How Breakthroughs Happen (Hindi)


अगर आपको लगता है कि नया बिजनेस आइडिया लाने के लिए आपको कोई आइंस्टीन जैसा जीनियस होना पड़ेगा तो मुबारक हो आप अब तक अंधेरे में जी रहे हैं। बिना इस बुक को पढ़े आप बस अपनी पुरानी घिसी पिटी मेहनत वेस्ट कर रहे हैं और मार्केट का असली मजा दूसरे ले जा रहे हैं।

आज के इस आर्टिकल में हम एंड्रयू हारगाडन की बुक हाउ ब्रेकथ्रूज हैपन से वो राज खोलेंगे जो बड़ी बड़ी कंपनीज को सक्सेसफुल बनाते हैं। चलिए देखते हैं वो 3 लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।


लेसन १ : पुराने आइडियाज से नया धमाका

अक्सर हमें लगता है कि इनोवेशन का मतलब है कुछ ऐसा बना देना जो इस धरती पर पहले कभी था ही नहीं। हम सोचते हैं कि कोई जीनियस रात को सोएगा और सुबह उठकर दुनिया बदल देने वाला कोई चमत्कारी फॉर्मूला लेकर आएगा। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो सच कहूं तो आप किसी बॉलीवुड मूवी के हीरो वाली दुनिया में जी रहे हैं। एंड्रयू हारगाडन अपनी बुक हाउ ब्रेकथ्रूज हैपन में इस भ्रम को बहुत प्यार से तोड़ते हैं। वो कहते हैं कि असली ब्रेकथ्रू कुछ नया पैदा करने में नहीं बल्कि पुराने आइडियाज को नई जगह फिट करने में है।

सोचिए आपके पास एक पुरानी साइकिल है और एक कबाड़ में पड़ी मोटर। अब आप इन दोनों को जोड़कर एक इलेक्ट्रिक साइकिल बना देते हैं। क्या आपने मोटर इन्वेंट की? नहीं। क्या आपने साइकिल इन्वेंट की? बिल्कुल नहीं। लेकिन आपने उन दोनों को मिलाकर जो नया काम किया उसे ही हम इनोवेशन कहते हैं। हमारे यहाँ इंडिया में इसे लोग जुगाड़ कहते हैं लेकिन ग्लोबल मार्केट में यही अरबों डॉलर की स्ट्रेटजी है। अगर आप आज भी बैठकर उस एक जादुई आइडिया का इंतजार कर रहे हैं जो बिल्कुल फ्रेश हो तो यकीन मानिए आप बस अपना टाइम और अपनी जवानी दोनों बर्बाद कर रहे हैं।

थॉमस एडिसन का नाम तो सुना ही होगा आपने। स्कूल की किताबों ने हमें बताया कि उन्होंने बल्ब बनाया। लेकिन भाई साहब सच तो यह है कि एडिसन से पहले भी कई लोग बल्ब बनाने की कोशिश कर रहे थे। एडिसन ने बस उन सबकी गलतियों को देखा और अलग अलग इंडस्ट्री के पुराने कॉन्सेप्ट्स को मिलाकर एक ऐसा बल्ब तैयार किया जो वाकई काम करता था। वो कोई जादूगर नहीं थे बल्कि एक बहुत स्मार्ट कबाड़ी थे जिन्हें पता था कि कौन सा पुराना पुर्जा कहाँ फिट होगा।

आज के टाइम में भी अगर आप किसी स्टार्टअप की बात करें तो गौर से देखिएगा। ओला ने क्या किया? कार उनकी नहीं है और सड़क भी उनकी नहीं है। उन्होंने बस पुराने टैक्सी सिस्टम को मोबाइल एप के साथ जोड़ दिया। अब इसमें कौन सा रॉकेट साइंस है? लेकिन फिर भी हम इसे बड़ा ब्रेकथ्रू मानते हैं क्योंकि उन्होंने दो अलग दुनिया को आपस में मिला दिया।

अगर आप अपने बिजनेस या लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो लाइब्रेरी में जाकर सिर पटकने से अच्छा है कि अपने आस पास की चीजों को ध्यान से देखें। देखिए कि दूसरी इंडस्ट्री में क्या चल रहा है जिसे आप अपने काम में ला सकते हैं। अगर आप एक समोसे की दुकान चलाते हैं और देखते हैं कि पिज्जा कंपनी कैसे होम डिलीवरी कर रही है तो वही लॉजिक समोसे पर लगा दीजिए। लोग आपको पागल कहेंगे लेकिन जब बैंक बैलेंस बढ़ेगा तब वही लोग आपसे टिप्स मांगेंगे।

याद रखिए दुनिया में कुछ भी पूरी तरह से नया नहीं है। सब कुछ पुराने का ही एक नया रूप है। जो लोग इस बात को समझ जाते हैं वो मार्केट के राजा बन जाते हैं और बाकी लोग बस यह सोचते रह जाते हैं कि काश मेरे पास भी कोई ओरिजिनल आइडिया होता। ओरिजिनलिटी के चक्कर में मत पड़िए बस इफेक्टिव बनिए। पुराने कबाड़ से सोना बनाना ही असली कला है। यह लेसन हमें सिखाता है कि क्रिएटिविटी का मतलब खाली दिमाग से सोचना नहीं बल्कि भरी हुई दुनिया से सही चीजें चुनना है।


लेसन २ : नेटवर्क और नॉलेज ब्रोकिंग

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग बड़े ही एवरेज होते हैं फिर भी वो हर मीटिंग और हर बिजनेस डील में सबसे आगे कैसे रहते हैं? वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग दिन रात मेहनत करते हैं पर उनका प्रमोशन या ग्रोथ कछुए की रफ्तार से चलता है। फर्क सिर्फ एक चीज का है और वो है नेटवर्क। एंड्रयू हारगाडन इसे नॉलेज ब्रोकिंग कहते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको बस बहुत सारे लोगों से हाथ मिलाना है। इसका मतलब है कि आपको वो पुल बनना है जो दो अलग अलग आइलैंड्स को जोड़ता है।

कल्पना कीजिए कि एक तरफ कुछ साइंटिस्ट हैं जो लैब में बहुत ही एडवांस केमिकल बना रहे हैं। दूसरी तरफ एक पेंट बनाने वाली कंपनी है जो अपने रंगों को पक्का करने के लिए परेशान है। अब इन दोनों को एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं पता। आप बीच में आते हैं और साइंटिस्ट का वो केमिकल पेंट कंपनी को दिखा देते हैं। बम। आपने एक बहुत बड़ा ब्रेकथ्रू कर दिया। इसमें आपने ना तो लैब में पसीना बहाया और ना ही पेंट की बाल्टियां उठाईं। आपने बस एक तरफ की जानकारी को दूसरी तरफ पहुंचाया। इसी को कहते हैं दिमाग से काम लेना।

हम इंडियंस अक्सर यह गलती करते हैं कि हम सोचते हैं कि अकेले ही सारा पहाड़ तोड़ देंगे। हमें लगता है कि अगर हम अपनी सीक्रेट रेसिपी किसी को बता देंगे तो हमारा नुकसान हो जाएगा। जबकि सच तो यह है कि जो लोग अपनी इंडस्ट्री के बाहर के लोगों से नहीं मिलते वो बहुत जल्दी आउट ऑफ डेट हो जाते हैं। अगर आप सिर्फ सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के साथ उठेंगे बैठेंगे तो आपकी सोच सिर्फ कोड और बग्स तक सीमित रह जाएगी। लेकिन अगर आप एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर होकर किसी किसान या किसी आर्टिस्ट से बात करेंगे तो आपको पता चलेगा कि उनकी प्रॉब्लम्स को टेक्नोलॉजी से कैसे हल किया जा सकता है।

नॉलेज ब्रोकर बनना एक जासूसी जैसा काम है। आपको हर जगह अपनी आंखें और कान खुले रखने होते हैं। आपको यह देखना होता है कि एक फील्ड की प्रॉब्लम का सोल्यूशन दूसरी फील्ड में पहले से ही मौजूद हो सकता है। हेनरी फोर्ड ने जब कार बनाने की असेंबली लाइन सोची थी तो उन्हें यह आइडिया किसी इंजीनियरिंग बुक से नहीं मिला था। उन्हें यह आइडिया एक कसाई खाने यानी स्लाटर हाउस को देखकर आया था जहाँ मीट के टुकड़ों को एक बेल्ट पर रखकर आगे बढ़ाया जाता था। अब सोचिए एक कार बनाने वाला आदमी कसाई खाने में क्या कर रहा था? वो वहां नॉलेज ब्रोकिंग कर रहा था।

अगर आप अपने करियर में अटके हुए महसूस कर रहे हैं तो शायद आपको और मेहनत करने की जरूरत नहीं है। बल्कि आपको नए लोगों से मिलने और उनकी दुनिया को समझने की जरूरत है। मार्केट में जो लोग सबसे ज्यादा पैसा कमा रहे हैं वो वो नहीं हैं जो सबसे ज्यादा जानते हैं बल्कि वो हैं जो जानते हैं कि कौन क्या जानता है। नॉलेज शेयर करने से घटती नहीं है बल्कि उसका इस्तेमाल करने का नया तरीका मिल जाता है।

तो अगली बार जब आप किसी ऐसी पार्टी या इवेंट में जाएं जहाँ आपकी फील्ड का कोई ना हो तो वहां से भागिए मत। बल्कि वहां जाकर लोगों से पूछिए कि उनकी लाइफ में सबसे बड़ी सरदर्दी क्या है। क्या पता उनके सर का दर्द आपके लिए करोड़ों का बिजनेस आइडिया बन जाए। नॉलेज के दलाल बनिए पर वो वाले दलाल नहीं जो धोखा देते हैं बल्कि वो जो दो अलग दुनिया को मिलाकर एक नया सवेरा लाते हैं।


लेसन ३ : छोटे एक्सपेरिमेंट्स की बड़ी वैल्यू

क्या आपको भी ऐसा लगता है कि एक बड़ा बिजनेस शुरू करने के लिए करोड़ों का बैंक बैलेंस और एक बहुत बड़ा ऑफिस होना जरूरी है? अगर हां, तो शायद आप उन लोगों में से हैं जो तब तक घर से नहीं निकलते जब तक रास्ते की सारी ट्रैफिक लाइट्स ग्रीन ना हो जाएं। सच तो यह है दोस्त, कि अगर आप सारी लाइट्स के ग्रीन होने का इंतजार करेंगे, तो आप अपनी पूरी जिंदगी पार्किंग लॉट में ही गुजार देंगे। एंड्रयू हारगाडन कहते हैं कि बड़े बड़े इनोवेशन कोई एक मास्टर प्लान बनाकर नहीं आते, बल्कि वो बहुत सारे छोटे और गंदे दिखने वाले एक्सपेरिमेंट्स का नतीजा होते हैं।

मान लीजिए आपको एक नया मोबाइल एप बनाना है। अब दो तरीके हैं। पहला यह कि आप दो साल तक कमरे में बंद होकर कोडिंग करें और फिर उसे लॉन्च करें। दूसरा तरीका यह है कि आप एक हफ्ते में एक बेसिक सा वर्जन बनाएं और अपने दस दोस्तों को इस्तेमाल करने के लिए दें। पहले तरीके में फेल होने का चांस 99 परसेंट है और दूसरे तरीके में आप हर हफ्ते सीख रहे हैं कि लोगों को क्या चाहिए। इसे ही कहते हैं स्मार्ट फेलियर। जो लोग छोटे फेलियर से डरते हैं, वो दरअसल एक बहुत बड़े और भयानक फेलियर की तैयारी कर रहे होते हैं।

हमारी इंडियन सोसायटी में फेल होने को पाप समझा जाता है। पड़ोस वाली आंटी से लेकर दूर के मौसा जी तक सब तैयार बैठे होते हैं यह कहने के लिए कि हमने तो पहले ही कहा था तुमसे ना हो पाएगा। इसी डर की वजह से हम कभी कुछ नया ट्राई ही नहीं करते। लेकिन बुक हमें सिखाती है कि इनोवेशन एक लेबोरेटरी की तरह है। वहां धमाके भी होंगे, धुआं भी निकलेगा और कभी कभी कांच भी टूटेगा। लेकिन हर धमाका आपको यह सिखाता है कि अगली बार आग कैसे नहीं लगानी है।

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनीज जैसे गूगल या एमेजॉन आज भी छोटे छोटे टेस्ट करती रहती हैं। वो सीधे कोई बड़ा प्रोडक्ट मार्केट में नहीं उतारते। वो पहले एक छोटा सा फीचर टेस्ट करते हैं, फिर डेटा देखते हैं और अगर वह काम नहीं करता तो उसे चुपचाप बंद कर देते हैं। इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। शर्म तो इसमें है कि आप बिना हाथ पैर हिलाए बस एक परफेक्ट दिन का इंतजार करते रहें। परफेक्ट दिन कभी नहीं आता, उसे बनाना पड़ता है।

अगर आपके पास कोई आइडिया है, तो आज ही उसका सबसे छोटा वर्जन ट्राई कीजिए। अगर आपको कुकिंग का शौक है और आप रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं, तो पहले अपने ऑफिस के कलीग्स को अपना बनाया खाना खिलाकर देखिए। अगर वो दोबारा मांगते हैं, तब समझिए कि आपके आइडिया में दम है। वरना चुपचाप अपनी नौकरी पर ध्यान दीजिए। छोटे एक्सपेरिमेंट्स आपको जमीन की हकीकत बताते हैं और आपके लाखों रुपये डूबने से बचाते हैं।

आखिर में याद रखिए कि हर बड़ा ब्रेकथ्रू एक छोटी सी कोशिश से शुरू हुआ था। जो लोग आज दुनिया बदल रहे हैं, वो आपसे ज्यादा स्मार्ट नहीं हैं, बस वो आपसे ज्यादा बार फेल होने की हिम्मत रखते हैं। अपनी गलतियों को मेडल की तरह पहनिए क्योंकि वही आपको उस मुकाम तक ले जाएंगी जहाँ लोग आपकी कामयाबी की कहानियां सुनाएंगे।


दुनिया को आपकी नई सोच की जरूरत है, पर वो सोच तब तक बेकार है जब तक आप उसे दुनिया के सामने नहीं लाते। क्या आप भी किसी पुराने आइडिया को नए तरीके से देख सकते हैं? या क्या आप तैयार हैं नॉलेज ब्रोकर बनकर लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए? आज ही कमेंट्स में बताइए कि इस आर्टिकल का कौन सा लेसन आपके दिल को छू गया। इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा नए आइडियाज की बात तो करता है पर कदम उठाने से डरता है। उठिए, एक्सपेरिमेंट कीजिए और अपना खुद का ब्रेकथ्रू क्रिएट कीजिए।

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