अगर आपको लगता है कि आपकी कंपनी की ग्रोथ इसलिए रुकी है क्योंकि किस्मत खराब है तो बधाई हो आप अकेले नहीं हैं पर आप गलत जरूर हैं। मार्केट में पैसा बिखरा पड़ा है और आप अंधे बने बैठे हैं। अपनी पुरानी घिसी पिटी स्ट्रेटेजी छोड़िये वरना कॉम्पिटिटर अमीर होगा और आप बस ताली बजाएंगे।
आज हम एरिच जोआचिमस्थेलर की किताब हिडन इन प्लेन Sight की मदद से उन ३ बड़े लेसन्स को डिकोड करेंगे जो आपके बिजनेस को रॉकेट बना सकते हैं। चलिए जानते हैं कैसे आप उन मौकों को पकड़ सकते हैं जो सबके सामने होकर भी किसी को नहीं दिख रहे हैं।
लेसन १ : कस्टमर के दिमाग में नहीं उसकी लाइफ में घुसना सीखो
आजकल के बिजनेस ओनर्स को लगता है कि उन्होंने फेसबुक पर दो विज्ञापन चला दिए या फिर अपनी दुकान के बाहर एक बड़ा सा बोर्ड लगा दिया तो कस्टमर लाइन लगा देगा। भाई साहब, जमाना बदल चुका है। एरिच जोआचिमस्थेलर अपनी किताब हिडन इन प्लेन Sight में बड़े प्यार से समझाते हैं कि असली पैसा कस्टमर के दिमाग में नहीं बल्कि उसकी डेली लाइफ की उन दिक्कतों में छुपा है जिन्हें वह खुद भी ठीक से नहीं समझा पा रहा है। हम लोग अक्सर प्रोडक्ट बेचने के चक्कर में यह भूल जाते हैं कि इंसान कोई चीज खरीदता क्यों है। वह असल में कोई 'काम' पूरा करने के लिए सामान खरीदता है।
मान लीजिये आप एक जिम चलाते हैं। अब आप पूरे शहर में पोस्टर लगा रहे हैं कि हमारे पास दुनिया की सबसे महंगी मशीनें हैं और प्रोटीन शेक फ्री है। पर आपके पड़ोस में रहने वाला शर्मा जी का लड़का जिम क्यों नहीं आ रहा? उसे मशीनों से मतलब नहीं है। उसे डर है कि अगर वह जिम गया तो ऑफिस की मीटिंग मिस हो जाएगी या फिर शाम को घर की सब्जियां कौन लाएगा। उसकी असली समस्या 'बॉडी बनाना' नहीं है बल्कि 'टाइम मैनेजमेंट' है। अगर आप उसे यह बेचते कि हमारे यहाँ केवल २० मिनट की ऐसी वर्कआउट है जो आप ऑफिस जाते समय कर सकते हैं तो वह खुशी खुशी पैसे देता। पर आप तो उसे लोहे की मशीनें दिखा रहे थे जैसे उसे कबाड़ की दुकान खोलनी हो।
किताब कहती है कि ग्रोथ वहीं छुपी होती है जहाँ सब देख रहे हैं पर कोई समझ नहीं रहा है। हम डेटा और नंबर्स के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई मजनू लैला के पीछे भागता है। पर हम यह भूल जाते हैं कि डेटा केवल यह बताता है कि क्या हुआ है पर यह नहीं बताता कि 'क्यों' हुआ है। अगर कोई आपकी वेबसाइट पर आकर बिना खरीदे जा रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपका प्रोडक्ट खराब है। हो सकता है उसे पेमेंट का बटन ही न दिख रहा हो या फिर उसे यह लग रहा हो कि यह चीज उसके घर के छोटे से अलमारी में फिट नहीं आएगी।
जब आप कस्टमर की लाइफ में गहराई से झांकते हैं तब आपको समझ आता है कि आपकी असली वैल्यू क्या है। बहुत से स्टार्टअप्स को लगता है कि वे दुनिया बदलने आए हैं पर असल में वे बस लोगों का सिरदर्द बढ़ा रहे होते हैं। अगर आप वही घिसी पिटी सर्विस दे रहे हैं जो पिछले दस साल से चल रही है तो आपकी कंपनी की ग्रोथ नहीं बल्कि उसकी विदाई का वक्त आ गया है। सार्केज्म की बात तो यह है कि लोग अपनी कंपनी की मीटिंग्स में घंटों बैठ कर यह डिस्कस करते हैं कि कस्टमर को क्या चाहिए पर कभी दुकान से बाहर निकल कर उस बेचारे कस्टमर से बात करने की जहमत नहीं उठाते।
आपको अपनी सोच को 'प्रोडक्ट सेंट्रिक' से हटाकर 'लाइफ सेंट्रिक' बनाना होगा। यह देखिये कि आपका कस्टमर सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक किन छोटी छोटी बातों पर चिढ़ता है। क्या आपकी सर्विस उसकी उस चिढ़ को खत्म कर सकती है? अगर हाँ तो मुबारक हो आपको अपनी अगली बड़ी ग्रोथ स्ट्रेटेजी मिल गई है। वरना आप बस उन लोगों की भीड़ में शामिल रहेंगे जो अपनी नाकामी का ठीकरा मार्केट की मंदी पर फोड़ते रहते हैं।
ग्रोथ कोई ऐसी चीज नहीं है जो आसमान से टपकेगी। यह आपके सामने ही पड़ी है बस आपको अपनी चश्मा साफ करने की जरूरत है। अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे आप मार्केट की उस डिमांड को पकड़ सकते हैं जो अभी तक पैदा ही नहीं हुई है पर फिर भी वहां मौजूद है।
लेसन २ : डिमांड साइड का चश्मा पहनो वरना अंधे ही रहोगे
अक्सर बिजनेस की दुनिया में लोग सप्लाई के पीछे पागल रहते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हम कुछ बहुत कूल बना लेंगे तो लोग उसे खरीदने के लिए टूट पड़ेंगे। एरिच अपनी किताब में इस गुब्बारे की हवा निकालते हुए कहते हैं कि असली ग्रोथ 'डिमांड साइड' को समझने में है। डिमांड साइड का मतलब यह नहीं है कि लोग क्या मांग रहे हैं बल्कि यह है कि लोग अपनी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए किन रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम अक्सर अपने ऑफिस के एयर कंडीशन कमरों में बैठकर यह तय कर लेते हैं कि मार्केट को क्या चाहिए जैसे हम कोई भविष्यवक्ता हों।
सोचिये एक कंपनी है जो बहुत ही एडवांस और प्रीमियम टूथब्रश बनाती है। वे उसमें सेंसर लगाते हैं, ब्लूटूथ जोड़ते हैं और उसे मोबाइल ऐप से कनेक्ट कर देते हैं। कंपनी को लगता है कि उन्होंने दुनिया जीत ली है। पर असलियत क्या है? कस्टमर सुबह सोकर उठता है, उसकी एक आंख बंद होती है और वह बस जल्दी से दांत साफ करके ऑफिस भागना चाहता है। उसे इस बात से रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता कि उसका टूथब्रश उसके फोन से बातें कर रहा है या नहीं। यहाँ कंपनी ने 'सप्लाई' तो बहुत तगड़ी कर दी पर 'डिमांड' को बिल्कुल नहीं समझा। डिमांड ब्रश की नहीं थी बल्कि एक ताजी सांस और साफ दांतों के साथ जल्दी तैयार होने की थी।
ज्यादातर इंडियन बिजनेस इसी जाल में फंसे हैं। वे देखते हैं कि पड़ोस वाली दुकान पर रसगुल्ले बिक रहे हैं तो वे भी रसगुल्ले बनाना शुरू कर देते हैं। फिर वे सोचते हैं कि उनके रसगुल्ले क्यों नहीं बिक रहे? भाई साहब, मार्केट में रसगुल्लों की कमी नहीं है। कमी शायद उस मिठास की है जो बिना शुगर बढ़ाए काम कर जाए या फिर उस पैकिंग की है जो सफर में न फटे। जब आप डिमांड साइड से सोचते हैं तो आप सामान नहीं बेचते बल्कि आप कस्टमर की लाइफ का एक बड़ा हिस्सा बन जाते हैं।
किताब हमें सिखाती है कि हमें अपनी इंडस्ट्री की दीवारों को तोड़ना होगा। अगर आप एक बैंक चलाते हैं तो आपका कॉम्पिटिशन सिर्फ दूसरे बैंक से नहीं है। आपका कॉम्पिटिशन उन सभी एप्स से है जो पैसे का लेन देन आसान बना रही हैं। आप जिस कॉम्पिटिशन से डर रहे हैं वह शायद उस तरफ से आए ही न जहाँ आप देख रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप मोहल्ले के क्रिकेट मैच में बॉलर को घूर रहे हों और पीछे से कुत्ता आकर आपकी गेंद ले जाए। असली खतरा और असली मौका अक्सर आपकी नजरों से ओझल होता है क्योंकि आप सिर्फ अपने प्रोडक्ट को प्यार करने में बिजी हैं।
कंपनियां लाखों करोड़ों रुपये आर एंड डी (R&D) पर खर्च करती हैं ताकि वे अपने प्रोडक्ट को थोड़ा और चमका सकें। पर वे पांच मिनट भी उस ऑटो वाले या उस हाउसवाइफ के साथ नहीं बिताते जो उनके प्रोडक्ट का असली यूजर है। अगर आप यह नहीं समझ पा रहे कि आपका प्रोडक्ट कस्टमर की लाइफ के किस दुःख को खत्म कर रहा है तो यकीन मानिये आप बिजनेस नहीं कर रहे बस टाइमपास कर रहे हैं।
जब आप डिमांड साइड का चश्मा पहनते हैं तो आपको वे खाली जगहें दिखने लगती हैं जहाँ कोई और नहीं पहुंच पाया है। इसे ही एरिच 'हिडन इन प्लेन Sight' कहते हैं। मौके आपके सामने नाच रहे होते हैं बस आप सप्लाई के बोझ तले दबे होते हैं। अगले लेसन में हम बात करेंगे कि जब आपको यह मौका दिख जाए तो उस पर झपट्टा कैसे मारना है और उसे असलियत में कैसे बदलना है।
लेसन ३ : बड़ी बातें कम और एक्जीक्यूशन में दम दिखाओ
अब तक आपने यह समझ लिया कि कस्टमर की लाइफ में कैसे घुसना है और डिमांड को कैसे पहचानना है। पर असली खेल यहाँ शुरू होता है। दुनिया के हर दूसरे इंसान के पास एक 'मल्टी-मिलियन डॉलर' आइडिया होता है। रात को सोते समय हम सब एलन मस्क बन जाते हैं पर सुबह उठकर वही पुरानी घिसी-पिटी जिंदगी जीने लगते हैं। एरिच जोआचिमस्थेलर अपनी किताब में साफ कहते हैं कि स्ट्रेटेजी बनाना सिर्फ १०% काम है, बाकी ९०% तो उसे जमीन पर उतारना यानी 'एक्जीक्यूशन' है। अगर आपका प्लान कागज पर बहुत सुंदर दिख रहा है पर ऑफिस की टेबल से बाहर नहीं निकल पा रहा, तो वह रद्दी के बराबर है।
मान लीजिये आपने तय किया कि आप शहर की सबसे बेहतरीन 'हेल्थ फूड' डिलीवरी सर्विस शुरू करेंगे। आपने बहुत शानदार लोगो बनाया, एक महंगा सा ऐप बनवाया और ऑफिस में बड़े-बड़े बोर्ड लगा दिए। पर जिस दिन काम शुरू हुआ, पता चला कि आपका डिलीवरी बॉय ही रास्ता भटक गया और सलाद दोपहर के बजाय रात को मिला। अब आपकी वह करोड़ों की स्ट्रेटेजी उस बासी सलाद के साथ डस्टबिन में चली गई। यहाँ कमी विजन की नहीं थी, कमी थी उन छोटे-छोटे कदमों की जिन्हें आपको रोज मॉनिटर करना था।
अक्सर बड़े-बड़े मैनेजर्स को लगता है कि अगर उन्होंने मीटिंग में पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिखा दिया तो काम हो गया। भाई साहब, प्रेजेंटेशन से प्रेजेंट नहीं बदलता। एक्जीक्यूशन का असली मतलब है उन बारीकियों को पकड़ना जो आपकी ग्रोथ की स्पीड को धीमा कर रही हैं। क्या आपका स्टाफ कस्टमर से बात करते समय मुस्कुराता है? क्या आपका प्रोडक्ट पैकेजिंग खोलते ही टूट तो नहीं जाता? ये वो छोटी बातें हैं जो सबके सामने होती हैं पर कोई इन पर ध्यान नहीं देता।
हंसी तो तब आती है जब कंपनियां अपनी नाकामी के लिए 'मार्केट कंडीशन' को दोष देती हैं। अगर आपकी सर्विस खराब है तो उसमें मार्केट का क्या दोष? यह तो वही बात हुई कि आपको गाड़ी चलानी नहीं आती और आप सड़क को टेढ़ा बता रहे हैं। हिडन इन प्लेन Sight का असली मंत्र यही है कि अपनी आंखों को खुला रखो और अपने हाथों को गंदा करने से मत डरो। अगर आपको अपनी कंपनी को अगले लेवल पर ले जाना है, तो आपको उन हिस्सों को ठीक करना होगा जिन्हें अक्सर 'छोटा काम' समझकर छोड़ दिया जाता है।
याद रखिये, ग्रोथ कोई चमत्कार नहीं है जो एक रात में होगा। यह उन छोटे सुधारों का नतीजा है जो आप रोज करते हैं। जब आप सही डिमांड को पकड़ते हैं और उसे पूरी शिद्दत के साथ एक्जीक्यूट करते हैं, तब जाकर आपकी कंपनी वह 'बिग ग्रोथ' हासिल करती है जिसका सपना आप देख रहे हैं। अब बहाने बनाना छोड़िये और उस स्ट्रेटेजी पर काम शुरू कीजिये जो आपकी आंखों के सामने ही पड़ी है।
तो दोस्तों, हिडन इन प्लेन Sight हमें यही सिखाती है कि सफलता के रास्ते कहीं दूर पहाड़ों में नहीं बल्कि हमारे आसपास के आम लोगों की जरूरतों में छुपे हैं। अब समय है खुद से एक कड़वा सवाल पूछने का। क्या आप भी वही कर रहे हैं जो सब कर रहे हैं या फिर आप वो देख पा रहे हैं जो दूसरे नहीं देख पा रहे?
नीचे कमेंट्स में मुझे बताइये कि आपके बिजनेस या करियर का वो कौन सा 'लेसन' है जिसे आप आज से ही लागू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो सिर्फ प्लान बनाता है पर काम कभी शुरू नहीं करता। जागिये, देखिये और अपनी ग्रोथ की कहानी खुद लिखिये।
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