अगर आप आज भी वही घिसे पिटे तरीके अपनाकर करोड़पति बनने के सपने देख रहे हैं तो मुबारक हो आप फेल होने की रेस में सबसे आगे हैं। सैम वॉल्टन के ये रूल्स इग्नोर करके आप अपनी वेल्थ और बिजनेस की ग्रोथ को खुद अपने हाथों से गड्ढे में धकेल रहे हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर वॉलमार्ट के फाउंडर सैम वॉल्टन के उन 10 पावरफुल रूल्स को डिकोड करेंगे जिन्होंने रिटेल की दुनिया ही बदल दी। चलिए जानते हैं वो 3 बड़े लेसन जो आपकी लाइफ और बिजनेस को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म कर देंगे।
लेसन १ : अपनी टीम को अपना पार्टनर बनाओ और प्रॉफिट शेयर करो
आजकल के बॉसेस को लगता है कि ऑफिस में सीसीटीवी कैमरा लगा देने से और एम्प्लॉई की गर्दन पर तलवार लटकाए रखने से काम जबरदस्त होगा। लेकिन सैम वॉल्टन का सोचना कुछ और ही था। उन्होंने दुनिया को बताया कि अगर आप चाहते हैं कि आपका एम्प्लॉई आपके बिजनेस को अपना समझकर खून पसीना बहाए तो आपको उसे सिर्फ एक नौकर समझना बंद करना होगा। सैम ने अपने वर्कर्स को एम्प्लॉई नहीं बल्कि असोसिएट्स कहा। उन्होंने एक बहुत ही सिंपल सा फंडा अपनाया कि अगर कंपनी कमा रही है तो उसका फायदा उन लोगों को भी मिलना चाहिए जो जमीन पर उतरकर काम कर रहे हैं।
जरा सोचिए आप एक दुकान चलाते हैं और आपका सेल्समैन बस घड़ी देख रहा है कि कब पांच बजें और वह यहाँ से भागे। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आज बोहनी हुई या नहीं क्योंकि उसे तो महीने के आखिर में फिक्स सैलरी मिल ही जानी है। अब इसी सिचुएशन में थोड़ा तड़का लगाइए। अगर आप उसे कहें कि भाई आज जितनी ज्यादा सेल होगी उसका एक छोटा सा हिस्सा सीधा तेरी जेब में जाएगा। अब देखिए उस सेल्समैन की एनर्जी। वह थका हुआ होने के बावजूद कस्टमर को ऐसे चिपकेगा जैसे चुंबक से लोहा। यही है पार्टनरशिप का असली जादू। सैम वॉल्टन ने वॉलमार्ट में स्टॉक ऑप्शंस और प्रॉफिट शेयरिंग प्लान्स शुरू किए। उन्होंने अपने एम्प्लॉईज को कंपनी का मालिक बना दिया। जब इंसान को लगता है कि दुकान उसकी है तो वह झाड़ू भी खुद मार लेता है और कस्टमर को भगवान भी समझता है।
हमारे यहाँ इंडिया में तो बॉस को लगता है कि अगर एम्प्लॉई को थोड़ा ज्यादा पैसा दे दिया तो वह कल से सिर पर चढ़ जाएगा। हम लोग कंट्रोल करने में इतने बिजी रहते हैं कि मोटिवेट करना ही भूल जाते हैं। सैम कहते थे कि अपने लोगों की तारीफ करने में कंजूसी मत करो। एक चेक बुक से ज्यादा ताकत आपकी जुबान में है अगर आप सही समय पर अपने पार्टनर की पीठ थपथपा दें। अगर आप एक लीडर हैं और चाहते हैं कि आपकी टीम आपके विजन के लिए लड़े तो पहले उन्हें उस विजन का हिस्सा बनाइए। उन्हें बताइए कि जब कंपनी आसमान छुएगी तो वे भी जमीन पर नहीं रहेंगे।
सैम वॉल्टन खुद अपनी गाड़ियों में घूमते थे और स्टोर के मैनेजर्स से लेकर सफाई करने वालों तक से बात करते थे। वे उनसे सजेशंस मांगते थे। क्या आपने कभी अपने ऑफिस के गार्ड से पूछा है कि भाई गेट पर आने वाले कस्टमर को क्या दिक्कत हो रही है। शायद नहीं क्योंकि हमें लगता है कि अक्ल तो सिर्फ केबिन में बैठने वालों के पास होती है। सैम ने इस ईगो को लात मारी और अपनी टीम को एक परिवार की तरह नहीं बल्कि एक प्रोफेशनल पार्टनर की तरह ट्रीट किया। जब आप लोगों को रिस्पेक्ट और पैसा दोनों देते हैं तो वे आपके लिए वह कर जाते हैं जो करोड़ों का विज्ञापन भी नहीं कर पाता। इसलिए अगर आप एक बड़ा अंपायर खड़ा करना चाहते हैं तो अकेले मत दौड़िए। अपनी टीम को साथ लीजिए उन्हें हिस्सेदारी दीजिए और फिर देखिए कि आपका बिजनेस कैसे रॉकेट की तरह ऊपर जाता है।
लेसन २ : अपने खर्चों पर इतनी पैनी नजर रखो कि मक्खी भी बिना टोल दिए न निकल सके
सैम वॉल्टन का एक बड़ा ही सिंपल सा उसूल था कि अगर आपको अपने कस्टमर को सबसे कम दाम में सामान बेचना है तो आपको अपनी लागत को भी सबसे कम रखना होगा। आज के जमाने में जब किसी स्टार्टअप को थोड़ी सी फंडिंग मिल जाती है तो सबसे पहले ऑफिस में आलीशान सोफे और महंगी कॉफी मशीनें आती हैं। लोग धंधा शुरू करने से पहले अपनी शानशौकत दिखाने में लग जाते हैं। लेकिन सैम वॉल्टन दुनिया के सबसे अमीर इंसान होने के बावजूद अपनी पुरानी पिकअप ट्रक खुद चलाते थे और सस्ते होटलों में रुकते थे। उनका मानना था कि हर वो रुपया जो आप फालतू खर्च करते हैं वह असल में आपके कस्टमर की जेब से जा रहा है।
कल्पना कीजिए कि आप एक रेस्टोरेंट खोलते हैं और आप वहां इटली से मंगाया हुआ मार्बल लगवाते हैं जिसकी प्लेट में समोसा परोसने से उसका स्वाद नहीं बदलने वाला। अब उस मार्बल का खर्चा निकालने के लिए आप समोसे की कीमत 20 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर देते हैं। नतीजा यह होगा कि कस्टमर एक बार आएगा और दोबारा कभी मुड़कर नहीं देखेगा। सैम वॉल्टन ने इसी फिजूलखर्ची को अपना दुश्मन नंबर वन बनाया। वे वॉलमार्ट के हेडक्वार्टर में भी टूटी हुई कुर्सियों पर बैठकर मीटिंग कर लेते थे क्योंकि उन्हें पता था कि असली पैसा कुर्सियों में नहीं बल्कि एफिशिएंसी में है।
इंडिया में हमें अक्सर लगता है कि अगर हम कंजूसी करेंगे तो लोग क्या कहेंगे। लेकिन बिजनेस में कंजूसी नहीं इसे 'ऑपरेशनल एक्सीलेंस' कहते हैं। सैम ने सिखाया कि अपने सप्लायर से एक एक पैसे के लिए मोलभाव करो। ईगो को साइड में रखो और यह देखो कि कंपनी का पैसा कहां बच सकता है। अगर आप अपने कंपिटीटर से 5 परसेंट भी ज्यादा एफिशिएंट हैं तो आप लॉन्ग रन में उसे मार्केट से बाहर कर देंगे। सैम वॉल्टन की डिक्शनरी में 'लग्जरी' नाम का शब्द ही नहीं था जब बात बिजनेस की आती थी। वे कहते थे कि हर बार जब आप कंपनी का एक पैसा बचाते हैं तो आप अपने कस्टमर के लिए वैल्यू बढ़ा रहे होते हैं।
सैम की यह फिलॉसफी सिर्फ बड़े बिजनेस के लिए नहीं बल्कि आपकी पर्सनल लाइफ के लिए भी एक बड़ा लेसन है। हम अक्सर दिखावे के चक्कर में उन चीजों पर पैसा लुटा देते हैं जिनकी हमें जरूरत भी नहीं होती। सैम ने वॉलमार्ट को एक ऐसी मशीन बना दिया था जो कम से कम इनपुट में ज्यादा से ज्यादा आउटपुट देती थी। उन्होंने लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में इतना पैसा बचाया कि दूसरे रिटेलर्स के पसीने छूट गए। अगर आप आज के दौर में टिकना चाहते हैं तो अपनी बैलेंस शीट को जिम ले जाइए और उसका सारा एक्स्ट्रा फैट यानी फालतू खर्चे काटकर अलग कर दीजिए। जब आपका धंधा लीन और मीन होगा तभी आप मार्केट के उतार चढ़ाव को झेल पाएंगे।
लेसन ३ : कस्टमर की उम्मीदों को तोड़ो नहीं बल्कि उन्हें सरप्राइज कर दो
सैम वॉल्टन का तीसरा और सबसे बड़ा मंत्र था कि अपने कस्टमर को वह सब कुछ दो जिसकी उसने उम्मीद भी न की हो। आज के दौर में जब आप किसी दुकान पर जाते हैं और सेल्समैन आपको ऐसे देखता है जैसे आपने उसकी जायदाद मांग ली हो तो आपका मन दोबारा वहां जाने का नहीं करता। सैम ने इस बात को बहुत पहले समझ लिया था कि बिजनेस केवल सामान बेचने का नाम नहीं है बल्कि कस्टमर का दिल जीतने का नाम है। उन्होंने वॉलमार्ट में 'सैटिस्फैक्शन गारंटेड' का ऐसा माहौल बनाया कि अगर कस्टमर को कोई चीज पसंद नहीं आई तो बिना किसी सवाल जवाब के उसका पैसा वापस कर दिया जाता था।
सोचिए आप एक मोबाइल की दुकान पर जाते हैं और वहां का ओनर आपको फोन बेचने के बाद एक प्यारा सा कवर फ्री में दे देता है और साथ में यह भी कहता है कि भाई साहब अगर इसमें कोई भी दिक्कत आए तो बस एक फोन कर दीजिएगा मैं बंदा भेज दूंगा। अब भले ही आपने फोन के पूरे पैसे दिए हों लेकिन वह छोटा सा जेस्चर आपको उस दुकान का परमानेंट कस्टमर बना देगा। सैम वॉल्टन इसी एक्स्ट्रा सर्विस के दीवाने थे। वे कहते थे कि अगर आप अपने कस्टमर की उम्मीद से 10 परसेंट भी ज्यादा देते हैं तो आप एक ऐसा एडवर्टाइजमेंट तैयार कर रहे हैं जो दुनिया की कोई भी मार्केटिंग एजेंसी नहीं बना सकती।
हमारे यहां इंडिया में अक्सर दुकानदार यह सोचते हैं कि एक बार माल बिक गया तो हमारा काम खत्म। लेकिन सैम के लिए तो काम वहीं से शुरू होता था। उन्होंने अपने स्टोर्स के बाहर 'ग्रीटर्स' खड़े किए जिनका काम सिर्फ आने वाले लोगों का मुस्कुराकर स्वागत करना था। सुनने में यह छोटी बात लगती है लेकिन जब कोई इंसान थका हारा शॉपिंग करने आता है और उसे कोई दिल से 'नमस्ते' कहता है तो उसका मूड बदल जाता है। सैम ने सिखाया कि कस्टमर को कभी भी नंबर की तरह मत देखो उसे एक इंसान की तरह ट्रीट करो। अगर आप उसकी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं तो वह आपको पैसे देने में कभी हिचकिचाएगा नहीं।
सैम वॉल्टन अक्सर भेष बदलकर दूसरे स्टोर्स में जाते थे ताकि यह देख सकें कि दूसरे लोग क्या अच्छा कर रहे हैं और वे अपने कस्टमर को उससे भी बेहतर क्या दे सकते हैं। उनकी डिक्शनरी में 'कॉम्प्लिसेंसी' यानी संतुष्टि के लिए कोई जगह नहीं थी। वे हमेशा कुछ नया करने की फिराक में रहते थे। अगर आप भी अपने कॉम्पिटिशन को खत्म करना चाहते हैं तो बस एक ही तरीका है कि अपने कस्टमर के लिए इतना बेहतरीन एक्सपीरियंस क्रिएट कर दो कि उसे कहीं और जाना सजा जैसा लगे। जब आप लोगों की लाइफ में वैल्यू ऐड करते हैं तो सक्सेस आपके पीछे हाथ धोकर पड़ जाती है।
सैम वॉल्टन की यह कहानी हमें सिखाती है कि महान बनने के लिए किसी जादुई छड़ी की जरूरत नहीं होती बल्कि सही उसूलों की जरूरत होती है। उन्होंने जीरो से शुरू करके दुनिया का सबसे बड़ा अंपायर खड़ा किया क्योंकि उनके पास एक विजन था और उसे पूरा करने के लिए अनुशासन था। क्या आप भी अपनी लाइफ में इन रूल्स को लागू करने के लिए तैयार हैं। आज ही अपने काम करने के तरीके को बदलिए और अपनी टीम अपने खर्चे और अपने कस्टमर पर फोकस कीजिए।
अगर आपको सैम वॉल्टन के ये लेसन पसंद आए और आप चाहते हैं कि आपके दोस्त भी अपनी लाइफ में ग्रोथ लाएं तो इस आर्टिकल को अभी शेयर कीजिए। नीचे कमेंट में बताएं कि इन 3 में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा पसंद आया और आप उसे कल से ही अपनी लाइफ में फॉलो करने वाले हैं।
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