क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो लाखों रुपये फूंक कर एमबीए की डिग्री दीवार पर सजाने का सपना देख रहे हैं। बहुत बढ़िया। आप अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती करने के बहुत करीब हैं। जबकि स्मार्ट लोग जोश कॉफमैन की द पर्सनल एमबीए पढ़कर आपसे दस गुना आगे निकल चुके हैं और आप अभी भी वही पुराने घिसे पिटे सिलेबस के भरोसे बैठे हैं। सच तो यह है कि बिना असली बिजनेस माइंडसेट के आपकी वह महंगी डिग्री रद्दी के भाव भी नहीं बिकेगी।
इस आर्टिकल में हम उस कड़वे सच का सामना करेंगे जो कोई भी बड़ा कॉलेज आपको कभी नहीं बताएगा। हम जोश कॉफमैन की इस मास्टरपीस से वह ३ पावरफुल लेसन सीखेंगे जो आपके बिजनेस करने के नजरिये को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : वैल्यू क्रिएशन - अगर माल में दम नहीं, तो धंधा कम नहीं
बिजनेस का असली मतलब क्या है। क्या यह सिर्फ एक आलीशान ऑफिस और बढ़िया दिखने वाला लोगो है। अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो मुबारक हो, आप एक महंगे शौक को पाल रहे हैं धंधा नहीं कर रहे। जोश कॉफमैन अपनी किताब द पर्सनल एमबीए में सबसे पहले प्रहार करते हैं आपके इसी भ्रम पर। वह कहते हैं कि हर सफल बिजनेस की शुरुआत एक ऐसी चीज से होती है जो किसी और के काम आए। इसे वह कहते हैं वैल्यू क्रिएशन।
जरा सोचिए, आप एक बहुत ही क्रांतिकारी प्रोडक्ट बनाते हैं। एक ऐसा छाता जो बारिश में खुद ही गायब हो जाता है। सुनने में कितना कूल लगता है न। लेकिन क्या कोई इसे खरीदेगा। बिल्कुल नहीं, क्योंकि यह किसी की प्रॉब्लम सॉल्व नहीं कर रहा बल्कि नई प्रॉब्लम खड़ी कर रहा है। लोग आपको पैसे इसलिए देते हैं क्योंकि आप उनकी लाइफ को थोड़ा आसान बना रहे हैं या उनकी किसी जरूरत को पूरा कर रहे हैं। अगर आपके पास बेचने के लिए कुछ ऐसा नहीं है जो दुनिया को चाहिए, तो आपके पास बिजनेस नहीं है।
हमारे पड़ोस के शर्मा जी को ही देख लीजिए। उन्होंने जोश में आकर एक ऐसी जिम खोली जहाँ सिर्फ उबले हुए चने मिलते थे और म्यूजिक के नाम पर भजन चलते थे। शर्मा जी को लगा कि वह हेल्थ और अध्यात्म का संगम करा रहे हैं। परिणाम क्या हुआ। जिम में चूहों ने भी वर्कआउट करना छोड़ दिया। क्यों। क्योंकि उन्होंने मार्केट की वैल्यू को नहीं समझा। लोगों को जिम में मोटिवेशन और एनर्जी चाहिए, प्रवचन नहीं।
वैल्यू क्रिएशन का मतलब है लोगों की इच्छाओं को पहचानना। इंसान की पांच बुनियादी जरूरतें होती हैं। कुछ पाने की इच्छा, जुड़ने की इच्छा, सीखने की इच्छा, सुरक्षित महसूस करने की इच्छा और खुद को बेहतर दिखाने की इच्छा। अगर आपका आईडिया इनमें से किसी एक को भी हिट नहीं कर रहा, तो समझो आपका आईडिया कूड़ेदान के लायक है।
आप किसी को यह नहीं कह सकते कि भाई मेरा सामान खरीद ले क्योंकि मुझे अपना घर चलाना है। सामने वाले को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि आपका घर कैसे चल रहा है। उसे बस इस बात से मतलब है कि आपका सामान उसके किस काम का है। अगर आप किसी भूखे इंसान को हीरा बेचेंगे, तो वह आपको पागल ही समझेगा। उसे उस वक्त सिर्फ एक रोटी की वैल्यू समझ आती है।
इसलिए बिजनेस शुरू करने से पहले शीशे के सामने खड़े होकर खुद से पूछिए कि क्या मैं वाकई कुछ ऐसा बना रहा हूँ जिसकी किसी को परवाह है। अगर जवाब ना है, तो रुक जाइए। अपनी ईगो को थोड़ा साइड में रखिए और लोगों की तकलीफों को सुनना शुरू कीजिए। जिस दिन आपको किसी की परेशानी का सस्ता और बढ़िया हल मिल गया, समझो आपका आधा बिजनेस तो वहीं खड़ा हो गया। याद रखिए, बिना वैल्यू के बिजनेस वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के फरारी। दिखने में तो बहुत चमकती है, लेकिन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ती।
लेसन २ : मार्केटिंग और सेल्स का असली खेल - शोर नहीं, भरोसा चाहिए
वैल्यू क्रिएशन के बाद नंबर आता है उस चीज का जिससे दुनिया के अच्छे अच्छे लोग डरते हैं। मार्केटिंग और सेल्स। जोश कॉफमैन कहते हैं कि मार्केटिंग का मतलब सिर्फ सोशल मीडिया पर नाचकर वीडियो बनाना या लोगों के फोन पर फालतू मैसेज भेजना नहीं है। मार्केटिंग का असली मतलब है ध्यान खींचना। अटेंशन। अगर किसी को पता ही नहीं कि आप अस्तित्व में हैं, तो वह आपसे खरीदेगा क्या। आपका प्रोडक्ट भले ही कैंसर का इलाज क्यों न हो, अगर वह आपकी दराज में बंद है, तो उसकी कीमत जीरो है।
लेकिन रुकिए। यहाँ सबसे बड़ी गलती क्या होती है। लोग मार्केटिंग को ही सेल्स समझ लेते हैं। मार्केटिंग सिर्फ दरवाजे तक लाने का नाम है, लेकिन सेल्स उस दरवाजे को खोलकर हाथ मिलाने का नाम है। मार्केटिंग एक वादा है, और सेल्स उस वादे को निभाने की शुरुआत है। हमारे एक दोस्त हैं वर्मा जी। उन्होंने अपनी नई खुली मिठाई की दुकान के लिए पूरे शहर में पोस्टर लगवा दिए कि हमारे यहाँ जैसा लड्डू स्वर्ग में भी नहीं मिलेगा। मार्केटिंग तो टॉप क्लास थी। लोग लाइन लगाकर दुकान पर आए।
पर जैसे ही लोगों ने लड्डू चखा, उन्हें अहसास हुआ कि यह लड्डू नहीं, बल्कि क्रिकेट की गेंद है जिससे किसी का सिर फोड़ा जा सकता है। वर्मा जी ने अटेंशन तो पा लिया, लेकिन उसे सेल्स में नहीं बदल पाए क्योंकि उन्होंने भरोसा तोड़ दिया। सेल्स का मतलब है ट्रांजेक्शन। जब तक सामने वाला अपनी मेहनत की कमाई आपकी जेब में नहीं डालता, तब तक आपकी सारी मार्केटिंग सिर्फ हवा है।
जोश कॉफमैन समझाते हैं कि लोग तब खरीदते हैं जब उन्हें यकीन होता है कि जो उन्हें मिल रहा है उसकी कीमत उस पैसे से कहीं ज्यादा है जो वह दे रहे हैं। इसे कहते हैं पर्सिव्ड वैल्यू। सेल्स में सबसे बड़ी रुकावट होती है शंका। क्या यह काम करेगा। क्या मैं लूट तो नहीं जाऊंगा। अगर आप इन सवालों के जवाब अपने कस्टमर के पूछने से पहले ही दे देते हैं, तो आप एक महान सेल्समैन हैं।
आज के जमाने में लोग विज्ञापन से नफरत करते हैं। जैसे ही टीवी पर एड आता है, हम चैनल बदल देते हैं। तो फिर मार्केटिंग कैसे करें। जवाब है रेजिस्टेंस कम करके। आप जबरदस्ती किसी के गले में अपना सामान नहीं उतार सकते। आपको उसे यह महसूस कराना होगा कि यह फैसला उसका अपना है। सेल्स कोई युद्ध नहीं है जिसे आपको जीतना है, यह एक दोस्ती है जिसे आपको निभाना है।
अगर आप सोचते हैं कि मार्केटिंग का मतलब है झूठ बोलना, तो आप बहुत बड़े धोखे में हैं। झूठ आपको एक बार की सेल दिला सकता है, लेकिन बिजनेस हमेशा रिपीट कस्टमर से बनता है। मार्केटिंग का काम है सही इंसान को सही वक्त पर यह बताना कि उसके पास जो समस्या है, उसका समाधान आपके पास है। और सेल्स का काम है उसे इतना सुरक्षित महसूस कराना कि वह अपना बटुआ खोल दे। बिना इन दोनों के, आपका बिजनेस वैसा ही है जैसे एक बहुत ही सुंदर लड़की जो कमरे में बंद है और किसी को उसके बारे में पता ही नहीं।
लेसन ३ : आयरन लॉ ऑफ मार्केट - आपकी मेहनत की कोई वैल्यू नहीं है
सुनने में थोड़ा बुरा लग सकता है पर यही बिजनेस की सबसे बड़ी हकीकत है। जोश कॉफमैन इसे आयरन लॉ ऑफ मार्केट कहते हैं। सीधा सा नियम है। अगर मार्केट को आपके प्रोडक्ट की जरूरत नहीं है, तो आप चाहे सिर के बल खड़े होकर मार्केटिंग कर लें या दुनिया का सबसे बेहतरीन सॉफ्टवेयर बना लें, आपका फेल होना तय है। मार्केट एक बेरहम जज की तरह है जिसे आपकी रातों की नींद और आपकी मेहनत से कोई लेना देना नहीं है। उसे बस अपनी जरूरत से मतलब है।
जरा कल्पना कीजिए। आप रेगिस्तान के बीचों बीच एक बहुत ही शानदार और आलीशान जैकेट की दुकान खोलते हैं। आप दुनिया के सबसे बड़े डिजाइनर को बुलाते हैं। बेस्ट क्वालिटी का फैब्रिक इस्तेमाल करते हैं। आपकी मेहनत सौ प्रतिशत है। लेकिन क्या वहां कोई जैकेट खरीदेगा। बिल्कुल नहीं। क्यों। क्योंकि वहां के मार्केट को जैकेट की जरूरत ही नहीं है। वहां लोगों को पानी और छांव चाहिए। आपकी मेहनत वहां जीरो है क्योंकि आपने मार्केट के लोहे के कानून को नजरअंदाज कर दिया।
अक्सर नए बिजनेसमैन अपनी ईगो के जाल में फंस जाते हैं। उन्हें लगता है कि मेरा आईडिया क्रांतिकारी है तो लोग पागल होकर इसे खरीदेंगे ही। हमारे एक जानकार थे जिन्होंने एक ऐसा ऐप बनाया जो आपको यह बताता था कि आपके पड़ोस के कुत्ते का मूड कैसा है। उन्होंने दो साल दिन रात एक कर दिए। अपनी जमा पूंजी लगा दी। कोडिंग ऐसी कि नासा भी दंग रह जाए। पर जब ऐप लॉन्च हुआ तो पता चला कि दुनिया में किसी को भी यह जानने में दिलचस्पी नहीं है कि टॉमी आज उदास है या खुश। मार्केट ने उनके आईडिया को एक झटके में खारिज कर दिया।
सफल होने का सबसे आसान तरीका क्या है। कुछ नया और अजीब बनाने की बजाय वह बनाइये जिसकी मांग पहले से है। एक भूखे इंसान को खाना बेचना उस इंसान को खाना बेचने से हजार गुना आसान है जिसका पेट पहले से भरा हुआ है। जोश कॉफमैन कहते हैं कि रिसर्च पर वक्त लगाइये। यह देखिये कि लोग किस चीज के लिए पहले से पैसे खर्च कर रहे हैं। अगर आप किसी ऐसी नदी में नाव चला रहे हैं जहाँ पानी ही नहीं है, तो आपकी चप्पू चलाने की ताकत किसी काम की नहीं।
मार्केट का यह नियम आपको विनम्र होना सिखाता है। यह बताता है कि आप राजा नहीं हैं, बल्कि कस्टमर और उसकी जरूरतें राजा हैं। अगर आप मार्केट की लहरों के खिलाफ तैरेंगे तो डूब जाएंगे। लेकिन अगर आप लहरों को पहचान कर उनके साथ चलेंगे, तो कम मेहनत में भी बहुत आगे निकल जाएंगे। बिजनेस कोई जुआ नहीं है, यह एक गणित है। जहाँ मार्केट की डिमांड सबसे बड़ा फैक्टर है।
तो अगली बार जब आप किसी बड़े आईडिया पर काम शुरू करें, तो पहले यह देख लें कि क्या वहां कोई प्यासा खड़ा भी है या आप सिर्फ रेत में गड्ढा खोद रहे हैं। याद रखिये, मार्केट आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करता, वह सिर्फ अपनी जरूरतों को पूरा करता है।
द पर्सनल एमबीए हमें सिखाती है कि बिजनेस कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह सिर्फ इंसानी व्यवहार और वैल्यू का एक खेल है। अगर आप भी उस भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ डिग्री के पीछे भागती है, तो आपकी मर्जी। लेकिन अगर आप वाकई में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो इन लेसन को अपनी जिंदगी में उतारिए। आज ही नीचे कमेंट में बताइये कि आपके हिसाब से किसी बिजनेस के लिए सबसे जरूरी चीज क्या है। वैल्यू या मार्केटिंग। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अभी भी महंगी डिग्री का सपना देख रहा है। जागने का वक्त अब है।
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