क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो कल की प्लानिंग आज सुबह के नाश्ते के बाद करते हैं। बहुत बढ़िया। जब दुनिया बदल जाएगी और आप वही पुराने घिसे पिटे आइडियाज के साथ बैठे रहेंगे तब शायद आपको समझ आएगा कि आपने क्या खो दिया है। बिना फ्यूचर विजन के आप सिर्फ एक चलती फिरती ममी हैं जो वक्त की ठोकर का इंतज़ार कर रही है।
आज हम पीटर श्वार्ट्ज़ की बेहतरीन किताब इनेविटेबल सरप्राइजेस के बारे में बात करेंगे। यह बुक आपको सिखाएगी कि कैसे आने वाले बड़े बदलावों को पहले ही पहचान कर आप अपनी लाइफ और बिजनेस में बड़ी जीत हासिल कर सकते हैं। चलिए इन तीन लाइफ चेंजिंग लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : द ड्राइविंग फोर्सेस ऑफ चेंज - हवा का रुख पहचानना सीखो
दुनिया बदल रही है और आप अभी भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके लेकर बैठे हैं। पीटर श्वार्ट्ज़ कहते हैं कि बदलाव अचानक नहीं आता। उसके पीछे कुछ बड़ी ताकतें होती हैं जिन्हें ड्राइविंग फोर्सेस कहते हैं। इसे एक मिसाल से समझते हैं। मान लीजिए आप एक नाव चला रहे हैं। अचानक तूफान आता है और आपकी नाव पलट जाती है। आप इसे किस्मत की बात कहेंगे। लेकिन सच तो यह है कि हवा पिछले आधे घंटे से अपनी दिशा बदल रही थी। आपने बस उस पर ध्यान नहीं दिया। आप अपनी पुरानी धुन में मस्त थे। यही हाल हमारे बिजनेस और करियर का भी है।
हम अक्सर उन सिग्नल्स को इग्नोर कर देते हैं जो चीख चीख कर कह रहे होते हैं कि भाई जाग जा। अब वो जमाना गया। अगर आपको लगता है कि आपकी नौकरी या आपका धंधा अगले दस साल तक वैसा ही रहेगा जैसा आज है तो यकीन मानिए आप किसी बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं। पीटर कहते हैं कि डेमोग्राफिक्स यानी आबादी का बदलना एक बहुत बड़ा ड्राइविंग फोर्स है। इंडिया में आज हर कोई जवान है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि जब ये करोड़ों लोग बूढ़े होंगे तब मार्केट कैसा दिखेगा। शायद तब आप लाठी बेचने की फैक्ट्री लगा चुके होंगे। लेकिन अगर आप आज सिर्फ गेमिंग एप्स बना रहे हैं तो आप फ्यूचर के उस बड़े बदलाव को मिस कर रहे हैं।
लोग अक्सर कहते हैं कि फ्यूचर प्रेडिक्ट करना जादू टोना है। नहीं जनाब। यह सिर्फ ऑब्जर्वेशन का खेल है। जब नोकिया को लगा कि उसका कीपैड वाला फोन हमेशा अमर रहेगा तब टचस्क्रीन की लहर आ चुकी थी। नोकिया ने सोचा कि लोग उँगलियों से स्क्रीन को गंदा क्यों करेंगे। लेकिन लोगों को तो गंदा होना पसंद आया। और नोकिया इतिहास बन गया। आप भी अगर अपनी पुरानी जिद पर अड़े रहे तो कल को लोग आपको म्यूजियम में ढूंढेंगे। बदलाव की इन ताकतों को समझना मतलब उस ट्रेन को पकड़ना है जो छूटने वाली है। अगर आप स्टेशन पर खड़े होकर समोसे खाते रहे तो ट्रेन तो जाएगी ही और आप बस हाथ मलते रह जाएंगे।
ड्राइविंग फोर्सेस को समझने के लिए आपको अपनी नजरें अखबार की हेडलाइंस से हटाकर दुनिया के गहरे पैटर्न्स पर लगानी होगी। टेक्नोलॉजी कहाँ जा रही है। लोग क्या सोच रहे हैं। क्लाइमेट में क्या बदलाव हो रहे हैं। ये सब वो चीजें हैं जो आज नहीं तो कल आपके दरवाजे पर दस्तक देंगी। अगर आप तैयार हैं तो आप विनर हैं। और अगर आप तैयार नहीं हैं तो यकीन मानिए वो सरप्राइज आपके लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं होगा। इसलिए अपनी खिड़की खोलो और देखो कि बाहर कौन सी हवा चल रही है। कहीं ऐसा न हो कि आप स्वेटर पहन कर बैठे हों और बाहर गर्मी शुरू हो चुकी हो।
लेसन २ : लर्निंग टू सी द अनसीन - अपनी आँखों से पट्टी हटाओ
ज्यादातर लोग लाइफ में वैसे ही चलते हैं जैसे कोई बिना हेलमेट के कोहरे में गाड़ी चला रहा हो। पीटर श्वार्ट्ज़ कहते हैं कि फ्यूचर में जो होने वाला है वह असल में आपके सामने ही खड़ा होता है। बस आप उसे देखना नहीं चाहते। हम अक्सर वही देखते हैं जो हम देखना चाहते हैं। इसे साइकोलॉजी में कंफर्मेशन बायस कहते हैं। मतलब अगर आपको लगता है कि आपकी सरकारी नौकरी पक्की है तो आप उन खबरों को इग्नोर कर देंगे जो कह रही हैं कि मशीनें अब इंसानों का काम छीन रही हैं। आप सोचेंगे कि अरे ये तो अमेरिका की बातें हैं। इंडिया में तो बाबू जी का राज चलेगा। लेकिन जब आपके ऑफिस में रोबोट फाइलें चेक करने लगेगा तब आप कहेंगे कि यह तो धोखा हो गया।
सच तो यह है कि अनसीन यानी अनदेखी चीजों को देखना कोई सुपरपावर नहीं है। यह बस थोड़े कॉमन सेंस की बात है। मान लीजिए आपके पड़ोस में एक नई दुकान खुलती है जो आपसे कम दाम में सामान बेच रही है। आप क्या करेंगे। आप कहेंगे कि अरे इसका माल खराब होगा। दो दिन में बंद हो जाएगी। लेकिन वह दुकानदार असल में नई टेक्नोलॉजी यूज कर रहा है। वह ऑनलाइन ऑर्डर ले रहा है। और आप अभी भी वही पुराने लाल डायरी वाले हिसाब में फंसे हैं। कुछ महीनों बाद जब आपकी दुकान पर सिर्फ मक्खियाँ भिनभिनाएंगी तब आप कहेंगे कि मार्केट खराब है। नहीं दोस्त। मार्केट खराब नहीं है। आपकी नजरें खराब थीं जिन्होंने उस अनसीन कॉम्पिटिशन को नहीं देखा।
पीटर कहते हैं कि हमें अलग अलग सिनेरियोस यानी स्थितियों के बारे में सोचना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो मैं क्या करूंगा। और अगर वैसा नहीं हुआ तो मेरा प्लान बी क्या है। लोग अक्सर प्लान ए बना कर बैठ जाते हैं और फिर जिंदगी उन्हें प्लान जेड दिखा देती है। अगर आप एक बिजनेसमैन हैं तो आपको यह सोचना होगा कि अगर कल को इंटरनेट बंद हो गया तो आपका धंधा कैसे चलेगा। या अगर कल को लोग घर से बाहर निकलना ही बंद कर दें तो आप क्या करेंगे। जो लोग २०२० से पहले यह सोच रहे थे वे लॉकडाउन में भी पैसा छाप रहे थे। और जो लोग सिर्फ आज की रोटी तोड़ रहे थे वे थाली पीट रहे थे।
अनदेखी चीजों को देखने का मतलब है कि आप अपनी ईगो को साइड में रखें। यह मत सोचिए कि आप सबसे स्मार्ट हैं। अपने आसपास के छोटे छोटे बदलावों को नोटिस कीजिए। जब आपके घर का छोटा बच्चा टीवी छोड़कर मोबाइल पर वीडियो देखने लगे तो समझ जाइए कि कंटेंट की दुनिया बदल चुकी है। जब आपके मोहल्ले का चाय वाला क्यूआर कोड मांग ले तो समझ जाइए कि कैश अब पुराना हो गया है। ये सब वो इनेविटेबल सरप्राइजेस हैं जो चीख चीख कर अपना पता बता रहे हैं। अगर आप अभी भी अंधे बने रहना चाहते हैं तो शौक से रहिए। लेकिन याद रहे कि खड्डा आपके सामने ही है। और गिरने के बाद यह मत कहना कि किसी ने बताया नहीं था।
लेसन ३ : फ्लेक्सिबिलिटी और एडैप्टेबिलिटी - पत्थर नहीं पानी बनो
अगर आप सोचते हैं कि एक बार प्लान बना लिया और अब जिंदगी भर उसी पर चलते रहेंगे, तो बधाई हो, आप एक बहुत बड़े क्रैश की तैयारी कर रहे हैं। पीटर श्वार्ट्ज़ कहते हैं कि फ्यूचर उन लोगों का नहीं है जो बहुत इंटेलिजेंट हैं, बल्कि उन लोगों का है जो सबसे जल्दी बदल सकते हैं। इसे एक मजेदार मिसाल से समझिए। एक पुराना बरगद का पेड़ है, बहुत मजबूत और अकड़ा हुआ। और उसके बगल में एक पतली सी घास है। जब भयंकर तूफान आता है, तो बरगद अपनी जड़ों समेत उखड़ जाता है क्योंकि वह झुकना नहीं जानता। लेकिन घास? वह हवा के साथ झुक जाती है और तूफान गुजरते ही फिर से खड़ी हो जाती है। अब आप खुद सोचिए कि आपको उखड़ा हुआ पेड़ बनना है या मुस्कुराती हुई घास।
ज्यादातर लोग अपने आइडियाज और अपनी स्किल्स के साथ इतने इमोशनल हो जाते हैं जैसे कि वह उनकी जायदाद हो। अगर आपने दस साल पहले टाइपिंग सीखी थी और आज आप कहें कि मैं तो सिर्फ टाइपराइटर पर ही काम करूंगा क्योंकि मुझे वही पसंद है, तो दुनिया आपको काम नहीं, बल्कि धक्का देगी। एडैप्टेबिलिटी का मतलब यह नहीं है कि आप कमजोर हैं। इसका मतलब है कि आप स्मार्ट हैं। आपको पता है कि कब गियर बदलना है। जो लोग नोकिया की तरह अपनी अकड़ में रहे, वे आज इतिहास के पन्नों में दबे हुए हैं। और जो लोग वक्त के साथ बदलते रहे, वे आज राज कर रहे हैं।
आज के समय में चीजें इतनी तेजी से बदल रही हैं कि जब तक आप एक नई चीज सीखते हैं, वह पुरानी हो जाती है। ऐसे में खुद को अपडेट रखना किसी लग्जरी की बात नहीं, बल्कि सर्वाइवल का मामला है। अगर आप एक प्रोफेशनल हैं, तो आपको अपनी फील्ड के हर नए टूल और तरीके के बारे में पता होना चाहिए। यह मत कहिए कि मुझे यह समझ नहीं आता। समझने की कोशिश कीजिए, वरना वक्त आपको समझा देगा और वह सबक बहुत महंगा पड़ेगा। पीटर कहते हैं कि हमें अपनी सोच में लचीलापन रखना चाहिए। हमें उन स्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए जो हमें पसंद नहीं हैं। मान लीजिए आपका बहुत बड़ा शोरूम है, लेकिन अचानक सब कुछ ऑनलाइन बिकने लगा। क्या आप दुकान के बाहर बैठकर रोएंगे या अपनी खुद की वेबसाइट बनाकर धमाका करेंगे।
जिंदगी आपको सरप्राइज देगी ही देगी, यह तय है। लेकिन वह सरप्राइज आपके लिए मौका बनेगा या बर्बादी, यह इस बात पर डिपेंड करता है कि आप कितने फ्लेक्सिबल हैं। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलिए। नई चीजें ट्राई कीजिए। फेल होने से मत डरिए, बल्कि पुराना और बेकार बने रहने से डरिए। याद रखिए, पानी अगर बहता रहे तो साफ रहता है, और अगर रुक जाए तो सड़ जाता है। आपको भी बस बहते रहना है। अपनी सोच को हर रोज नया कीजिए और आने वाले कल का स्वागत एक विनर की तरह कीजिए।
तो दोस्तों, इनेविटेबल सरप्राइजेस हमें यही सिखाती है कि फ्यूचर को डरावना समझने के बजाय उसे एक खेल की तरह देखें। अगर आप बदलाव की ताकतों को पहचान लेंगे, अनदेखी चीजों को देख पाएंगे और खुद को बदलने के लिए तैयार रहेंगे, तो कोई भी तूफान आपको हिला नहीं पाएगा। कल का सूरज उनके लिए नहीं उगेगा जो आज सो रहे हैं, बल्कि उनके लिए उगेगा जो आज से ही कल की तैयारी कर रहे हैं।
अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट्स में बताइए कि ऐसा कौन सा बड़ा बदलाव है जिसे आप अपने आसपास महसूस कर रहे हैं लेकिन दुनिया उसे इग्नोर कर रही है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अभी भी पुराने जमाने में जी रहे हैं। जाग जाइए, क्योंकि फ्यूचर आ चुका है।
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