क्या आप अभी भी अपनी पुरानी गलतियों को छुपाकर खुद को बहुत स्मार्ट समझ रहे हैं। बधाई हो आप अपनी बर्बादी का प्रीमियम सब्स्क्रिप्शन लेकर बैठे हैं। आपकी यही ईगो आपको लाइफ की रेस में पीछे धकेल रही है क्योंकि आप सच का सामना करने से डरते हैं।
आज हम मैथ्यू सैयद की बुक ब्लैक बॉक्स थिंकिंग से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो दुनिया के टॉप लीडर्स और सफल लोग इस्तेमाल करते हैं। चलिए देखते हैं वह ३ लेसन जो आपकी सोच का तरीका बदल देंगे।
लेसन १ : फेलियर को गले लगाना सीखो वरना लाइफ आपकी ले लेगी
देखिये बॉस हम सब एक ऐसे समाज में पले बढ़े हैं जहाँ गलती करना मतलब पाप माना जाता है। स्कूल में टेस्ट में नंबर कम आए तो टीचर ऐसे देखती थी जैसे हमने कोई मर्डर कर दिया हो। और घर पर पापा का चेहरा देखकर तो लगता था कि अब सीधा जायदाद से बेदखल ही होंगे। इसी चक्कर में हमने एक बहुत ही खतरनाक हुनर सीख लिया है और वह है अपनी गलतियों को कालीन के नीचे छुपाना। हम अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय बहाने बनाने में गोल्ड मेडल जीत लेते हैं। लेकिन मैथ्यू सैयद कहते हैं कि अगर आप अपनी गलती को एक्सेप्ट नहीं कर सकते तो आप कभी ग्रो भी नहीं कर सकते।
इस बात को समझने के लिए एविएशन इंडस्ट्री यानी हवाई जहाज वाली दुनिया और मेडिकल फील्ड की तुलना करते हैं। जब कोई प्लेन क्रैश होता है तो सबसे पहले उस काले डिब्बे यानी ब्लैक बॉक्स को ढूंढा जाता है। वह डिब्बा चीख चीख कर बताता है कि पायलट ने कहाँ गड़बड़ की या इंजन में क्या खराबी थी। पूरी दुनिया के पायलट्स उस एक गलती से सीखते हैं ताकि दोबारा वैसा हादसा न हो। यहाँ गलती को बेइज्जती नहीं बल्कि डेटा माना जाता है। अब जरा हमारे डॉक्टर्स और अस्पतालों की बात करते हैं। वहां अगर किसी मरीज की जान डॉक्टर की छोटी सी लापरवाही से चली जाए तो अक्सर उसे ढक दिया जाता है। कोई यह नहीं कहता कि मुझसे गलती हुई बल्कि उसे भगवान की मर्जी बताकर फाइल बंद कर दी जाती है। नतीजा यह होता है कि वही गलती दूसरा डॉक्टर भी दोहराता है और लोग मरते रहते हैं।
यही हाल आपकी और मेरी लाइफ का है। मान लीजिये आपने कोई नया बिजनेस शुरू किया और वह बुरी तरह पिट गया। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह कि आप अपनी किस्मत को कोसें या कहें कि मार्केट खराब था। यह वही डॉक्टर वाली अप्रोच है जहाँ आप सच से मुंह मोड़ रहे हैं। दूसरा रास्ता है ब्लैक बॉक्स थिंकिंग अपनाना। खुद से पूछिए कि क्या मैंने रिसर्च कम की थी। क्या मेरा प्रोडक्ट बेकार था। जब आप अपनी हार का पोस्टमार्टम करते हैं तब आपको वह असली हीरा मिलता है जिसे एक्सपीरियंस कहते हैं।
सच तो यह है कि आपकी ईगो आपकी सबसे बड़ी दुश्मन है। हम सबको लगता है कि हम परफेक्ट हैं। हमें अपनी इमेज की इतनी फिक्र होती है कि हम यह भूल जाते हैं कि हर महान इंसान असल में एक प्रोफेशनल लूजर रह चुका है। वह बस हारने के बाद रोया नहीं बल्कि उसने यह देखा कि वह हारा क्यों। अगर आप अपनी छोटी सी गलती छुपा रहे हैं तो समझ लीजिये कि आप अपनी अगली बड़ी कामयाबी का रास्ता खुद बंद कर रहे हैं। लाइफ आपको थप्पड़ मारेगी और वह थप्पड़ बहुत जरूरी है। उस दर्द को महसूस कीजिये और देखिये कि निशाना कहाँ चूका। वरना आप उम्र भर बस हाथ मलते रह जाएंगे और लोग आपसे आगे निकल जाएंगे।
गलती करना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन उस गलती को बार बार दोहराना और उससे कुछ न सीखना असली बेवकूफी है। अपनी हार को अपनी पहचान मत बनाइये बल्कि उसे अपना सबसे बड़ा टीचर बनाइये। जब आप अपनी गलतियों का सामना करना शुरू कर देते हैं तब आपके अंदर का डर खत्म हो जाता है। और जिस दिन डर खत्म हो गया उस दिन आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। तो अगली बार जब आप फेल हों तो छुपने के बजाय एक डायरी उठाइए और लिख डालिए कि आपने क्या रायता फैलाया है। यकीन मानिए यह आपकी लाइफ का सबसे टर्निंग पॉइंट होगा।
लेसन २ : सिस्टम की बैंड बजाओ इंसान की नहीं
अक्सर जब ऑफिस में या घर पर कोई काम बिगड़ता है तो हमारा सबसे पहला रिएक्शन क्या होता है। हम सीधा चिल्लाते हैं कि यह किसने किया। किसकी वजह से यह नुकसान हुआ। हम उस इंसान को ढूंढकर उसे सूली पर चढ़ाने के लिए तैयार हो जाते हैं। मैथ्यू सैयद कहते हैं कि यहीं हम सबसे बड़ी गलती कर देते हैं। हम इंसान को निशाना बनाते हैं जबकि असली विलेन तो वह सिस्टम होता है जिसमें वह इंसान काम कर रहा है। अगर आप सिर्फ इंसान को डांटकर छोड़ देंगे तो यकीन मानिए वही गलती कल कोई और भी करेगा। क्योंकि आपने जड़ को तो छुआ ही नहीं बस पत्तों को झाड़कर खुश हो गए।
सोचिये एक कंपनी है जहाँ हर हफ्ते कोई न कोई फाइल गुम हो जाती है। मैनेजर हर बार चपरासी को बुलाकर उसकी क्लास लगाता है और उसे नौकरी से निकालने की धमकी देता है। चपरासी डर के मारे दो दिन ठीक काम करता है और तीसरे दिन फिर वही हाल। अब यहाँ प्रॉब्लम चपरासी की नीयत नहीं बल्कि वह अलमारी है जहाँ फाइलें रखी जाती हैं। वहां कोई लेबल नहीं है कोई ढंग का अरेंजमेंट नहीं है। अगर मैनेजर चपरासी पर चिल्लाने के बजाय एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बना दे तो फाइल कभी गुम ही नहीं होगी। इसे कहते हैं सिस्टम को ठीक करना। जब आप सिस्टम को फुलप्रूफ बना देते हैं तो इंसान की छोटी सी चूक भी बड़ा हादसा नहीं बनने पाती।
हवाई जहाज उड़ाने वाले पायलट्स के पास एक चेकलिस्ट होती है। चाहे पायलट दुनिया का सबसे अनुभवी इंसान ही क्यों न हो वह उड़ान भरने से पहले उस लिस्ट के हर पॉइंट को चेक करता है। यह सिस्टम इसलिए बनाया गया क्योंकि इंसान का दिमाग कभी भी भटक सकता है। उसे कल रात की मूवी या सुबह का झगड़ा याद आ सकता है। लेकिन चेकलिस्ट कभी कुछ नहीं भूलती। हमारी लाइफ में भी यही कमी है। हम अपनी याददाश्त पर बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं और जब हम कुछ भूल जाते हैं तो खुद को कोसते हैं। अरे भाई खुद को कोसना बंद करो और एक ऐसा सिस्टम बनाओ जो आपको भूलने ही न दे।
अगर आप जिम नहीं जा पा रहे हैं तो खुद को आलसी बोलना बंद कीजिये। शायद आपका सिस्टम खराब है। शायद आपने अपने कपड़े ऐसी जगह रखे हैं जहाँ से उन्हें निकालना एक बड़ा टास्क है। अगर आप रात को अलार्म बजने पर उसे बंद करके सो जाते हैं तो फोन को अपने हाथ के पास मत रखिये। उसे कमरे के दूसरे कोने में रखिये ताकि आपको उठकर जाना ही पड़े। यह एक छोटा सा सिस्टम चेंज है जो आपकी लाइफ बदल सकता है। जब आप लोगों को ब्लेम करना बंद कर देते हैं और प्रोसेस पर फोकस करते हैं तब आप एक असली लीडर बनते हैं।
अपनी लाइफ का एक ब्लैक बॉक्स बनाइये जहाँ आप यह देख सकें कि बार बार कहाँ रुकावट आ रही है। क्या आपकी सुबह की रूटीन खराब है या आपके काम करने का तरीका। जब आप सिस्टम को ठीक करेंगे तो रिजल्ट अपने आप मिलने लगेंगे। याद रखिये इंसान को बदलना मुश्किल है लेकिन एक बेहतर सिस्टम बनाना आपके हाथ में है। जो लोग सिस्टम की कमियों को पकड़ लेते हैं वह दुनिया पर राज करते हैं और जो सिर्फ दूसरों पर उंगली उठाते हैं वह बस मैनेजर बनकर रह जाते हैं। अब आप तय कीजिये कि आपको क्या बनना है।
लेसन ३ : मार्जिनल गेन्स की पावर और छोटी जीत का जादू
क्या आपको लगता है कि बड़ी कामयाबी पाने के लिए कोई बहुत बड़ा धमाका करना पड़ता है। अगर हाँ, तो आप भी उसी गलतफहमी का शिकार हैं जिसमें दुनिया के ९९ परसेंट लोग जी रहे हैं। हम सबको लगता है कि रातों-रात किस्मत चमकेगी और हम अर्श से फर्श पर पहुँच जाएंगे। लेकिन असली खेल तो छोटे-छोटे बदलावों में छिपा है जिसे मैथ्यू सैयद 'मार्जिनल गेन्स' कहते हैं। यह कॉन्सेप्ट कहता है कि अगर आप अपनी लाइफ के हर छोटे हिस्से में सिर्फ १ परसेंट सुधार कर लें, तो उनका कुल असर इतना खतरनाक होगा कि आप खुद को पहचान नहीं पाएंगे। यह वैसा ही है जैसे आप रोज एक ईंट रखते हैं और एक दिन बिना शोर मचाए महल खड़ा हो जाता है।
इस बात को समझने के लिए ब्रिटिश साइकिलिंग टीम की कहानी देखते हैं। सालों तक इस टीम का हाल इतना बुरा था कि साइकिल बनाने वाली कंपनियां उन्हें अपनी साइकिल तक बेचने से मना कर देती थीं ताकि उनका ब्रांड खराब न हो। फिर आए सर डेव ब्रेल्सफोर्ड। उन्होंने कोई जादू नहीं किया। उन्होंने बस छोटी-छोटी चीजों को पकड़ा। उन्होंने साइकिल की सीट को थोड़ा आरामदायक बनाया, टायरों पर बेहतर ग्रिप के लिए अल्कोहल रगड़ा और यहाँ तक कि एथलीट्स के लिए सबसे अच्छे तकिये और गद्दे ढूंढे ताकि उन्हें नींद अच्छी आए। लोगों ने उनका मजाक उड़ाया कि यह छोटी बातें क्या बदलेंगी। लेकिन नतीजा यह हुआ कि अगले कुछ ही सालों में उस टीम ने ओलंपिक और टूर डी फ्रांस में मेडल की लाइन लगा दी।
हम अपनी लाइफ में भी यही गलती करते हैं। हम सोचते हैं कि जब तक हमें १ लाख की लॉटरी नहीं लगेगी, हम अमीर नहीं बनेंगे। जबकि असली अमीरी रोज के १०० रुपये बचाने और उन्हें सही जगह लगाने में है। हम सोचते हैं कि एक दिन में १० घंटे पढ़कर हम टॉपर बन जाएंगे, जबकि टॉपर वह बनता है जो रोज सिर्फ ३० मिनट बिना फोन छुए पढ़ता है। आपकी लाइफ की छोटी-छोटी कमियां ही वह लीकेज हैं जो आपके सक्सेस के घड़े को कभी भरने नहीं देतीं। अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो जिम में पहले दिन पसीना बहाने से ज्यादा जरूरी है कि आप अपनी डाइट से वह एक एक्स्ट्रा बिस्किट हटा दें।
जब आप इन छोटे सुधारों को अपनी गलतियों से जोड़ते हैं, तो एक मैजिक होता है। मान लीजिये आप पब्लिक स्पीकिंग में कमजोर हैं। अब आप एक दिन में महान वक्ता नहीं बन सकते। लेकिन आप अपनी पिछली स्पीच का ब्लैक बॉक्स खोलकर देख सकते हैं कि आपने कहाँ गड़बड़ की। क्या आपकी बॉडी लैंग्वेज खराब थी। क्या आपकी आवाज कम थी। बस उस एक चीज को अगले दिन १ परसेंट बेहतर कीजिये। यही छोटा सा कदम आपको भीड़ से अलग कर देगा। दुनिया आपको देख रही है और वह चाहती है कि आप बड़े-बड़े वादे करें और फेल हो जाएं। लेकिन आप चुपचाप अपनी कमियों को सुधारते रहिये।
अंत में, यह समझ लीजिये कि सक्सेस कोई डेस्टिनेशन नहीं है बल्कि एक प्रोसेस है। ब्लैक बॉक्स थिंकिंग का मतलब सिर्फ बड़े हादसों से सीखना नहीं है, बल्कि अपनी डेली लाइफ की छोटी-छोटी चूकों को पकड़ना भी है। जब आप अपनी ईगो को साइड में रखकर अपनी छोटी गलतियों का पोस्टमार्टम करते हैं, तब आप असल में ग्रो करते हैं। आपकी हार आपकी दुश्मन नहीं, बल्कि वह सीढ़ी है जो आपको ऊपर ले जाएगी। बस शर्त यह है कि आप उस सीढ़ी पर चढ़ने की हिम्मत दिखाएं और हर दिन खुद का एक बेहतर वर्जन तैयार करें। अब बहाने बनाना छोड़िये और अपनी गलतियों से वह लेसन लीजिये जो आपको जीत की तरफ ले जाए।
अगर आप भी अपनी गलतियों को छुपाने के बजाय उनसे सीखना चाहते हैं, तो आज ही अपनी एक पुरानी गलती को नीचे कमेंट्स में शेयर करें और बताएं कि आपने उससे क्या सीखा। आपकी एक छोटी सी ईमानदारी किसी और की लाइफ बदल सकती है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो हमेशा अपनी किस्मत को कोसते रहते हैं। चलिए, साथ मिलकर अपनी लाइफ का ब्लैक बॉक्स खोलते हैं।
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