क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो काम के बोझ तले दबकर खुद की ही चटनी बना रहे हैं? बधाई हो। आप अपनी लाइफ का कीमती समय और चैन कूड़े के डिब्बे में डाल रहे हैं क्योंकि आपको काम मैनेज करना नहीं बल्कि रायता फैलाना आता है। बिना सिस्टम के आप बस एक बिना ब्रेक वाली साइकिल चला रहे हैं जो जल्द ही दीवार से टकराने वाली है।
लेकिन घबराइए मत। आज हम डेविड एलन की गेटिंग थिंग्स डन मेथड से सीखेंगे कि कैसे इस पागलपन को कंट्रोल करना है। यहाँ ३ ऐसे लाइफ चेंजिंग लेसन हैं जो आपकी अस्त व्यस्त जिंदगी को फिर से पटरी पर ले आएंगे और आपको सुपर प्रोडक्टिव बनाएंगे।
Lesson : अपने दिमाग को डस्टबिन मत बनाइए - कैप्चर एवरीथिंग
क्या आपने कभी गौर किया है कि आपका दिमाग रात को २ बजे ही आपको क्यों याद दिलाता है कि कल बिजली का बिल भरना है? या फिर तब जब आप नहा रहे होते हैं तब अचानक याद आता है कि यार उस दोस्त को तो रिप्लाई ही नहीं किया? सच तो यह है कि आपका दिमाग बहुत ही खराब अलार्म क्लॉक है। डेविड एलन कहते हैं कि हमारा दिमाग आइडियाज को रखने के लिए नहीं बल्कि नए आइडियाज सोचने के लिए बना है। लेकिन हम क्या करते हैं? हम अपने इस अनमोल सुपर कंप्यूटर को सब्जी की लिस्ट, ऑफिस की डेडलाइन्स और उस पुरानी उधार वाली डायरी की तरह इस्तेमाल करते हैं।
इमेजिन कीजिए कि आप एक रेस्टोरेंट में वेटर हैं। एक टेबल से ऑर्डर आया, दूसरे से बिल माँगा गया और तीसरे पर किसी ने पानी गिरा दिया। अगर आप यह सब सिर्फ याद रखने की कोशिश करेंगे तो यकीन मानिए आप किसी के सिर पर सूप गिरा देंगे। हमारी जिंदगी भी कुछ ऐसी ही हो गई है। हम हर छोटी बड़ी चीज को दिमाग में ठूँसते रहते हैं। "मम्मी को फोन करना है", "गाड़ी की सर्विस करानी है", "वो नया प्रोजेक्ट शुरू करना है"। जब दिमाग में इतनी भीड़ होगी तो फोकस के लिए जगह कहाँ बचेगी? फिर हम कहते हैं कि हमें स्ट्रेस हो रहा है। भाई साहब, स्ट्रेस काम का नहीं है, स्ट्रेस तो उस कचरे का है जिसे आपने दिमाग में जमा कर रखा है।
डेविड एलन का पहला लेसन बहुत सिंपल है - कैप्चर। जो भी चीज आपका ध्यान खींच रही है उसे तुरंत बाहर निकालिए और किसी पेपर या ऐप में लिख डालिए। इसे "इनबॉक्स" कहिए। जब आप किसी टास्क को लिख लेते हैं तो आपके दिमाग को एक सिग्नल मिलता है कि "भाई रिलैक्स कर, अब इसकी जिम्मेदारी कागज की है"। इससे आपका मेंटल बैंडविड्थ खाली होता है।
जरा सोचिए उस इंसान के बारे में जो शॉपिंग लिस्ट घर भूल आता है और दुकान पर खड़े होकर अपनी याददाश्त से लड़ता है। वो आधा सामान भूल जाता है और जो लाता है वो गलत होता है। क्या आप अपनी लाइफ के साथ भी यही करना चाहते हैं? अपनी लाइफ के कीमती आइडियाज को इस भरोसे मत छोड़िए कि "याद रहेगा"। यकीन मानिए, आपको कुछ याद नहीं रहने वाला। आप बस एक स्ट्रेस से भरे हुए इंसान बनकर रह जाएंगे जो हमेशा हड़बड़ी में रहता है। तो आज से ही एक डायरी उठाइए या कोई ऐप डाउनलोड कीजिए और अपने दिमाग का सारा कूड़ा बाहर निकाल दीजिए। जब दिमाग खाली होगा तभी तो उसमें बड़े और विजनरी आइडियाज के लिए जगह बनेगी। वरना आप बस यही सोचते रह जाएंगे कि कल नाश्ते में क्या बनाना था।
Lesson : २ मिनट का जादू - आलस को टाटा बाय बाय कहिए
हम इंसानों की एक बहुत ही कमाल की सुपरपावर है - काम को टालना। हम छोटे से छोटे काम को भी इतना बड़ा बना देते हैं जैसे हमें चांद पर रॉकेट भेजना हो। मान लीजिए आपको एक ईमेल का रिप्लाई करना है। आप उसे देखते हैं, फिर सोचते हैं कि "अभी नहीं, बाद में करूँगा"। फिर वो ईमेल आपके दिमाग के पीछे कहीं जाकर बैठ जाता है और धीरे-धीरे आपको टेंशन देने लगता है। डेविड एलन यहाँ एक बहुत ही सिंपल और पावरफुल रूल देते हैं जिसे कहते हैं - द टू मिनट रूल।
इसका लॉजिक बड़ा सीधा है। अगर किसी काम को पूरा करने में २ मिनट से कम का समय लगता है, तो उसे अभी के अभी कर डालिए। उसे अपनी "टू डू लिस्ट" में लिखने की जरूरत भी नहीं है। क्योंकि किसी काम को लिखने, फिर उसे याद रखने और बाद में करने में जितना समय और एनर्जी खराब होगी, उससे कम में तो वो काम खत्म हो जाएगा।
इमेजिन कीजिए आपका कमरा फैला हुआ है। एक गंदा मोजा बेड पर पड़ा है। उसे उठाकर लॉन्ड्री बास्केट में डालने में मुश्किल से १० सेकंड लगेंगे। लेकिन हम क्या करते हैं? हम उस मोजे को देखते हैं, उसके बारे में एक दुख भरी कविता सोचते हैं और फिर उसे वहीं पड़ा रहने देते हैं। धीरे-धीरे ऐसे १० काम जमा हो जाते हैं और अचानक आपका पूरा कमरा कबाड़खाना लगने लगता है। फिर आप एक दिन पूरा संडे बर्बाद करते हैं सफाई में और खुद को कोसते हैं। क्या फायदा हुआ?
यही हाल ऑफिस में भी होता है। किसी फाइल को फोल्डर में डालना है, किसी को "थैंक यू" का मैसेज भेजना है या बस एक छोटा सा बिल पे करना है। ये सब २ मिनट के काम हैं। लेकिन जब हम इन्हें टालते हैं, तो ये छोटे-छोटे कंकड़ मिलकर पहाड़ बन जाते हैं। फिर आप उस पहाड़ के नीचे दबकर चीखते हैं कि "मैं बहुत बिजी हूँ"। असल में आप बिजी नहीं हैं, आप बस एक प्रोफेशनल आलसी हैं जो छोटी चीजों को इग्नोर कर रहा है।
इस रूल को अपनाने के बाद आपकी लाइफ से वो "छोटा मोटा स्ट्रेस" गायब हो जाएगा जो हमेशा बैकग्राउंड म्यूजिक की तरह बजता रहता है। २ मिनट का ये रूल आपको एक एक्शन लेने वाला इंसान बनाता है, न कि सिर्फ सोचने वाला। तो अगली बार जब कोई छोटा टास्क सामने आए, तो उसे अपनी डायरी में जगह मत दीजिए, उसे अपनी लाइफ से ही बाहर कर दीजिए - तुरंत।
Lesson : वीकली रिव्यु - अपनी लाइफ के पायलट बनिए
सोचिए आप एक बहुत लंबी ट्रिप पर निकले हैं और आप कार चला रहे हैं। क्या आप पूरी यात्रा के दौरान एक बार भी मैप नहीं देखेंगे? या क्या आप यह चेक नहीं करेंगे कि पेट्रोल कितना बचा है? अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो मुबारक हो, आप बहुत जल्द किसी गड्ढे में गिरने वाले हैं। डेविड एलन कहते हैं कि आपने काम लिख तो लिए, २ मिनट वाले काम निपटा भी दिए, लेकिन अगर आप रुककर अपनी प्रोग्रेस को चेक नहीं करते, तो आपका पूरा सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। इसे ही वो वीकली रिव्यु कहते हैं।
वीकली रिव्यु आपकी लाइफ का वो समय है जब आप एक कदम पीछे हटते हैं और देखते हैं कि "भाई, चल क्या रहा है?"। ज्यादातर लोग बस भाग रहे हैं, उन्हें पता ही नहीं कि वो सही दिशा में जा रहे हैं या बस गोल-गोल घूम रहे हैं। हफ्ते में एक दिन, मान लीजिए संडे की सुबह, खुद के साथ एक डेट पर जाइए। अपनी डायरी खोलिए, अपने ऐप चेक कीजिए और देखिए कि पिछले हफ्ते कौन से काम अधूरे रह गए। कौन से नए प्रोजेक्ट्स हैं जो शुरू करने हैं? और कौन सी ऐसी चीजें हैं जो अब जरूरी नहीं हैं और उन्हें डिलीट कर देना चाहिए।
बिना वीकली रिव्यु के आप उस फुटबॉल प्लेयर की तरह हैं जो मैदान में पागलों की तरह दौड़ रहा है लेकिन उसे पता ही नहीं कि गोल पोस्ट कहाँ है। आपको लगता है कि आप बहुत काम कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में आप बस अपनी ही पूंछ के पीछे भाग रहे कुत्ते की तरह हैं। सार्केस्म की बात तो यह है कि लोग कहते हैं "मेरे पास रिव्यु करने का टाइम नहीं है"। भाई साहब, आपके पास रिव्यु करने का टाइम नहीं है इसीलिए तो आपके पास किसी भी चीज के लिए टाइम नहीं है।
जब आप हर हफ्ते अपना सिस्टम साफ़ करते हैं, तो आपको एक अलग लेवल का कॉन्फिडेंस मिलता है। आपको पता होता है कि जो काम आप अभी कर रहे हैं, वो ही इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी है। इससे वो "कुछ छूट गया है" वाला डर खत्म हो जाता है। यह रिव्यु आपको एक क्लैरिटी देता है जो आज के शोर शराबे वाले जमाने में किसी वरदान से कम नहीं है।
दोस्तों, गेटिंग थिंग्स डन सिर्फ एक किताब नहीं, एक लाइफस्टाइल है। आप कब तक स्ट्रेस और अधूरी लिस्ट के बोझ तले दबे रहेंगे? आज ही अपना पहला "इनबॉक्स" बनाइए और दिमाग का कचरा बाहर निकालिए। याद रखिए, आपकी शांति आपके सिस्टम में छिपी है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो हमेशा "मैं बहुत बिजी हूँ" का रोना रोता रहता है। नीचे कमेंट में बताइए कि आप कौन सा काम आज २ मिनट के अंदर खत्म करने वाले हैं।
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