Guerrilla Marketing in 30 Days (Hindi)


अगर आप अभी भी करोड़ों का बजट न होने का रोना रोकर अपने बिजनेस को कछुए की चाल से चला रहे हैं तो मुबारक हो। आप अपनी बर्बादी का इंतजार कर रहे हैं। बिना स्मार्ट मार्केटिंग के आपके प्रोडक्ट को तो आपकी पड़ोस वाली आंटी भी नोटिस नहीं करेंगी।

इस आर्टिकल में हम जय लेविंसन की कमाल की बुक से वह ३ खास लेसन सीखेंगे जो आपके छोटे से बिजनेस को ३० दिन के अंदर एक ब्रांड में बदल सकते हैं। तो चलिए मार्केटिंग के इस रोमांचक सफर को शुरू करते हैं।


लेसन १ : आपकी जेब खाली है पर दिमाग तो चालू है न

मार्केटिंग का नाम सुनते ही मिडिल क्लास बिजनेसमैन के पसीने छूटने लगते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक टीवी पर बड़े एक्टर की फोटो नहीं चमकेगी या न्यूजपेपर के फ्रंट पेज पर बड़ा सा विज्ञापन नहीं छपेगा तब तक कोई उनके प्रोडक्ट को घास नहीं डालेगा। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो बधाई हो। आप उसी पुरानी और थकी हुई सोच के शिकार हैं जो बिजनेस को आगे नहीं बल्कि गड्ढे में ले जाती है। जय लेविंसन कहते हैं कि मार्केटिंग में पैसा फेंकने से ज्यादा जरूरी है अपनी क्रिएटिविटी का सही इस्तेमाल करना। असल में गुरीला मार्केटिंग का पहला और सबसे बड़ा नियम यही है कि आपको डॉलर की जगह टाइम और एनर्जी का इन्वेस्टमेंट करना होगा।

सोचिए आपके पास एक छोटी सी केक की शॉप है। अब आपके पास इतना बजट तो है नहीं कि आप पूरे शहर में होर्डिंग लगवा सकें। एक आम दुकानदार क्या करेगा। वह बस चुपचाप बैठकर कस्टमर का इंतजार करेगा और किस्मत को कोसेगा। लेकिन एक गुरीला मार्केटर क्या करेगा। वह अपने मोहल्ले के सबसे ज्यादा बोलने वाले इंसान को खोजेगा। मान लीजिए वह आपकी कॉलोनी की वह आंटी हैं जिनकी पहुंच हर घर तक है। आपने उन्हें एक छोटा सा फ्री सैंपल खिलाया और बस। अब वह आंटी पूरे मोहल्ले में आपके केक का फ्री में विज्ञापन करेंगी। इसे कहते हैं दिमाग का इस्तेमाल करना। यहाँ आपने एक रुपया भी विज्ञापन पर खर्च नहीं किया लेकिन आपकी मार्केटिंग सुपर हिट हो गई।

ज्यादातर लोग मार्केटिंग को एक बोझ समझते हैं। उन्हें लगता है कि यह तो सिर्फ बड़े ब्रांड्स का खेल है। पर सच तो यह है कि गुरीला मार्केटिंग छोटे खिलाड़ियों का सबसे घातक हथियार है। आपके पास पैसा कम है तो क्या हुआ। आपके पास वह हिम्मत तो है जो बड़े कॉरपोरेट ऑफिस में बैठे लोग खो चुके हैं। मार्केटिंग असल में एक साइकोलॉजिकल खेल है। अगर आप अपने कस्टमर के चेहरे पर एक मुस्कान ला सकते हैं या उन्हें हैरान कर सकते हैं तो आपने आधी जंग जीत ली। मान लीजिए आप एक जिम चलाते हैं। अब आप पर्चे बंटवाने की जगह शहर के हर टूटे हुए बेंच पर एक स्टीकर चिपका दें जिस पर लिखा हो कि अगर आप फिट होते तो यह बेंच नहीं टूटता। लोग इसे देखेंगे हसेंगे और आपका नाम उनके दिमाग में छप जाएगा।

ह्यूमर और सरप्राइज वह दो चीजें हैं जो करोड़ों के बजट को भी मात दे सकती हैं। लोग विज्ञापन देखना पसंद नहीं करते पर लोग मजेदार चीजें देखना जरूर पसंद करते हैं। अगर आपकी मार्केटिंग में जान है तो लोग खुद उसे शेयर करेंगे। आपको उन्हें फोर्स नहीं करना पड़ेगा। तो अपनी जेब की तरफ देखना बंद कीजिए और अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाइए। याद रखिए कि बड़ा बजट होना अच्छी बात है पर बड़ा विजन होना उससे कहीं ज्यादा जरूरी है। जब आप पैसा कम और अक्ल ज्यादा लगाते हैं तभी आप एक असली गुरीला मार्केटर बनते हैं। यह पहला कदम है जो आपको ३० दिन के अंदर प्रॉफिट की राह पर ले जाएगा।


लेसन २ : एक दिन का जोश और पूरी उम्र का होश

मार्केटिंग की दुनिया में सबसे बड़ी गलती क्या है पता है। वह है एक दिन के लिए शेर बनना और बाकी के उन्नतीस दिन तक गायब हो जाना। लोग जोश में आकर एक दिन खूब सारे सोशल मीडिया पोस्ट डाल देंगे या कुछ पर्चे बंटवा देंगे और फिर उम्मीद करेंगे कि अगले दिन दुकान के बाहर लाइन लग जाएगी। जब ऐसा नहीं होता तो वे निराश होकर बैठ जाते हैं। जय लेविंसन कहते हैं कि गुरीला मार्केटिंग कोई स्प्रिंट नहीं बल्कि एक मैराथन है। यहाँ आपको हर दिन अपने कस्टमर के सामने बने रहना पड़ता है। अगर आप उनकी आंखों से ओझल हुए तो समझो आप उनके दिमाग से भी गायब हो गए।

मान लीजिए आप किसी को पसंद करते हैं और उसे इम्प्रेस करना चाहते हैं। अब आपने एक दिन तो उसके लिए बहुत महंगी गिफ्ट खरीदी और बहुत सारी तारीफ की पर फिर पूरे महीने आपने उसे एक मैसेज तक नहीं किया। क्या लगता है आपको। क्या वह आपके प्यार में पागल हो जाएगी। बिल्कुल नहीं। वह तो आपका नाम तक भूल जाएगी। मार्केटिंग भी बिल्कुल ऐसी ही है। आपको अपने कस्टमर के साथ रिश्ता बनाना पड़ता है। और रिश्ता एक दिन में नहीं बल्कि बार बार याद दिलाने से बनता है। मार्केटिंग का मतलब है कि जब भी आपके कस्टमर को उस चीज की जरूरत पड़े जो आप बेच रहे हैं तो सबसे पहला नाम आपके ब्रांड का ही आना चाहिए।

ज्यादातर छोटे बिजनेसमैन को लगता है कि बार बार विज्ञापन करने से लोग परेशान हो जाएंगे। लेकिन सच तो यह है कि आज की दुनिया में लोगों का अटेंशन स्पैन एक गोल्डफिश से भी कम है। उन्हें बार बार याद दिलाना पड़ता है कि भाई साहब हम अभी भी जिंदा हैं और बेस्ट सर्विस दे रहे हैं। कंसिस्टेंसी का मतलब यह नहीं है कि आप हर दिन कुछ नया और बड़ा करें। इसका मतलब सिर्फ यह है कि आप अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहें। चाहे वह एक छोटा सा व्हाट्सएप मैसेज हो या एक सिंपल ईमेल। आपकी मार्केटिंग की टोन और मैसेज एक जैसा होना चाहिए। अगर आप आज कुछ और बोल रहे हैं और कल कुछ और तो कस्टमर कन्फ्यूज हो जाएगा।

गुरीला मार्केटिंग में धैर्य यानी पेशेंस सबसे बड़ा हथियार है। बहुत से लोग ३० दिन के प्लान को १० दिन में ही छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें तुरंत रिजल्ट चाहिए होता है। मार्केटिंग एक बीज बोने जैसा है। आप रोज पानी देंगे तभी पेड़ बड़ा होगा। अगर आप रोज उसे खोदकर देखेंगे कि जड़ें कितनी बड़ी हुईं तो पौधा मर ही जाएगा न। इसलिए अपनी स्ट्रेटेजी पर भरोसा रखिए और उसे समय दीजिए। जब आप लगातार ३० दिन तक अपने कस्टमर के सामने सही तरीके से आते हैं तो आप उनके लिए एक अनजान दुकानदार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद दोस्त बन जाते हैं। और याद रखिए कि लोग हमेशा उसी से खरीदते हैं जिस पर वे भरोसा करते हैं। तो शोर मचाना बंद कीजिए और हर दिन एक छोटा कदम उठाने पर ध्यान दीजिए।


लेसन ३ : कस्टमर नहीं बल्कि एक आर्मी तैयार कीजिए

मार्केटिंग का असली मतलब सिर्फ सामान बेचना नहीं है। अगर आप सिर्फ ट्रांजेक्शन के पीछे भाग रहे हैं तो आप एक साधारण सेल्समैन हैं। गुरीला मार्केटर कभी भी सिर्फ एक बार की सेल पर ध्यान नहीं देता। उसका लक्ष्य होता है एक वफादार कम्युनिटी बनाना। जय लेविंसन हमें सिखाते हैं कि एक पुराने कस्टमर को वापस बुलाना एक नए कस्टमर को खोजने से छह गुना ज्यादा सस्ता और आसान होता है। पर हमारे देसी भाई क्या करते हैं। एक बार माल बिका और फिर वे कस्टमर को ऐसे भूल जाते हैं जैसे कोई पुराना उधार मांगने वाला रिश्तेदार। यह अप्रोच आपके बिजनेस की जड़ें काट रही है।

मान लीजिए आप एक सैलून चलाते हैं। एक कस्टमर आया आपने उसके बाल काटे और उसने पैसे दिए। खेल खत्म। लेकिन एक गुरीला माइंडसेट वाला मालिक क्या करेगा। वह उस कस्टमर का नंबर लेगा और ठीक पंद्रह दिन बाद उसे एक छोटा सा मैसेज भेजेगा कि क्या आप अपनी हेयरस्टाइल से खुश हैं। फिर पच्चीसवें दिन एक रिमाइंडर भेजेगा कि अब आपके बाल कटवाने का सही समय आ गया है। इस छोटे से एक्स्ट्रा एफर्ट से उस कस्टमर को लगेगा कि आप सिर्फ उसके पैसों से नहीं बल्कि उसकी लुक से भी प्यार करते हैं। अब वह कहीं और नहीं जाएगा। वह आपका ऐसा पक्का फैन बन जाएगा जो फ्री में दस और लोगों को आपके पास लेकर आएगा। इसे कहते हैं बिना पैसे खर्च किए अपनी मार्केटिंग आर्मी खड़ी करना।

आजकल के जमाने में लोग विज्ञापनों पर भरोसा नहीं करते। वे लोगों के रिव्यू और उनके एक्सपीरियंस पर भरोसा करते हैं। आपकी सबसे बड़ी मार्केटिंग आपके वह कस्टमर्स हैं जो आपके बारे में दूसरों को बताते हैं। इसे 'वर्ड ऑफ माउथ' कहते हैं। पर यह जादू अपने आप नहीं होता। आपको अपने कस्टमर को कुछ ऐसा खास देना होगा जिसके बारे में वह बात कर सके। चाहे वह आपकी सर्विस का तरीका हो या आपके बात करने का अंदाज। अगर आप अपने कस्टमर को एक वीआईपी फीलिंग दे सकते हैं तो वह आपकी मार्केटिंग का सबसे बड़ा हथियार बन जाएगा। याद रखिए कि एक संतुष्ट कस्टमर एक चलते फिरते विज्ञापन की तरह होता है जिसकी वैल्यू किसी भी फेसबुक या इंस्टाग्राम ऐड से कहीं ज्यादा होती है।

गुरीला मार्केटिंग का यह ३० दिन का सफर आपको सिर्फ प्रॉफिट ही नहीं दिलाता बल्कि आपको एक स्मार्ट लीडर बनाता है। अब समय आ गया है कि आप उन पुरानी और महंगी मार्केटिंग की जंजीरों को तोड़ दें। अपने आस पास की छोटी छोटी चीजों को अपना हथियार बनाएं। अपने कस्टमर्स के साथ एक गहरा रिश्ता जोड़ें और हर दिन अपनी प्रजेंस दिखाएं। याद रखिए कि बिजनेस सिर्फ पैसों का खेल नहीं है बल्कि यह लोगों का दिल जीतने की कला है। अगर आपने एक बार लोगों का भरोसा जीत लिया तो पैसा और प्रॉफिट तो बस एक छोटा सा बायप्रोडक्ट बनकर आपके पीछे खिंचा चला आएगा। तो उठिए और आज से ही अपनी मार्केटिंग की इस नई जंग की शुरुआत कीजिए।

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