आप आज भी कल की प्लानिंग कर रहे हैं जबकि दुनिया परसों की तैयारी करके बैठ चुकी है। कितनी शर्म की बात है कि आप अपनी लाइफ के अंधे मोड़ पर बिना लाइट के गाड़ी चला रहे हैं। अपनी किस्मत को कोसना बंद कीजिए क्योंकि असल में आप बस अंधे हैं।
आज हम डेनियल बरुस की बेहतरीन बुक फ्लैश फोरसाइट के बारे में बात करेंगे। यह आर्टिकल आपको वह सुपरपावर देगा जिससे आप आने वाले कल को आज ही देख पाएंगे। चलिए जानते हैं उन 3 लेसन के बारे में जो आपकी लाइफ बदल देंगे।
लेसन १ : हार्ड ट्रेंड्स को पकड़ो और सॉफ्ट ट्रेंड्स से खेलो
क्या आपको लगता है कि फ्यूचर एक अनसुलझी पहेली है। अगर हां तो मुबारक हो आप उन 99 परसेंट लोगों में शामिल हैं जो अपनी लाइफ के ड्राइवर नहीं बल्कि सिर्फ पैसेंजर हैं। डेनियल बरुस कहते हैं कि फ्यूचर प्रेडिक्ट करना कोई जादू टोना नहीं है। यह सिर्फ एक साइंस है जिसे हम हार्ड ट्रेंड्स और सॉफ्ट ट्रेंड्स कहते हैं।
हार्ड ट्रेंड्स वो चीजें हैं जो होकर ही रहेंगी। इन्हें कोई रोक नहीं सकता। जैसे कि आपकी उम्र का बढ़ना। आप चाहे कितना भी महंगा फेस वॉश लगा लें या जिम में पसीना बहा लें आप बूढ़े तो होंगे ही। यह एक हार्ड ट्रेंड है। उसी तरह टेक्नोलॉजी का बढ़ना भी एक हार्ड ट्रेंड है। अब आप रोते रहें कि पहले के जमाने में चिट्ठियां चलती थीं और आज सब व्हाट्सएप पर है तो यह आपकी बेवकूफी है। दुनिया बदल चुकी है और यह बदलती रहेगी।
अब बात करते हैं सॉफ्ट ट्रेंड्स की। यह वो चीजें हैं जो शायद हों और शायद न हों। यह एक ऐसी संभावना है जिसे बदला जा सकता है। जैसे कि यह सोचना कि मेरी नौकरी कल चली जाएगी। यह एक सॉफ्ट ट्रेंड है क्योंकि अगर आप अपनी स्किल्स बढ़ा लें तो आप अपनी नौकरी बचा सकते हैं।
मान लीजिए आप एक चाय की दुकान खोलना चाहते हैं। अब हार्ड ट्रेंड यह है कि लोग हमेशा बाहर निकलेंगे और उन्हें प्यास लगेगी। लेकिन सॉफ्ट ट्रेंड यह है कि लोग आपकी ही दुकान पर आएंगे या नहीं। अगर आप सिर्फ पुरानी स्टाइल की फीकी चाय बेचेंगे तो शायद आप फेल हो जाएं। लेकिन अगर आप ट्रेंड को भांप लें और अपनी दुकान को इंस्टाग्राम फ्रेंडली बना दें तो आप जीत जाएंगे।
ज्यादातर लोग सॉफ्ट ट्रेंड्स को ही पत्थर की लकीर मान लेते हैं और डर के मारे घर बैठ जाते हैं। वह सोचते हैं कि मार्केट खराब है इसलिए मेरा बिजनेस नहीं चलेगा। अरे भाई मार्केट का खराब होना एक सॉफ्ट ट्रेंड है जिसे आप अपनी मेहनत और सही स्ट्रेटजी से बदल सकते हैं।
सर्कस के उस हाथी की तरह मत बनिए जिसे बचपन में एक पतली जंजीर से बांधा गया था। तब वह उसे तोड़ नहीं पाया और आज जब वह विशालकाय हो चुका है तब भी उसे लगता है कि वह उसे नहीं तोड़ सकता। जंजीर अब एक सॉफ्ट ट्रेंड है जिसे एक झटके में तोड़ा जा सकता है लेकिन उसकी सोच एक हार्ड ट्रेंड बन चुकी है।
अगर आप लाइफ में सक्सेसफुल होना चाहते हैं तो आज ही एक कागज और पेन उठाइए। अपनी लाइफ और बिजनेस के हार्ड ट्रेंड्स को लिखिए। देखिए कि अगले पांच साल में क्या निश्चित रूप से होने वाला है। फिर उन सॉफ्ट ट्रेंड्स को पहचानिए जिन्हें आप आज बदल सकते हैं। जो लोग इनविजिबल को देख लेते हैं वही इम्पॉसिबल को पॉसिबल कर पाते हैं।
बाकी दुनिया तो बस कोहरे में गाड़ी चला रही है और एक्सीडेंट का इंतजार कर रही है। क्या आप भी उन्हीं के पीछे लाइन में खड़े होना चाहते हैं या अपनी खुद की हेडलाइट जलाकर रास्ता देखना चाहते हैं। चॉइस आपकी है क्योंकि वक्त किसी का सगा नहीं होता।
लेसन २ : अपनी प्रॉब्लम को गायब करो और बैकवर्ड थिंकिंग अपनाओ
लाइफ में जब कोई बड़ी प्रॉब्लम आती है तो आप क्या करते हैं। ज्यादातर लोग सिर पकड़कर बैठ जाते हैं और दुनिया भर का दुख मनाते हैं। उन्हें लगता है कि दीवार बहुत ऊंची है और वह उसे पार नहीं कर सकते। लेकिन डेनियल बरुस कहते हैं कि अगर दीवार पार नहीं हो रही तो उसे तोड़ना जरूरी नहीं है। आप बस वहां से हट जाइए जहां दीवार खड़ी है। इसे कहते हैं प्रॉब्लम को डी-फोकस करना।
अक्सर हम जिस प्रॉब्लम को अपनी सबसे बड़ी रुकावट मानते हैं वो असल में असली प्रॉब्लम होती ही नहीं है। वह तो बस एक लक्षण है। असली बीमारी तो कहीं और छिपी होती है। लेखक हमें सिखाते हैं बैकवर्ड थिंकिंग। इसका मतलब है कि अपनी आज की उलझनों को छोड़कर सीधा फ्यूचर में चले जाइए। मान लीजिए कि आज से तीन साल बाद आपकी सारी प्रॉब्लम्स सॉल्व हो चुकी हैं और आप एक बेहद सक्सेसफुल इंसान बन चुके हैं। अब वहां खड़े होकर पीछे मुड़कर देखिए। खुद से पूछिए कि मैं वहां से यहां तक कैसे पहुंचा। आपको जो रास्ते दिखेंगे वही आपकी आज की मुश्किलों का हल हैं।
मान लीजिए एक हसबैंड अपनी वाइफ के रोज-रोज के तानों से परेशान है। प्रॉब्लम क्या है। तानें। लेकिन क्या यह असली प्रॉब्लम है। नहीं। असली प्रॉब्लम शायद यह है कि वह घर पर वक्त नहीं बिताता या घर के कामों में मदद नहीं करता। अब अगर वह बैकवर्ड थिंकिंग करे और इमेजिन करे कि एक साल बाद उसका रिश्ता बहुत खुशहाल है। उसने वहां तक पहुंचने के लिए क्या किया होगा। शायद उसने संडे को साथ में खाना बनाना शुरू किया होगा। यही उसका आज का सोल्यूशन है।
लोग अक्सर कहते हैं कि मेरे पास पैसे नहीं हैं इसलिए मैं अमीर नहीं बन पा रहा। भाई यह तो ऐसी बात हो गई कि कार में पेट्रोल नहीं है इसलिए मैं पेट्रोल पंप नहीं जा पा रहा। आप अपनी गरीबी को ही अपनी ढाल बना लेते हैं। अगर आप फ्यूचर में खुद को अमीर देख रहे हैं तो आपको आज यह देखना होगा कि आपने अपनी स्किल्स पर काम किया या नहीं।
हम अपनी प्रॉब्लम्स के इतने आदि हो जाते हैं कि हमें उनसे प्यार हो जाता है। हमें अपनी दुर्दशा सुनाने में मजा आने लगता है। लेकिन सक्सेसफुल लोग अपनी प्रॉब्लम को अपनी ओपर्चुनिटी में बदल देते हैं। अगर आपके पास रिसोर्सेज की कमी है तो यह आपकी क्रिएटिविटी बढ़ाने का सबसे बड़ा मौका है। जिनके पास सब कुछ होता है वह अक्सर आलसी हो जाते हैं। जिनके पास कुछ नहीं होता वही इतिहास रचते हैं।
सोचना बंद कीजिए और विजुअलाइज करना शुरू कीजिए। अगर आप आज के कीचड़ में ही देखते रहेंगे तो कभी आसमान के सितारे नहीं देख पाएंगे। फ्यूचर से पीछे की तरफ प्लानिंग करना ही असली स्मार्टनेस है। बाकी लोग तो बस अंधेरे में हाथ-पांव मार रहे हैं। आप कम से कम लाइट जलाकर पीछे का रास्ता तो देख लीजिए ताकि आगे का सफर साफ हो जाए।
लेसन ३ : अपनी सबसे बड़ी प्रॉब्लम को ही अपनी ओपर्चुनिटी बनाओ
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो समस्या आने पर रोते हैं और दूसरे वो जो उस समस्या को ही बेच देते हैं। डेनियल बरुस कहते हैं कि आपकी सबसे बड़ी रुकावट ही असल में आपका सबसे बड़ा जैकपॉट हो सकती है। बस आपको अपनी नजरिया बदलने की जरूरत है। हम अक्सर उन चीजों से भागते हैं जो हमें डराती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चीज से आप डर रहे हैं शायद वही आपको करोड़पति बना दे।
आजकल के दौर में कॉम्पिटिशन बहुत बढ़ गया है। हर कोई यही रोना रो रहा है। लेकिन जरा सोचिए अगर कॉम्पिटिशन न होता तो क्या आप कभी अपनी क्वालिटी सुधारते। नहीं। आप वही घटिया सर्विस देते रहते जो आप दस साल पहले दे रहे थे। कॉम्पिटिशन एक ऐसी आग है जो या तो आपको जला देगी या फिर आपको कुंदन बना देगी।
मान लीजिए एक मोहल्ले में बहुत शोर होता है। अब वहां रहने वाले लोग परेशान हैं और अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। लेकिन एक स्मार्ट लड़का वहां आता है और उसे दिखता है कि शोर की वजह से लोग चिड़चिड़े हैं। वह वहां एक साउंडप्रूफ को-वर्किंग स्पेस या लाइब्रेरी खोल देता है। उसने उस शोर यानी उस प्रॉब्लम को ही अपना बिजनेस मॉडल बना लिया। अब लोग उसे शोर से बचने के लिए पैसे दे रहे हैं। इसे कहते हैं इनविजिबल को देख लेना।
ज्यादातर लोग अपनी लाइफ को एक फिक्स्ड रेंट के मकान की तरह जीते हैं। वह सोचते हैं कि जैसा चल रहा है वैसा ही चलेगा। लेकिन याद रखिए कि बदलाव ही एकमात्र सच्चाई है। अगर आप बदलाव से डरेंगे तो आप उस नोकिया फोन की तरह हो जाएंगे जिसे अपनी ताकत पर बहुत गुरूर था लेकिन समय ने उसे म्यूजियम में पहुंचा दिया।
आपकी लाइफ में जो आज सबसे बड़ी मुश्किल है उसे एक दुश्मन की तरह नहीं बल्कि एक टीचर की तरह देखिए। अगर आपके पास पैसे कम हैं तो यह लेसन है बजटिंग सीखने का। अगर आपके पास टाइम कम है तो यह लेसन है टाइम मैनेजमेंट का। मुश्किलों के बिना इंसान सिर्फ एक मिट्टी का पुतला है जिसे जरा सी बारिश भी गला सकती है।
फ्लैश फोरसाइट का असली मतलब यही है कि आप आज में खड़े होकर कल की उन मुश्किलों को देख लें और आज ही उनका सोल्यूशन तैयार रखें। जब तूफान आएगा तब लोग छाता ढूंढेंगे और आप तब तक अपनी रेनकोट की फैक्ट्री खोल चुके होंगे। यही वो फर्क है जो एक लीडर और एक फॉलोअर के बीच होता है।
सक्सेस कोई इत्तेफाक नहीं है। यह उन लोगों को मिलती है जो अपनी आंखों पर बंधी पट्टियों को उतार कर फेंक देते हैं। दुनिया आपको डराएगी लेकिन आपको डरना नहीं है। आपको बस अपनी फोरसाइट यानी अपनी दूरदृष्टि का इस्तेमाल करना है। अपनी समस्याओं की छाती पर पैर रखकर आगे बढ़ना सीखिए।
तो दोस्तों, आज हमने सीखा कि कैसे हार्ड ट्रेंड्स को पहचानकर और अपनी प्रॉब्लम्स को ओपर्चुनिटी में बदलकर हम अपनी लाइफ को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म कर सकते हैं। फ्लैश फोरसाइट सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि एक चश्मा है जिससे आप दुनिया को वैसे देख सकते हैं जैसी वह असल में होने वाली है।
अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट बॉक्स में बताइए कि आपकी लाइफ का वो कौन सा हार्ड ट्रेंड है जिसे आप आज तक अनदेखा कर रहे थे। क्या आप आज भी पुरानी सोच के साथ जीना चाहते हैं या फिर आप कल के हीरो बनना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपनी लाइफ में अटके हुए महसूस कर रहे हैं। याद रखिए कि आपका एक शेयर किसी की धुंधली लाइफ में रोशनी ला सकता है। उठिए और अपना फ्यूचर आज ही डिजाइन कीजिए।
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