क्या आप भी अपनी घिसी पिटी रूटीन और एवरेज लाइफ से बहुत प्यार करते हैं। बधाई हो। आप अपनी मेहनत और टैलेंट को कचरे के डिब्बे में फेंकने का रिकॉर्ड बना रहे हैं। बिना इन हाई परफॉरमेंस हैबिट्स के आप सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे जबकि दुनिया आपसे कोसों आगे निकल जाएगी।
लेकिन फिक्र मत कीजिये। आज हम ब्रेंडन बुचार्ड की किताब से वो ३ सीक्रेट लेसन्स सीखेंगे जो आपकी सुस्त जिंदगी को रॉकेट की तरह उड़ा देंगे। तैयार हो जाइये अपनी असल काबिलियत को पहचानने के लिए।
लेसन १ : क्लैरिटी की तलाश (Seek Clarity)
क्या आपको पता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा कंफ्यूज्ड प्राणी कौन है। नहीं वो कोई जानवर नहीं बल्कि हम इंसान हैं जो मंडे सुबह उठकर यह सोचते हैं कि आज ऑफिस क्यों जाना है। ब्रेंडन बुचार्ड कहते हैं कि अगर आप अपनी लाइफ में हाई परफॉरमर बनना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको क्लैरिटी ढूंढनी होगी। क्लैरिटी कोई ऐसी चीज नहीं है जो आपको रास्ते में चलते हुए अचानक मिल जाएगी जैसे कि कोई खोया हुआ बटुआ। इसे आपको खुद बनाना पड़ता है।
जरा सोचिये आप एक टैक्सी में बैठते हैं और ड्राइवर आपसे पूछता है कि साहब कहाँ जाना है। अब अगर आप उसे कहें कि भाई कहीं भी ले चल बस गाड़ी तेज चला तो वह आपको पागल समझेगा या शायद किसी सुनसान मोड़ पर उतार देगा। असल जिंदगी में भी हम यही कर रहे हैं। हम बहुत मेहनत कर रहे हैं और पसीना बहा रहे हैं लेकिन हमें यह नहीं पता कि हम जा कहाँ रहे हैं। क्लैरिटी का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि आपको अगले दस साल का पता हो। इसका मतलब है कि आपको आज के दिन के अपने मुख्य मकसद का पता होना चाहिए।
मान लीजिये आपके दोस्त की शादी है और आप वहां जिम के कपड़े पहनकर पहुँच जाते हैं। अब आप वहां कितने भी स्मार्ट लगें लोग तो यही कहेंगे कि भाई का दिमाग ठिकाने नहीं है। क्यों। क्योंकि आपके पास उस माहौल की क्लैरिटी नहीं थी। हाई परफॉरमर लोग हर काम शुरू करने से पहले खुद से पूछते हैं कि मैं यह क्यों कर रहा हूँ और इससे मुझे क्या हासिल होगा। वे अपने रोल के बारे में स्पष्ट होते हैं। अगर वे एक पिता हैं तो उन्हें पता है कि घर जाकर उन्हें एक अच्छा पिता बनना है न कि वहां भी अपने बॉस वाली अकड़ दिखानी है।
अक्सर लोग कहते हैं कि यार मैं बहुत बिजी हूँ। भाई बिजी तो एक मक्खी भी होती है जो दिन भर कांच की खिड़की से सिर टकराती रहती है पर पहुँचती कहीं नहीं है। क्लैरिटी का अभाव आपको उस मक्खी जैसा बना देता है। आप ईमेल चेक करते हैं और सोशल मीडिया पर दूसरों की लाइफ देखते हैं और आपको लगता है कि आप काम कर रहे हैं। असल में आप बस समय बर्बाद कर रहे हैं।
एक हाई परफॉरमर व्यक्ति अपनी सोशल लाइफ और अपने काम के बीच की लकीर को साफ रखता है। वह जानता है कि उसे कब ना कहना है। अगर आपको यह नहीं पता कि आपका अगला बड़ा कदम क्या है तो आप बस दूसरों के प्लान्स का हिस्सा बनकर रह जाएंगे। जैसे वो रिश्तेदार जो शादियों में बिना बुलाये आ जाते हैं और सारा पनीर खुद खा जाते हैं वैसे ही बिना क्लैरिटी के विचार आपके दिमाग का सारा सुकून खा जाएंगे। इसलिए सुबह उठते ही यह तय कीजिये कि आज आपकी टॉप प्रायोरिटी क्या है। जब आपके पास विजन होता है तो आपकी बॉडी और माइंड एक साथ मिलकर काम करते हैं। वरना आप उस इंसान की तरह हैं जो अँधेरे कमरे में काला चश्मा पहनकर अपनी चाबियाँ ढूंढ रहा है। क्लैरिटी लाइए और देखिये कैसे आपकी परफॉरमेंस में चार चाँद लग जाते हैं।
लेसन २ : नेसेसिटी पैदा करना (Generate Necessity)
अब जब आपको यह पता चल गया है कि जाना कहाँ है तो अगला सवाल यह है कि आप वहां पहुँचने के लिए दौड़ेंगे या बस रेंगते रहेंगे। ब्रेंडन बुचार्ड कहते हैं कि हाई परफॉरमर और एक आम इंसान के बीच सबसे बड़ा फर्क है 'नेसेसिटी' यानी जरूरत का। एक आम इंसान सोचता है कि चलो आज मन करेगा तो काम कर लेंगे वरना कल तो है ही। लेकिन एक हाई परफॉरमर के लिए काम करना एक चॉइस नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी बन जाती है। उसे लगता है कि अगर उसने आज अपना बेस्ट नहीं दिया तो वह अपनी नजरों में गिर जाएगा।
मान लीजिये आपको सुबह ५ बजे उठकर दौड़ना है। आपका अलार्म बजता है और आप उसे बड़ी बेरहमी से स्नूज कर देते हैं क्योंकि रजाई में जो सुकून है वो दुनिया में कहीं नहीं है। लेकिन अब कल्पना कीजिये कि आपके कमरे में एक भूखा शेर घुस आया है। क्या अब भी आप स्नूज बटन दबाएंगे। बिल्कुल नहीं। आप तो ओलंपिक एथलीट से भी तेज दौड़ेंगे और शायद खिड़की से बाहर कूद जाएंगे। वहां दौड़ना आपकी जरूरत बन गई थी। वहां आपके पास कोई बहाना नहीं था।
सफल लोग अपनी जिंदगी में इसी तरह का 'शेर' खुद पालते हैं। वे काम इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें पैसे चाहिए बल्कि वे इसलिए काम करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि दुनिया को उनकी जरूरत है। जैसे वो पड़ोस वाली आंटी जिन्हें पूरे मोहल्ले की खबर रखना अपनी ड्यूटी लगती है वैसे ही हाई परफॉरमर को अपनी फील्ड में टॉप पर रहना अपनी जिम्मेदारी लगती है। जब आप यह सोचते हैं कि आपकी टीम और आपकी फैमिली आप पर डिपेंड करती है तब आपकी थकान गायब हो जाती है।
अक्सर लोग कहते हैं कि यार मोटिवेशन नहीं आ रहा। भाई मोटिवेशन कोई मैगी नहीं है जो २ मिनट में बन जाएगी। यह तो अंदर की आग से आता है। अगर आप सिर्फ अपने लिए काम कर रहे हैं तो आप जल्दी थक जाएंगे। लेकिन अगर आप दूसरों की भलाई के लिए या किसी बड़े मकसद के लिए काम कर रहे हैं तो आपको कभी थकान नहीं होगी। जैसे एक मां अपने बच्चे के लिए पूरी रात जाग सकती है और उसे थकान महसूस नहीं होती क्योंकि वहां नेसेसिटी है।
बिना जरूरत के इंसान उस सरकारी ऑफिस के पंखे की तरह हो जाता है जो आवाज बहुत करता है पर हवा जरा भी नहीं देता। आप भी अगर बिना किसी मकसद के बस कीबोर्ड चला रहे हैं तो आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं। खुद से पूछिए कि मेरे इस काम से किसका भला होगा। जब आप खुद को किसी बड़े मकसद से जोड़ लेते हैं तो आपका आउटपुट अपने आप बढ़ जाता है। लोग आपकी तारीफ करें या न करें पर आपको खुद को पता होता है कि आप आज के दिन के असली हीरो हैं। इसलिए आलस को छोड़िये और अपनी लाइफ में वो जरूरी आग पैदा कीजिये जो आपको रुकने न दे।
लेसन ३ : प्रोडक्टिविटी बढ़ाना (Increase Productivity)
अब तक आपने जान लिया कि क्या करना है और क्यों करना है। लेकिन अगर आप उसे सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं तो आप उस शेफ की तरह हैं जिसके पास रेसिपी भी है और भूख भी पर वो चूल्हा जलाना ही भूल गया है। ब्रेंडन बुचार्ड कहते हैं कि असली प्रोडक्टिविटी का मतलब सिर्फ ज्यादा काम करना नहीं है बल्कि 'सही' काम करना है। आज के जमाने में लोग बिजी रहने को अपनी शान समझते हैं। अगर आप किसी से पूछें कि क्या हाल है तो वो फौरन कहेगा कि भाई बहुत काम है बिलकुल टाइम नहीं है। असल में वो इंसान बिजी नहीं है बल्कि वो बस अपनी लाइफ मैनेज नहीं कर पा रहा है।
मान लीजिये आपको एक दीवार में कील ठोकनी है। अब आप एक बड़ा सा हथौड़ा लेकर पूरे दिन दीवार पर मारते रहें पर कील की जगह हाथ पर मार लें तो क्या आप खुद को प्रोडक्टिव कहेंगे। नहीं आप बस एक घायल इंसान कहलाएंगे जिसने अपनी दीवार का कबाड़ा कर दिया है। हाई परफॉरमर जानते हैं कि उन्हें अपनी एनर्जी कहाँ और कैसे लगानी है। वे उन ५ प्रतिशत कामों पर फोकस करते हैं जो उन्हें ९५ प्रतिशत रिजल्ट्स देते हैं। बाकी के काम वे या तो दूसरों को दे देते हैं या फिर उन्हें इग्नोर कर देते हैं।
आजकल हमारा सबसे बड़ा दुश्मन हमारा स्मार्टफोन है। आप एक जरूरी ईमेल लिखने बैठते हैं और तभी एक नोटिफिकेशन आता है कि आपकी दूर की मौसी के लड़के ने गोवा की फोटो डाली है। बस फिर क्या है। आप अगले आधे घंटे तक यह देखने में बिता देते हैं कि मौसी के लड़के ने कौन सा चश्मा पहना है। आप उस वक्त प्रोडक्टिव नहीं थे बल्कि आप बस डिजिटल कचरे में गोते लगा रहे थे। हाई परफॉरमर अपने काम के वक्त को मंदिर की तरह पवित्र मानते हैं। जब वे काम करते हैं तो पूरी दुनिया को भूल जाते हैं।
अगर आप सोचते हैं कि आप मल्टी टास्किंग के राजा हैं तो आप गलतफहमी में जी रहे हैं। मल्टी टास्किंग का मतलब है एक साथ कई काम खराब तरीके से करना। यह वैसा ही है जैसे आप एक ही वक्त पर गाड़ी भी चला रहे हैं और अपनी प्रेमिका को लव लेटर भी लिख रहे हैं। यकीन मानिए न तो लेटर अच्छा लिखा जाएगा और न ही आपकी गाड़ी सुरक्षित रहेगी। प्रोडक्टिविटी का असली मंत्र है 'सिंगल टास्किंग'। एक समय पर एक काम और उसमें अपनी पूरी जान झोंक देना।
अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए आपको अपने दिन को छोटे छोटे हिस्सों में बांटना होगा। जैसे वो लोग जो शादी की प्लेट में सारा खाना एक साथ भर लेते हैं और बाद में कुछ भी ढंग से नहीं खा पाते वैसे ही अपने दिन को कामों से मत भरिये। केवल वही काम चुनिए जो आपको आपके गोल के करीब ले जाएं। जब आप हर दिन कुछ ठोस हासिल करते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर होता है। याद रखिये कि अंत में आपकी मेहनत की नहीं बल्कि आपके रिजल्ट्स की गिनती होगी। इसलिए स्मार्ट बनिए और अपनी एनर्जी को सही दिशा में मोड़िये।
तो दोस्तों, ब्रेंडन बुचार्ड की यह बातें सिर्फ सुनने के लिए नहीं हैं। हाई परफॉरमेंस कोई टैलेंट नहीं बल्कि एक चॉइस है। क्या आप आज वह चॉइस लेने के लिए तैयार हैं। अपनी क्लैरिटी ढूंढिए अपनी जरूरत पहचानिए और अपनी प्रोडक्टिविटी से दुनिया को हैरान कर दीजिये। कल कभी नहीं आता जो है बस आज है।
अगर आप भी अपनी लाइफ को एवरेज से एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनाना चाहते हैं तो नीचे कमेंट में अपनी वह एक आदत लिखें जिसे आप आज ही बदलना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे लाइफ में एक बड़े धक्के की जरूरत है।
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