क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोमवार की सुबह ऑफिस जाने के नाम पर ऐसे रोते हैं जैसे किसी ने किडनैप कर लिया हो। बधाई हो। आप अपनी लाइफ की रेस हारने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। बिना डिसिप्लिन और कंसिस्टेंसी के आप सिर्फ भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे और सक्सेस आपसे कोसों दूर भागती रहेगी।
आज के इस आर्टिकल में हम कैल रिपकेन जूनियर की किताब गेट इन द गेम से वो ३ जरूरी लेसन सीखेंगे जो आपको एक एवरेज इंसान से बदलकर एक लेजेंड बना सकते हैं। अगर आप भी अपनी बोरियत वाली लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो यह लेसन आपके बहुत काम आने वाले हैं।
लेसन १ : मैदान में उतरना और डटे रहना
क्या आपको लगता है कि आप बहुत बड़े तीस मार खां हैं क्योंकि आप ऑफिस टाइम पर पहुँच जाते हैं। जरा रुकिए और खुद को आईने में देखिये। कैल रिपकेन जूनियर कहते हैं कि सिर्फ हाजिरी लगाना सक्सेस नहीं है। लोग अक्सर अपनी लाइफ को ऑटो पायलट मोड पर छोड़ देते हैं। वो सुबह उठते हैं। बिना मन के काम पर जाते हैं। और शाम को थके हुए घर लौटकर नेटफ्लिक्स पर अपना दिमाग सड़ाते हैं। अगर आप भी यही कर रहे हैं तो आप लाइफ के खिलाड़ी नहीं बल्कि सिर्फ एक दर्शक हैं जो स्टैंड में बैठकर ताली बजा रहा है।
परसीवरेंस का पहला रूल है कि आपको हर हाल में मैदान में उतरना होगा। कैल रिपकेन को आयरन मैन ऐसे ही नहीं कहा जाता। उन्होंने लगातार २६३२ गेम्स खेले। बिना एक भी दिन मिस किए। अब जरा अपनी हालत सोचिये। हल्का सा जुकाम हुआ नहीं कि आप चादर तानकर सो जाते हैं जैसे पूरी दुनिया का बोझ आप ही के कंधों पर था। या फिर जिम जाने का जोश तीन दिन में ठंडा हो जाता है क्योंकि चौथे दिन बारिश हो रही थी। असली चैंपियन वो नहीं होता जो सिर्फ अच्छे मौसम में खेलता है। असली चैंपियन वो है जो बुखार में भी और तूफान में भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए खड़ा रहता है।
मान लीजिये आप एक सेल्स की जॉब में हैं। सोमवार की सुबह है। बाहर धूप तेज है और आपका मन कर रहा है कि काश आज छुट्टी मिल जाती। एक एवरेज इंसान बहाना ढूंढेगा और क्लाइंट को कॉल करने के बजाय चाय की टपरी पर बैठकर गप्पे मारेगा। लेकिन जिसके अंदर परसीवरेंस है। वो इंसान पसीने में लथपथ होकर भी उस क्लाइंट के दरवाजे पर खड़ा होगा। वो जानता है कि रिजल्ट आज मिले या न मिले। पर उसकी मौजूदगी ही उसकी जीत की पहली सीढ़ी है।
लोग आपसे कहेंगे कि भाई थोड़ा रिलैक्स कर। इतनी मेहनत करके कहाँ जाएगा। याद रखिये। ये वही लोग हैं जो साल के अंत में प्रमोशन न मिलने पर रोते हैं। कैल रिपकेन कहते हैं कि कंसिस्टेंसी ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। जब आप बार बार एक ही काम को पूरी शिद्दत से करते हैं। तो पूरी कायनात को झुकना पड़ता है। लेकिन अगर आप आज जोश में हैं और कल गायब। तो आपकी वैल्यू जीरो है।
सक्सेस कोई जैकपॉट नहीं है जो एक दिन में लग जाएगा। ये तो वो ईंट है जो आपको हर रोज बिना थके लगानी पड़ती है ताकि एक दिन महल खड़ा हो सके। अगर आप अपनी लाइफ की पिच पर टिकना चाहते हैं। तो पहले बहाने बनाना बंद कीजिये। हर दिन अपना काम पूरी ईमानदारी से करना ही आपको भीड़ से अलग बनाता है। और जब आप इस तरह डटे रहते हैं। तो लोग आपको पागल कह सकते हैं। लेकिन एक दिन वही लोग आपके लिए तालियां बजाएंगे।
लेसन २ : अपनी वैल्यूज और उसूलों का पक्का होना
मैदान में टिकना तो आपने सीख लिया। लेकिन टिके रहने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी आत्मा बेच दें। आजकल के जमाने में लोग सक्सेस पाने के लिए ऐसे उतावले रहते हैं जैसे किसी फ्री सेल में आखिरी टी शर्ट बची हो। लोग शॉर्टकट ढूंढते हैं। जुगाड़ लगाते हैं और सोचते हैं कि वो बहुत स्मार्ट हैं। कैल रिपकेन जूनियर कहते हैं कि अगर आपके पास स्ट्रॉन्ग वैल्यूज नहीं हैं। तो आपकी सक्सेस उस ताश के घर की तरह है जो पहली हवा के झोंके में ढह जाएगा।
वैल्यूज का मतलब यह नहीं है कि आप किसी हिमालय की गुफा में जाकर तपस्या करें। इसका सिंपल मतलब है कि जब कोई देख न रहा हो। तब भी आप सही काम करें। मान लीजिये आपके ऑफिस में कोई ऐसा प्रोजेक्ट आया है जहाँ आप थोड़ी सी हेराफेरी करके बहुत सारा पैसा कमा सकते हैं। एक एवरेज इंसान सोचेगा कि अरे किसको पता चलेगा। सब यही तो कर रहे हैं। लेकिन एक सच्चा खिलाड़ी जानता है कि शॉर्टकट का रास्ता हमेशा गढ्ढे में जाकर खत्म होता है। अगर आप आज अपने उसूलों से समझौता करेंगे। तो कल आप खुद की नजरों में गिर जाएंगे। और जब आप खुद का सम्मान नहीं कर सकते। तो दुनिया की तालियां आपके किसी काम की नहीं हैं।
आजकल सोशल मीडिया पर लोग इन्फ्लुएंसर बनने के चक्कर में कुछ भी करने को तैयार हैं। कोई फेक लाइफस्टाइल दिखा रहा है। तो कोई बिना किसी जानकारी के ज्ञान बांट रहा है। ये लोग थोड़े समय के लिए तो फेमस हो जाते हैं। लेकिन जैसे ही सच सामने आता है। इनका करियर ऐसे गायब होता है जैसे गधे के सिर से सींग। वही दूसरी तरफ वो लोग हैं जो धीरे चलते हैं। पर अपनी ईमानदारी और वैल्यूज पर टिके रहते हैं। लोग उन पर भरोसा करते हैं। और भरोसा ही वो करेंसी है जो आपको असली अमीर बनाती है।
कैल रिपकेन ने अपनी लाइफ में कभी भी अपनी चमक बढ़ाने के लिए गलत रास्ता नहीं चुना। उन्होंने अपनी मेहनत और अपने व्यवहार से अपनी पहचान बनाई। आपकी वैल्यूज आपका जीपीएस हैं। जब लाइफ के मोड़ पर आपको समझ न आए कि कहाँ जाना है। तो आपकी ईमानदारी ही आपको सही रास्ता दिखाएगी। बिना वैल्यूज के आप एक ऐसी बिना पतवार की नाव हैं जो लहरों के साथ कहीं भी बह जाएगी।
याद रखिये। सक्सेसफुल होना बड़ी बात नहीं है। सक्सेसफुल बने रहना और उसे गरिमा के साथ निभाना बड़ी बात है। लोग आपके बैंक बैलेंस को भूल सकते हैं। पर वो आपके करैक्टर को कभी नहीं भूलते। अगर आप खेल में लम्बे समय तक बने रहना चाहते हैं। तो अपनी नींव मजबूत रखिये। जब आपकी जड़ें ईमानदारी की मिट्टी में गहरी होंगी। तो कोई भी तूफान आपको हिला नहीं पाएगा। और यही वो क्वालिटी है जो एक आम इंसान को लेजेंड बनाती है। अब जब आप अपने उसूलों को समझ चुके हैं। तो अगले लेसन में हम यह देखेंगे कि जब वक्त खराब हो तो कैसे पेश आना है।
लेसन ३ : फेलियर और मुश्किलों को अपना हथियार बनाना
क्या आपको लगता है कि कैल रिपकेन की लाइफ में सब कुछ मक्खन की तरह स्मूथ था। बिल्कुल नहीं। जब आप २६३२ मैच लगातार खेलते हैं। तो ऐसा नहीं है कि हर दिन आप छक्के मार रहे होते हैं। कई बार ऐसे दिन भी आते हैं जब आपका बल्ला गेंद को छू तक नहीं पाता। जब पूरी दुनिया आपको बू (boo) कर रही होती है। और जब आपका खुद का शरीर कहता है कि बस भाई। अब और नहीं। लेकिन असली परसीवरेंस का मतलब ही यही है कि जब हार आपके सामने खड़ी होकर हंस रही हो। तो आप उसे कहें कि भाई थोड़ा साइड हो। मुझे अपना काम पूरा करना है।
आजकल के यूथ की प्रॉब्लम क्या है। एक छोटा सा फेलियर आया नहीं कि सीधा डिप्रेशन का टैग लगा लेते हैं। ब्रेकअप हो गया तो देवदास बन जाएंगे। जॉब में डांट पड़ गई तो सीधे रेजिग्नेशन लेटर टाइप करने लगेंगे। अरे भाई। फेलियर तो लाइफ का नमक है। बिना इसके सफलता का स्वाद फीका ही रहेगा। कैल रिपकेन कहते हैं कि आपको अपनी गलतियों से सीखना होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उन गलतियों का शोक मनाते बैठें। हारना बुरी बात नहीं है। पर हार मान लेना सबसे बड़ा अपराध है।
मान लीजिये आप कुकिंग सीख रहे हैं। पहले दिन आपने नमक की जगह चीनी डाल दी। अब आपके पास दो ऑप्शन हैं। या तो आप कढ़ाई फेंक कर किचन से बाहर भाग जाएं और कसम खा लें कि अब कभी खाना नहीं बनाएंगे। या फिर आप उस मीठी सब्जी को चुपचाप खाएं और अगली बार याद रखें कि डब्बे पर नाम पढ़ना जरूरी है। ज्यादातर लोग पहली वाली कैटेगरी में आते हैं। वो लाइफ के थप्पड़ से इतना डर जाते हैं कि दोबारा हाथ उठाने की हिम्मत ही नहीं करते।
परसीवरेंस का मतलब है कि आप अपनी कमजोरियों को पहचानें और उन पर काम करें। अगर आप किसी काम में फेल हुए हैं। तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप बुरे हैं। इसका मतलब सिर्फ यह है कि आपकी स्ट्रेटेजी गलत थी। कैल रिपकेन ने कभी बहाने नहीं बनाए। उन्होंने हार को एक फीडबैक की तरह लिया। जब आप अपनी हार से डरना बंद कर देते हैं। तो आप अजेय (invincible) बन जाते हैं। तब मुश्किलें आपको रोकने के लिए नहीं। बल्कि आपको तराशने के लिए आती हैं।
तो दोस्तों। गेट इन द गेम का असली मैसेज यही है कि लाइफ की पिच पर डटे रहो। चाहे धूप हो या बारिश। चाहे लोग तालियां बजाएं या गालियां दें। आपका काम है बस खेलते रहना। अपनी वैल्यूज को मत छोड़ो। और हर गिरती हुई विकेट से कुछ नया सीखो। याद रखिये। इतिहास वो नहीं रचते जो कभी नहीं गिरे। इतिहास वो रचते हैं जो हर बार गिरकर फिर से खड़े हुए और बोले कि अभी खेल खत्म नहीं हुआ है।
अब उठिये। अपने कंफर्ट जोन की चादर फेंकिये और अपनी लाइफ के मैदान में उतर जाइये। क्योंकि दुनिया सिर्फ विनर्स को याद रखती है। और विनर वही बनता है जो हारने के बाद भी मैदान नहीं छोड़ता। आज ही तय कीजिये कि आप अपनी लाइफ के आयरन मैन बनेंगे या नहीं।
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