Five Minds for the Future (Hindi)


अगर आपको लगता है कि सिर्फ एक डिग्री लेकर आप आने वाले कल के किंग बन जाएंगे तो भाई आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। बिना इन पांच दिमागों के आप कल के मार्केट में एक पुराने कबाड़ की तरह बेकार हो जाएंगे। दुनिया बदल रही है और आप अभी भी पुराने ढर्रे पर सो रहे हैं। क्या सच में आपको अपनी नाकामयाबी पर इतना गर्व है या बस हारने का इंतज़ार कर रहे हैं।

आज के इस ब्लॉग में हम हॉवर्ड गार्डनर की किताब फाइव माइंड्स फॉर द फ्यूचर से उन पांच खास दिमागों के बारे में जानेंगे जो आपको भीड़ से अलग करेंगे। चलिए इन तीन सबसे जरूरी लेसन्स को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : डिसिप्लिन माइंड: सिर्फ मास्टर ही टिकेंगे, बाकी सब बिकेंगे

आजकल के दौर में हर किसी को इंस्टेंट नूडल्स की तरह तुरंत सक्सेस चाहिए। लेकिन हॉवर्ड गार्डनर कहते हैं कि अगर आपके पास डिसिप्लिन माइंड नहीं है, तो आप उस मोबाइल ऐप की तरह हैं जो डाउनलोड तो होता है पर दो दिन बाद अनइंस्टॉल कर दिया जाता है। डिसिप्लिन माइंड का मतलब सिर्फ सुबह चार बजे उठकर ठंडे पानी से नहाना नहीं है। इसका असली मतलब है अपनी फील्ड में इतनी गहराई तक उतर जाना कि लोग आपको उस काम का खुदा मानने लगें।

जरा सोचिए, आप एक ऐसे डॉक्टर के पास जाते हैं जिसने मेडिकल की पढ़ाई सिर्फ रील देखते हुए की है। क्या आप उसे अपना इलाज करने देंगे। बिल्कुल नहीं। आप भाग खड़े होंगे। यही हाल आज के जॉब मार्केट का है। अगर आप मार्केटिंग में हैं, कोडिंग में हैं या फिर समोसे तलने के बिजनेस में हैं, अगर आप उस काम की बारीकियों को नहीं समझते, तो आप बस एक भीड़ का हिस्सा हैं। लोग अक्सर कहते हैं कि मुझे दस साल का एक्सपीरियंस है। पर भाई, क्या सच में दस साल का एक्सपीरियंस है या एक ही साल के एक्सपीरियंस को दस बार रिपीट किया है।

डिसिप्लिन माइंड बनाने के लिए आपको कम से कम दस साल की तपस्या चाहिए होती है। यह सुनने में बहुत बोरिंग लगता है ना। आजकल के छपरी इन्फ्लुएंसर्स तो आपको दो दिन में करोड़पति बनाने का सपना दिखाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक आप अपनी स्किल के साथ शादी नहीं कर लेते, तब तक आपकी प्रोग्रेस का डिवोर्स तय है। एक डिसिप्लिन माइंड वाला इंसान रोज वही बोरिंग काम करता है जो उसे बेहतर बनाता है। वह अपनी गलतियों से सीखता है और हर बार पहले से ज्यादा शार्प होकर वापस आता है।

उदाहरण के तौर पर अपने उस दोस्त को देखिये जो हर महीने नया शौक पालता है। जनवरी में उसे गिटार सीखना था, फरवरी में वह जिम का दीवाना हो गया और मार्च आते आते वह स्टॉक मार्केट का गुरु बनने चला था। नतीजा क्या निकला। वह आज भी वही है जहाँ पिछले साल था, बस उसके पास अब तीन अलग अलग चीजों का आधा अधूरा ज्ञान है जो किसी काम का नहीं है। वह 'जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स' तो बन गया पर 'मास्टर ऑफ नन' रह गया। ऐसे लोग फ्यूचर में सिर्फ मजदूरी करेंगे क्योंकि मशीनें उनसे बेहतर काम कर लेंगी।

फ्यूचर में सिर्फ वही इंसान बचेगा जिसके पास ऐसी स्किल होगी जिसे कोई रोबोट कॉपी न कर सके। और वह स्किल आती है डिसिप्लिन से। जब आप घंटों एक ही चीज पर फोकस करते हैं, तो आपका दिमाग उस फील्ड के पैटर्न को समझने लगता है। आप वह देख पाते हैं जो एक आम इंसान नहीं देख सकता। यही वह जादू है जो आपको एक एवरेज एम्प्लॉई से एक लेजेंड में बदल देता है। तो सवाल यह है कि क्या आप अपनी फील्ड के मास्टर बनने के लिए तैयार हैं या फिर बस किस्मत के भरोसे बैठना चाहते हैं।

जैसे ही आप अपनी स्किल में मास्टर बन जाते हैं, आपका काम यहाँ खत्म नहीं होता। असल चुनौती तो तब शुरू होती है जब आपके पास दुनिया भर की जानकारी का पहाड़ खड़ा हो जाता है। यहीं पर काम आता है हमारा अगला लेसन, जो हमें सिखाता है कि इस कचरे जैसी जानकारी में से हीरा कैसे ढूंढना है।


लेसन २ : सिंथेसाइजिंग माइंड: जानकारी के समंदर में सही रास्ता ढूंढना

आज के समय में गूगल बाबा के पास हर सवाल का जवाब है। लेकिन दिक्कत यह है कि जवाब इतने ज्यादा हैं कि इंसान पागल हो जाए। हॉवर्ड गार्डनर कहते हैं कि फ्यूचर में वही राज करेगा जिसके पास सिंथेसाइजिंग माइंड होगा। इसका सरल मतलब है कि बिखरी हुई जानकारी को समेटना, उसमें से काम की बात निकालना और उसे ऐसे जोड़ना कि एक नई तस्वीर साफ दिखाई दे। अगर आप यह नहीं कर सकते, तो आप उस आदमी की तरह हैं जो लाइब्रेरी में तो खड़ा है पर उसे यह नहीं पता कि पढ़ना क्या है।

कल्पना कीजिये कि आपको एक नया बिजनेस शुरू करना है। आप यूट्यूब पर जाते हैं और दस अलग अलग गुरुओं की वीडियो देखते हैं। एक कहता है कि सारा पैसा एड्स पर लगा दो, दूसरा कहता है कि ऑर्गेनिक ही सब कुछ है, और तीसरा कहता है कि बिजनेस छोड़ो और हिमालय चले जाओ। अब अगर आपका दिमाग सिंथेसाइजिंग नहीं है, तो आप बस अपना सिर पकड़कर बैठ जाएंगे। एक तेज दिमाग वाला इंसान इन सबकी बातों को सुनेगा, उनमें से अपने काम की स्ट्रेटजी निकालेगा और एक ऐसा प्लान बनाएगा जो उसके लिए काम करे।

आजकल व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज्ञान ने सबका दिमाग खराब कर रखा है। लोग बिना सोचे समझे कोई भी मैसेज फॉरवर्ड कर देते हैं। उन्हें लगता है कि उनके पास बहुत जानकारी है, जबकि हकीकत में उनके पास सिर्फ कूड़ा है। एक सिंथेसाइजिंग माइंड वाला व्यक्ति सबसे पहले यह पूछता है कि क्या यह जानकारी सही है। क्या इसका कोई लॉजिक है। वह अलग अलग सोर्सेज से डेटा इकट्ठा करता है और उसे अपनी समझ की छलनी से छानता है। यह एक सुपरपावर है क्योंकि आज दुनिया में डेटा की कमी नहीं है, कमी है उसे समझने वालों की।

मिसाल के तौर पर उस ऑफिस कलीग को देखिये जो हर मीटिंग में बहुत सारे ग्राफ और चार्ट लेकर आता है। वह घंटों डेटा दिखाता रहता है पर अंत में जब बॉस पूछता है कि भाई करना क्या है, तो उसके पास कोई जवाब नहीं होता। वह डेटा तो जुटा सकता है पर उसे सिंथेसाइज नहीं कर पाता। वहीं दूसरी तरफ वह स्मार्ट बंदा होता है जो सिर्फ दो मिनट बोलता है, सारी मुश्किल बातों को आसान भाषा में समझा देता है और सबको बता देता है कि अगला कदम क्या होगा। असली वैल्यू उस दूसरे बंदे की है।

सिंथेसाइजिंग माइंड विकसित करने के लिए आपको एक परफ्यूम मेकर की तरह बनना होगा। जैसे वह हजारों फूलों के अर्क से एक छोटी सी शीशी में बेहतरीन खुशबू कैद कर लेता है, वैसे ही आपको भी हजारों पन्नों की रिपोर्ट को तीन मुख्य पॉइंट्स में बदलना सीखना होगा। जो इंसान दूसरों का वक्त बचाता है और उलझन को सुलझाता है, उसकी डिमांड कभी कम नहीं होती। आप चाहे स्टूडेंट हों या प्रोफेशनल, अगर आप कॉम्प्लेक्स चीजों को सिंपल नहीं बना सकते, तो आप रिप्लेस कर दिए जाएंगे।

लेकिन रुकिए, सिर्फ दूसरों की बातों को जोड़कर समझना ही काफी नहीं है। असली मजा तो तब आता है जब आप कुछ ऐसा नया कर दें जो आज तक किसी ने सोचा ही न हो। यही वह मोड़ है जहाँ हम अपने अगले और सबसे रोमांचक लेसन की ओर कदम बढ़ाते हैं, जो हमें भीड़ का हिस्सा बनने से रोककर एक लीडर बनाता है।


लेसन ३ : क्रिएटिंग माइंड: लीक से हटकर सोचना और दुनिया बदलना

अगर आप वही कर रहे हैं जो दुनिया के बाकी सात अरब लोग कर रहे हैं, तो आप बस एक रोबोट हैं जिसका सॉफ्टवेयर कभी भी आउटडेटेड हो सकता है। हॉवर्ड गार्डनर कहते हैं कि क्रिएटिंग माइंड वह है जो वहां सवाल खड़ा करता है जहां बाकी सब सिर झुकाकर 'हां में हां' मिला रहे होते हैं। क्रिएटिंग माइंड का मतलब सिर्फ पेंटिंग करना या कविता लिखना नहीं है। इसका असली मतलब है किसी पुरानी समस्या का ऐसा नया समाधान ढूंढना जिसे देखकर लोग कहें कि भाई, यह पहले किसी ने क्यों नहीं सोचा।

आजकल के कॉर्पोरेट कल्चर में लोग उस बैल की तरह बन गए हैं जिसकी आंखों पर पट्टी बंधी है और वह बस गोल गोल घूम रहा है। उन्हें लगता है कि सुबह नौ से शाम पांच बजे तक फाइलें इधर से उधर करना ही मेहनत है। लेकिन क्रिएटिंग माइंड वाला इंसान सिस्टम को देखता है और सोचता है कि इस काम को करने का कोई बेहतर और नया तरीका क्या हो सकता है। क्रिएटिविटी के लिए आपको थोड़ा सा बागी होना पड़ता है। आपको उन रूल्स को तोड़ने की हिम्मत चाहिए जो अब काम के नहीं रहे।

मान लीजिये आप एक ऐसी कंपनी में हैं जो छाते बेचती है। एक आम दिमाग वाला सेल्समैन सोचेगा कि बारिश ज्यादा होगी तो सेल बढ़ेगी। लेकिन एक क्रिएटिंग माइंड वाला बंदा सोचेगा कि लोग छाता सिर्फ बारिश से बचने के लिए नहीं, बल्कि धूप से बचने या फोटो खिंचवाने के लिए भी ले सकते हैं। वह उसे एक फैशन एक्सेसरी बना देगा। जब दुनिया गड्डों को देख रही होती है, तब एक क्रिएटिंग माइंड वाला इंसान उन गड्डों में कमल उगाने की प्लानिंग कर रहा होता है।

पर सावधान रहिये, क्रिएटिविटी का मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी फालतू काम करें। कुछ लोग अलग दिखने के चक्कर में शर्ट की जगह पेंट पहनकर ऑफिस चले आते हैं, उसे क्रिएटिविटी नहीं बेवकूफी कहते हैं। असली क्रिएटिंग माइंड पहले पिछले दो लेसन्स यानी डिसिप्लिन और सिंथेसाइजिंग पर पकड़ बनाता है। जब तक आप किसी फील्ड के रूल्स को अच्छी तरह जान नहीं लेते, तब तक आप उन्हें शानदार तरीके से तोड़ नहीं सकते। बिना बेस के क्रिएटिविटी सिर्फ एक जोक बनकर रह जाती है।

आज के स्टार्टअप दौर में हर कोई 'अगला फेसबुक' या 'अगला जोमैटो' बनाना चाहता है। लेकिन कॉपी पेस्ट करने से आप कभी आगे नहीं निकल पाएंगे। फ्यूचर उनका है जो अपनी गलतियों को सेलिब्रेट करते हैं और फेल होने से नहीं डरते। क्योंकि हर फेलियर एक नया रास्ता दिखाता है जो किसी किताब में नहीं लिखा होता। अगर आप रिस्क लेने से डरते हैं, तो शायद आप एक सुरक्षित जिंदगी तो जी लेंगे, लेकिन आप कभी इतिहास नहीं रच पाएंगे। क्या आप अपनी कंफर्ट जोन की चादर ओढ़कर सोना चाहते हैं या जागकर कुछ नया बनाना चाहते हैं।

यह याद रखिये कि ये तीन लेसन्स सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि जीने के लिए हैं। डिसिप्लिन से मास्टर बनिए, सिंथेसाइजिंग से समझदार बनिए और क्रिएटिंग माइंड से दुनिया को हैरान कर दीजिये। कल की दुनिया उन्हीं की होगी जो आज अपने दिमाग को तैयार करेंगे। तो उठिये, इन स्किल्स पर काम शुरू कीजिये और खुद को आने वाले कल का सबसे पावरफुल वर्जन बनाइये।

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