How the Mighty Fall (Hindi)


क्या आपको लगता है कि आपका बिजनेस या करियर कभी नहीं डूबेगा। वाह। यही ओवरकॉन्फिडेंस आपको ले डूबेगा। आप शायद अगली बड़ी नाकामी की तैयारी कर रहे हैं और आपको पता भी नहीं है। जब बड़ी कंपनियां धूल चाटती हैं तब आपकी क्या बिसात है।

आज हम जिम कोलिन्स की बुक हाउ द माइटी फॉल से वह कड़वे सच जानेंगे जो आपको बर्बादी से बचा सकते हैं। यह आर्टिकल आपको उन 3 लेसन के बारे में बताएगा जो हर लीडर को पता होने चाहिए।


लेसन १ : जरूरत से ज्यादा कॉन्फिडेंस और घमंड का आना

जिम कोलिन्स कहते हैं कि किसी भी बड़ी कंपनी के पतन की शुरुआत तब नहीं होती जब उसका पैसा खत्म हो जाता है। बल्कि तब होती है जब उसके लीडर्स के सिर पर कामयाबी का भूत सवार हो जाता है। इसे वे ह्युब्रिस बोर्न ऑफ सक्सेस कहते हैं। आसान भाषा में कहें तो जब आपको लगने लगे कि आप जो भी छुएंगे वो सोना बन जाएगा तो समझ लीजिए कि आपके बुरे दिन शुरू हो चुके हैं।

सोचिए एक ऐसी कंपनी के बारे में जो सालों से मार्केट पर राज कर रही है। उनके पास पैसा है नाम है और वफादार कस्टमर्स भी हैं। अब यहाँ एंट्री होती है उस डेंजरस घमंड की। लीडर्स को लगने लगता है कि अब उन्हें मेहनत करने की या मार्केट को समझने की जरूरत नहीं है। वे मान लेते हैं कि लोग उनकी सर्विस इसलिए ले रहे हैं क्योंकि वे बेस्ट हैं। पर असलियत में शायद लोग सिर्फ इसलिए आ रहे थे क्योंकि उनके पास कोई और ऑप्शन नहीं था। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे मोहल्ले का वो लड़का जो एक बार रेस जीत कर खुद को उसैन बोल्ट समझने लगता है और अगले दिन प्रैक्टिस पर जाना ही बंद कर देता है। उसे लगता है कि जीतना तो उसका जन्मसिद्ध अधिकार है।

अक्सर ऐसी कंपनियां अपनी पुरानी स्ट्रेटेजी को ही पत्थर की लकीर मान लेती हैं। वे भूल जाती हैं कि जिस रास्ते ने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया है जरूरी नहीं कि वही रास्ता उन्हें आगे भी ले जाए। जब कोई नया स्टार्टअप कुछ हटकर करने की कोशिश करता है तो ये बड़ी कंपनियां उसे देखकर हंसती हैं। उन्हें लगता है कि ये कल के आए बच्चे हमारा क्या बिगाड़ेंगे। लेकिन यही वो मोमेंट होता है जब जमीन खिसकना शुरू होती है। आप खुद को भगवान समझने लगते हैं और यही वो पॉइंट है जहाँ से आप नीचे गिरना शुरू करते हैं।

जिम कोलिन्स यहाँ एक बहुत पते की बात कहते हैं। वे कहते हैं कि जब आप अपनी सक्सेस का क्रेडिट अपनी मेहनत और डिसिप्लिन की जगह अपनी पर्सनालिटी या अपनी किस्मत को देने लगते हैं तो आप खतरे में हैं। घमंड में चूर लीडर्स अक्सर उन लोगों की बात सुनना बंद कर देते हैं जो उन्हें सच बताते हैं। वे सिर्फ उन लोगों को अपने पास रखते हैं जो सिर्फ हां में हां मिलाते हैं। अगर आपके ऑफिस में सब लोग आपकी हर बात पर ताली बजा रहे हैं तो समझ जाइए कि या तो आप सच में जीनियस हैं या फिर आप डूबने वाले जहाज के कैप्टन हैं। ज्यादातर चांस दूसरे वाले के ही होते हैं।

जब ये कंपनियां डूब रही होती हैं तब भी इनके सीईओ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़े बड़े शब्दों का इस्तेमाल करके यह बताते हैं कि सब कंट्रोल में है। वे इसे फेलियर नहीं बल्कि लर्निंग एक्सपीरियंस कहते हैं। भाई साहब जब घर जल रहा हो तो उसे दिवाली की लाइटिंग नहीं कहते। अपनी गलतियों को छुपाने के लिए भारी भरकम शब्दों का सहारा लेना भी पतन की ही एक निशानी है। अगर आप आज अपनी छोटी सी जीत पर इतरा रहे हैं और दूसरों को छोटा समझ रहे हैं तो संभल जाइए। मार्केट किसी का सगा नहीं है। जो आज टॉप पर है वो कल कबाड़ में भी मिल सकता है। इसलिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना और हमेशा सीखते रहना ही आपको इस पहले स्टेज से बचा सकता है।


लेसन २ : बिना सोचे समझे हर जगह हाथ पैर मारना

जब कोई कंपनी या इंसान थोड़ा सक्सेसफुल हो जाता है तो उसे लगता है कि अब वह दुनिया का हर काम कर सकता है। जिम कोलिन्स इसे अनुशासनहीन विस्तार कहते हैं। यह पतन का दूसरा बड़ा स्टेज है। यहाँ लीडर्स को लगने लगता है कि ग्रोथ ही सब कुछ है। चाहे वह ग्रोथ क्वालिटी के दम पर आए या सिर्फ नंबर्स बढ़ाने के लिए। वे अपनी असली ताकत को भूलकर उन कामों में घुस जाते हैं जिनके बारे में उन्हें ए बी सी डी भी नहीं पता होती।

मान लीजिए एक हलवाई की दुकान बहुत फेमस हो गई। लोग दूर-दूर से उसके समोसे खाने आते हैं। अब उस हलवाई को लगा कि मैं तो बहुत बड़ा बिजनेसमैन बन गया हूँ। अब मैं समोसे के साथ-साथ स्मार्टफोन भी बेचूंगा और जिम भी खोलूँगा। सुनने में यह मजाक लगता है लेकिन असलियत में बड़ी कंपनियां यही करती हैं। वे ऐसे नए बिजनेस खरीदने लगती हैं जिनका उनके कोर काम से कोई लेना-देना नहीं होता। उन्हें लगता है कि पैसा फेंक कर वे किसी भी मार्केट को जीत लेंगे। लेकिन भाई साहब पैसा होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास दिमाग भी है।

इस चक्कर में होता यह है कि उनका ध्यान अपने असली काम से हट जाता है। उनके समोसे की क्वालिटी गिरने लगती है और उधर स्मार्टफोन और जिम का बिजनेस भी फ्लॉप हो जाता है। आप एक साथ पांच घोड़ों पर सवारी नहीं कर सकते। अगर कोशिश करेंगे तो बीच में गिरना तय है। ऐसी कंपनियां अक्सर अपनी टीम में ऐसे लोगों को भर लेती हैं जो कंपनी के कल्चर को नहीं समझते। उन्हें बस नंबर चाहिए होते हैं। तेजी से बढ़ने की भूख उन्हें अंधा कर देती है। उन्हें लगता है कि जितना बड़ा साइज होगा उतनी ही ज्यादा ताकत होगी। जबकि असलियत में वे सिर्फ एक मोटा और कमजोर हाथी बन रहे होते हैं जिसे कोई भी छोटा शिकारी गिरा सकता है।

यहाँ सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब चीजें खराब होने लगती हैं तो ये लीडर्स और भी ज्यादा हाथ पैर मारते हैं। वे रुक कर अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय और भी नए प्रोजेक्ट्स शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि एक और बड़ा रिस्क लेने से सब ठीक हो जाएगा। यह तो वही बात हुई कि गड्ढे में गिरने के बाद आप बाहर निकलने के बजाय और गहरा गड्ढा खोद रहे हैं ताकि शायद नीचे से कोई रास्ता मिल जाए।

सर्कस में जो जोकर एक साथ दस गेंदें उछालता है वह प्रोफेशनल होता है। लेकिन अगर आप सिर्फ एक गेंद के साथ सक्सेसफुल हुए हैं और अचानक दस गेंदों के साथ खेलने लगेंगे तो सारी गेंदें आपके सिर पर ही गिरेंगी। ग्रोथ अच्छी बात है लेकिन बिना किसी सॉलिड प्लान और डिसिप्लिन के की गई ग्रोथ सिर्फ सुसाइड है। अगर आप अपने काम में बेस्ट हैं तो उसे और बेस्ट बनाइए। बेवजह हर बहती गंगा में हाथ धोने की कोशिश करेंगे तो डूबने के चांस बढ़ जाएंगे। अपनी बाउंड्री पहचानना ही असली बुद्धिमानी है।


लेसन ३ : डेंजर सिग्नल को इग्नोर करना और चमत्कार की तलाश

जब पतन का तीसरा स्टेज आता है तो कंपनी के अंदर सब कुछ बिखर रहा होता है लेकिन बाहर से पेंट करके उसे चमकाया जाता है। लीडर्स के सामने डेटा होता है जो चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा होता है कि भाई साहब डूब रहे हैं। लेकिन वे इसे सिर्फ एक छोटा सा बुरा वक्त मानकर टाल देते हैं। वे कड़वे सच को छुपाते हैं और अच्छी दिखने वाली झूठी रिपोर्ट्स को बढ़ावा देते हैं। इसे जिम कोलिन्स कहते हैं डेंजर सिग्नल्स को नकारना।

यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आपकी कार के इंजन से अजीब सी आवाज आ रही हो और आप मैकेनिक के पास जाने के बजाय रेडियो की आवाज तेज कर दें ताकि शोर सुनाई न दे। आपको लगेगा कि सब ठीक है लेकिन इंजन किसी भी वक्त फट सकता है। बड़ी कंपनियों में जब सेल्स गिरने लगती है या कस्टमर्स छोड़कर जाने लगते हैं तो लीडर्स अपनी टीम पर चिल्लाते हैं। वे डेटा को इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं कि सब कुछ बढ़िया लगे। वे अपनी गलतियों के लिए दूसरों को दोष देने लगते हैं। वे कहते हैं कि मार्केट खराब है सरकार खराब है या फिर मौसम ही खराब है। बस वो खुद कभी खराब नहीं होते।

जब हालत एकदम खराब हो जाती है तो ये कंपनियां किसी चमत्कार की तलाश में निकलती हैं। उन्हें लगता है कि कोई जादुई छड़ी आएगी और सब ठीक कर देगी। वे अचानक से किसी ऐसे नए सीईओ को ले आते हैं जो दावा करता है कि वह सब बदल देगा। या फिर वे कोई ऐसी टेक्नोलॉजी खरीदने की कोशिश करते हैं जो उन्हें रातों-रात राजा बना दे। यह वैसा ही है जैसे कोई इंसान साल भर पढ़ाई न करे और एग्जाम के एक दिन पहले किसी बाबा जी के तावीज के भरोसे बैठ जाए। भाई साहब मेहनत और डिसिप्लिन का कोई शॉर्टकट नहीं होता।

पतन की इस आखिरी स्टेज में कंपनी अपनी पहचान खो देती है। वे घबराहट में इतने सारे बदलाव करते हैं कि उनके पुराने वफादार कस्टमर्स भी उन्हें पहचान नहीं पाते। वे कभी इस तरफ भागते हैं तो कभी उस तरफ। वे यह भूल जाते हैं कि किसी भी मुसीबत से बाहर निकलने का रास्ता पैनिक करना नहीं बल्कि शांत होकर अपनी गलतियों को सुधारना होता है। जब आप चमत्कार की उम्मीद करने लगते हैं तो समझ लीजिए कि आप लॉटरी के भरोसे बैठे हैं और बिजनेस लॉटरी से नहीं चलता।

अक्सर देखा गया है कि जो कंपनियां संभल जाती हैं वे वे होती हैं जो सच का सामना करती हैं। वे मान लेती हैं कि उन्होंने गलती की है और फिर वे धीरे-धीरे अपनी जड़ों की तरफ लौटती हैं। लेकिन जो कंपनियां घमंड और झूठ के सहारे चलती रहती हैं वे एक दिन इतिहास के पन्नों में दब जाती हैं। अगर आप आज अपने काम में आने वाली छोटी-छोटी दिक्कतों को इग्नोर कर रहे हैं तो याद रखिए कि कल यही छोटी आग आपका पूरा घर जला सकती है।


हाउ द माइटी फॉल हमें सिखाती है कि कामयाबी कभी भी परमानेंट नहीं होती। यह एक जिम्मेदारी है जिसे हर रोज निभाना पड़ता है। चाहे आप एक बड़ा बिजनेस चला रहे हों या अपना करियर बना रहे हों घमंड और लापरवाही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन है। रुकिए और खुद से पूछिए कि क्या आप भी उन डेंजर सिग्नल्स को इग्नोर कर रहे हैं जो आपको बार-बार चेतावनी दे रहे हैं।

आज ही अपनी वर्किंग स्टाइल का ऑडिट करें। अपनी गलतियों को स्वीकारें और उन पर काम करना शुरू करें। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप नहीं चाहते कि आपका कोई दोस्त भी ऐसी गलती करे तो इस आर्टिकल को उनके साथ जरूर शेयर करें। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको इन तीन लेसन में से कौन सा सबसे ज्यादा रिलेटेबल लगा। याद रखिए सीखना बंद तो जीतना बंद।

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