If You Don't Make Waves You'll Drown (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस में 'जी सर जी सर' करके खुद को बहुत बड़ा लीडर समझते हैं। बधाई हो आप बहुत जल्द डूबने वाले हैं। अगर आप लहरें पैदा नहीं कर रहे तो आप बस भीड़ का हिस्सा हैं और भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता।

आज के इस दौर में जहाँ हर कोई सबको खुश करने में लगा है डेव एंडरसन की यह किताब हमें वह कड़वा सच बताएगी जो शायद आपके बॉस ने आपको कभी नहीं बताया। आइए जानते हैं वो 3 बड़े लेसन जो आपको एक डूबते हुए करियर से बचाकर एक असली लीडर बना सकते हैं।


लेसन १ : अपनी जगह बनाने के लिए शोर मचाना जरूरी है

क्या आपने कभी गौर किया है कि पानी में खड़ा पत्थर तब तक किसी को नहीं दिखता जब तक कोई उसमें कंकड़ मारकर लहरें न पैदा कर दे। कॉर्पोरेट दुनिया का भी यही हाल है। हम में से ज्यादातर लोग ऑफिस जाते हैं अपना सिर झुकाकर काम करते हैं और शाम को चुपचाप घर आ जाते हैं। हमें लगता है कि हमारा काम खुद बोलेगा। लेकिन सच तो यह है कि बिना मार्केटिंग के तो भगवान भी नहीं दिखते फिर आपका काम क्या चीज है। डेव एंडरसन साफ कहते हैं कि अगर आप लहरें नहीं उठा रहे हैं तो आप बस पानी की सतह पर तैरता हुआ वो कचरा हैं जो बहाव के साथ कहीं भी निकल जाएगा।

कल्पना कीजिए कि आप एक मीटिंग में बैठे हैं जहाँ आपका बॉस एक ऐसी प्लानिंग बता रहा है जो आपको पता है कि पूरी तरह फेल होने वाली है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह कि आप 'यस बॉस' बोलें और अपनी नौकरी बचाएँ। दूसरा रास्ता यह कि आप हाथ उठाएँ और कहें कि सर यह प्लान बेकार है। ज्यादातर लोग पहला रास्ता चुनते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि शोर मचाने से उनकी इमेज खराब होगी। लेकिन डेव कहते हैं कि एक असली लीडर वही है जो अपनी मौजूदगी दर्ज कराए। अगर आप किसी कमरे में दाखिल होते हैं और आपके आने से माहौल में कोई हलचल नहीं होती तो यकीन मानिए आपका होना या न होना बराबर है।

मान लीजिए आप एक सेल्स टीम में हैं। महीने का टारगेट पूरा नहीं हुआ। अब मीटिंग में सब बहाने बना रहे हैं कि मार्केट खराब है या कॉम्पिटिशन ज्यादा है। अगर आप वहाँ खड़े होकर यह कहें कि मार्केट नहीं हमारी एप्रोच खराब है तो आप लहरें पैदा कर रहे हैं। हो सकता है कुछ लोग आपको घमंडी कहें या कुछ को आपकी बात चुभे। लेकिन अगली बार जब कोई बड़ा फैसला लेना होगा तो बॉस की नजर सबसे पहले आप पर ही जाएगी। क्योंकि आपने भीड़ से अलग हटकर कुछ कहा है।

शान्त रहकर काम करना उन लोगों के लिए अच्छा है जिन्हें रिटायरमेंट तक बस अपनी कुर्सी बचानी है। लेकिन अगर आप इस 25 से 34 साल की उम्र वाले गोल्डन पीरियड में हैं और कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो आपको शोर मचाना ही पड़ेगा। इसका मतलब यह नहीं कि आप बिना बात के चिल्लाएँ। इसका मतलब यह है कि आपकी राय और आपके काम का इम्पैक्ट इतना गहरा होना चाहिए कि लोग उसे नजरअंदाज न कर सकें। याद रखिए जो कुत्ता भौंकता नहीं है उसे चोर भी सीरियसली नहीं लेते। इसलिए अपनी आवाज बुलंद कीजिए और सिस्टम में वो हलचल पैदा कीजिए जिसकी आज सख्त जरूरत है।


लेसन २ : पीसी कल्चर यानी पॉलिटिकल करेक्टनेस की जंजीरें तोड़ें

आजकल के जमाने में एक नई बीमारी चली है जिसे लोग 'पॉलिटिकल करेक्टनेस' कहते हैं। सरल भाषा में कहें तो इसका मतलब है कि किसी को बुरा न लग जाए इसलिए सच को इतना घुमा फिराकर बोलो कि उसका मतलब ही खत्म हो जाए। ऑफिस हो या बिजनेस आज हर कोई एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखने में इतना बिजी है कि असली मुद्दे पर कोई बात ही नहीं करता। डेव एंडरसन इस किताब में सीधे शब्दों में समझाते हैं कि अगर आप एक अच्छे लीडर बनना चाहते हैं तो आपको 'नाइस' बनने की चाहत छोड़नी होगी। हर किसी को खुश रखने की कोशिश करना एक नाकामयाब लीडर की सबसे पहली निशानी है।

जरा सोचिए आप एक क्रिकेट टीम के कैप्टन हैं और आपका सबसे खास दोस्त बहुत खराब फॉर्म में चल रहा है। अब आप उसे टीम से बाहर नहीं निकाल रहे क्योंकि उसे बुरा लगेगा। नतीजा यह होगा कि पूरी टीम हार जाएगी। क्या आप एक अच्छे दोस्त बने। शायद हाँ। लेकिन क्या आप एक अच्छे लीडर बने। बिल्कुल नहीं। कॉर्पोरेट दुनिया में भी यही होता है। जब आप फीडबैक देते वक्त चीनी मिलाकर कड़वी बात बोलते हैं तो सामने वाले को समझ ही नहीं आता कि उसने गलती कहाँ की है। वो अपनी उसी घटिया परफॉरमेंस को जारी रखता है और अंत में नुकसान कंपनी का होता है।

मान लीजिए आपके ऑफिस में कोई ऐसा कोलीग है जो हर काम में देरी करता है। अब आप उसे कहते हैं कि यार तुम्हारा काम बहुत अच्छा है बस थोडा टाइम का देख लिया करो। उसे लगेगा कि काम तो अच्छा ही है टाइम का क्या है थोड़ा ऊपर नीचे चलता है। इसकी जगह अगर आप उसे सीधे बोलें कि तुम्हारी इस देरी की वजह से पूरी टीम का बोनस रुक सकता है और यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तो आप लहरें पैदा कर रहे हैं। हाँ वो शाम को कैंटीन में बैठकर आपकी बुराई करेगा लेकिन अगली बार काम वक्त पर होगा।

लीडरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप सबको पसंद आएँ। लीडरशिप का मतलब है सही रिजल्ट लाना। अगर आप हमेशा इसी सोच में रहेंगे कि लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे तो आप कभी कोई कड़ा फैसला नहीं ले पाएंगे। पीसी कल्चर की जंजीरें आपको एक औसत इंसान बनाकर रख देंगी। समाज और ऑफिस आपको एक सांचे में ढालना चाहते हैं जहाँ आप बस एक 'यस मैन' बनकर रह जाएँ। लेकिन डेव कहते हैं कि लहरें वही उठाता है जो सच बोलने का दम रखता है भले ही वो सच सुनने में कड़वा लगे। इसलिए मीठा बोलना बंद कीजिए और वो कहना शुरू कीजिए जो जरूरी है।


लेसन ३ : रिस्क न लेना ही सबसे बड़ा रिस्क है

क्या आपने कभी उस ठहरे हुए पानी को देखा है जिसमें महीनों से कोई हलचल नहीं हुई। उसमें से बदबू आने लगती है और वो कीड़ों का घर बन जाता है। हमारा करियर और हमारी लीडरशिप भी बिल्कुल वैसी ही है। अगर आप रिस्क नहीं ले रहे हैं और बस सेफ खेल रहे हैं तो यकीन मानिए आप धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। डेव एंडरसन कहते हैं कि आज की इस भागती हुई दुनिया में सबसे बड़ा रिस्क यही है कि आप कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। जो इंसान लहरें नहीं उठाता वो शांत पानी की तरह सड़ने के लिए मजबूर हो जाता है।

मान लीजिए आपके पास एक शानदार आइडिया है जिससे कंपनी का बहुत फायदा हो सकता है। लेकिन उसे लागू करने के लिए पुराने ढर्रे को बदलना पड़ेगा। अब आप डर रहे हैं कि अगर यह फेल हो गया तो मेरी सैलरी कट जाएगी या लोग हँसेंगे। इसलिए आप चुप रहते हैं। कुछ महीनों बाद कोई दूसरा बंदा वही आइडिया देता है रिस्क लेता है और प्रमोट होकर आपका बॉस बन जाता है। अब आप बैठकर उसे गाली देंगे लेकिन सच तो यह है कि आपने खुद को डुबाने का फैसला उसी दिन कर लिया था जब आपने चुप रहने का चुनाव किया।

जरा सोचिए अगर थॉमस एडिसन ने यह सोचा होता कि अगर बल्ब नहीं जला तो लोग क्या कहेंगे तो क्या आज हम उजाले में होते। नहीं ना। लीडरशिप का मतलब ही यही है कि आप अनजाने रास्तों पर चलने की हिम्मत रखें। डेव कहते हैं कि लहरें उठाना रिस्की है क्योंकि लहरें आपको भी भिगो सकती हैं। लेकिन किनारे पर बैठकर सिर्फ दूसरों को डूबते या तैरते देखना कोई जिंदगी नहीं है। आप जिस भी फील्ड में हैं वहाँ कुछ ऐसा कीजिए जो आज तक किसी ने नहीं किया। चाहे वो एक नया प्रोसेस हो या एक बिलकुल अलग तरह का मार्केटिंग प्लान।

जब आप कुछ नया करने की कोशिश करते हैं तो शुरुआत में विरोध जरूर होता है। लोग कहेंगे कि इसकी क्या जरूरत है या तुम पागल हो गए हो। लेकिन याद रखिए इतिहास वही रचते हैं जिन्हें दुनिया पागल कहती है। अगर आप अपने करियर के ग्राफ को एक सीधी लाइन की तरह रखना चाहते हैं तो आप डेड बॉडी से ज्यादा कुछ नहीं हैं। क्योंकि ईसीजी मशीन में भी सीधी लाइन का मतलब मौत होता है। इसलिए अपनी जिंदगी में रिस्क की लहरें लाते रहिए। गिरेंगे तो सीखेंगे और अगर संभल गए तो पूरी दुनिया को सिखाएंगे। शांत रहना छोड़िए और आज ही वो पहला कदम उठाइए जिससे आपके आसपास के पानी में हलचल शुरू हो जाए।


तो दोस्तों, क्या आप अभी भी किनारे पर बैठकर तमाशा देखेंगे या समुद्र की उन लहरों को चुनौती देंगे जो आपको डुबाने के लिए तैयार खड़ी हैं। डेव एंडरसन की यह किताब हमें याद दिलाती है कि एक लीडर का काम सिर्फ हुक्म चलाना नहीं बल्कि वो लहर पैदा करना है जिससे बदलाव आए। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी अपने करियर में वो लहरें उठाना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सेफ जोन में सो रहे हैं। नीचे कमेंट में हमें बताएँ कि आप अपने काम में कौन सा एक नया रिस्क लेने वाले हैं। उठिए शोर मचाइए और दुनिया को दिखा दीजिए कि आप डूबने के लिए नहीं बल्कि राज करने के लिए बने हैं।

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