अगर आपको लगता है कि आपकी सेल्स की पिच सुनकर लोग इम्प्रेस हो रहे हैं तो मुबारक हो आप दुनिया के सबसे बड़े वहम में जी रहे हैं। मार्केट में सन्नाटा है और आपकी जेब में सिर्फ धूल क्योंकि आप अभी भी दादा जी के जमाने के घिसे पिटे तरीके चिपका रहे हैं।
सेल्स का मतलब सिर्फ प्रोडक्ट बेचना नहीं बल्कि मंदी के दौर में भी कस्टमर का भरोसा जीतना है। देव लखानी की यह बुक हमें सिखाती है कि जब कोई नहीं खरीद रहा तब गेम कैसे पलटते हैं। चलिए जानते हैं इसके 3 सबसे पावरफुल लेसन।
लेसन १ : क्रेडिबिलिटी और ट्रस्ट बनाना
आजकल के मार्केट में सेल्स करना वैसा ही है जैसे किसी शादी में बिना बुलाए घुसकर खाना खाना। अगर आप पकड़े गए तो बेइज्जती पक्की है। देव लखानी कहते हैं कि जब मंदी आती है तो कस्टमर अपना बटुआ ऐसे बंद कर लेता है जैसे कोई कंजूस रिश्तेदार उधार मांगने पर फोन काट देता है। इस दौर में लोग सामान नहीं खरीदते बल्कि वे भरोसा खरीदते हैं। अगर आप किसी को कुछ बेचना चाहते हैं और वह आपको एक अनजाना सेल्समेन समझ रहा है तो समझ लीजिए आपकी डील शुरू होने से पहले ही खत्म हो चुकी है।
कल्पना कीजिए कि आप एक सड़क किनारे खड़े हैं और अचानक एक आदमी दौड़ता हुआ आता है। वह आपसे कहता है कि भाई यह दस हजार का आईफोन सिर्फ दो हजार में ले लो। आप क्या करेंगे। क्या आप तुरंत पैसे निकाल देंगे। बिलकुल नहीं। आपके दिमाग में पहली बात यह आएगी कि या तो यह फोन चोरी का है या फिर यह बंदा आपको लूटने वाला है। ऐसा क्यों हुआ। क्योंकि उस आदमी की कोई क्रेडिबिलिटी नहीं थी। यही हाल आपके बिजनेस का होता है जब आप बिना ट्रस्ट बनाए अपनी पिच मारना शुरू कर देते हैं।
क्रेडिबिलिटी रातों रात नहीं बनती। इसके लिए आपको खुद को एक एक्सपर्ट के तौर पर पेश करना पड़ता है। लोग उन लोगों से खरीदना पसंद करते हैं जिन्हें उस फील्ड की पूरी जानकारी हो। मान लीजिए आपको अपने घर के लिए एक एसी खरीदना है। एक तरफ वो सेल्समेन है जो सिर्फ फीचर्स रट कर आया है और दूसरी तरफ वो मैकेनिक है जो दस साल से एसी ठीक कर रहा है। आप किसकी बात पर ज्यादा भरोसा करेंगे। जाहिर है उस मैकेनिक पर क्योंकि उसके पास अनुभव है।
मुश्किल समय में कस्टमर बहुत डरा हुआ होता है। उसे लगता है कि कहीं उसके पैसे डूब न जाएं। ऐसे में आपको एक डॉक्टर की तरह व्यवहार करना चाहिए। क्या आपने कभी किसी डॉक्टर को देखा है जो आपको क्लिनिक में घुसते ही दवा बेचने लगे। नहीं। वह पहले आपसे सवाल पूछता है। वह आपकी तकलीफ समझता है। फिर वह आपको यकीन दिलाता है कि वह आपकी समस्या का समाधान जानता है। सेल्स में भी आपको यही करना है। सवाल पूछिए और सुनिए। जब आप ज्यादा सुनते हैं और कम बोलते हैं तो सामने वाले को लगता है कि आप उसकी मदद करना चाहते हैं।
सर्कस के जोकर और एक प्रोफेशनल सेल्समेन में बस इतना ही फर्क है कि जोकर सबका ध्यान खींचने के लिए चिल्लाता है जबकि प्रोफेशनल सेल्समेन अपनी अथॉरिटी से लोगों को अपनी तरफ खींचता है। देव लखानी सलाह देते हैं कि आपको मार्केट में अपनी ऐसी इमेज बनानी चाहिए कि लोग आपके पास खुद चलकर आएं। इसके लिए आपको अपनी नॉलेज शेयर करनी होगी। सोशल मीडिया पर टिप्स दीजिए। लोगों की छोटी छोटी मदद कीजिए। जब आप वैल्यू देना शुरू करते हैं तो लोग आपको एक गुरु की तरह देखने लगते हैं। और याद रखिए गुरु जो कहता है चेले उसे बिना सवाल किए मान लेते हैं।
अगर आप मंदी के दौर में भी टॉप पर रहना चाहते हैं तो अपनी पिच को भूल जाइए और अपनी पर्सनालिटी को एक ट्रस्टेड एडवाइजर की तरह बनाइए। जब लोग आप पर आंख मूंदकर भरोसा करने लगेंगे तब आपको सामान बेचने के लिए किसी जादू की जरूरत नहीं पड़ेगी। ट्रस्ट वो चाबी है जो उस ताले को भी खोल देती है जिसे मंदी ने कसकर जकड़ा हुआ है।
लेसन २ : सही संभावनाओं की पहचान करना
सेल्स की दुनिया में सबसे बड़ा झूठ यह है कि हर इंसान आपका कस्टमर बन सकता है। अगर आप गंजे को कंघी बेचने की कोशिश कर रहे हैं तो आप सेल्समेन नहीं बल्कि एक जिद्दी इंसान हैं जो अपना कीमती समय नाली में बहा रहा है। देव लखानी कहते हैं कि जब मार्केट में मंदी हो तो आपको एक शिकारी की तरह नहीं बल्कि एक हीरे के पारखी की तरह काम करना चाहिए। मंदी के समय में वैसे भी लोगों के पास फालतू पैसे नहीं होते। ऐसे में अगर आप किसी ऐसे इंसान के पीछे पड़े हैं जिसकी जेब फटी हुई है तो नतीजा सिर्फ निराशा ही होगा।
मान लीजिए आप एक फाइव स्टार होटल में जाकर उन लोगों को ढूंढ रहे हैं जो सड़क किनारे मिलने वाले सस्ते समोसे ढूंढ रहे हैं। क्या वहां आपको कोई मिलेगा। बिलकुल नहीं। आप गलत जगह पर गलत चीज बेच रहे हैं। मंदी के दौर में सबसे जरूरी यह है कि आप उन लोगों को पहचानें जिनके पास समस्या भी है और उस समस्या को हल करने के लिए थोड़े पैसे भी। कुछ सेल्समेन ऐसे होते हैं जो हर किसी को अपनी कहानी सुनाने लगते हैं। वे उस लड़के की तरह हैं जो मोहल्ले की हर लड़की को प्रोपोज करता है और आखिर में उसे सिर्फ राखी मिलती है।
आपको अपनी सेल्स फनल को फिल्टर करना होगा। हर वो इंसान जो आपसे रेट पूछता है वह कस्टमर नहीं होता। कुछ लोग सिर्फ टाइम पास करने के लिए आते हैं। वे आपकी पूरी प्रेजेंटेशन देखेंगे। आपका फ्री में पिलाया हुआ पानी पिएंगे। और आखिर में कहेंगे कि भाई घर जाकर पूछकर बताऊंगा। ऐसे लोगों से बचकर रहना ही आपकी समझदारी है। देव लखानी के अनुसार आपको कुछ ऐसे सवाल तैयार रखने चाहिए जो पहले पांच मिनट में ही साफ कर दें कि सामने वाला खरीदेगा या सिर्फ आपका दिमाग चाटेगा।
क्या आपने कभी किसी महंगी गाड़ी के शोरूम में सेल्समेन को देखा है। वह हर आने जाने वाले को अपनी पिच नहीं देता। वह पहले यह देखता है कि बंदा आया किस गाड़ी से है। उसने कपड़े कैसे पहने हैं। उसकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है। यह कोई भेदभाव नहीं है बल्कि यह बिजनेस की सच्चाई है। अगर आप अपना सारा समय उन लोगों पर लगा देंगे जो कभी नहीं खरीदने वाले तो जब असल में कोई बड़ा कस्टमर आएगा तब तक आप थक चुके होंगे।
मंदी में सही संभावनाओं को ढूंढना वैसा ही है जैसे भूसे के ढेर में सुई ढूंढना। लेकिन अगर आपके पास एक चुंबक हो तो काम आसान हो जाता है। आपका कंटेंट और आपकी एक्सपर्ट इमेज वो चुंबक है। जब आप सही समस्या का हल बताते हैं तो सिर्फ वही लोग आपके पास आते हैं जिन्हें सच में उसकी जरूरत है। फालतू भीड़ से बेहतर है कि आपके पास पांच ऐसे लोग हों जो आपकी वैल्यू समझते हों और चेक साइन करने की ताकत रखते हों।
सेल्स का असली मजा तब आता है जब आप ना कहना सीख जाते हैं। जब आप किसी ऐसे कस्टमर को मना कर देते हैं जो आपकी वैल्यू कम करने की कोशिश करता है तो आप खुद को एक प्रीमियम लेवल पर ले जाते हैं। मंदी में हर किसी को खुश करने की कोशिश मत कीजिए वरना आप खुद दुखी हो जाएंगे। अपना फोकस सिर्फ उन चुनिंदा लोगों पर रखिए जो आपके बिजनेस को अगले लेवल पर ले जा सकें।
लेसन ३ : सेल्स प्रोसेस का नया ढांचा
पुराने जमाने के सेल्समेन एक टेप रिकॉर्डर की तरह होते थे। बटन दबाओ और उनकी घिसी पिटी पिच शुरू हो जाती थी। लेकिन आज का कस्टमर बहुत होशियार है। वह आपकी मीठी बातों में तब तक नहीं आता जब तक उसे अपना फायदा साफ न दिखे। देव लखानी कहते हैं कि मंदी में सेल्स करने के लिए आपको अपनी पुरानी स्क्रिप्ट को आग लगा देनी चाहिए। अब वक्त है एक नई प्रोसेस को अपनाने का जो कस्टमर के डर को खत्म करे और उसे एक्शन लेने पर मजबूर कर दे।
सोचिए आप एक दुकान पर जाते हैं और दुकानदार आपको वो चीजें दिखाने लगता है जिनकी आपको जरूरत ही नहीं है। आपको चिढ़ होने लगेगी। यही गलती बहुत से सेल्समेन करते हैं। वे अपनी कंपनी के बारे में डींगें मारते रहते हैं कि हम कितने बड़े हैं और हमने कितने मेडल जीते हैं। सच तो यह है कि कस्टमर को आपकी कंपनी या आपकी उपलब्धियों में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं है। उसे बस एक ही चीज से मतलब है कि मेरा फायदा क्या होगा। अगर आप मंदी में भी पुराने तरीके अपना रहे हैं तो आप उस इंसान की तरह हैं जो बंद हो चुके बैंक का चेक भुनाने की कोशिश कर रहा है।
नई सेल्स प्रोसेस का सबसे पहला कदम है रेजिस्टेंस को कम करना। जब मार्केट खराब होता है तो हर किसी को लगता है कि उसे लूटा जा रहा है। आपको अपनी पिच में कुछ ऐसा शामिल करना होगा जो उनके रिस्क को खत्म कर दे। जैसे कि मनी बैक गारंटी या फ्री ट्रायल। जब आप कहते हैं कि अगर काम नहीं हुआ तो पैसे वापस मिलेंगे तो कस्टमर का आधा तनाव वही खत्म हो जाता है। यह वैसा ही है जैसे किसी डरे हुए बच्चे का हाथ पकड़कर उसे सड़क पार कराना।
इसके बाद आता है वैल्यू क्रिएट करना। वैल्यू का मतलब कम कीमत नहीं होता। अगर आप अपनी चीज को बहुत सस्ता बेच रहे हैं तो लोग सोचेंगे कि इसमें कुछ गड़बड़ है। मंदी में लोग सस्ता नहीं बल्कि टिकाऊ और असरदार सामान ढूंढते हैं। आपको उन्हें यह समझाना होगा कि आपका प्रोडक्ट महंगे होने के बावजूद उनके पैसे कैसे बचाएगा। उदाहरण के लिए अगर आप एक ऐसी मशीन बेच रहे हैं जो थोड़ी महंगी है लेकिन बिजली का बिल आधा कर देती है तो कस्टमर उसे खुशी खुशी खरीदेगा। क्योंकि मंदी में हर कोई अपना खर्चा बचाना चाहता है।
अगली बात है अर्जेंसी यानी जल्दबाजी पैदा करना। लेकिन यह नकली नहीं होनी चाहिए जैसे कि सिर्फ आज के लिए ऑफर। लोग अब इन चालों को समझ चुके हैं। आपको उन्हें असल नुकसान दिखाना होगा। उन्हें बताइए कि अगर उन्होंने अभी यह फैसला नहीं लिया तो आने वाले महीनों में उन्हें कितना बड़ा घाटा हो सकता है। जब इंसान को खोने का डर होता है तो वह पाने की चाहत से ज्यादा तेजी से काम करता है।
सेल्स एक फिल्म की तरह है जिसका क्लाइमेक्स जबरदस्त होना चाहिए। पूरी बातचीत के बाद अगर आपने साफ शब्दों में यह नहीं बताया कि आगे क्या करना है तो आपकी सारी मेहनत बेकार है। उसे बताइए कि अब उसे क्या स्टेप लेना है। चाहे वो एक फॉर्म भरना हो या मीटिंग फिक्स करना। बिना सही कॉल टू एक्शन के आपकी सेल्स पिच सिर्फ एक अच्छी कहानी बनकर रह जाएगी जिसे सुनकर लोग वाह वाह तो करेंगे पर आपको फूटी कौड़ी भी नहीं देंगे।
मंदी के इस खेल में जीत उसी की होती है जो अपने कस्टमर की साइकोलॉजी को समझता है। अपनी प्रोसेस को फ्लेक्सिबल रखिए और कस्टमर के साथ एक पार्टनर की तरह जुड़िए। जब आप उनके बिजनेस या उनकी लाइफ को बेहतर बनाने का जिम्मा लेते हैं तो सेल्स अपने आप होने लगती है। मंदी सिर्फ एक बहाना है उन लोगों के लिए जो खुद को बदलना नहीं चाहते।
अगर आपको यह लेसन काम के लगे हैं तो आज ही अपनी सेल्स पिच को बदलिए। कमेंट में बताइए कि आप सेल्स में कौन सी बड़ी गलती कर रहे थे। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जिनका बिजनेस मंदी की मार झेल रहा है। चलिए मिलकर इस मुश्किल समय को एक बड़ा अवसर बनाते हैं।
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