क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो हर साल नए साल पर बड़े बड़े वादे करते हैं और फिर फरवरी आते ही उन्हें भूलकर सो जाते हैं? सच तो यह है कि आपकी नाकामी का सबसे बड़ा कारण आपके कमजोर सपने हैं। अगर आपके गोल्स आपको डराते नहीं हैं तो यकीन मानिए आप सिर्फ अपना टाइम वेस्ट कर रहे हैं।
मार्क मर्फी की बुक हार्ड गोल्स हमें सिखाती है कि कैसे आलस को छोड़कर हम उन ऊंचाइयों तक पहुँच सकते हैं जहाँ सिर्फ १ परसेंट लोग पहुँचते हैं। आइए जानते हैं वो ३ कमाल के लेसन जो आपकी लाइफ बदल देंगे।
लेसन १ : हार्टफेल्ट गोल्स - जब तक दिल नहीं लगेगा तब तक काम नहीं बनेगा
क्या आपने कभी गौर किया है कि लोग जिम की मेंबरशिप तो ले लेते हैं पर जाते सिर्फ फोटो खिंचवाने हैं। या फिर वो गिटार जो कोने में धूल खा रहा है क्योंकि किसी ने कहा था कि गिटार बजाने वाले कूल लगते हैं। मार्क मर्फी कहते हैं कि हमारे ज्यादातर गोल्स फेल इसलिए होते हैं क्योंकि वो हमारे अपने होते ही नहीं हैं। वो उधार के होते हैं। पड़ोसी की नई गाड़ी देख ली तो हमें भी गाड़ी चाहिए। दोस्त ने प्रमोशन पा लिया तो हमें भी वही पोस्ट चाहिए। लेकिन क्या आपका दिल सच में वो चाहता है? हार्ड गोल्स का पहला और सबसे जरूरी नियम है हार्टफेल्ट गोल्स। इसका सीधा मतलब है कि आपका अपने लक्ष्य के साथ एक गहरा इमोशनल कनेक्शन होना चाहिए। जब तक आपका गोल आपकी भावनाओं से नहीं जुड़ा होगा तब तक आप उसे पूरा करने के लिए जरूरी मेहनत कभी नहीं करेंगे।
मान लीजिए आप वजन कम करना चाहते हैं क्योंकि डॉक्टर ने डरा दिया है। यह एक बोरिंग गोल है। आप दो दिन सलाद खाएंगे और तीसरे दिन छोले भटूरे देखकर आपका ईमान डोल जाएगा। लेकिन कल्पना कीजिए कि आपको अपनी बेटी की शादी में सबसे फिट दिखना है या फिर आपको उस ट्रैक पर जाना है जिसके लिए बॉडी का फ्लेक्सिबल होना जरूरी है। अब यह एक इमोशनल बात है। अब जब आपके सामने पिज्जा आएगा तो आपको अपना वो सपना याद आएगा। आपके अंदर से आवाज आएगी कि भाई रुक जा यह एक स्लाइस तुझे तेरे सपने से दूर ले जा रही है। यही पावर है हार्टफेल्ट गोल्स की। जब गोल दिल से जुड़ा होता है तो दिमाग बहाने बनाना बंद कर देता है।
अक्सर लोग स्मार्ट गोल्स के पीछे भागते हैं। स्पेसिफिक मेजरेबल और पता नहीं क्या क्या। पर मर्फी कहते हैं कि अगर गोल में जान ही नहीं है तो उसका स्पेसिफिक होने का क्या फायदा? एक मरा हुआ चूहा कितना भी स्पेसिफिक हो वो रहेगा तो मरा हुआ ही। आपके गोल्स में वो तड़प होनी चाहिए जो आपको सुबह अलार्म बजने से पहले बिस्तर से उठाकर खड़ा कर दे। अगर आप सिर्फ इसलिए काम कर रहे हैं क्योंकि बिल भरने हैं तो आप कभी भी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी रिजल्ट नहीं ला पाएंगे। आपको यह ढूंढना होगा कि वो कौन सी चीज है जो आपको सच में खुशी देती है। क्या आप पैसा इसलिए चाहते हैं ताकि दुनिया को दिखा सकें या इसलिए ताकि आप अपने परिवार को वो सुकून दे सकें जो आपको कभी नहीं मिला?
ज्यादातर लोग लाइफ में इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वो दूसरों की स्क्रिप्ट पर अपनी फिल्म बनाने की कोशिश करते हैं। आपका गोल आपका अपना होना चाहिए। उसमें आपकी पर्सनालिटी की झलक होनी चाहिए। जब आप किसी काम को प्यार करते हैं तो मेहनत बोझ नहीं लगती। वो एक नशा बन जाती है। तो आज ही बैठिए और अपने आप से पूछिए कि क्या आपका गोल सच में आपका है? क्या उसे पाने की सोच मात्र से आपके रोंगटे खड़े होते हैं? अगर जवाब ना है तो समझ लीजिए कि आप गलत पटरी पर गाड़ी दौड़ा रहे हैं। अपने गोल्स को दिल के करीब लाइए फिर देखिए कैसे नामुमकिन भी मुमकिन लगने लगता है। यह सिर्फ शुरुआत है क्योंकि दिल लगने के बाद उसे हकीकत में देखना भी तो जरूरी है।
लेसन २ : एनिमेटेड विजन - दिमाग में फिल्म चलाओ वरना लाइफ ठप हो जाएगी
अगर मैं आपसे कहूँ कि एक गुलाबी हाथी के बारे में मत सोचिए तो आपके दिमाग में सबसे पहले क्या आएगा? वही गुलाबी हाथी। हमारा दिमाग शब्दों में नहीं बल्कि तस्वीरों में सोचता है। मार्क मर्फी कहते हैं कि अगर आपका गोल आपकी आंखों के सामने एक हाई डेफिनेशन फिल्म की तरह साफ नहीं है तो आप बस हवा में तीर चला रहे हैं। इसे वो एनिमेटेड विजन कहते हैं। ज्यादातर लोग बस इतना कहते हैं कि मुझे बहुत पैसा कमाना है। भाई कितना पैसा? क्या नोटों की गड्डी आपके हाथ में है या वो सिर्फ बैंक बैलेंस का एक नंबर है? जब तक आपका दिमाग उस सफलता को देख नहीं पाएगा तब तक वो उसे पाने के लिए सिग्नल नहीं भेजेगा।
मान लीजिए आप एक नई कार खरीदना चाहते हैं। एक तरीका यह है कि आप कहें कि मुझे एक अच्छी गाड़ी चाहिए। यह इतना धुंधला गोल है कि भगवान भी कंफ्यूज हो जाएंगे कि इसे नैनो दूँ या मर्सिडीज। अब दूसरा तरीका देखिए। आप अपनी आंखें बंद करते हैं और देखते हैं कि आप शोरूम में खड़े हैं। आप उस कार के दरवाजे को खोलने की आवाज सुनते हैं। आप अंदर बैठते हैं और आपको नई लेदर सीट्स की खुशबू आती है। आप स्टीयरिंग व्हील पर हाथ रखते हैं और आपको उसकी ठंडक महसूस होती है। आप इंजन स्टार्ट करते हैं और उसकी गड़गड़ाहट आपके कानों में पड़ती है। इसे कहते हैं एनिमेटेड विजन। अब आपका दिमाग उस कार को पाने के लिए किसी भूखे शेर की तरह शिकार पर निकल पड़ेगा।
लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि वो मोटिवेटेड महसूस नहीं करते। अरे भाई मोटिवेशन कोई पेट्रोल नहीं है जो आप किसी स्टेशन से भरवा लेंगे। मोटिवेशन तो उस क्लियर विजन का बाय प्रोडक्ट है। जब आपकी फिल्म आपके दिमाग में क्रिस्टल क्लियर होती है तो आलस आपके पास फटकता भी नहीं है। क्या आपने कभी किसी ऐसे इंसान को देखा है जो अपनी शादी के दिन सुबह १० बजे तक सो रहा हो? नहीं ना। क्योंकि उसके दिमाग में उस दिन का विजन एकदम साफ है। उसे पता है कि उसे क्या करना है और कैसा दिखना है। अगर आपका करियर का गोल आपको सुबह जल्दी नहीं उठा पा रहा है तो इसका मतलब है कि आपकी फिल्म अभी भी ब्लैक एंड व्हाइट है और उसमें सिग्नल ठीक से नहीं आ रहे हैं।
एनिमेटेड विजन का एक और फायदा यह है कि यह आपके डर को खत्म कर देता है। जब आप बार बार अपनी जीत को दिमाग में देख लेते हैं तो असलियत में वो काम करना आपके लिए एक रूटीन बन जाता है। जैसे कोई एक्टर स्टेज पर जाने से पहले हजार बार रिहर्सल करता है। वो पहले ही देख चुका होता है कि ऑडियंस कहाँ ताली बजाएगी। अगर आप भी अपनी सफलता को हर दिन ५ मिनट के लिए विजुअलाइज करते हैं तो आपका सबकॉन्शियस माइंड उसे सच मान लेता है। वो आपको ऐसे आइडियाज देगा जो आपने पहले कभी नहीं सोचे थे।
लेकिन याद रहे यह कोई जादू टोना नहीं है। सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होगा। विजुअलाइजेशन आपको वो एनर्जी देता है जो एक्शन लेने के लिए जरूरी है। अगर फिल्म अच्छी लग रही है तो अब उसे बड़े पर्दे पर उतारने की मेहनत भी करनी होगी। और उस मेहनत का असली मजा तब आता है जब रास्ता आसान नहीं बल्कि पहाड़ जैसा मुश्किल हो। इसी मुश्किल के सफर को समझने के लिए हमें अगले लेसन की तरफ बढ़ना होगा जो आपकी सोचने की कैपेसिटी को हिला कर रख देगा।
लेसन ३ : डिफिकल्ट गोल्स - आसान रास्ता आपको बर्बाद कर रहा है
दुनिया में हर कोई चाहता है कि काम आसान हो जाए। शॉर्टकट मिल जाए। लेकिन मार्क मर्फी एक कड़वा सच बताते हैं। वो कहते हैं कि आसान गोल्स असल में आपके सबसे बड़े दुश्मन हैं। जब आप कोई ऐसा लक्ष्य चुनते हैं जो बहुत आसान है तो आपका दिमाग सो जाता है। उसे पता है कि यह तो चलते फिरते हो जाएगा। और यहीं से शुरू होती है बोरियत और आलस की कहानी। इंसान का दिमाग लोहे की तरह है। अगर इसे इस्तेमाल न करो तो जंग लग जाता है। और अगर इस पर जोर न डालो तो यह कभी अपनी असली ताकत नहीं दिखाता। डिफिकल्ट गोल्स वो चिंगारी हैं जो आपके अंदर के बारूद को धमाके में बदल देते हैं।
सोचिए आप लूडो खेल रहे हैं और आपके सामने ५ साल का बच्चा है। आप उसे हर बार हरा देते हैं। शुरुआत में शायद मजा आए पर १० मिनट बाद आपको नींद आने लगेगी। क्यों? क्योंकि वहां कोई चैलेंज नहीं है। अब कल्पना कीजिए कि आप किसी प्रोफेशनल प्लेयर के साथ चेस खेल रहे हैं। अब आपका दिमाग घोड़े की तरह दौड़ेगा। आप पसीने से तर बतर हो जाएंगे पर आपको नींद नहीं आएगी। यही लाइफ का सच है। अगर आपका गोल ऐसा है कि उसे आप बिना किसी एक्स्ट्रा मेहनत के पा सकते हैं तो आप कभी भी अपनी लिमिट्स को पुश नहीं करेंगे। मुश्किल गोल्स आपको नई स्किल्स सीखने पर मजबूर करते हैं। वो आपको नए लोगों से मिलवाते हैं और आपको एक बेहतर इंसान बनाते हैं।
लोग अक्सर डरते हैं कि अगर गोल बहुत बड़ा हुआ और हम फेल हो गए तो क्या होगा? मार्क मर्फी कहते हैं कि एक बड़े और मुश्किल गोल को पाने की कोशिश में फेल होना उस आसान गोल को पाने से कहीं बेहतर है जिसे पाकर भी आप वहीं के वहीं खड़े हैं। जब आप किसी पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश करते हैं और आधे रास्ते तक भी पहुँचते हैं तो आप उन लोगों से बहुत ऊपर होते हैं जो नीचे जमीन पर बैठकर सिर्फ बातें बना रहे हैं। मुश्किल गोल्स आपके दिमाग को एक ऐसी स्टेट में ले जाते हैं जिसे फ्लो कहते हैं। वहां समय का पता नहीं चलता और काम बोझ नहीं बल्कि एक मिशन बन जाता है।
ज्यादातर कंपनियां और लोग इसलिए फेल हो जाते हैं क्योंकि वो सेफ खेलना चाहते हैं। वो कहते हैं कि चलो इस साल ५ परसेंट ग्रोथ कर लेते हैं। ५ परसेंट तो महंगाई बढ़ जाती है भाई। इसमें आपने क्या उखाड़ लिया? असली मजा तब है जब आप कहें कि इस साल हमें मार्केट लीडर बनना है। अब इस मुश्किल बात को सुनकर आपके शरीर का एक एक सेल एक्टिव हो जाएगा। आप रात को देर तक जागेंगे क्योंकि वो चैलेंज आपको सोने नहीं देगा। मुश्किल गोल्स आपको वो रिस्पेक्ट दिलाते हैं जो आसान गोल्स कभी नहीं दिला सकते। दुनिया उन्हें याद नहीं रखती जो भीड़ के साथ चले। दुनिया उन्हें याद रखती है जिन्होंने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया।
तो अब समय आ गया है कि आप अपनी कंफर्ट जोन की रजाई फेंक दें। अगर आपकी लिस्ट में ऐसे गोल्स हैं जो आपको डराते नहीं हैं तो उन्हें अभी काट दीजिए। कुछ ऐसा सोचिए जिसे सुनकर लोग कहें कि तू पागल हो गया है क्या? क्योंकि जिस दिन लोग आपको पागल कहना शुरू कर दें समझ लेना कि आप सही रास्ते पर हैं। अपनी काबिलियत पर शक करना बंद कीजिए और खुद को एक ऐसी चुनौती दीजिए जो आपकी रूह कंपा दे। क्योंकि अंत में जीत उसी की होती है जिसने हारने के डर से ज्यादा जीतने की मुश्किल को प्यार किया हो।
लाइफ बहुत छोटी है इसे छोटे और आसान गोल्स में बर्बाद मत करो। मार्क मर्फी की यह किताब हमें याद दिलाती है कि हमारे अंदर एक सुपरहीरो छिपा है जिसे सिर्फ एक मुश्किल लक्ष्य ही बाहर निकाल सकता है। आज ही अपने आप से वादा कीजिए कि आप केवल वही सपने देखेंगे जो आपके दिल के करीब हों जिनका विजन साफ हो और जो इतने मुश्किल हों कि आपको खुद पर गर्व महसूस हो।
नीचे कमेंट्स में मुझे अभी बताइए कि वो कौन सा एक हार्ड गोल है जिसे आप इस साल हर हाल में पूरा करना चाहते हैं? शर्माइए मत आपका एक कमेंट आपकी कमिटमेंट की पहली सीढ़ी हो सकता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो बहुत टैलेंटेड है पर आलस की वजह से पीछे छूटा जा रहा है। उठिए और अपनी कहानी खुद लिखिए।
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