क्या आप भी उन महान लोगों में से हैं जो रात को सपना देखते हैं और सुबह अपनी पूरी सेविंग्स एक फालतू आईडिया पर फूंक देते हैं। बधाई हो आप अपनी बर्बादी का प्रीमियम सब्स्क्रिप्शन ले चुके हैं क्योंकि बिना मार्केट चेक किए बिजनेस शुरू करना मतलब बिना पैराशूट के प्लेन से कूदना है। आपकी जिद आपको रोड पर लाने वाली है।
लेकिन फिकर मत कीजिए। आज हम रोब एडम्स की किताब के जरिए उस जादुई तरीके को समझेंगे जो आपके डूबते हुए करियर और पैसों को बचा सकता है। चलिए जानते हैं उन 3 लेसन्स के बारे में जो आपको फेल होने से पहले ही संभाल लेंगे।
लेसन १ : मार्केट वैलिडेशन की कड़वी सच्चाई और आपका भ्रम
ज्यादातर लोग जब अपना नया बिजनेस आईडिया सोचते हैं तो उन्हें लगता है कि उन्होंने आग लगा दी है। उन्हें लगता है कि दुनिया बस पलकें बिछाकर उनके उस क्रांतिकारी प्रोडक्ट का इंतजार कर रही है। लेकिन रोब एडम्स कहते हैं कि भाई साहब थोड़ा जमीन पर आ जाइए। आपका आईडिया शायद सिर्फ आपको और आपकी मम्मी को ही पसंद आ रहा है। असली दुनिया में लोग आपके आईडिया के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं करना चाहते।
इस लेसन का सबसे बड़ा सच यह है कि मार्केट को आपकी मेहनत या आपके इमोशन्स से कोई लेना देना नहीं है। मार्केट सिर्फ एक चीज देखता है और वह है उसकी अपनी जरूरत। हम अक्सर एक कमरे में बैठकर सफेद चार्ट पेपर पर बड़े बड़े सपने लिखते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हम कुछ बनाएंगे तो लोग खुद दौड़ते हुए आएंगे। लेकिन असलियत में अगर आप बिना पूछे कुछ बनाएंगे तो सिर्फ धूल और मकड़ियां ही आपके पास आएंगी।
मान लीजिए आपने एक ऐसा ऐप बनाया जो लोगों को यह बताता है कि आज उनके घर की छिपकली ने कितनी बार पलकें झपकाईं। आपको लग रहा है कि यह बहुत कूल और यूनिक है। आपने अपनी जिंदगी की सारी जमा पूंजी लगा दी। ऑफिस लिया और बढ़िया कॉफी मशीन भी रख ली। लेकिन जब ऐप लॉन्च हुआ तो पता चला कि दुनिया को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि छिपकली क्या कर रही है। अब आप सर पकड़कर बैठे हैं और सोच रहे हैं कि लोग इतने जाहिल क्यों हैं। असल में जाहिल लोग नहीं बल्कि आप थे क्योंकि आपने मार्केट से पूछा ही नहीं कि उन्हें इसकी जरूरत है भी या नहीं।
रोब एडम्स समझाते हैं कि मार्केट वैलिडेशन कोई ऑप्शन नहीं है बल्कि यह बिजनेस की ऑक्सीजन है। अगर ऑक्सीजन नहीं होगी तो आपका स्टार्टअप आईसीयू में भी नहीं बचेगा। लोग अक्सर सर्वे फॉर्म भरवाते हैं और सोचते हैं कि रिसर्च हो गई। भाई साहब लोग फ्री में तो किसी को भी हां बोल देते हैं। असली टेस्ट तब होता है जब आप उनसे कहते हैं कि अपना बटुआ निकालो और पैसे दो।
अगर आप यह सोचकर बैठे हैं कि आपका आईडिया दुनिया बदल देगा तो रुकिए। पहले यह देखिये कि क्या दुनिया बदलना चाहती है। क्या आपका प्रोडक्ट किसी की असली और बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहा है। या फिर आप सिर्फ अपनी ईगो को सहलाने के लिए एक महंगा खिलौना बना रहे हैं। याद रखिये मार्केट एक निर्दयी जज है। उसे इससे मतलब नहीं कि आपने कितनी रातें जागकर कोडिंग की है। उसे सिर्फ अपने फायदे से मतलब है।
इसलिए अगली बार जब कोई तगड़ा आईडिया आए तो ऑफिस रेंट पर लेने के बजाय मार्केट में निकल जाइये। लोगों की आंखों में देखिये और समझने की कोशिश कीजिये कि क्या वो वाकई परेशान हैं। अगर आप उनकी प्रॉब्लम का हल नहीं ढूंढ रहे तो आप बस अपना वक्त और पैसा बर्बाद कर रहे हैं। बिजनेस करना कोई जुआ नहीं है जहाँ आप तुक्का मारें। यह एक साइंस है और इस साइंस का पहला चैप्टर है मार्केट वैलिडेशन। अगर आप यहाँ फेल हो गए तो आगे की पूरी कहानी सिर्फ एक दुखद किस्सा बनकर रह जाएगी।
लेसन २ : ऑफिस से बाहर निकलिए और सच का सामना कीजिये
अक्सर हमारे सो कॉल्ड फ्यूचर एंटरप्रेन्योर्स को लगता है कि एसी रूम में बैठकर और दुनिया भर के डेटा ग्राफ देखकर वो मार्केट की नब्ज पकड़ लेंगे। रोब एडम्स कहते हैं कि यह सब सिर्फ मन को बहलाने के बहाने हैं। असली बिजनेस वो नहीं जो एक्सेल शीट पर दिखता है। असली बिजनेस वो है जो गली और मोहल्ले की दुकानों पर या लोगों के ड्राइंग रूम में हो रहा है। अगर आप सच में जानना चाहते हैं कि आपका आईडिया चलेगा या नहीं तो अपनी आरामदायक कुर्सी छोड़िये और धूप में बाहर निकलिए।
ज्यादातर स्टार्टअप फाउंडर्स को एक बीमारी होती है जिसे गेट आउट ऑफ द बिल्डिंग सिंड्रोम कहते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वो बाहर जाएंगे तो लोग उनके आईडिया को रिजेक्ट कर देंगे और उनका दिल टूट जाएगा। भाई साहब दिल टूटने से बेहतर है कि आपका बैंक बैलेंस टूटने से बच जाए। आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से राय मांगते हैं और वो आपकी शक्ल देखकर कह देते हैं कि भाई तू तो अगला एलन मस्क बनेगा। असल में वो सिर्फ आपका दिल नहीं दुखाना चाहते या शायद वो आपके हाथ की फ्री कॉफी का कर्ज उतार रहे होते हैं।
सोचिये आपने एक ऐसा प्रीमियम चाय का स्टार्टअप शुरू करने का सोचा जिसमें आप सोने के कप में चाय पिलाएंगे। आपने ऑफिस में बैठकर हिसाब लगाया कि शहर में दस लाख अमीर लोग हैं और अगर एक परसेंट भी आए तो आप करोड़पति बन जाएंगे। गणित तो एकदम परफेक्ट है। लेकिन जब आप बाहर जाकर उन अमीरों से बात करते हैं तो पता चलता है कि उन्हें सोने के कप से ज्यादा अपनी सेहत की फिक्र है और वो चाय पीना ही छोड़ चुके हैं। अब आपके वो करोड़ों के कप सिर्फ आपकी तिजोरी की शोभा बढ़ाएंगे।
रोब एडम्स इस बुक में साफ कहते हैं कि कस्टमर से बात करना एक कला है। आपको उनसे यह नहीं पूछना कि क्या आप मेरा प्रोडक्ट खरीदेंगे। लोग झूठ बोल देते हैं। आपको उनसे उनकी तकलीफों के बारे में पूछना है। आपको यह देखना है कि वो आज अपनी उस प्रॉब्लम को कैसे सॉल्व कर रहे हैं। अगर वो आज उस प्रॉब्लम के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं तभी आपके लिए वहां कोई जगह है। अगर वो अपनी प्रॉब्लम के साथ खुशी खुशी जी रहे हैं तो आप वहां अपनी दुकान मत खोलिये।
हम अक्सर इन्वेस्टर को इम्प्रेस करने के लिए पीपीटी बनाते हैं लेकिन असली इन्वेस्टर तो आपका कस्टमर है। अगर कस्टमर ने हां बोल दिया तो दुनिया का कोई भी इन्वेस्टर आपको मना नहीं कर पाएगा। लेकिन हम तो अपनी ही दुनिया में मगन रहते हैं। हमें लगता है कि हम ज्यादा स्मार्ट हैं। हम सोचते हैं कि कस्टमर को क्या पता उसे क्या चाहिए हम उसे बताएंगे कि उसे क्या चाहिए। भाई साहब आप स्टीव जॉब्स नहीं हैं और हर आईडिया आईफोन नहीं होता।
इसलिए अपनी ईगो को जेब में डालिए और असली दुनिया के धक्के खाइए। लोगों से बात कीजिये और उनके गुस्से को समझिये। उनकी शिकायतों में ही आपके अगले मिलियन डॉलर आईडिया का राज छुपा है। जब आप सौ लोगों से बात करेंगे और अस्सी लोग एक ही तरह की समस्या बताएंगे तब समझिये कि आपने गोल्ड माइन ढूंढ ली है। वरना घर पर बैठकर सपने देखना तो फ्री है ही। उसमें तो कोई टैक्स लगता नहीं है।
लेसन ३ : डेटा का दम और रिस्क को टाटा बाय-बाय बोलना
अब जब आप धूप में घूम लिए और लोगों की कड़वी बातें सुन लीं तो समय आता है उस सारी जानकारी को एक हथियार बनाने का। रोब एडम्स कहते हैं कि बिजनेस में इमोशन्स की उतनी ही जगह है जितनी सब्जी में इलायची की यानी बहुत कम। आपको अपना फैसला दिल से नहीं बल्कि डेटा से लेना होगा। अगर आपके पास नंबर्स नहीं हैं तो आप सिर्फ एक और इंसान हैं जिसके पास एक ओपिनियन है। और सच तो यह है कि ओपिनियन से घर का राशन नहीं आता।
रिस्क कम करने का मतलब यह नहीं है कि आप डरपोक हैं। इसका मतलब है कि आप समझदार हैं। बेवकूफ लोग कुएं में कूदकर उसकी गहराई नापते हैं जबकि बुद्धिमान इंसान पहले रस्सी और पत्थर का इस्तेमाल करता है। आपको यह देखना होगा कि आपके आईडिया में कितने छेद हैं। क्या आपकी कॉस्टिंग सही है। क्या लोग उतने पैसे देने को तैयार हैं जितने में आपका घर चलेगा। अगर आपका प्रॉफिट सिर्फ कागज पर दिख रहा है और बैंक अकाउंट में नहीं तो समझ जाइये कि आप एक बहुत महंगा शौक पाल रहे हैं।
कल्पना कीजिये कि आपने एक बहुत शानदार जिम खोला क्योंकि आपको लगा कि मोहल्ले के सारे लड़के बॉडी बनाना चाहते हैं। आपने इटली से मशीनें मंगवाईं और कोच भी एकदम प्रोफेशनल रखा। लेकिन दो महीने बाद पता चला कि मोहल्ले के लड़कों को तो सिर्फ शाम को मोमोज खाना पसंद है और जिम जाने के नाम पर उन्हें बुखार आ जाता है। अगर आपने पहले ही एक छोटा सा सर्वे किया होता या एक हफ्ते के लिए एक अस्थायी सेटअप लगाकर देखा होता तो आज आप उन मशीनों पर कपड़े नहीं सुखा रहे होते।
रोब एडम्स का सीधा फंडा है कि छोटे फेलियर से डरो मत क्योंकि वो आपको बड़े फेलियर से बचाते हैं। अपने आईडिया को छोटे लेवल पर टेस्ट कीजिये। अगर वहां रिजल्ट जीरो है तो चुपचाप अपना रास्ता बदल लीजिये। इसमें कोई बेइज्जती नहीं है। असली बेइज्जती तब होती है जब आप सब कुछ हारकर दुनिया को बताते हैं कि काश मैंने पहले सुन लिया होता। डेटा आपको आईना दिखाता है और आईना कभी झूठ नहीं बोलता भले ही आपकी शक्ल उस वक्त कितनी ही खराब क्यों न दिख रही हो।
बिजनेस शुरू करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है लेकिन यह कोई बचकाना खेल भी नहीं है। अगर आप इन तीन स्टेप्स को फॉलो करते हैं तो आपके सक्सेसफुल होने के चांस बढ़ जाते हैं। हमेशा याद रखिये कि एक सफल एंटरप्रेन्योर वो नहीं होता जो सबसे ज्यादा रिस्क लेता है बल्कि वो होता है जो रिस्क को सबसे बेहतर तरीके से मैनेज करता है। तो अब अपनी डायरी उठाइए और देखिये कि क्या आपके पास सच में कोई आईडिया है या सिर्फ एक महंगा सपना।
अगर आप आज भी इस मुगालते में हैं कि आपकी मेहनत ही सब कुछ है तो जाग जाइये। मार्केट को आपकी मेहनत नहीं बल्कि उसकी वैल्यू चाहिए। रोब एडम्स की यह बातें सिर्फ थ्योरी नहीं बल्कि कड़वा सच हैं। क्या आप तैयार हैं अपने आईडिया की धज्जियां उड़ते हुए देखने के लिए ताकि आप एक असली बिजनेस खड़ा कर सकें। कमेंट में बताएं कि आपका वो कौन सा आईडिया है जिसे आप आज ही टेस्ट करने वाले हैं। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो कल से नया बिजनेस शुरू करने की बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है।
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