क्या आपको लगता है कि सिर्फ कुर्सी पर बैठकर आर्डर देना ही लीडरशिप है। अगर हां तो मुबारक हो आप अपनी टीम के सबसे बड़े विलेन बनने की राह पर हैं। बिना विजन और क्रेडिबिलिटी के आप सिर्फ एक मैनेजर हैं जिसे लोग पीठ पीछे कोसते हैं। क्या आप भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके अपनाकर अपनी इज्जत गवां रहे हैं।
आज हम जेम्स कुजेस और बैरी पॉसनर की किताब द ट्रुथ अबाउट लीडरशिप से वो कड़वे सच जानेंगे जो आपको एक असली लीडर बनाएंगे। हम उन तीन बड़े लेसन पर बात करेंगे जो आपके काम करने के नजरिए को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : क्रेडिबिलिटी ही आपकी असली करेंसी है
क्या आपने कभी उस बॉस के साथ काम किया है जो मीटिंग में तो बड़ी बड़ी बातें करता है लेकिन जब काम की बारी आती है तो सबसे पहले गायब हो जाता है। जेम्स कुजेस और बैरी पॉसनर कहते हैं कि अगर आप खुद पर यकीन नहीं करते तो कोई और आप पर क्यों करेगा। लीडरशिप का सबसे बड़ा सच यह है कि क्रेडिबिलिटी ही सब कुछ है। अगर आपकी बातों और आपके काम में मेल नहीं है तो आप बस एक शोर मचाने वाले इंसान हैं। लोग आपके शब्दों को नहीं बल्कि आपके कदमों के निशानों को फॉलो करते हैं।
मान लीजिए आपका कोई दोस्त है जो हर हफ्ते कहता है कि इस मंडे से मैं पक्का जिम जाऊंगा और बॉडी बनाऊंगा। लेकिन मंडे आते ही वह आपको समोसे की दुकान पर मिलता है। क्या आप उसकी फिटनेस सलाह पर कभी भरोसा करेंगे। बिल्कुल नहीं। ऑफिस में भी यही होता है। अगर आप टीम से कहते हैं कि टाइम पर आना जरूरी है और खुद लंच के बाद ऑफिस आते हैं तो आपकी इज्जत जीरो हो जाएगी। लोग आपको देख रहे हैं और आपकी हर हरकत का हिसाब रख रहे हैं।
सच्चाई तो यह है कि क्रेडिबिलिटी रातों रात नहीं बनती। यह छोटी छोटी ईमानदारी से बनती है। जब आप अपनी गलती मानते हैं तो आप कमजोर नहीं बल्कि एक इंसान लगते हैं। आजकल के कॉर्पोरेट वर्ल्ड में लोग रोबोटिक लीडर्स से पक चुके हैं। उन्हें ऐसा लीडर चाहिए जो अपनी बात का पक्का हो। अगर आपने कहा है कि आप अपनी टीम का साथ देंगे तो मुश्किल वक्त में पीछे मत हटिए। वरना आपकी टीम भी वही करेगी जो आप कर रहे हैं यानी सिर्फ बहानेबाजी।
इमेजिन कीजिए आप एक बस के ड्राइवर हैं और आपको खुद नहीं पता कि बस कहां जा रही है। क्या पैसेंजर शांति से बैठेंगे। नहीं वे शोर मचाएंगे और बस से उतरने की कोशिश करेंगे। एक लीडर के तौर पर आपकी क्रेडिबिलिटी ही वह भरोसा है जो पैसेंजर्स को सीट पर बिठाए रखता है। अगर आप भरोसेमंद नहीं हैं तो आप लीडर नहीं हैं बल्कि सिर्फ एक ट्रैफिक जाम का हिस्सा हैं। इसलिए पहले खुद को काबिल बनाइए और अपनी वैल्यूज पर टिके रहिए। लोग कुर्सी को सलाम नहीं करते बल्कि उस इंसान को करते हैं जो उस पर बैठा है।
लेसन २ : फ्यूचर का विजन और आगे की सोच
अगर आपको लगता है कि सिर्फ आज का काम निपटा लेना ही लीडरशिप है तो आप गलत ट्रैक पर हैं। जेम्स कुजेस और बैरी पॉसनर कहते हैं कि एक लीडर वह नहीं है जो सिर्फ प्रेजेंट में जीता है बल्कि वह है जिसके पास भविष्य का एक साफ नक्शा हो। बिना विजन के आप उस अंधे मुसाफिर की तरह हैं जो बहुत तेज तो दौड़ रहा है लेकिन उसे यह नहीं पता कि रास्ता कहां खत्म होगा। आपकी टीम को यह जानने का पूरा हक है कि वे जिस प्रोजेक्ट पर खून पसीना बहा रहे हैं उसका बड़ा मकसद क्या है।
मान लीजिए आप अपने दोस्तों के साथ एक ट्रिप प्लान करते हैं। आप सबको गाड़ी में बिठा लेते हैं और कहते हैं कि बस चलते रहो। जब वे पूछते हैं कि भाई जाना कहां है तो आप कहते हैं कि पता नहीं बस गाड़ी चलाते रहो। क्या आपके दोस्त आपके साथ अगली बार ट्रिप पर जाएंगे। बिल्कुल नहीं। वे आपको बीच रास्ते में उतार देंगे और खुद वापस घर चले जाएंगे। लीडरशिप में भी यही होता है। अगर आपके पास विजन नहीं है तो आपकी टीम बस थकान महसूस करेगी उत्साह नहीं।
आजकल के दौर में लोग सिर्फ सैलरी के लिए काम नहीं करना चाहते। उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि वे कुछ बड़ा क्रिएट कर रहे हैं। अगर आप अपनी टीम को सिर्फ डेडलाइन का डर दिखाते रहेंगे तो वे सिर्फ उतना ही काम करेंगे जिससे उनकी नौकरी बची रहे। लेकिन अगर आप उन्हें यह दिखा सकें कि अगले पांच साल में आपकी कंपनी कहां होगी और उसमें उनका क्या रोल होगा तो वे अपना बेस्ट देंगे। एक असली लीडर भविष्य को इमेजिन करता है और फिर दूसरों को भी वह सपना देखने में मदद करता है।
क्या आपने कभी उन नेताओं को देखा है जो चुनाव के वक्त बड़े बड़े वादे करते हैं लेकिन उनके पास कोई प्लान नहीं होता। वे सिर्फ हवा में तीर छोड़ते हैं। एक कॉर्पोरेट लीडर को इस जाल से बचना चाहिए। आपका विजन सिर्फ कागजों पर लिखी एक बोरिंग लाइन नहीं होनी चाहिए। वह ऐसा होना चाहिए जो सुबह आपकी टीम को बिस्तर से खुशी खुशी उठने पर मजबूर कर दे। अगर आपका विजन सुनकर किसी के रोंगटे नहीं खड़े होते तो समझ लीजिए कि आपने सिर्फ एक लिस्ट बनाई है विजन नहीं।
याद रखिए कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। जो लीडर कल की तैयारी आज नहीं करता वह इतिहास का हिस्सा बन जाता है। आपको अपनी टीम के लिए वह लाइटहाउस बनना होगा जो समंदर के तूफान में भी रास्ता दिखाता है। अगर आप खुद अंधेरे में हैं तो दूसरों को रोशनी क्या देंगे। इसलिए अपनी आंखें खुली रखिए और आने वाले कल की चुनौतियों और मौकों को पहले से भांप लीजिए। जब आपकी टीम देखेगी कि आपके पास एक मास्टर प्लान है तो वे आपकी बात पत्थर की लकीर मानेंगे।
लेसन ३ : लीडरशिप एक जिम्मेदारी है पोजीशन नहीं
अगर आप यह सोचते हैं कि आपके विजिटिंग कार्ड पर लिखा हुआ बड़ा पद आपको लीडर बनाता है तो आपको अपनी गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए। जेम्स कुजेस और बैरी पॉसनर बड़े ही साफ शब्दों में कहते हैं कि लीडरशिप कोई रैंक या टाइटल नहीं है बल्कि यह एक जिम्मेदारी है जो आपके व्यवहार से झलकती है। दुनिया ऐसे बॉस से भरी पड़ी है जिनके पास बड़ी केबिन है लेकिन कोई भी उन्हें दिल से फॉलो नहीं करना चाहता। असली लीडरशिप तब शुरू होती है जब आप अपनी कुर्सी के अहंकार को छोड़कर अपनी टीम की सफलता के लिए ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं।
कल्पना कीजिए कि आप किसी शादी में गए हैं और वहां बहुत भीड़ है। अगर वहां कोई इंसान सिर्फ सूट पहनकर खड़ा है और सबको आर्डर दे रहा है कि प्लेट उठाओ और खाना लगाओ तो कोई उसकी बात नहीं सुनेगा। लेकिन अगर वही इंसान खुद आगे बढ़कर किसी बुजुर्ग की मदद करता है या खाने की व्यवस्था ठीक करने में हाथ बंटाता है तो लोग अपने आप उसकी बात सुनने लगते हैं। लीडर वह नहीं है जो दूसरों को काम पर लगाता है बल्कि वह है जो खुद काम करके यह दिखाता है कि इसे करना कैसे है।
सच्चाई तो यह है कि जब आप किसी टीम के लीडर बनते हैं तो आप उनके मालिक नहीं बल्कि उनके सेवक बन जाते हैं। आपका काम यह नहीं है कि आप सबसे ज्यादा चमके बल्कि यह है कि आप अपनी टीम के लोगों को चमकने का मौका दें। अगर प्रोजेक्ट सफल होता है तो उसका क्रेडिट टीम को दीजिए और अगर फेल होता है तो उसकी जिम्मेदारी खुद पर लीजिए। आजकल के स्मार्ट वर्क कल्चर में लोग ऐसे लीडर को सिर आंखों पर बिठाते हैं जो उनके बुरे वक्त में उनके साथ खड़ा होता है। सार्काज्म की बात तो यह है कि लोग अक्सर टाइटल पाकर खुद को भगवान समझने लगते हैं जबकि असल में वे सिर्फ एक बड़े ग्रुप के चपरासी होते हैं जिनका काम सबकी मुश्किलें हल करना है।
अक्सर देखा गया है कि जब किसी को प्रमोशन मिलता है तो उनकी चाल ढाल बदल जाती है। वे भूल जाते हैं कि वे भी कभी उसी डेस्क पर बैठकर काम करते थे। अगर आप अपनी टीम की छोटी छोटी जरूरतों को नहीं समझ सकते तो आप उनके लिए बस एक आफत हैं। लीडरशिप एक जर्नी है जहां आपको रोज खुद को साबित करना पड़ता है। यह कोई वन टाइम अचीवमेंट नहीं है कि एक बार मैनेजर बन गए तो काम खत्म। आपको हर दिन अपनी टीम का भरोसा जीतना होगा। अगर आप अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं तो आप सिर्फ कुर्सी की शोभा बढ़ा रहे हैं लीडरशिप की नहीं।
लोग इस बात को भूल सकते हैं कि आपने उनसे क्या कहा था लेकिन वे इस बात को कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया था। एक सच्चा लीडर वह है जो लोगों के अंदर छिपी हुई प्रतिभा को बाहर लाता है और उन्हें खुद से बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। अगर आप आज से ही अपनी ईगो को किनारे रखकर अपनी टीम की मदद करना शुरू कर देते हैं तो यकीन मानिए आपको किसी पद की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोग आपको खुद अपना नेता मान लेंगे।
तो दोस्तों, क्या आप भी उन पुराने खयालात वाले बॉस की तरह रहना चाहते हैं या एक ऐसा लीडर बनना चाहते हैं जिसकी मिसाल दी जाए। याद रखिए लीडरशिप का मतलब दूसरों पर राज करना नहीं बल्कि दूसरों के जीवन में बदलाव लाना है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और इसने आपकी सोच को थोड़ा भी बदला है तो इसे अपने उस दोस्त या कलीग के साथ शेयर करें जिसे एक अच्छे लीडर बनने की जरूरत है। कमेंट में हमें बताएं कि आपके हिसाब से एक अच्छे लीडर की सबसे बड़ी क्वालिटी क्या है। चलिए मिलकर एक बेहतर वर्क कल्चर बनाते हैं।
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