप अपनी दिशा बदल सकते है। इसलिए परफेक्ट बनने की जिद छोड़िए और थोडा सा फेल होने की हिम्मत जुटाइए।
यह लेसन आपको एक्शन मोड में लाने के लिए काफी है, क्योंकि जब आप रुकते है तो सिर्फ जंग लगती है, प्रोग्रेस नहीं।
लेसन २ : फेलियर कोई अंत नहीं बल्कि कीमती डेटा है
पिछले लेसन में हमने समझा कि छोटे कदम उठाना क्यों जरूरी है। लेकिन जब आप कदम उठाएंगे, तो जाहिर है कि आप गिरेंगे भी। यहाँ एंट्री होती है हमारे सबसे बड़े डर की जिसे हम फेलियर कहते है। ऑथर रायन और जॉन एक बहुत ही मजेदार बात कहते है। वह कहते है कि फेलियर को एक पर्सनल हार की तरह मत देखो। इसे एक साइंटिस्ट की तरह देखो जो लैब में एक्सपेरिमेंट कर रहा है। जब एक साइंटिस्ट का कोई फार्मूला काम नहीं करता, तो वह रोने नहीं बैठता कि मेरी तो किस्मत ही खराब है। वह बस अपनी नोटबुक निकालता है और लिखता है कि यह तरीका काम नहीं कर रहा, अब कुछ और ट्राई करते है।
यही वह डेटा है जिसकी कीमत करोड़ों में है। मान लीजिए आपने एक नया स्टार्टअप शुरू किया और आपने सोचा कि लोग आपका बनाया हुआ समोसा पास्ता बहुत पसंद करेंगे। आपने दुकान खोली और एक भी ग्राहक नहीं आया। अब आपके पास दो रास्ते है। या तो आप यह मान ले कि आप एक लूजर है और चुपचाप अपनी पुरानी नौकरी पर लौट जाए। या फिर आप उस दिन को एक डेटा की तरह देखे। आप सोचे कि क्या दुकान की लोकेशन गलत थी। क्या पास्ता में नमक ज्यादा था। या फिर शायद दुनिया अभी इस महान डिश के लिए तैयार ही नहीं है। यह जानकारी आपको तभी मिली जब आपने फेल होने का रिस्क लिया।
इंडिया में तो फेलियर को लेकर ऐसा माहौल बनाया जाता है जैसे आपने कोई क्राइम कर दिया हो। पडोसी और रिश्तेदार ऐसे देखते है जैसे आपकी लाइफ अब खत्म हो चुकी है। लेकिन हकीकत में, जो इंसान कभी फेल नहीं हुआ, उसने कभी कुछ नया सीखा ही नहीं। वह बस एक सेफ जोन में रहकर अपनी जिंदगी काट रहा है। ऑथर कहते है कि जितनी जल्दी आप फेल होंगे, उतनी ही जल्दी आपको वह रास्ता मिल जाएगा जो आपको सक्सेस तक ले जाएगा। इसलिए किताब का नाम ही है फेल फास्ट। मतलब जल्दी से हार मान लो ताकि आप अपना टाइम और पैसा बचा सके और अगले बेहतर आइडिया पर काम कर सके।
सोचिए अगर थॉमस एडिसन पहले १० फेलियर्स के बाद हार मान लेते। वह १० हजार बार फेल हुए थे। लेकिन उन्होंने इसे फेलियर नहीं कहा। उन्होंने कहा कि मुझे १० हजार ऐसे तरीके पता चले है जिनसे बल्ब नहीं बनाया जा सकता। यही एटीट्यूड आपको एक आम इंसान से एक लेजेंड बनाता है। जब आप फेलियर को डेटा की तरह देखने लगते है, तो आपका इमोशनल बोझ हल्का हो जाता है। आप रिस्क लेने से डरते नहीं है क्योंकि आपको पता है कि हर हार आपको जीत के एक कदम और करीब ला रही है।
इसलिए अगली बार जब कोई आपसे कहे कि आप फेल हो गए है, तो मुस्कुराइए और कहिए कि नहीं, मुझे बस एक नया डेटा मिला है। यह नजरिया आपको उस प्रेशर से आजाद कर देगा जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है। जब आप गिरने के डर से मुक्त हो जाते है, तभी आप असल में उड़ना शुरू करते है। और याद रखिए, मजे की बात तो तब है जब आप इस प्रोसेस को एन्जॉय करना सीख जाए, जिसके बारे में हम अगले लेसन में बात करेंगे।
लेसन ३ : मजे के लिए काम करना और एक्सपेरिमेंट की ताकत
पिछले दो लेसन्स में हमने एक्शन लेने और फेलियर से डेटा निकालने की बात की। लेकिन यह सब बोझिल लग सकता है अगर इसमें मजा न हो। ऑथर कहते है कि हम अक्सर किसी काम को इसलिए शुरू करते है क्योंकि हमें उसका रिजल्ट चाहिए होता है, जैसे पैसा या शोहरत। लेकिन इस चक्कर में हम उस काम को एन्जॉय करना भूल जाते है। जब आप सिर्फ रिजल्ट के बारे में सोचते है, तो आप रिस्क लेने से डरते है। लेकिन जब आप मजे के लिए या सिर्फ यह देखने के लिए काम करते है कि क्या होगा, तो आप एक रिसर्चर बन जाते है। यही वह स्टेट है जहाँ असली क्रिएटिविटी जन्म लेती है और बड़े बड़े अविष्कार होते है।
कल्पना कीजिए कि आप एक कुकिंग कॉम्पिटिशन में है जहाँ हारने पर आपको सजा मिलेगी। आप डरे डरे वही पुरानी दाल बनाएंगे जो आपको आती है। लेकिन अब सोचिए कि आप घर पर अकेले है और बस टाइम पास के लिए कुछ नया ट्राई कर रहे है। आप चॉकलेट में मिर्च डाल देते है या मैगी में दही। यहाँ आप मजे ले रहे है। और हो सकता है कि इसी मजाक मजाक में आपको दुनिया की सबसे बेस्ट रेसिपी मिल जाए। सक्सेसफुल लोग भी यही करते है। वह अपनी लाइफ को एक बड़ा प्लेग्राउंड समझते है। वह हर दिन कुछ नया एक्सपेरिमेंट करते है क्योंकि उन्हें उस प्रोसेस में आनंद आता है।
हमारी इंडियन वर्क कल्चर में मजा शब्द को काम का दुश्मन माना जाता है। अगर आप काम के वक्त हंस रहे है या मजे ले रहे है, तो बॉस को लगता है कि आप सीरियस नहीं है। लेकिन असलियत इसके ठीक उलट है। जब आप खुश होकर काम करते है, तो आपका दिमाग ज्यादा खुला होता है और आप बेहतर डिसीजन लेते है। ऑथर हमें सलाह देते है कि अपनी लाइफ में प्लेफुलनेस लाइए। ऐसी चीजें ट्राई कीजिए जो आपके करियर से जुड़ी न हो। शायद एक डांस क्लास या एक नई भाषा सीखना। यह छोटी चीजें आपके दिमाग के नए हिस्से खोलती है और आपको उन प्रॉब्लम्स के सोल्यूशन दे देती है जिनसे आप ऑफिस में जूझ रहे थे।
अंत में, यह बुक हमें बस एक ही बात सिखाती है कि लाइफ कोई फाइनल एग्जाम नहीं है जिसे आपको टॉप करना है। यह तो एक फिल्म की तरह है जिसे आपको बस अच्छे से जीना है। फेल होना, गिरना, फिर से उठना और हर बार कुछ नया सीखना ही असली जीत है। तो आज ही अपनी उस सीरियस वाली मास्क को उतारिए और थोडा सा रिस्क लीजिए। थोडा सा फेल होइए। और यकीन मानिए, इस प्रोसेस में आपको जो मजा आएगा, वह किसी भी मेडल या प्रमोशन से कहीं बढ़कर होगा।
अगर आप भी अब तक फेल होने के डर से रुके हुए थे, तो आज ही एक छोटा सा और घटिया सा स्टेप लीजिए। कमेंट्स में हमें बताइए कि वह कौन सा काम है जो आप सिर्फ फेल होने के डर से नहीं कर रहे थे। चलिए साथ मिलकर फेल होते है और जीत की तरफ अपना पहला कदम बढ़ाते है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो बहुत ज्यादा सोचता है और कुछ करता नहीं। शायद उसका भी भला हो जाए।
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