How to Grow When Markets Don't (Hindi)


आप अभी भी वही घिसे-पिटे प्रोडक्ट्स बेचने की कोशिश कर रहे हैं जो मार्केट में पहले से ही कचरे की तरह भरे पड़े हैं। सच तो यह है कि आपका बिजनेस धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है और आपको लग रहा है कि शायद अगली सेल में चमत्कार हो जाएगा। मुबारक हो, आप फेल होने की रेस में सबसे आगे खड़े हैं और आपके कंपटीटर्स आपकी बेवकूफी पर हंस रहे हैं।

लेकिन रुकिए, अगर आप इस बर्बादी से बचना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि कैसे डेड मार्केट में भी नोटों की बारिश की जाती है, तो यह आर्टिकल आपके लिए आखिरी उम्मीद है। एड्रियन स्लीवोत्स्की के इन तीन लेसन्स को समझकर आप अपने बिजनेस को पूरी तरह से ट्रांसफॉर्म कर सकते हैं।


लेसन १ : प्रोडक्ट नहीं, डिमांड इनोवेशन पर फोकस करें

हम में से ज्यादातर लोग एक ही जाल में फंसे हैं। हमें लगता है कि अगर हमारी दुकान या बिजनेस नहीं चल रहा, तो शायद हमें प्रोडक्ट में थोड़ा और नमक या मसाला डाल देना चाहिए। मतलब आप वही पुराना मोबाइल बेच रहे हैं जिसका कैमरा थोड़ा और चमका दिया या वही पुरानी सर्विस दे रहे हैं जिसे अब कोई पूछ नहीं रहा। अगर आप भी यही सोच रहे हैं कि मार्केट स्लो है इसलिए धंधा मंदा है, तो यकीन मानिए मार्केट स्लो नहीं है, बस आपकी सोचने की शक्ति को जंग लग गया है। एड्रियन स्लीवोत्स्की कहते हैं कि जब मार्केट में हर दूसरा बंदा वही चीज बेच रहा हो जो आप बेच रहे हैं, तो उसे "प्रोडक्ट सैचुरेशन" कहते हैं। यहाँ गला काट कॉम्पिटिशन होता है जहाँ आप सिर्फ दाम कम करके खुद को बर्बाद करते हैं।

इस दलदल से निकलने का एकमात्र रास्ता है डिमांड इनोवेशन। इसका सीधा सा मतलब है कि कस्टमर के उस दर्द को पकड़ो जिसे बाकी सब नजरअंदाज कर रहे हैं। इसे एक रियल लाइफ एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिये आप एक वाशिंग मशीन बेचने वाली कंपनी हैं। अब मार्केट में हजारों वाशिंग मशीनें हैं जो कपड़े धोती हैं। आप चाहे उसे कितना भी स्मार्ट बना लें, वह रहेगी तो वाशिंग मशीन ही। यहाँ डिमांड इनोवेशन क्या होगा? असल में कस्टमर को वाशिंग मशीन नहीं चाहिए, उसे "साफ़ कपड़े" चाहिए। अब सोचिये उस बेचारे कस्टमर के बारे में जो मशीन तो खरीद लाया, लेकिन अब उसे डिटर्जेंट की चिंता है, पानी के बिल की टेंशन है और सबसे बड़ा सिरदर्द तो तब होता है जब मशीन खराब हो जाती है और मैकेनिक उसे अगले जन्म में आने का वादा करता है।

स्मार्ट कंपनियां यहाँ क्या करती हैं? वह सिर्फ मशीन नहीं बेचतीं। वह कस्टमर को एक ऐसा ईकोसिस्टम देती हैं जहाँ उसे डिटर्जेंट की ऑटोमेटिक डिलीवरी मिले और खराब होने पर 2 घंटे में सर्विस मिले। आपने प्रोडक्ट नहीं बदला, आपने उस प्रोडक्ट के आस-पास की "डिमांड" को इनोवेट कर दिया। हमारे पड़ोस वाले शर्मा जी को ही देख लीजिये। उन्होंने किराने की दुकान खोली, लेकिन मोहल्ले में पहले से ही दस दुकानें थीं। अब शर्मा जी ने क्या किया? उन्होंने सिर्फ सामान नहीं बेचा। उन्होंने देखा कि सुबह के वक्त लोग ऑफिस जाने की जल्दी में होते हैं और दूध-ब्रेड के लिए लाइन में नहीं लगना चाहते। उन्होंने "सब्सक्रिप्शन मॉडल" शुरू किया और सुबह 6 बजे बिना कहे घर के बाहर सामान छोड़ने लगे। बाकी दुकानदार अभी भी मक्खियां मार रहे हैं और शर्मा जी का धंधा रॉकेट बना हुआ है।

तो भाई, अगर आप भी वही घिसा-पिटा माल बेचकर अमीर बनने के सपने देख रहे हैं, तो जाग जाइये। कस्टमर को आपके प्रोडक्ट से प्यार नहीं है, उसे अपनी सुविधा से प्यार है। जिस दिन आपने यह समझ लिया कि कस्टमर का असली स्ट्रगल क्या है, उस दिन मार्केट स्लो हो या फास्ट, आपके यहाँ ग्राहकों की लाइन लगी रहेगी। यह लेसन हमें सिखाता है कि बिजनेस को प्रोडक्ट की नजर से नहीं, बल्कि कस्टमर की लाइफ में आने वाली उन छोटी-छोटी रुकावटों की नजर से देखिये जो आपके लिए पैसे बनाने की मशीन बन सकती हैं। अगर आप सिर्फ वही करेंगे जो सब कर रहे हैं, तो आपको सिर्फ वही मिलेगा जो सबको मिल रहा है, यानी "घाटा और स्ट्रेस"।


लेसन २ : अपने हिडन एसेट्स (Hidden Assets) को पहचानें

जब आपका बिजनेस ठप पड़ने लगता है, तो आप सबसे पहले क्या करते हैं? शायद बैंक से लोन मांगते हैं या नए इनवेस्टर के पैरों में गिर जाते हैं। लेकिन एड्रियन कहते हैं कि आपके पास पहले से ही एक ऐसा खजाना छिपा है जिसे आप देख ही नहीं पा रहे। इसे ही कहते हैं हिडन एसेट्स। यह वो ताकत है जो आपकी बैलेंस शीट में नहीं लिखी होती, लेकिन आपके धंधे को आसमान पर ले जा सकती है। इसे ऐसे समझिये कि आप अपने घर में पुराने कबाड़ के नीचे दबा हुआ सोने का घड़ा ढूंढ रहे हैं और आपको पता ही नहीं कि आप उसी घड़े पर बैठकर रो रहे हैं।

हिडन एसेट्स कुछ भी हो सकते हैं—आपका कस्टमर डेटा, लोगों का आप पर भरोसा, या आपका वो सप्लायर नेटवर्क जिसे बनाने में आपने सालों लगा दिए। चलिए इसे एक मजेदार उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिये आपके पास एक फोटोकॉपी की दुकान है जो कॉलेज के बाहर है। अब आजकल सब कुछ डिजिटल हो रहा है, तो आपका धंधा मंदा पड़ गया। अब आप क्या करेंगे? रोना रोएंगे कि जमाना बदल गया है? एक स्मार्ट बंदा अपने हिडन एसेट को देखेगा। उसका सबसे बड़ा एसेट फोटोकॉपी मशीन नहीं है, बल्कि वो "हजारों स्टूडेंट्स" हैं जो रोज उसकी दुकान पर आते हैं।

अगर वो उन स्टूडेंट्स का डेटा इस्तेमाल करके उन्हें इंटरनशिप की जानकारी देने लगे या पुराने स्टूडेंट्स के नोट्स बेचने लगे, तो उसका असली मुनाफा वहां से आएगा। मशीन तो बस एक बहाना थी उन लोगों को दुकान तक लाने का। हमारे एक दोस्त हैं वर्मा जी, जिनकी साड़ियों की पुरानी दुकान थी। जब ऑनलाइन शॉपिंग ने उनका काम खराब किया, तो उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने गौर किया कि उनका सबसे बड़ा एसेट उनका "रिलेशनशिप" है। मोहल्ले की आंटियां उन पर भरोसा करती थीं। उन्होंने साड़ियों के साथ-साथ कस्टमाइज्ड बुटीक और स्टिचिंग सर्विस शुरू कर दी। अब आंटियां ऑनलाइन साड़ी तो देख लेती हैं, लेकिन फिटिंग और भरोसे के लिए आज भी वर्मा जी के पास ही जाती हैं।

ज्यादातर बिजनेस मालिक अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर सिर्फ वही देखते हैं जो सामने दिख रहा है। आप यह नहीं देखते कि आपके पास जो 500 वफादार कस्टमर हैं, वो और क्या-क्या खरीदना चाहते हैं। अगर आप सिर्फ एक चीज बेचकर खुश हैं, तो आप उस ड्राइवर की तरह हैं जिसके पास फेरारी है लेकिन वो उसे बैलगाड़ी की स्पीड पर चला रहा है। अपने बिजनेस के अंदर झांकिए। क्या आपके पास कोई ऐसी जानकारी है जो दूसरों के काम आ सकती है? क्या आपका ब्रांड नाम इतना मजबूत है कि आप कोई नई कैटेगरी शुरू कर सकें?

याद रखिये, मार्केट तब नहीं गिरता जब लोग खरीदना बंद कर देते हैं, मार्केट तब गिरता है जब आप अपनी असली ताकत को भूल जाते हैं। जो लोग सिर्फ फिजिकल एसेट्स यानी दुकान और स्टॉक के भरोसे रहते हैं, वो अक्सर पीछे रह जाते हैं। लेकिन जो अपने हिडन एसेट्स का इस्तेमाल करना सीख जाते हैं, वो मंदी के दौर में भी अपना साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं। तो अगली बार जब आप कहें कि "मेरे पास ग्रोथ के लिए पैसे नहीं हैं", तो एक बार रुककर सोचिये कि क्या आपके पास वो हिडन एसेट है जिसे आपने अभी तक कैश नहीं किया है?


लेसन ३ : कस्टमर के पूरे 'इकोनॉमिक चेन' का हिस्सा बनें

ज्यादातर बिजनेसमैन की सबसे बड़ी गलती यह है कि वो कस्टमर को सिर्फ एक "चलती-फिरती जेब" समझते हैं। उनको लगता है कि जैसे ही ग्राहक ने सामान खरीदा और पैसे दिए, रिश्ता खत्म और टाटा-बाय-बाय। अगर आप भी यही सोचते हैं, तो यकीन मानिए आप अपने मुनाफे का 80 परसेंट हिस्सा नाली में बहा रहे हैं। एड्रियन स्लीवोत्स्की कहते हैं कि असली पैसा सिर्फ सामान बेचने में नहीं है, बल्कि उस सामान के साथ जुड़ी हुई पूरी लाइफ साइकिल या इकोनॉमिक चेन को कैप्चर करने में है।

इसे एक देसी और थोड़े फनी एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिये आपने एक नई कार खरीदी। शोरूम वाले ने आपको कार बेची और मोटा कमीशन कमाया। लेकिन कार बेचना तो सिर्फ शुरुआत थी। अब उस कार को इंश्योरेंस चाहिए, उसकी सर्विसिंग होनी है, उसमें एक्सेसरीज लगनी हैं, और शायद तीन साल बाद उसे बेचना भी पड़े। अब अगर वो शोरूम वाला सिर्फ कार बेचकर सो गया, तो वो बेवकूफ है। एक स्मार्ट बिजनेसमैन आपको कार बेचते वक्त ही एक ऐसा पैकेज चिपकाएगा कि आप अगले पांच साल तक हर छोटी-चीज के लिए उसी के पास आएं। वह आपकी पूरी इकोनॉमिक चेन का मालिक बन चुका है।

अब जरा अपने आसपास के उन "टेक गुरुओं" को देखिये जो आपको सस्ता प्रिंटर बेच देते हैं। प्रिंटर तो वो आपको लगभग घाटे में बेचते हैं, लेकिन असली खेल शुरू होता है उसके बाद। उस प्रिंटर की इंक इतनी महंगी होती है कि दो बार इंक डलवाओ तो नए प्रिंटर की कीमत वसूल हो जाती है। इसे कहते हैं "कस्टमर को लॉक करना"। आपने एक बार प्रोडक्ट बेचा, लेकिन मुनाफा आपको सालों तक मिलता रहा। अगर आप सिर्फ एक बार की सेल पर जी रहे हैं, तो आप हर रोज एक नया कुआं खोद रहे हैं। लेकिन अगर आप कस्टमर की पूरी जरूरत को पकड़ लेते हैं, तो आपने अपने घर में ही गंगा बहा ली है।

हमारे एक परिचित हैं जो वाटर प्यूरीफायर (RO) बेचते हैं। पहले वो सिर्फ मशीन बेचने के पीछे भागते थे और परेशान रहते थे क्योंकि मार्केट में बहुत कंपटीशन था। फिर उन्होंने अपनी स्ट्रैटेजी बदली। उन्होंने मशीन बहुत कम मार्जिन पर बेचना शुरू किया, लेकिन साथ में "एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट" यानी AMC को अनिवार्य कर दिया। अब उन्हें इस बात की टेंशन नहीं है कि नई मशीन बिक रही है या नहीं, क्योंकि उनके पुराने 5000 कस्टमर्स से उन्हें हर महीने सर्विस और फिल्टर बदलने का बंधा-बंधाया पैसा मिल रहा है। इसे कहते हैं बिजनेस को "हसल" से "सिस्टम" पर ले जाना।

तो भाई, अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस कभी न रुके, तो सिर्फ यह मत सोचिये कि "मैं क्या बेच सकता हूँ?" बल्कि यह सोचिये कि "मेरे प्रोडक्ट को खरीदने के बाद कस्टमर और कहाँ पैसे खर्च करने वाला है?" क्या आप वो सर्विस खुद दे सकते हैं? क्या आप किसी के साथ पार्टनरशिप कर सकते हैं? जिस दिन आप कस्टमर की जेब से निकलने वाले हर रुपये का रास्ता अपनी तरफ मोड़ना सीख गए, उस दिन आपको किसी मंदी का डर नहीं लगेगा। याद रखिये, अधूरा बिजनेस सिर्फ सामान बेचता है, लेकिन एक लेजेंडरी बिजनेस पूरी प्रॉब्लम सॉल्व करता है।


मार्केट बढ़ना बंद कर सकता है, लेकिन आपकी ग्रोथ कभी नहीं रुकनी चाहिए। यह तीन लेसन्स—डिमांड इनोवेशन, हिडन एसेट्स और इकोनॉमिक चेन—सिर्फ किताबी बातें नहीं हैं, बल्कि ये आपके बिजनेस के लिए ऑक्सीजन की तरह हैं। अगर आप आज भी पुराने तरीकों से चिपके रहे, तो इतिहास आपको बहुत जल्द भुला देगा। उठिये, अपने बिजनेस को नए चश्मे से देखिये और उस ग्रोथ को हासिल कीजिये जिसके आप हकदार हैं। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा? क्या आप अपने बिजनेस में इनमें से कोई तरीका इस्तेमाल कर रहे हैं? नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर शेयर करें और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसका धंधा आजकल थोड़ा मंदा चल रहा है। आपकी एक शेयरिंग किसी का बिजनेस बचा सकती है।

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