It's Called Work for a Reason (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से है जो ऑफिस में सिर्फ अपनी कुर्सी गरम करते है और फिर रोते है कि प्रमोशन क्यों नहीं मिला। बधाई हो। आप अपनी बर्बादी का रास्ता खुद बना रहे है और आपको इसका अहसास तक नहीं है। अगर आपको लगता है कि दुनिया आपके टैलेंट की कर्जदार है तो यह भ्रम पालना छोड़ दीजिये।

आज हम लैरी विंगेट की किताब के उन कड़वे सच की बात करेंगे जो आपकी प्रोफेशनल लाइफ की धज्जिया उड़ा देंगे। अगर आप सच सुनने की हिम्मत रखते है और खुद को बदलना चाहते है तो आगे पढ़ते रहिये।


लेसन १ : अपनी जिम्मेदारी खुद ले। आपकी सक्सेस या फेलियर के जिम्मेदार सिर्फ आप है

देखिये भाई साहब। सीधा सा हिसाब है। अगर आपकी लाइफ अभी एक कचरा डब्बा बनी हुई है तो उसके जिम्मेदार आप खुद है। यह सुनने में थोड़ा कड़वा लग सकता है पर यही सच है। हम अक्सर अपनी नाकामियों का ठीकरा अपने बॉस, अपनी कंपनी या यहाँ तक कि अपने पड़ोस वाले शर्मा जी के लड़के पर फोड़ देते है। हमें लगता है कि हमारी कंपनी हमें कम सैलरी दे रही है इसलिए हम काम चोरी कर रहे है। लेकिन सच तो यह है कि आप अपनी वैल्यू खुद तय करते है।

मान लीजिये आप एक ऑफिस में काम करते है जहाँ हर कोई सिर्फ घड़ी देखता रहता है कि कब शाम के छह बजेंगे और कब वो आज़ाद होंगे। अब वहां एक महाशय ऐसे भी है जो हर काम में कमी निकालते है। वो कहते है कि बॉस तो खडूस है और ऑफिस की चाय में चीनी कम है इसलिए वो मन लगाकर काम नहीं कर पा रहे। यह वही लोग है जो अपनी लाइफ की स्टयरिंग सीट पर खुद नहीं बैठे होते। अगर आप अपनी सक्सेस की चाबी किसी और के हाथ में देंगे तो वो तो उसे नाले में ही फेंकेगा ना।

जिम्मेदारी लेने का मतलब है कि आप यह मानना शुरू कर दे कि आज आप जहाँ भी है वो आपके अपने फैसलों का नतीजा है। अगर आप कल भी वही करेंगे जो आज कर रहे है तो आपको वही मिलेगा जो आज मिल रहा है। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है। लोग अक्सर बहाने बनाने में इतनी मेहनत कर देते है कि अगर उतनी मेहनत काम में की होती तो शायद आज वो खुद बॉस होते।

हकीकत यह है कि मार्किट को आपकी पर्सनल परेशानियों से कोई लेना देना नहीं है। आपके घर में बिजली का बिल ज्यादा आया है या आपका कुत्ता बीमार है इससे आपकी कंपनी का रेवेन्यू नहीं बढ़ेगा। जब आप ऑफिस की दहलीज के अंदर कदम रखते है तब आप एक एसेट होने चाहिए ना कि एक बोझ। अगर आप खुद को एक विक्टिम की तरह देखेंगे तो दुनिया आपको एक लूजर की तरह ही ट्रीट करेगी।

अपनी कमियों को गले लगाना सीखिये। अगर आपको प्रमोशन नहीं मिला तो यह देखिये कि आपने ऐसा क्या एक्स्ट्रा किया जो दूसरों ने नहीं किया। क्या आपने सिर्फ उतना ही किया जितना आपकी जॉब डिस्क्रिप्शन में लिखा था। अगर हा तो फिर एक्स्ट्रा पैसे की उम्मीद करना छोड़ दीजिये। लैरी विंगेट बड़े प्यार से समझाते है कि अगर आप अपनी लाइफ की जिम्मेदारी नहीं लेंगे तो आपकी लाइफ कोई और कंट्रोल करेगा। और यकीन मानिये वो इंसान आपके भले के बारे में तो बिलकुल नहीं सोचेगा।


लेसन २ : काम का मतलब काम होता है। ऑफिस मजे करने की जगह नहीं है

आजकल के ऑफिसों का हाल तो देखिये। लोग वहां ऐसे जाते है जैसे किसी पिकनिक पर जा रहे हो। वहां पहुँचते ही पहला काम होता है कंप्यूटर ऑन करना और दूसरा काम होता है लंच में क्या खाना है उस पर आधे घंटे की मीटिंग करना। अगर आप भी इन्ही महानुभावों की केटेगरी में आते है तो यकीन मानिये आपकी तरक्की उतनी ही होगी जितनी एक रुके हुए पंखे की होती है। काम को काम की तरह लेना सीखिये। लैरी विंगेट कहते है कि आपको वहां काम करने के पैसे मिलते है न कि अपनी सोशल लाइफ सुधारने के।

मान लीजिये आप एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। आप ऑफिस पहुँचते है और सीधे कैंटीन की तरफ दौड़ते है क्योंकि वहां समोसे ताजे मिल रहे है। समोसा खाते हुए आप अपने कोलीग के साथ इस बात पर चर्चा करते है कि पिछले हफ्ते वाली फिल्म में हीरो ने विलेन को क्यों नहीं मारा। फिर आप अपनी डेस्क पर आते है और अपनी फेसबुक फीड चेक करने लगते है। अचानक बॉस आता है और आप ऐसे कीबोर्ड पर उंगलियां चलाते है जैसे आप नासा का कोई रॉकेट लॉन्च करने वाले हो।

यह जो आप ड्रामेबाजी कर रहे है इसे काम नहीं टाइम पास कहते है। लोग अक्सर शिकायत करते है कि वो आठ घंटे ऑफिस में रहते है फिर भी काम पूरा नहीं होता। अरे भाई साहब अगर आप उन आठ घंटों में से चार घंटे चाय पीने और गप्पे मारने में निकाल देंगे तो काम क्या आपके पड़ोसी आकर करेंगे। काम का मतलब होता है रिजल्ट देना। कंपनी को आपके पसीने से प्यार नहीं है उसे उस आउटपुट से प्यार है जो आप टेबल पर रखते है।

अगर आप ऑफिस में है तो आपका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ अपने टास्क पर होना चाहिए। यह जो बार बार नोटिफिकेशन चेक करने की बीमारी है यह आपकी प्रोडक्टिविटी का गला घोंट रही है। लोग सोचते है कि वो मल्टी टास्किंग कर रहे है पर असल में वो सिर्फ अपना और कंपनी का टाइम बर्बाद कर रहे होते है। जब आप काम कर रहे हो तो दुनिया को भूल जाइये।

सच्चाई तो यह है कि जो लोग ऑफिस में सबसे ज्यादा चिल्लाते है कि उनके पास बहुत काम है असल में वही सबसे कम काम करते है। वो बस शोर मचाकर यह दिखाना चाहते है कि वो बहुत बिजी है। लेकिन सच तो सबको पता होता है। अगर आप सच में सक्सेसफुल होना चाहते है तो अपनी जुबान बंद रखिये और अपने काम को बोलने दीजिये। जब आपके रिजल्ट्स खुद ब खुद चीखने लगेंगे तब आपको किसी को समझाने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि आपने कितनी मेहनत की है।


लेसन ३ : एटीट्यूड ही सब कुछ है। अगर काम पसंद नहीं तो रास्ता नापिये

ज्यादातर लोग ऑफिस में एक ऐसा चेहरा लेकर बैठते है जैसे उन्हें जबरदस्ती किसी ने जेल में डाल दिया हो। उनके चेहरे पर दुनिया भर का बोझ होता है और जुबान पर सिर्फ अपनी कंपनी की बुराई। लैरी विंगेट बहुत साफ शब्दों में कहते है कि अगर आपको अपना काम पसंद नहीं है, तो उसे छोड़ दीजिये। लेकिन अगर आप वहां रुकने का फैसला करते है और पैसे ले रहे है, तो फिर रोना बंद कीजिये और अपना बेस्ट दीजिये।

इस सिचुएशन को जरा गौर से देखिये। एक भाई साहब है जो हर सोमवार को फेसबुक पर स्टेटस डालते है - "मंडे ब्लूज"। वो ऑफिस ऐसे जाते है जैसे उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई हो। डेस्क पर बैठकर वो बस इस बात का इन्तजार करते है कि कब घड़ी की सुइयां भागेगी। अब सोचिये, क्या ऐसा इंसान कभी लाइफ में कुछ बड़ा कर पाएगा। जो इंसान अपने काम की इज्जत नहीं कर सकता, वो कभी भी ऊपर नहीं उठ सकता। अगर आप हर वक्त रोते रहेंगे कि आपकी जॉब खराब है, तो आपकी लाइफ भी वैसी ही बनती जाएगी।

मान लीजिये आप एक कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव है। अगर आप कस्टमर से ऐसे बात कर रहे है जैसे आप उस पर कोई बहुत बड़ा अहसान कर रहे हो, तो आप सिर्फ उस कंपनी का नुकसान नहीं कर रहे, आप अपना करियर खुद खत्म कर रहे है। आपका एटीट्यूड ही यह तय करता है कि लोग आपके साथ काम करना चाहेंगे या नहीं। दुनिया में टैलेंटेड लोगों की कमी नहीं है, लेकिन सही एटीट्यूड वाले लोग बहुत कम मिलते है।

अक्सर लोग कहते है कि उन्हें वो काम नहीं मिला जो वो करना चाहते थे। ठीक है, लेकिन जो काम अभी आपके हाथ में है उसे तो ढंग से कीजिये। अगर आप एक छोटा सा काम ईमानदारी से नहीं कर सकते, तो कुदरत आपको बड़ा काम क्यों देगी। यह वही बात हुई कि आप साइकिल तो ठीक से चला नहीं पाते और सपना देख रहे है फाइटर जेट उड़ाने का। एटीट्यूड का मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा मुस्कुराते रहे, बल्कि इसका मतलब है कि आप अपने काम के प्रति कितने गंभीर है।

आपका काम आपकी पहचान है। जब आप कोई प्रोजेक्ट खत्म करते है, तो उस पर आपका नाम लिखा होता है। क्या आप चाहेंगे कि आपका नाम एक ऐसी चीज के साथ जुड़े जो घटिया हो। अगर नहीं, तो फिर बहाने बनाना छोड़िये। अपनी लाइफ में "एक्सीलेंस" को एक आदत बनाइये। जब आप अपने काम को प्यार करने लगते है, तो वो काम नहीं रहता, वो एक आर्ट बन जाता है। और याद रखिये, आर्टिस्ट को कभी काम मांगने की जरूरत नहीं पड़ती, काम खुद उनके पास आता है।


तो दोस्तों, लैरी विंगेट की यह बातें सुनने में भले ही कड़वी लगे, लेकिन यह वही दवा है जो आपकी करियर रूपी बीमारी को ठीक कर सकती है। याद रखिये, आपकी सक्सेस आपकी अपनी जिम्मेदारी है। आप बहाने बना सकते है या पैसे कमा सकते है, लेकिन दोनों एक साथ नहीं कर सकते। आज ही यह तय कीजिये कि आप एक एसेट बनेंगे या एक बोझ। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा अपनी जॉब का रोना रोते रहते है। कमेंट में बताइये कि आप आज से अपनी लाइफ की कौन सी जिम्मेदारी खुद ले रहे है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#CareerGrowth #SuccessMindset #WorkEthics #MotivationHindi #ProfessionalDevelopment


_

Post a Comment

Previous Post Next Post