क्या आपको लगता है कि आप बहुत स़मारट हैं। असलियत यह है कि दुनिया आपसे कोसों आगे निकल चुकी है और आप अभी भी पुराने तरीके से घिस रहे हैं। अगर आपने नई सकिल को तेजी से माशटर नहीं किया तो आप बस भीड का हिससा बनकर रह जाएंगे।
आज के इस दौर में अगर आप वही पुराने घिसेपिटे ढररे पर चलते रहे तो अपनी नौकरी और इजजत दोनों से हाथ धो बैठेंगे। इसलिय आज हम सकॉट यंग की बुक अलटरा लर्निंग से ऐसे 3 लेसन सीखेंगे जो आपके दिमाग की बतती जला देंगे और आपको माशटर बना देंगे।
लेसन १ : मेटलर्निंग - सीखने से पहले यह तो जान लो कि सीखना क्या है
मान लीजिए आपको कुकिंग नहीं आती और आपने जोश में आकर अपनी गरलफरेड के लिए बिरयानी बनाने का फैसला किया। अब आप सीधे किचन में घुस गए और जो हाथ लगा वह पतीले में डाल दिया। नतीजा कया होगा। बिरयानी तो छोडिए वह चीज जहर से कम नहीं लगेगी। यही हाल हमारे सीखने का है। हम बस कूद पडते हैं और फिर सिर पकडकर बैठ जाते हैं कि यार कुछ समझ नहीं आ रहा। अलटरा लर्निंग का सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम है मेटलर्निंग। इसका सीधा मतलब है सीखने के बारे में सीखना। यानी किसी भी जंग में उतरने से पहले उसका मैप तैयार करना।
जरा सोचिए आप जिम जाते हैं और पहले ही दिन 100 किलो का डंबल उठाने की कोशिश करते हैं। आपका शरीर बनेगा नहीं बल्कि टूट जाएगा। मेटलर्निंग हमें बताती है कि किसी भी सकिल को छोटे छोटे टुकडों में कैसे तोडना है। स्कॉट यंग कहते हैं कि आपको अपनी मेहनत का 10 परसेंट समय सिर्फ इस बात पर लगाना चाहिए कि आपको आखिर सीखना कया है और उसे सीखने के लिए कौन से रिसोर्स सबसे बेस्ट रहेंगे। हमारे यहाँ इंडिया में लोग यूट्यूब पर रैंडम वीडियो देखते हैं और सोचते हैं कि वह इंजीनियर बन गए। भाई ऐसे तो सिर्फ फोन की बैटरी गरम होगी दिमाग नहीं।
अगर आपको कोडिंग सीखनी है तो पहले यह देखो कि इंटरनेट पर कौन से कोरस फ्री हैं और कौन से पैड। यह देखो कि लोग इसे कैसे सीख रहे हैं। मेटलर्निंग का मतलब है कि आप अपनी सकिल का पूरा पोसटमोरटम कर दें। आपको यह पता होना चाहिए कि इस सकिल के कौन से हिससे सबसे ज्यादा जरूरी हैं। अगर आप गिटार सीखना चाहते हैं तो पहले यह जानो कि बेसिक कॉरडस कया होते हैं न कि सीधे रॉकसटार बनने के सपने देखो। बिना नहशे के सफर करना मतलब अपनी मंजिल से दूर जाना है। मेटलर्निंग वही नहशा है जो आपको भटने से बचाता है।
सच तो यह है कि हम सब आलसी हैं। हमें लगता है कि बस बुक खोलेंगे और सारा नयान दिमाग में घुस जाएगा। लेकिन असली खेल तो रणनीति का है। मेटलर्निंग आपको वह ससता और टिकाऊ रासता दिखाती है जिससे आप कम मेहनत में ज्यादा सीख सकें। अगर आपने यह नहीं किया तो आप बस उसी गधे की तरह हैं जो मेहनत तो बहुत करता है पर पहुंचता कहीं नहीं। इसलिय अगली बार जब भी कुछ नया सीखने का मन करे तो पहले एक डायरी उठाओ और लिखो कि आखिर इसका रासता कया है। जब रासता साफ होगा तो मंजिल तो मिल ही जाएगी।
लेसन २ : डायरेक्टनेस - किताबी ज्ञान छोड़ो और सीधे मैदान में उतरो
क्या आपने कभी ऐसे इंसान को देखा है जो तैरना सीखने के लिए बेड पर लेटकर हाथ पैर मारता है। सुनने में यह जितना बेवकूफी भरा लगता है हम असल जिंदगी में ठीक वैसा ही करते हैं। हम सालों तक स्कूल और कॉलेज की बेंच घिसते रहते हैं पर जब असली काम करने की बारी आती है तो हमारे हाथ पैर फूल जाते हैं। अलटरा लर्निंग का दूसरा पावरफुल लेसन है डायरेक्टनेस। इसका मतलब है कि आप जो सीखना चाहते हैं उसे सीधे उसी माहौल में जाकर सीखें जहाँ उसका इस्तेमाल होना है। अगर आप फ्रेंच भाषा सीखना चाहते हैं तो ग्रामर की मोटी किताबें चाटने के बजाय किसी फ्रेंच बंदे से बात करना शुरू कीजिए। भले ही आप शुरू में गालियाँ खाएं पर आप सीखेंगे वही जो काम आएगा।
हमारे यहाँ इंडिया में लड़के सालों तक 'हाउ टू पटायो ए गर्ल' के वीडियो देखते रहते हैं पर जब सामने कोई लड़की आती है तो उनसे नमस्ते तक नहीं बोला जाता। भाई स्क्रीन के सामने बैठकर आप चैंपियन नहीं बन सकते। यही हाल हमारी प्रोफेशनल लाइफ का है। लोग कोडिंग सीखने के लिए हजार वीडियो देखते हैं पर अपना पहला ऐप बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। स्कॉट यंग कहते हैं कि असली लर्निंग तभी होती है जब आप सीधे एक्शन लेते हैं। जब आप कोई प्रोजेक्ट शुरू करते हैं तो आपको पता चलता है कि असली दिक्कत कहाँ आ रही है। किताब में सब कुछ आसान लगता है क्योंकि वहाँ आपके पास जवाब होते हैं। लेकिन असली दुनिया में कोई आपको हिंट नहीं देगा।
डायरेक्टनेस का एक बड़ा फायदा यह है कि आप फालतू की चीजों से बच जाते हैं। अक्सर हम ऐसी चीजें पढ़ने में वक्त बर्बाद करते हैं जिनका हकीकत से कोई लेना देना नहीं होता। अगर आपको बिजनेस करना है तो सीधे मार्केट में जाकर सामान बेचना शुरू करो न कि एमबीए की थ्योरी में अपना सिर खपाओ। जो इंसान सीधे मैदान में उतरता है उसे ठोकरें लगती हैं पर वही सबसे तेज दौड़ता भी है। बाकी लोग तो बस जूते के फीते बांधने में ही पूरी जिंदगी गुजार देते हैं। डारेक्ट लर्निंग में थोडा डर लगता है क्योंकि इसमें फेल होने का चांस ज्यादा होता है। लेकिन याद रखिए डर के आगे जीत है और उस जीत के पीछे डायरेक्टनेस का हाथ है।
अगर आप आज भी सोच रहे हैं कि जब मैं पूरी तरह तैयार हो जाऊंगा तब काम शुरू करूंगा तो यकीन मानिए वह दिन कभी नहीं आएगा। आप कभी भी सौ परसेंट तैयार नहीं होंगे। जो लोग सफल होते हैं वे अधूरे ज्ञान के साथ ही काम शुरू कर देते हैं और काम करते करते ही एक्सपर्ट बन जाते हैं। अपनी ईगो को साइड में रखिए और गलतियाँ करने के लिए तैयार हो जाइए। जब आप सीधे काम करते हैं तो आपका दिमाग उसे ज्यादा बेहतर तरीके से याद रखता है। इसलिय किताबी कीड़ा बनना छोड़िए और असली खिलाडी बनिए। जब आप खुद को सीधे चुनौती देते हैं तो आपका टैलेंट निखर कर बाहर आता है।
लेसन ३ : डरिल - अपनी कमजोर नस को पकड़ो और उसे तबाह कर दो
अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ मेहनत करने से आप सकसेसफुल हो जाएंगे तो आप बहुत बडी गलतफहमी में जी रहे हैं। गधा भी बहुत मेहनत करता है पर वह जंगल का राजा नहीं बनता। अलटरा लर्निंग का तीसरा और सबसे कडक नियम है डरिल। इसका मतलब है अपनी पूरी सकिल को छोटे छोटे टुकडों में तोडना और उस हिससे पर सबसे ज्यादा काम करना जहाँ आप सबसे ज्यादा फिससडी हैं। मान लीजिए आप करिकेटर बनना चाहते हैं और आपकी कवर डराइव बहुत खराब है। अब आप दिन भर छकके मारने की परैकटिस करेंगे तो उससे आपकी कवर डराइव ठीक नहीं होगी। आपको अपनी उस कमजोरी को अलग करना होगा और उस पर तबाह कर देने वाली मेहनत करनी होगी।
हमारे यहाँ लोग एक ही चीज को बार बार रटते रहते हैं जिसे वह जानते हैं। क्यों। क्योंकि उसमें मजा आता है और हमें लगता है कि हम बहुत कुछ कर रहे हैं। पर भाई जो आता है उसे बार बार करने से आप माशटर नहीं बनते बल्कि आप बस अपना टाइम पास कर रहे होते हैं। असली अलटरा लर्नर वह है जो अपनी उस कमजोरी को ढूंढता है जिससे उसे डर लगता है। अगर आपको मैथ में अलजेबरा समझ नहीं आता तो बाकी के चैप्टर छोडकर सिर्फ उसी पर टूट पडो। जब तक आप अपनी उस कमजोर कड़ी को मजबूत नहीं करेंगे तब तक आपकी पूरी चेन कमजोर ही रहेगी। डरिल का मतलब है कि आप अपनी सकिल के उस विलेन को ढूंढें जो आपकी ग्रोथ रोक रहा है।
जरा सोचिए एक शेफ के बारे में जिसे खाना तो बहुत अचा बनाना आता है पर उसकी चाकू चलाने की सपीट बहुत कम है। अगर वह अपनी इस एक कमी पर काम कर ले तो वह पूरी किचन का किंग बन सकता है। स्कॉट यंग कहते हैं कि हमें अपनी लर्निंग को इस तरह से डिजाइन करना चाहिए कि हम अपनी सबसे बडी रुकावट को सबसे पहले दूर करें। इसे 'रेटेपिटिव पिरैकटिस' भी कहते हैं पर एक टविसट के साथ। आपको सिर्फ दोहराना नहीं है बल्कि हर बार बेहतर होना है। अगर आप हर बार वही गलती दोहरा रहे हैं तो आप सीख नहीं रहे हैं बल्कि आप बस गढढे में गिर रहे हैं।
यह सब सुनने में बहुत बोरिंग लग सकता है क्योंकि इसमें कोई ग्लैमर नहीं है। अपनी कमियों पर काम करना किसे पसंद है। पर यकीन मानिए यही वह रासता है जो एक आम आदमी को एक लीजेंड बनाता है। जब आप अपनी कमजोरियों को मार देते हैं तो आपके पास सिर्फ ताकत बचती है। और जब आपकी हर कडी मजबूत होती है तो आपको कोई नहीं हरा सकता। तो अब बहाने बनाना बंद कीजिए और अपनी उस एक कमजोरी को पकडिए जो आपको आगे बढने से रोक रही है। उस पर इतनी डरिल कीजिए कि वह कमजोरी आपकी सबसे बडी ताकत बन जाए।
तो दोस्तों, कया आप अभी भी वही पुराने घिसेपिटे तरीके से सीखते रहेंगे या आज से ही अलटरा लर्नर बनेंगे। याद रखिए कि समय बहुत कम है और सकिलस बहुत सारी। अगर आप आज नहीं बदले तो कल आप सिर्फ दूसरों की कामयाबी की कहानियाँ पढ रहे होंगे। इस आरटिकल को अपने उन दोसतों के साथ शेयर करें जो कहते हैं कि उनसे कुछ नया नहीं सीखा जाता। कमेंट में बताएं कि आपकी वह कौन सी एक कमजोरी है जिसे आप आज से ही डरिल करना शुरू करेंगे। चलिए अब उठिए और खुद को माशटर बनाइये।
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