Flip the Script (Hindi)


आप रात-दिन पागलों की तरह लोगों को अपना आइडिया समझाते हैं और वो आपको ऐसे देखते हैं जैसे आप कोई फालतू कचरा बेच रहे हों। सच तो यह है कि आपकी बातें बोरिंग हैं और किसी को फर्क नहीं पड़ता। जब तक आप गधों की तरह मेहनत करेंगे आप रिजेक्शन ही झेलेंगे।

परेशान मत होइए क्योंकि ओरेन क्लाफ की किताब फ्लिप द स्क्रिप्ट आपको सिखाएगी कि कैसे लोग खुद चलकर आपके पास आएंगे और कहेंगे कि भाई यह आइडिया तो मेरा था। चलिए इस किताब के ३ बेहतरीन लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : द स्टेटस अलाइनमेंट (खुद को बराबर का खिलाड़ी साबित करें)

सोचिए आप एक बहुत बड़े इन्वेस्टर या क्लाइंट के ऑफिस में जाते हैं। आप महंगे कपड़े पहनकर और हाथ में अपनी शानदार प्रेजेंटेशन लेकर खड़े हैं। लेकिन सामने वाला बंदा अपने फोन में बिजी है या शायद आपको ऐसे देख रहा है जैसे आप उसे उधार मांगने आए कोई दूर के रिश्तेदार हों। यहाँ दिक्कत आपकी प्रेजेंटेशन में नहीं है बल्कि आपके 'स्टेटस' में है। सेल्स की दुनिया में अगर आप सामने वाले के सामने गिड़गिड़ाते हुए दिखेंगे तो वह आपको कभी भी सीरियसली नहीं लेगा। लोग हमेशा उनसे जुड़ना चाहते हैं जो उनके बराबर के हों या उनसे ऊपर हों। ओरेन क्लाफ कहते हैं कि अगर आप अपनी वैल्यू खुद नहीं समझेंगे तो दुनिया आपको सेलसमैन की भीड़ का हिस्सा समझकर कचरे के डिब्बे में डाल देगी।

ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वे क्लाइंट को 'भगवान' मान लेते हैं। आप जितनी ज्यादा जी-हजूरी करेंगे सामने वाला उतना ही भाव खाएगा। यह वैसा ही है जैसे आप किसी लड़की को इम्प्रेस करने के लिए उसके पीछे पड़े रहें और वह आपको 'फ्रेंडजोन' करके निकल जाए। बिजनेस में भी यही होता है। जब आप अपनी बात मनवाने के लिए बहुत ज्यादा कोशिश करते हैं तो उसे 'नीडी' होना कहते हैं। और नीडी लोगों की कोई इज्जत नहीं होती। आपको 'स्टेटस अलाइनमेंट' का इस्तेमाल करना होगा। इसका मतलब है कि आपको यह दिखाना होगा कि आप और सामने वाला व्यक्ति एक ही लेवल पर हैं। आप यहाँ सिर्फ कुछ बेचने नहीं आए हैं बल्कि आप एक एक्सपर्ट हैं जिसके पास उनकी समस्या का असली समाधान है।

मान लीजिए आप एक ग्राफिक डिजाइनर हैं और एक बड़े बिजनेसमैन से मिल रहे हैं। अगर आप उनसे जाकर कहते हैं कि सर प्लीज मुझे एक मौका दे दीजिए मैं बहुत अच्छा काम करता हूँ तो समझ लीजिए डील वहीँ खत्म हो गई। लेकिन अगर आप उनसे कहते हैं कि मैंने आपके ब्रांड का एनालिसिस किया है और आपकी डिजाइन स्ट्रेटेजी में तीन बड़ी कमियाँ हैं जिसकी वजह से आपका पैसा बर्बाद हो रहा है तो खेल बदल जाएगा। अब आप एक सेल्समेन नहीं बल्कि एक डॉक्टर की तरह बात कर रहे हैं जो मर्ज का इलाज जानता है। अब वह बिजनेसमैन आपको ध्यान से सुनेगा क्योंकि आपने उसका स्टेटस मैच कर लिया है।

लोग अक्सर सोचते हैं कि कॉन्फिडेंस का मतलब जोर से बोलना है। लेकिन असल कॉन्फिडेंस तब दिखता है जब आप यह जता सकें कि आपको इस डील की जरूरत नहीं है बल्कि उन्हें आपकी जरूरत है। जब आप शांत रहकर और फैक्ट्स के साथ बात करते हैं तो सामने वाले को लगता है कि इस बंदे को अपने काम पर पूरा भरोसा है। याद रखिए जब तक आप सामने वाले को यह महसूस नहीं कराएंगे कि आप उनके बराबर के प्रोफेशनल हैं तब तक वह आपकी राय को सिर्फ एक 'पिच' समझेगा। आपको अपना रुतबा खुद बनाना होगा वरना दुनिया आपको सिर्फ एक छोटा मोटा वेंडर समझकर साइड लाइन कर देगी।


लेसन २ : द प्री-वायर्ड आइडिया (उन्हें लगने दें कि आइडिया उनका है)

जब आपने अपना स्टेटस सेट कर लिया है तो अब असली जादू शुरू होता है। दुनिया का सबसे मुश्किल काम है किसी के दिमाग में अपनी बात घुसाना। इंसानी दिमाग एक किले की तरह होता है। जैसे ही आप किसी को कुछ समझाने की कोशिश करते हैं उनके दिमाग का सिक्योरिटी गार्ड यानी 'क्रिटिकल थिंकिंग' जाग जाता है। वह चिल्लाने लगता है कि सावधान यह बंदा तुम्हें कुछ बेचने आया है। आप जितना ज्यादा लॉजिक देंगे सामने वाला उतना ही पीछे हटेगा। लोग उन आइडियाज से नफरत करते हैं जो उन पर थोपे जाते हैं लेकिन वे उन आइडियाज के लिए जान दे सकते हैं जो उनके खुद के दिमाग में पैदा हुए हों। ओरेन क्लाफ कहते हैं कि अगर आप चाहते हैं कि कोई आपकी बात माने तो उसे यह महसूस कराएं कि यह शानदार विचार असल में उसी का था।

इस टेक्नीक को 'इन्सेप्शन' की तरह समझ लीजिए। आपको सामने वाले को सीधे यह नहीं कहना है कि मेरा प्रोडक्ट खरीद लो क्योंकि यह बेस्ट है। आपको उन्हें ऐसे सबूत और जानकारी देनी है कि उनका दिमाग खुद उस नतीजे पर पहुँचे जहाँ आप उन्हें ले जाना चाहते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप अपने किसी जिद्दी दोस्त को ट्रिप पर ले जाना चाहते हैं। अगर आप कहेंगे कि चलो भाई मनाली चलते हैं तो वह सौ बहाने बनाएगा। लेकिन अगर आप उसे पहाड़ों की सुंदर फोटो दिखाएंगे और खराब गर्मी की बातें करेंगे तो वह खुद कहेगा कि यार क्यों न हम कहीं पहाड़ों पर चलें। बस यही वह पल है जब शिकार खुद जाल में आकर बैठ गया है। अब वह उस प्लान को सफल बनाने के लिए आपसे ज्यादा मेहनत करेगा।

मान लीजिए आप अपने बॉस को एक नया सॉफ्टवेयर खरीदने के लिए मनाना चाहते हैं। अगर आप सीधे जाकर कहेंगे कि सर यह नया सॉफ्टवेयर बहुत अच्छा है इसे ले लीजिए तो बॉस कहेंगे कि अभी बजट नहीं है। लेकिन अगर आप उनके पास जाकर सिर्फ एक प्रॉब्लम डिस्कस करें। आप कहें कि सर हमारे डेटा में बहुत गलतियां हो रही हैं और टीम का काफी टाइम बर्बाद हो रहा है मुझे समझ नहीं आ रहा कि एफिशिएंसी कैसे बढ़ाऊं। फिर आप धीरे से कुछ डेटा पॉइंट्स उनके सामने रख दें। जब बॉस उन पॉइंट्स को देखेंगे तो वे खुद कहेंगे कि क्या ऐसा कोई टूल नहीं आता जो इसे ऑटोमेट कर दे। तब आप कह सकते हैं कि हाँ सर एक दो ऑप्शंस हैं पर मुझे लगा शायद आप अभी इन्वेस्ट नहीं करना चाहेंगे। अब बॉस आपको कन्विंस करेंगे कि नहीं हमें यह लेना ही चाहिए।

यह तरीका इसलिए काम करता है क्योंकि हर इंसान खुद को स्मार्ट समझना चाहता है। जब आप उन्हें रास्ता दिखाते हैं और वे उस पर खुद चलते हैं तो उनकी ईगो संतुष्ट हो जाती है। वे उस आइडिया के मालिक बन जाते हैं। और एक बार जब कोई किसी आइडिया का मालिक बन जाता है तो वह उसे डिफेंड करने लगता है। वह रिजेक्शन की सारी दीवारें खुद ही गिरा देता है। आपको बस सही जानकारी के टुकड़े यानी 'ब्रेड क्रम्ब्स' छोड़ने हैं जिन्हें फॉलो करते हुए सामने वाला आपकी मंजिल तक पहुँच जाए। यह थोड़ा चालाकी भरा लग सकता है लेकिन असल में यह सामने वाले के दिमाग को बिना थकाए सही फैसले तक पहुँचाने का सबसे प्रोफेशनल तरीका है।


लेसन ३ : क्रिएटिंग सर्टेंटी (भरोसे की दीवार खड़ी करें)

अब जब आपने स्टेटस सेट कर लिया है और सामने वाले के दिमाग में अपना आइडिया भी प्लांट कर दिया है तो आखिरी रुकावट आती है डर। इंसान का दिमाग सुरक्षा चाहता है। जब भी कोई बड़ा फैसला लेने की बात आती है तो अंदर से एक आवाज आती है कि क्या यह सही है। अगर मेरा पैसा डूब गया तो क्या होगा। अगर यह बंदा फ्रॉड निकला तो क्या होगा। यह अनिश्चितता यानी 'अनसर्टेंटी' ही वह वजह है जिसके कारण ९० परसेंट डील्स आखिरी मौके पर कैंसिल हो जाती हैं। ओरेन क्लाफ समझाते हैं कि आपको सामने वाले को सिर्फ कन्विंस नहीं करना है बल्कि उन्हें 'सर्टेंटी' देनी है। उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि आपके साथ काम करना दुनिया का सबसे सुरक्षित फैसला है।

ज्यादातर लोग यहाँ फिर वही गलती करते हैं। वे बड़ी-बड़ी कसमें खाने लगते हैं या झूठी गारंटी देते हैं। याद रखिए आप जितना ज्यादा 'गारंटी' शब्द का इस्तेमाल करेंगे सामने वाले को उतना ही शक होगा। यह वैसा ही है जैसे कोई दुकानदार आपसे कहे कि भाई मुझ पर भरोसा करो मैं कभी झूठ नहीं बोलता। जैसे ही वह यह बोलता है आप तुरंत अपना पर्स संभाल लेते हैं। असल में सर्टेंटी बातों से नहीं बल्कि आपके ट्रैक रिकॉर्ड और आपके काम करने के तरीके से आती है। आपको उन्हें यह दिखाना होगा कि आपने यह काम पहले भी किया है और आप जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है।

मान लीजिए आप एक इंटीरियर डिजाइनर हैं। क्लाइंट को आपका काम पसंद है लेकिन वह पैसे देने में हिचकिचा रहा है। अगर आप कहेंगे कि सर फिक्र मत कीजिए मैं बहुत अच्छा घर बनाऊंगा तो उसे डर लगेगा। लेकिन अगर आप उसे अपना एक 'प्रोसेस मैप' दिखा दें। आप कहें कि सर देखिए पहले ७ दिन हम प्लानिंग करेंगे अगले १० दिन मटेरियल आएगा और २०वें दिन तक आपका किचन तैयार हो जाएगा। जब आप उसे एक साफ रास्ता दिखा देते हैं तो उसका दिमाग शांत हो जाता है। उसे लगता है कि इस बंदे के पास एक मैप है और इसे पता है कि यह क्या कर रहा है। सर्टेंटी का मतलब है अंधेरे कमरे में सामने वाले का हाथ पकड़कर उसे रौशनी की तरफ ले जाना।

यहाँ एक और कड़वा सच जान लीजिए। लोग आपके 'व्हाट' (आप क्या करते हैं) से ज्यादा आपके 'हाउ' (आप कैसे करते हैं) पर दांव लगाते हैं। अगर आप अपनी प्रेजेंटेशन के दौरान थोड़े भी घबराए हुए दिखते हैं तो सामने वाला समझ जाता है कि आप खुद श्योर नहीं हैं। आपको एक ऐसे कैप्टन की तरह दिखना होगा जो तूफान में भी जहाज को सही सलामत किनारे लगा सके। जब आप बिना किसी हिचकिचाहट के मुश्किल सवालों के जवाब देते हैं और अपनी कमियों को भी ईमानदारी से स्वीकार करते हैं तो सामने वाले का भरोसा आप पर अटूट हो जाता है। वे आपके साथ इसलिए नहीं जुड़ते क्योंकि आपका प्लान परफेक्ट है बल्कि इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि आप एक भरोसेमंद लीडर की तरह दिखते हैं।

हर बड़ी सफलता के पीछे एक सही बातचीत का हाथ होता है। फ्लिप द स्क्रिप्ट सिर्फ सेल्स की किताब नहीं है बल्कि यह इंसानी दिमाग को समझने की एक कला है। जब आप लोगों को नीचा दिखाए बिना खुद की वैल्यू करते हैं और उन्हें फैसला लेने की आजादी देते हैं तो वे खुद आपकी तरफ खिंचे चले आते हैं। अब वक्त आ गया है कि आप अपनी पुरानी घिसी-पिटी बातों को छोड़ें और दुनिया के सामने एक नए और पावरफुल तरीके से अपनी बात रखें। उठिए और अपना अगला बड़ा आइडिया दुनिया के दिमाग में ऐसे डालिए कि वह उसे अपना समझकर गले लगा ले।


अगर आप भी अपनी लाइफ और बिजनेस में रिजेक्शन से तंग आ चुके हैं तो आज ही इन लेसन्स को अपनी बातचीत में शामिल करें। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा अपनी बात मनवाने के लिए संघर्ष करता है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको इन तीनों में से कौन सा लेसन सबसे पावरफुल लगा।

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