How to Succeed in Business Without Working So Damn Hard (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो गधे की तरह चौबीस घंटे मेहनत करके खुद को बहुत बड़ा बिजनेसमैन समझते हैं। अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी जिंदगी और फुर्सत दोनों को आग लगा रहे हैं। बिना स्मार्ट वर्क के सिर्फ पसीना बहाकर आप सक्सेस नहीं बल्कि सिर्फ थकान और बीपी की बीमारी पाएंगे।

इस आर्टिकल में हम रॉबर्ट क्रीगेल की किताब के वो सीक्रेट्स खोलेंगे जो आपको सिखाएंगे कि कैसे बिना अपनी जान दांव पर लगाए आप बिजनेस में टॉप पर पहुँच सकते हैं। चलिए देखते हैं इस किताब के वो 3 लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।


लेसन १ : पुराने घिसे पिटे रूल्स को कचरे के डिब्बे में डालिए

आजकल के दौर में कई लोग ऐसे हैं जो दादा परदादा के जमाने के बिजनेस रूल्स को पकड़कर बैठे हैं। उनको लगता है कि जितना ज्यादा डेस्क पर बैठकर अपना सिर पटकेंगे उतना ही ज्यादा पैसा बरसेगा। अरे भाई आप इंसान हैं कोई पुरानी मशीन नहीं जो बस चलती ही जाए। रॉबर्ट क्रीगेल कहते हैं कि बिजनेस में सक्सेस पाने का पहला कदम है उन नियमों को लात मारना जो अब काम नहीं करते। लोग आज भी मानते हैं कि अगर आप थके हुए नहीं हैं तो इसका मतलब आप काम नहीं कर रहे। यह वैसी ही बात है जैसे कोई कहे कि अगर दवा कड़वी नहीं है तो वह फायदा नहीं करेगी। कितनी अजीब बात है ना। हम उस जमाने में जी रहे हैं जहाँ लोग अपनी पूरी जवानी बस काम काम और काम में निकाल देते हैं और जब उनके पास पैसे आते हैं तो उन पैसों को डॉक्टर के बिल भरने में खर्च कर देते हैं। क्या आप भी इसी चूहा दौड़ का हिस्सा बनना चाहते हैं।

जरा सोचिए अगर आप वही पुराना रास्ता अपना रहे हैं जिस पर सब चल रहे हैं तो आपको वही मिलेगा जो सबको मिल रहा है। यानी कि थोड़ा सा प्रॉफिट और बहुत सारा स्ट्रेस। क्रीगेल हमें समझाते हैं कि हमें गेम को रीइन्वेंट करना होगा। इसका मतलब यह नहीं कि आप काम करना छोड़ दें बल्कि इसका मतलब यह है कि आप उन कामों को पहचानें जो असल में वैल्यू पैदा करते हैं। बाकी सब तो बस दिखावा है। ऑफिस में बैठकर घंटों ईमेल चेक करना और बेकार की मीटिंग्स में चाय पीना आपको बिजी रख सकता है पर यह आपको अमीर नहीं बनाएगा। असली सक्सेस तब मिलती है जब आप सिस्टम को अपने लिए काम करना सिखाते हैं। आप एक रोबोट की तरह बिहेव करना बंद कीजिए और एक स्ट्रेटेजिस्ट की तरह सोचना शुरू कीजिए।

मान लीजिए कि राहुल नाम का एक लड़का है जो अपनी छोटी सी सॉफ्टवेयर कंपनी चलाता है। राहुल को लगता है कि उसे हर क्लाइंट की कॉल खुद ही उठानी चाहिए चाहे रात के 2 ही क्यों न बज रहे हों। उसे लगता है कि अगर वह अपनी टीम पर नजर नहीं रखेगा तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। नतीजा क्या हुआ। राहुल की कंपनी तो बढ़ रही है पर राहुल की दाढ़ी सफेद हो रही है और उसकी पीठ में दर्द रहने लगा है। वह अपने बच्चे का बर्थडे तक मिस कर देता है क्योंकि उसे लगता है कि बिजनेस के रूल्स यही कहते हैं। दूसरी तरफ उसका दोस्त समीर है जो हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करता है और बाकी समय अपनी फैमिली के साथ वेकेशन पर रहता है। समीर ने स्मार्ट सिस्टम बनाए हैं और वह सिर्फ बड़े फैसलों पर ध्यान देता है। अब आप ही बताइए कौन ज्यादा सक्सेसफुल है। राहुल जिसके पास पैसे हैं पर सुकून नहीं या समीर जिसके पास दोनों हैं।

अक्सर हमें सिखाया जाता है कि हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है। पर क्या कभी किसी ने आपसे यह कहा कि हार्ड वर्क सिर्फ सही दिशा में होना चाहिए। गलत दिशा में किया गया हार्ड वर्क सिर्फ आपको गड्ढे में ले जाएगा। हमें लगता है कि अगर हम अपनी लिमिट से ज्यादा काम करेंगे तो हम बॉस की नजरों में हीरो बन जाएंगे। पर असल में आप सिर्फ खुद को थका रहे हैं। क्रीगेल कहते हैं कि जब आप रूल्स को तोड़ते हैं तब आप नई संभावनाओं के लिए रास्ता खोलते हैं। दुनिया उन लोगों को याद नहीं रखती जो बस कोल्हू के बैल की तरह काम करते रहे बल्कि उन्हें याद रखती है जिन्होंने कुछ अलग और नया किया। इसलिए अपने अंदर के उस डरे हुए इंसान को बाहर निकालिए जो कहता है कि मेहनत नहीं की तो फेल हो जाओगे। स्मार्ट बनिए और खेल के नियमों को अपने हिसाब से बदलिए।

याद रखिये कि बिजनेस कोई सजा नहीं है जिसे आपको भुगतना है। यह एक जरिया है अपनी लाइफ को बेहतर बनाने का। अगर आपका काम आपकी लाइफ को बदतर बना रहा है तो समझ जाइये कि आप गलत गेम खेल रहे हैं। पुराने जमाने के वो डरावने रूल्स कि काम ही पूजा है और बाकी सब बेकार है अब आउटडेटेड हो चुके हैं। आज के समय में फ्लेक्सिबिलिटी और क्रिएटिविटी ही असली राजा हैं। जब आप अपने दिमाग से वो बोझ उतार देते हैं कि मुझे हर समय काम करना है तब आप असल में सोचना शुरू करते हैं। और जब आप सोचना शुरू करते हैं तभी आप बिजनेस में कुछ बड़ा कर पाते हैं। तो क्या आप तैयार हैं उन बेड़ियों को तोड़ने के लिए जो आपको आगे बढ़ने से रोक रही हैं।


लेसन २ : बिजी होने का ढोंग छोड़िए और असली इम्पैक्ट पर फोकस कीजिए

हमारे समाज में एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि जो इंसान सबसे ज्यादा बिजी दिखता है वही सबसे ज्यादा कामयाब है। अगर आप किसी से पूछें कि भाई क्या हाल है और वह कहे कि सांस लेने की फुर्सत नहीं है तो हम उसे बहुत बड़ा आदमी मान लेते हैं। रॉबर्ट क्रीगेल कहते हैं कि यह 'बिजी' होना दरअसल एक बीमारी है। लोग बस इधर-उधर भाग रहे हैं पर पहुँच कहीं नहीं रहे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप जिम में ट्रेडमिल पर दौड़ रहे हों। पसीना तो बहुत निकल रहा है पर आप अपनी जगह से एक इंच भी आगे नहीं बढ़े। असली खेल पसीना बहाने का नहीं बल्कि सही दिशा में कदम बढ़ाने का है। अगर आप दिन भर में 50 काम कर रहे हैं पर उनमें से एक भी आपके बिजनेस को बड़ा नहीं बना रहा तो आप सिर्फ अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं।

आजकल के ऑफिस कल्चर में देखिए। लोग सुबह से शाम तक मीटिंग्स में बैठे रहते हैं जहाँ सिर्फ चाय और बिस्किट का ही सही इस्तेमाल होता है। बाकी समय तो बस वही बातें होती हैं जो एक छोटे से ईमेल में खत्म हो सकती थीं। क्रीगेल हमें समझाते हैं कि 80 प्रतिशत नतीजे सिर्फ 20 प्रतिशत कामों से आते हैं। लेकिन हम अपनी पूरी एनर्जी उन 80 प्रतिशत फालतू कामों में लगा देते हैं जिनका कोई मतलब ही नहीं है। हम खुद को झूठी तसल्ली देते हैं कि देखो मैंने आज 10 घंटे काम किया। पर भाई उन 10 घंटों में आपने तीर क्या मारा। जब तक आप अपने कामों की छंटनी नहीं करेंगे तब तक आप उसी दलदल में फंसे रहेंगे। आपको यह सीखना होगा कि 'ना' कैसे कहना है। हर वो काम जो आपकी प्रोग्रेस में मदद नहीं कर रहा वह आपके लिए कचरा है।

मान लीजिए एक साहब हैं जिनका नाम है मिस्टर शर्मा। शर्मा जी का अपना एक छोटा सा मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस है। शर्मा जी को लगता है कि अगर वह खुद जाकर ऑफिस का बिल नहीं भरेंगे या सप्लायर से घंटों मोलभाव नहीं करेंगे तो उनका बिजनेस डूब जाएगा। वह सुबह 8 बजे ऑफिस पहुँच जाते हैं और रात को 10 बजे तक फाइलों में दबे रहते हैं। अब शर्मा जी को लगता है कि वह बहुत बड़े कर्मयोगी हैं। लेकिन असलियत क्या है। असलियत यह है कि उनके पास अपनी टीम के लिए नई स्ट्रैटेजी सोचने का टाइम ही नहीं है क्योंकि वह तो बिजली का बिल बचाने में बिजी हैं। वहीं उनके पड़ोस में एक यंग लड़का है जो सिर्फ 4 घंटे ऑफिस आता है और बाकी समय नए क्लाइंट्स से नेटवर्किंग करता है। अब आप खुद सोचिए कि किसका बिजनेस अगले 5 साल में आसमान छुएगा। शर्मा जी तो बस अपनी कुर्सी के साथ चिपके रह जाएंगे।

क्रीगेल कहते हैं कि स्मार्ट लोग वो नहीं होते जो सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं बल्कि वो होते हैं जो सबसे कम मेहनत में सबसे ज्यादा रिजल्ट निकालते हैं। इसे 'इंटेलिजेंट लेजीनेस' भी कह सकते हैं। अगर आप थोड़े आलसी हैं तो आप हमेशा काम को आसान बनाने का तरीका ढूंढ लेंगे। और यही तरीका आपको बिजनेस में आगे ले जाएगा। हम लोग डर के मारे बिजी रहते हैं। हमें डर लगता है कि अगर हम खाली बैठ गए तो लोग क्या कहेंगे। या फिर हमें डर लगता है कि कहीं हम पीछे न छूट जाएं। इसी डर की वजह से हम फालतू के कामों का पहाड़ खड़ा कर लेते हैं। हमें लगता है कि ज्यादा काम मतलब ज्यादा इज्जत। पर यकीन मानिए दुनिया आपकी मेहनत नहीं बल्कि आपके रिजल्ट्स देखती है।

इसलिए अपनी टू-डू लिस्ट को छोटा कीजिये। उन कामों को दूसरों को सौंपना सीखिए जो आपके लेवल के नहीं हैं। अगर आप एक सीईओ होकर चपरासी वाले काम कर रहे हैं तो आप अपनी कंपनी का नुकसान कर रहे हैं। अपनी एनर्जी बचाकर रखिये उन बड़े आइडियाज के लिए जो आपके गेम को पूरी तरह बदल सकें। जब आप बेवजह की भागदौड़ बंद करते हैं तब आपके दिमाग को शांति मिलती है। और उसी शांति में वो जादुई आइडियाज आते हैं जो आपको करोड़पति बना सकते हैं। तो अब अगली बार जब कोई आपसे पूछे कि आप क्या कर रहे हैं तो गर्व से कहिये कि मैं कुछ नहीं कर रहा बस सोच रहा हूँ। क्योंकि सोचना भी एक बहुत बड़ा काम है जिसे बिजी लोग कभी नहीं कर पाते।


लेसन ३ : डर को भगाइये और काम में फन और क्रिएटिविटी वापस लाइए

क्या आपको याद है आखिरी बार आपने कब अपने काम का लुत्फ उठाया था। शायद तब जब आपने पहली बार अपना बिजनेस शुरू किया था या पहली नौकरी मिली थी। लेकिन आज हालत यह है कि काम का नाम सुनते ही चेहरे पर 12 बज जाते हैं। रॉबर्ट क्रीगेल कहते हैं कि हमने बिजनेस को इतना सीरियस बना दिया है कि उसमें से खुशी गायब हो गई है। और जब खुशी गायब होती है तो क्रिएटिविटी भी दम तोड़ देती है। लोग डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि कहीं क्लाइंट न चला जाए या कहीं कॉम्पिटिटर आगे न निकल जाए। इसी डर की वजह से हम सेफ खेलने लगते हैं। और बिजनेस में सेफ खेलने का मतलब है अपनी बर्बादी के वारंट पर साइन करना। जब तक आप अपने काम को एक बोझ की तरह लेंगे तब तक आप कभी कुछ महान नहीं कर पाएंगे।

क्रीगेल का मानना है कि सबसे बेहतरीन आइडियाज तब आते हैं जब आप रिलैक्स होते हैं। क्या कभी आपको नहाते वक्त या पार्क में टहलते वक्त कोई जबरदस्त आईडिया आया है। यकीनन आया होगा। लेकिन क्या कभी एक्सेल शीट भरते वक्त या किसी बोरिंग मीटिंग में सिर खपाते वक्त कुछ तूफानी सूझा है। कभी नहीं। इसका कारण यह है कि स्ट्रेस आपके दिमाग के उन दरवाजों को बंद कर देता है जहाँ से इनोवेशन निकलता है। हमें बचपन से सिखाया गया है कि काम को बहुत सीरियसली लेना चाहिए। पर सच तो यह है कि जो लोग अपने काम को खेल की तरह लेते हैं वही दुनिया बदलते हैं। जब आप रिस्क लेने से नहीं डरते और गलतियों को अपनी हार नहीं बल्कि एक लेसन मानते हैं तब आप असल में ग्रो करते हैं।

मान लीजिये मिस्टर वर्मा एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी चलाते हैं। वर्मा जी का ऑफिस किसी श्मशान घाट जैसा लगता है। हर कोई डरा हुआ है और अपने कंप्यूटर में घुसा हुआ है क्योंकि वर्मा जी को लगता है कि हंसी मजाक मतलब समय की बर्बादी है। नतीजा यह है कि उनकी टीम वही पुराने बोरिंग आइडियाज लाती है जो किसी को पसंद नहीं आते। अब दूसरी तरफ एक और एजेंसी है जहाँ म्यूजिक बजता है और लोग काम के बीच में जोक्स मारते हैं। वहां के लोग काम नहीं कर रहे होते बल्कि एक चैलेंज को एन्जॉय कर रहे होते हैं। अब आप ही बताइये कि कौन सी एजेंसी ज्यादा क्रिएटिव ऐड बनाएगी। जाहिर है वही जहाँ लोगों को अपनी बात कहने की आजादी है। स्ट्रेस में तो सिर्फ गधे काम करते हैं और घोड़े हमेशा मैदान में अपनी मर्जी से दौड़ते हैं।

जब आप डर से मुक्त होकर काम करते हैं तो आप एक्सपेरिमेंट करने की ताकत जुटा पाते हैं। क्रीगेल कहते हैं कि हमें अपनी 'परफेक्शनिस्ट' होने की आदत को छोड़ना होगा। कई लोग इसी चक्कर में कुछ नया शुरू नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें लगता है कि सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए। भाई दुनिया में कुछ भी परफेक्ट नहीं होता। आप बस मैदान में उतरिये और गेम खेलिए। अगर आप फेल भी हुए तो कम से कम आपको यह तो पता चलेगा कि कौन सा तरीका काम नहीं करता। असली सक्सेस का राज यही है कि आप खुद को बहुत ज्यादा सीरियसली लेना बंद कर दें। जब आप हंसते हैं और अपने आस पास का माहौल हल्का रखते हैं तब आपकी टीम भी अपना 100 परसेंट देती है।

अंत में बस इतना याद रखिये कि आपकी पहचान सिर्फ आपके काम से नहीं है। आप एक इंसान हैं और आपकी लाइफ बहुत कीमती है। अगर आप दिन भर चिड़चिड़े रहते हैं और अपने काम को एक मजबूरी समझते हैं तो आप कभी अमीर नहीं हो पाएंगे। क्योंकि असली अमीरी जेब में नहीं बल्कि आपके मन की शांति और आपके चेहरे की मुस्कान में है। स्मार्ट वर्क का मतलब सिर्फ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना नहीं है बल्कि अपने दिमाग को तनाव से मुक्त रखकर उसे सही दिशा में दौड़ाना है। तो अपनी कुर्सी से उठिए और थोड़ा मुस्कुराइए। बिजनेस कोई जंग नहीं है बल्कि एक खूबसूरत सफर है जिसे आपको मजे लेकर तय करना है।


दोस्तों, रॉबर्ट क्रीगेल की यह बातें हमें याद दिलाती हैं कि लाइफ सिर्फ काम के लिए नहीं बनी है। स्मार्ट वर्क कीजिये और अपनी जिंदगी को खुलकर जियिये। अब वक्त है खुद से एक सवाल पूछने का। क्या आप भी वही पुराने और थकाने वाले रास्ते पर चलना चाहते हैं या फिर आप आज से ही अपने काम करने का तरीका बदलने वाले हैं।

नीचे कमेंट्स में बताइये कि आप अपनी डेली रूटीन में से कौन सा एक फालतू काम आज से ही बंद करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो काम के चक्कर में अपनी खुशियां भूल चुके हैं।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#SmartWork #SuccessTips #RobertKriegel #BusinessStrategy #LifeBalance


_

Post a Comment

Previous Post Next Post